CBSE Class 11 Biology Chapter 12: Mineral Nutrition NCERT Solutions (Hindi)
This comprehensive set of NCERT Solutions for Class 11 Biology, Chapter 12: Mineral Nutrition (in Hindi), delves into the critical role of minerals in plant life. It explains the difference between essential and non-essential elements, macro and micronutrients, and beneficial elements. The solutions detail various deficiency symptoms like chlorosis, necrosis, and malformation, linking them to specific mineral deficiencies. It also covers the process of mineral absorption through apoplast and symplast pathways, and the conditions required for nitrogen fixation by Rhizobium. These solutions are designed to provide clear, step-by-step explanations, aiding students in understanding complex concepts and preparing effectively for their board examinations.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | जीव विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 12. खनिज पोषण |
Chapter summary
Chapter 12 of Class 11 Biology NCERT Solutions focuses on Mineral Nutrition in plants. It elaborates on the essentiality of various mineral elements for plant survival and metabolism. The solutions explain the classification of nutrients into macronutrients and micronutrients, beneficial elements, and toxic elements. It also details deficiency symptoms and the mechanisms of mineral absorption by plants, including apoplast and symplast pathways. The chapter concludes with the role of Rhizobium in nitrogen fixation.
Learning outcomes
- Understand the criteria for essentiality of mineral elements in plants.
- Differentiate between macronutrients and micronutrients.
- Identify and explain various deficiency symptoms caused by mineral element deficiency.
- Describe the process of mineral absorption by plant roots.
- Explain the role of Rhizobium in atmospheric nitrogen fixation.
Topics covered
Paper topics
- खनिज तत्वों की अनिवार्यता
- वृहत पोषक तत्व
- सूक्ष्म पोषक तत्व
- हितकारी पोषक तत्व
- आविष तत्व
- अनिवार्यता के मापदंड
- अपर्याप्तता के लक्षण (क्लोरोसिस, नेक्रोसिस, आदि)
- खनिजों का अवशोषण (एपॉप्लास्ट और सिम्प्लास्ट पथ)
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण
- राइजोबियम की भूमिका
Important topics
- खनिज तत्वों की अनिवार्यता के मापदंड
- वृहत और सूक्ष्म पोषक तत्वों में अंतर
- विभिन्न खनिजों की कमी से होने वाले लक्षण
- खनिजों के अवशोषण की क्रियाविधि
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
मृदा में कई खनिज तत्व उपस्थित होते हैं, जिन्हें पौधे जड़ों द्वारा जल के साथ अवशोषित करते हैं। हालांकि, सभी अवशोषित तत्व पौधों के लिए आवश्यक नहीं होते हैं। कुछ तत्व, जैसे सेलेनियम, मृदा में अधिक मात्रा में पाए जाने पर पौधों द्वारा अधिक अवशोषित किए जा सकते हैं, भले ही वे उनके लिए आवश्यक न हों या हानिकारक हों। पौधों में लगभग 60 से अधिक तत्व पाए जाते हैं, लेकिन इनमें से केवल कुछ ही तत्व आवश्यक माने जाते हैं। आवश्यक तत्व वे होते हैं जो सीधे पादप की उपापचयी क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और जिनकी कमी से विशिष्ट लक्षण प्रकट होते हैं।
प्रश्न 2
जल संवर्धन (Hydroponics) में, पौधों को पोषक तत्वों के विलयन में उगाया जाता है। यदि प्रयुक्त जल या पोषक लवण अशुद्ध होते हैं, तो उनमें ऐसे खनिज घुले हो सकते हैं जो पौधों की वृद्धि के लिए हानिकारक हों या आवश्यक पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा उत्पन्न करें। अशुद्धियाँ पौधों में वृद्धि अवरोधक के रूप में कार्य कर सकती हैं। इसलिए, जल संवर्धन में शुद्ध जल और केवल ज्ञात आवश्यक पोषक तत्वों वाले शुद्ध लवणों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है ताकि पौधों को सही पोषण मिल सके और उनकी वृद्धि बाधित न हो।
प्रश्न 3
विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व इस प्रकार हैं:
- वृहत पोषक तत्त्व (Macro Nutrients): ये वे तत्व हैं जिनकी पौधों को अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है। पादप ऊतक में इनकी सांद्रता शुष्क भार के 1-10 mg/L से अधिक होती है। उदाहरण: नाइट्रोजन (N), फास्फोरस (P), सल्फर (S), पोटेशियम (K), कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg)।
- सूक्ष्म पोषक तत्त्व (Micro Nutrients): ये वे तत्व हैं जिनकी पौधों को बहुत कम मात्रा में आवश्यकता होती है। पादप ऊतक में इनकी सांद्रता शुष्क भार के 0.1 mg/L से कम होती है। उदाहरण: मैंगनीज (Mn), कॉपर (Cu), आयरन (Fe), मोलिब्डेनम (Mo), जिंक (Zn), बोरॉन (B), क्लोरीन (Cl), निकेल (Ni)।
- हितकारी पोषक तत्त्व (Beneficial Nutrients): ये वे तत्व हैं जिनकी उच्च पादपों में बड़े और सूक्ष्म पोषक तत्वों के अतिरिक्त आवश्यकता हो सकती है, हालांकि ये सभी पौधों के लिए अनिवार्य नहीं होते। ये कुछ विशिष्ट पादप प्रजातियों के विकास या चयापचय में सहायता करते हैं। उदाहरण: सोडियम (Na), सिलिकॉन (Si), कोबाल्ट (Co), सेलेनियम (Se)।
- आविष तत्त्व (Toxic Elements): ये वे खनिज तत्व हैं जो पौधों के लिए हानिकारक होते हैं। यदि ये तत्व पादप ऊतक में एक निश्चित सांद्रता (जैसे शुष्क भार का 10% से अधिक) में मौजूद हों, तो वे पौधों की वृद्धि को गंभीर रूप से बाधित कर सकते हैं या विषाक्त प्रभाव डाल सकते हैं। उदाहरण: मैंगनीज (Mn) उच्च सांद्रता में विषाक्त हो सकता है।
- अनिवार्य तत्त्व (Essential Elements): ये वे तत्व हैं जो सीधे तौर पर पौधे की उपापचयी क्रियाओं में सम्मिलित होते हैं, और जिनकी कमी से पौधे में विशिष्ट संरचनात्मक या कार्यात्मक लक्षण दिखाई देते हैं, जिन्हें केवल उस तत्व की आपूर्ति से ही ठीक किया जा सकता है।
प्रश्न 4
पौधों में खनिज तत्वों की कमी से विभिन्न अपर्याप्तता लक्षण प्रकट होते हैं। यहाँ पाँच प्रमुख लक्षण और उनसे संबंधित खनिज दिए गए हैं:
- क्लोरोसिस (Chlorosis): यह क्लोरोफिल के निर्माण में कमी या उसके हास के कारण होता है, जिससे पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं। यह मुख्य रूप से नाइट्रोजन (N), पोटेशियम (K), सल्फर (S), मैग्नीशियम (Mg), आयरन (Fe), मैंगनीज (Mn), जिंक (Zn) और कोबाल्ट (Co) जैसे तत्वों की कमी से होता है।
- नेक्रोसिस (Necrosis): इसमें ऊतक की कोशिकाएं मर जाती हैं, जिससे पत्ती के कुछ हिस्से भूरे या काले पड़ जाते हैं। यह लक्षण मुख्य रूप से कैल्शियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), कॉपर (Cu) और पोटेशियम (K) जैसे तत्वों की कमी से जुड़ा होता है।
- कोशिका विभाजन का निरोधी (Suppression of Cell Division): जब कोशिका विभाजन ठीक से नहीं होता है, तो पौधे की वृद्धि रुक जाती है और वे बौने रह जाते हैं। यह लक्षण नाइट्रोजन (N), सल्फर (S), पोटेशियम (K) और मोलिब्डेनम (Mo) की कमी के कारण हो सकता है।
- विकृति (Malformation): इसमें पौधे के अंगों का आकार या रूप विकृत हो जाता है। उदाहरण के लिए, बोरॉन (B) की कमी से विभज्योतक ऊतकों के संगठन में कमी आ सकती है, जिससे पत्तियाँ विकृत हो जाती हैं और अंततः पौधे की मृत्यु हो सकती है।
- पुष्पन में देरी (Delay in Flowering): कुछ पौधों में, नाइट्रोजन (N), सल्फर (S) और मोलिब्डेनम (Mo) जैसे तत्वों की अपर्याप्त सांद्रता के कारण पुष्पन प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
प्रश्न 5
जब किसी पौधे में एक से अधिक तत्वों की कमी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो यह पता लगाने के लिए कि कौन से खनिज तत्व अपर्याप्त हैं, प्रायोगिक तौर पर जल संवर्धन (Hydroponics) तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। इस विधि में, पौधे को एक नियंत्रित पोषक तत्व विलयन में उगाया जाता है। पौधे को विभिन्न जल संवर्धन माध्यमों में उगाकर परीक्षण किया जाता है, जहाँ प्रत्येक माध्यम में एक विशिष्ट पोषक तत्व को छोड़कर बाकी सभी आवश्यक तत्व पूर्ण मात्रा में दिए जाते हैं। जिस माध्यम में पौधे के लक्षण ठीक हो जाते हैं, उससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि उस माध्यम में अनुपस्थित तत्व ही कमी वाला तत्व था। इस प्रकार, तुलनात्मक अध्ययन से अपर्याप्त खनिज तत्वों की पहचान की जा सकती है।
प्रश्न 6
पौधों में अपर्याप्तता लक्षण किस भाग में पहले प्रकट होते हैं, यह खनिज तत्व की गतिशीलता (mobility) पर निर्भर करता है।
- गतिशील तत्व: जिन तत्वों को पौधा एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जा सकता है (जैसे नाइट्रोजन, पोटेशियम, मैग्नीशियम), वे पुराने या परिपक्व ऊतकों से नए या विकासशील ऊतकों की ओर निर्यातित हो जाते हैं। जब इन तत्वों की कमी होती है, तो पुराने ऊतक (जैसे पुरानी पत्तियाँ) पहले प्रभावित होते हैं और उनमें कमी के लक्षण (जैसे क्लोरोसिस) दिखाई देते हैं।
- अगतिशील तत्व: जिन तत्वों को पौधा आसानी से एक ऊतक से दूसरे ऊतक में स्थानांतरित नहीं कर पाता (जैसे कैल्शियम, सल्फर, बोरॉन), उनकी कमी के लक्षण सबसे पहले नए या नवजात भागों (जैसे नई पत्तियाँ, शीर्षस्थ कलिकाएँ) में प्रकट होते हैं, क्योंकि ये तत्व उन भागों में जमा नहीं हो पाते और उनकी वृद्धि के लिए तत्काल आपूर्ति की आवश्यकता होती है।
इस प्रकार, तत्व की गतिशीलता के आधार पर, अपर्याप्तता लक्षण या तो पुराने ऊतकों में या नए ऊतकों में पहले दिखाई देते हैं।
प्रश्न 7
पौधों द्वारा खनिजों का अवशोषण मुख्य रूप से दो पथों द्वारा होता है:
- एपॉप्लास्ट पथ (Apoplast Pathway): इस पथ में आयन कोशिकाओं की कोशिका भित्ति और अंतःकोशिकीय स्थानों (intercellular spaces) से होकर गुजरते हैं। यह मार्ग तीव्र होता है और इसमें आयनों का अंतर्ग्रहण मुख्य रूप से निष्क्रिय अवशोषण द्वारा होता है। आयनों की यह निष्क्रिय गति अक्सर आयन चैनलों (ion channels) के माध्यम से होती है, जो पार-झिल्ली प्रोटीन होते हैं और चयनात्मक छिद्रों का कार्य करते हैं।
- सिम्प्लास्ट पथ (Symplast Pathway): इस पथ में आयन कोशिका द्रव्य (cytoplasm) से होकर गुजरते हैं, जो प्लाज्मोडेस्मेटा (plasmodesmata) द्वारा एक कोशिका से दूसरी कोशिका तक जुड़ा रहता है। इस मार्ग में आयनों का प्रवेश और निष्कासन उपापचयी ऊर्जा की आवश्यकता के कारण सक्रिय अवशोषण होता है। कोशिका में आयनों की गति को अन्तर्वाह (influx) और कोशिका से बाहर आयन की गति को बहिर्वाह (efflux) कहा जाता है।
सक्रिय अवशोषण में ऊर्जा (ATP के रूप में) का उपयोग होता है, जो आयनों को उनकी सांद्रता प्रवणता (concentration gradient) के विरुद्ध ले जाने में सहायक होता है।
प्रश्न 8
राइजोबियम (Rhizobium) जीवाणु फलीदार पौधों की जड़ों में सहजीवी (symbiotic) रूप से रहकर वातावरणीय नाइट्रोजन (N2) का स्थिरीकरण करते हैं। इस प्रक्रिया के लिए निम्नलिखित शर्तें आवश्यक हैं:
- ऑक्सीजन की अनुपस्थिति: नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए उत्तरदायी एंजाइम, नाइट्रोजिनेज (Nitrogenase), ऑक्सीजन के प्रति अत्यंत संवेदनशील होता है और ऑक्सीजन की उपस्थिति में निष्क्रिय हो जाता है। इसलिए, राइजोबियम जीवाणु को एक ऐसी वातावरण की आवश्यकता होती है जहाँ ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम हो या अनुपस्थित हो। जड़ों की गांठों (root nodules) में लेगहीमोग्लोबिन (leghemoglobin) नामक वर्णक ऑक्सीजन को बांधकर एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है।
- ऊर्जा की उपलब्धता: नाइट्रोजन स्थिरीकरण एक ऊर्जा-गहन प्रक्रिया है। राइजोबियम को इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त मात्रा में ATP की आवश्यकता होती है, जो पौधे द्वारा प्रकाश संश्लेषण से प्राप्त शर्करा के ऑक्सीकरण से मिलती है।
- आवश्यक पोषक तत्व: प्रक्रिया के लिए मोलिब्डेनम (Mo) और आयरन (Fe) जैसे सह-कारकों की भी आवश्यकता होती है।
N2 स्थिरीकरण में भूमिका: राइजोबियम वातावरणीय नाइट्रोजन (N2) को अमोनिया (NH3) में परिवर्तित करता है। यह रूपांतरण नाइट्रोजिनेज एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होता है। अमोनिया को फिर पौधे द्वारा उपयोग किए जाने वाले अन्य नाइट्रोजन यौगिकों में परिवर्तित किया जाता है। इस प्रकार, राइजोबियम वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के लिए उपलब्ध रूप में परिवर्तित करके मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है और पौधे के विकास के लिए आवश्यक नाइट्रोजन की आपूर्ति करता है।
Common mistakes
- Confusing essential and non-essential elements.
- Misidentifying deficiency symptoms with specific mineral deficiencies.
- Not understanding the difference between apoplast and symplast pathways.
- Overlooking the specific conditions required for nitrogen fixation.
Revision tips
- Create flashcards for macronutrients, micronutrients, and their functions.
- Draw diagrams illustrating deficiency symptoms for key minerals.
- Summarize the apoplast and symplast pathways in your own words.
- Review the conditions for nitrogen fixation by Rhizobium.
Practice MCQs
Q1. पौधों को अधिक मात्रा में आवश्यकता वाले पोषक तत्व क्या कहलाते हैं?
Explanation: वृहत पोषक तत्व वे होते हैं जिनकी पौधों को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है, जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, आदि।
Q2. क्लोरोसिस (पत्तियों का पीला पड़ना) किस तत्व की कमी का लक्षण है?
Explanation: क्लोरोसिस नाइट्रोजन (N), पोटेशियम (K), सल्फर (S), मैग्नीशियम (Mg), आयरन (Fe), मैंगनीज (Mn), जिंक (Zn) और कोबाल्ट (Co) जैसे कई तत्वों की कमी से हो सकता है।
Q3. खनिज अवशोषण का कौन सा पथ तीव्र गति से आयनों का अंतर्ग्रहण करता है?
Explanation: एपॉप्लास्ट पथ में आयनों का अंतर्ग्रहण तीव्र गति से होता है, जो कोशिकाओं के बाह्य स्थान में होता है।
Q4. राइजोबियम द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए कौन सी शर्त आवश्यक है?
Explanation: नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए ऑक्सीजन की अनुपस्थिति आवश्यक है क्योंकि नाइट्रोजनस एंजाइम ऑक्सीजन के प्रति संवेदनशील होता है।
Q5. कौन से तत्व की कमी से कोशिका विभाजन रुक जाता है और पौधे बौने रह जाते हैं?
Explanation: नाइट्रोजन (N), सल्फर (S), पोटेशियम (K), और मोलिब्डेनम (Mo) जैसे तत्वों की कमी से कोशिका विभाजन बाधित हो सकता है, जिससे पौधे बौने रह जाते हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 11 जीव विज्ञान के अध्याय 12 में खनिज पोषण का क्या महत्व है?
यह अध्याय पौधों के विकास और उत्तरजीविता के लिए आवश्यक विभिन्न खनिज तत्वों, उनकी भूमिकाओं, कमी के लक्षणों और अवशोषण की प्रक्रियाओं को समझने में मदद करता है।
वृहत पोषक तत्व और सूक्ष्म पोषक तत्व में क्या अंतर है?
वृहत पोषक तत्व वे हैं जिनकी पौधों को अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है, जबकि सूक्ष्म पोषक तत्व वे हैं जिनकी आवश्यकता बहुत कम मात्रा में होती है।
पौधों में क्लोरोसिस का क्या कारण है?
क्लोरोसिस, यानी पत्तियों का पीला पड़ना, अक्सर नाइट्रोजन, पोटेशियम, मैग्नीशियम, आयरन या मैंगनीज जैसे आवश्यक तत्वों की कमी के कारण होता है।
खनिज अवशोषण के दो मुख्य पथ कौन से हैं?
खनिज अवशोषण के दो मुख्य पथ एपॉप्लास्ट पथ (तेज, निष्क्रिय) और सिम्प्लास्ट पथ (धीमा, सक्रिय) हैं।
राइजोबियम नाइट्रोजन स्थिरीकरण में कैसे मदद करता है?
राइजोबियम फलीदार पौधों की जड़ों में सहजीवी संबंध बनाकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया में परिवर्तित करता है, जिसे पौधे उपयोग कर सकते हैं।
क्या सभी खनिज तत्व पौधों के लिए आवश्यक हैं?
नहीं, मृदा में कई खनिज तत्व उपस्थित हो सकते हैं, लेकिन केवल कुछ ही तत्व पौधों की सामान्य वृद्धि और उपापचयी क्रियाओं के लिए आवश्यक होते हैं।
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