CBSE Class 11 जीव विज्ञान: जीव जगत NCERT Solutions

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CBSE Class 11 Biology chapter 'The Living World' (जीव जगत) introduces the fundamental concepts of biology. These NCERT Solutions offer clear explanations on why classifying living organisms is essential, tracing the development of taxonomic systems. They detail the principles behind identifying and grouping organisms, defining key terms like 'taxon' and 'species'. The solutions explore the hierarchical structure of classification and the criteria used. Furthermore, they discuss the scientific naming of organisms and the complexities in defining species, particularly for microorganisms like bacteria. Designed to aid students in understanding these core biological principles, these solutions provide comprehensive, step-by-step answers to all exercise questions, ensuring thorough preparation for examinations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter1. जीव जगत

Chapter summary

Chapter 1, 'The Living World' (जीव जगत), introduces the fundamental concepts of biology. These NCERT Solutions cover the reasons for classifying living organisms, the historical development and reasons for changes in classification systems, and methods for categorizing individuals and populations. It clarifies the definition of a 'taxon' and its hierarchical levels, along with the correct sequence of taxonomic categories. The solutions also explain the concept of 'species' as the basic unit of classification, highlighting reproductive isolation as a key characteristic for higher plants and animals.

Learning outcomes

  • Understand the importance and reasons for classifying living organisms.
  • Explain the evolution of classification systems and why they change.
  • Define 'taxon' and identify examples at different hierarchical levels.
  • Recall the correct order of taxonomic categories.
  • Define 'species' and understand its significance as the basic unit of classification.
  • Differentiate between individuals and populations based on their characteristics.

Topics covered

Paper topics

  • जीवों का वर्गीकरण (Classification of Living Organisms)
  • वर्गीकरण की आवश्यकता (Need for Classification)
  • वर्गीकरण प्रणाली का विकास (Evolution of Classification Systems)
  • टैक्सोन (Taxon)
  • वर्गिकी संवर्ग (Taxonomic Categories)
  • पदानुक्रम (Hierarchy)
  • जाति (Species)
  • वंश (Genus)
  • गण (Order)
  • संघ (Phylum)
  • जगत (Kingdom)
  • व्यष्टि और समष्टि (Individual and Population)

Important topics

  • जीवों के वर्गीकरण के कारण
  • वर्गीकरण प्रणालियों में परिवर्तन
  • टैक्सोन की परिभाषा और उदाहरण
  • वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम
  • जाति की परिभाषा और महत्व

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

जीवों को वर्गीकृत क्यों करते हैं?
Solution: जीवों का वर्गीकरण निम्नलिखित महत्वपूर्ण कारणों से किया जाता है:
  1. पहचान में सरलता: वर्गीकरण के माध्यम से जीवों को आसानी से पहचाना जा सकता है।
  2. अन्य जीवों का अध्ययन: यह हमें विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में पाए जाने वाले जीवों का अध्ययन करने में मदद करता है।
  3. जीवाश्मों का अध्ययन: वर्गीकरण जीवाश्मों के अध्ययन और उनके विकासवादी संबंधों को समझने में सहायक है।
  4. सामूहिक अध्ययन: सभी जीवों का व्यक्तिगत रूप से अध्ययन करना असंभव है, इसलिए उन्हें समूहों में वर्गीकृत करके उनका अध्ययन किया जा सकता है।
  5. समानता व असमानता का ज्ञान: वर्गीकरण से जीवों के बीच समानताएं और असमानताएं स्पष्ट होती हैं, जिससे विभिन्न जीव समूहों के बीच संबंध स्थापित करने में मदद मिलती है।
  6. विकासवादी संबंध: यह विभिन्न टैक्सोन (वर्गिकी समूहों) के विकासवादी इतिहास (evolution) को समझने में सहायता करता है।

प्रश्न 2

वर्गीकरण प्रणाली को बार-बार क्यों बदलते हैं?
Solution: वर्गीकरण प्रणाली को समय के साथ बदलने के मुख्य कारण वैज्ञानिक ज्ञान और प्रौद्योगिकी का निरंतर विकास है।
  1. प्राचीन विधियाँ: पहले जीवों का वर्गीकरण उनके आवास और सामान्य गुणों के आधार पर किया जाता था।
  2. बाह्य आकारिकी: बाद में, बाह्य आकारिकी (external morphology) वर्गीकरण का मुख्य आधार बनी।
  3. आंतरिक संरचना और भ्रौणिकी: सूक्ष्मदर्शी और अन्य उपकरणों की खोज के पश्चात्, आंतरिक संरचना (anatomy) और भ्रौणिकी (embryology) का उपयोग वर्गीकरण में होने लगा।
  4. आधुनिक विधियाँ: वर्तमान में, कोशिकीय संरचना (cellular structure), गुणसूत्र (chromosomes), जैव रासायनिक विश्लेषण (biochemical analysis), जीन संरचना (gene structure) और DNA में समानता का भी उपयोग जीवों के बीच संबंध स्थापित करने और वर्गीकरण में किया जा रहा है।
इन नई जानकारियों और तकनीकों के कारण, वर्गीकरण प्रणालियों को अधिक सटीक और विस्तृत बनाने के लिए लगातार परिवर्तित और विकसित किया जाता रहा है।

प्रश्न 3

जिन लोगों से आप प्रायः मिलते रहते हैं, आप उनको किस आधार पर वर्गीकृत करना पसंद करेंगे?

[संकेत—ड्रेस, मातृभाषा, प्रदेश जिसमें वे रहते हैं; आर्थिक स्तर आदि।]

Solution: जिन लोगों से मैं प्रायः मिलता हूँ, उन्हें विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है, जैसे:
  1. पारिवारिक संबंध: परिवार के सदस्य, रिश्तेदार।
  2. सामाजिक संबंध: पारिवारिक मित्र, स्कूल मित्र, सहपाठी, खेल मित्र।
  3. आयु वर्ग: वयस्क, अपने से बड़े (वरिष्ठ), अपने से छोटे (कनिष्ठ), समान उम्र वाले।
  4. लिंग: स्त्री या पुरुष।
  5. भौगोलिक स्थिति/निवास स्थान: वे जिस प्रदेश में रहते हैं।
  6. भाषा: उनकी मातृभाषा या बोली जाने वाली भाषा।
  7. व्यवसाय/आर्थिक स्तर: उनका पेशा या आर्थिक स्थिति।
  8. शारीरिक विशेषताएँ: जैसे ऊँचाई, रंग आदि।
  9. पहनावा (ड्रेस): उनके द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों के प्रकार।
यह वर्गीकरण लोगों को समझने और उनके साथ बातचीत करने में सहायक हो सकता है।

प्रश्न 4

व्यष्टि तथा समष्टि की पहचान से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
Solution: व्यष्टि (Individual) और समष्टि (Population) की पहचान से हमें जीवों की प्रकृति और उनके बीच संबंधों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है:

व्यष्टि (Individual): प्रत्येक व्यष्टि में कुछ विशिष्ट लक्षण होते हैं जो उसे अपनी प्रजाति के अन्य व्यष्टियों से अलग करते हैं। यह एक एकल जीव होता है।

समष्टि (Population): एक समष्टि समान प्रजाति के व्यष्टियों का एक समूह है जो एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में रहते हैं और आपस में प्रजनन कर सकते हैं। समष्टि की पहचान से निम्नलिखित बातें स्पष्ट होती हैं:

  1. प्रजनन अलगाव (Reproductive Isolation): प्रत्येक समष्टि जनन की दृष्टि से अन्य समष्टियों से पृथक होती है।
  2. अंतःप्रजनन (Interbreeding): एक समष्टि के सदस्य आपस में अंतःप्रजनन करके नई संतान उत्पन्न कर सकते हैं।
  3. समानता और भिन्नता: एक समष्टि के सदस्यों में आपस में समानताएँ होती हैं, जबकि वे अन्य समष्टियों से भिन्न दिखाई देते हैं।
  4. कैरियोटाइप (Karyotype): एक समष्टि के सदस्यों का कैरियोटाइप (गुणसूत्रों का समूह) सामान्यतः समान होता है।
  5. आंतरिक संरचना: एक समष्टि के सदस्यों में आंतरिक संरचना में भी समानता पाई जाती है।
इस प्रकार, व्यष्टि और समष्टि की पहचान हमें जीवों की विविधता, उनके प्रजनन व्यवहार और विकासवादी संबंधों को समझने में मदद करती है।

प्रश्न 5

आम का वैज्ञानिक नाम निम्नलिखित है। इनमें से कौन-सा सही है?

मैंजीफेरा इंडिका, मैंजीफेरा इंडिका

Solution: आम का सही वैज्ञानिक नाम मैंजीफेरा इंडिका (Mangifera indica) है।

वैज्ञानिक नामकरण में, पहला शब्द वंश (Genus) को दर्शाता है और दूसरा शब्द जाति (Species) को दर्शाता है। वंश का पहला अक्षर बड़ा (Capital) और जाति का पहला अक्षर छोटा (small) लिखा जाता है, और दोनों को तिरछा (italic) लिखा जाता है। यदि हाथ से लिखा जा रहा हो, तो उन्हें रेखांकित (underline) किया जाता है।

प्रश्न 6

टैक्सोन की परिभाषा दीजिए। विभिन्न पदानुक्रम स्तर पर टैक्सा के कुछ उदाहरण दीजिए।
Solution:

टैक्सोन (Taxon): टैक्सोन किसी भी स्तर का एक वर्गिकी समूह होता है। यह किसी भी स्तर पर जीवों के समूह को निरूपित करता है। उदाहरण के लिए, एक प्रजाति, एक वंश, एक कुल, एक गण, एक वर्ग, एक संघ या एक जगत, सभी टैक्सोन कहलाते हैं।

शब्द 'टैक्सोन' सर्वप्रथम 1956 में ICBN (International Code of Botanical Nomenclature) द्वारा प्रतिपादित किया गया था। मेयर (1964) ने इसकी परिभाषा 'किसी भी स्तर के वर्गिकी समूह' के रूप में दी थी।

विभिन्न पदानुक्रम स्तर पर टैक्सा के उदाहरण:

  • जाति (Species): मक्का (Maize)
  • वंश (Genus): रोज़ेसी (Rosaceae - गुलाब कुल का वंश)
  • कुल (Family): घास (Poaceae - घास कुल)
  • गण (Order): कोनिफर (Coniferales - शंकुधारी गण)
  • वर्ग (Class): द्विबीजपत्री (Dicotyledonae)
  • विभाग (Division): बीजीय पौधे (Spermatophyta)
  • जगत (Kingdom): पादप (Plantae)

प्रश्न 7

क्या आप वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम पहचान सकते हैं?

(a) जाति (Species) → गण (Order) → संघ (Phylum) → जगत (Kingdom)

(b) वंश (Genus) → जाति (Species) → गण (Order) → जगत (Kingdom)

(c) जाति (Species) → वंश (Genus) → गण (Order) → संघ (Phylum)

Solution: वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम है: (c) जाति (Species) → वंश (Genus) → गण (Order) → संघ (Phylum)

वर्गिकी में जीवों को एक पदानुक्रमित क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, जिसमें सबसे छोटी इकाई जाति होती है और सबसे बड़ी इकाई जगत होती है। सही क्रम इस प्रकार है: जाति (Species) → वंश (Genus) → कुल (Family) → गण (Order) → वर्ग (Class) → संघ (Phylum) → जगत (Kingdom)। विकल्प (c) इस क्रम का एक हिस्सा दर्शाता है।

प्रश्न 8

'जाति' शब्द के सभी मानवीय वर्तमान कालिक अर्थों को एकत्र कीजिए। क्या आप अपने शिक्षक से उच्च कोटि के पौधों, प्राणियों तथा बैक्टीरिया की स्पीशीज का अर्थ जानने के लिए चर्चा कर सकते हैं?
Solution: 'जाति' (Species) शब्द के विभिन्न अर्थ और समझ इस प्रकार हैं:
  1. प्राकृतिक जनसंख्या: जाति को समान आकारिकी (morphology), आन्तरिक संरचना (anatomy), कार्यिकी (physiology) और कोशिकीय संरचना (cellular structure) वाले जीवों की एक प्राकृतिक जनसंख्या के रूप में समझा जा सकता है।
  2. वर्गीकरण की आधारभूत इकाई: जाति वर्गीकरण की सबसे आधारभूत इकाई है। एक जाति के जीवों में समान आनुवंशिक गुण होते हैं।
  3. प्रजनन अलगाव (Reproductive Isolation): जाति ऐसे संरचनात्मक रूप से समान जीवों का समूह है जो आपस में मुक्त लैंगिक जनन (freely sexual reproduction) द्वारा संतान उत्पन्न कर सकते हैं, परन्तु वे अन्य जातियों के जीवों से जनन में पृथक (reproductively isolated) होते हैं।
उच्च कोटि के पौधों, प्राणियों तथा बैक्टीरिया की स्पीशीज का अर्थ:

उच्च पादपों और जन्तुओं (higher plants and animals) में सामान्यतः लैंगिक जनन होता है। इसलिए, उनकी जाति का निर्धारण करने के लिए जनन पृथकता (reproductive isolation) का उपयोग एक महत्वपूर्ण मापदंड है। परिभाषा (3) इन जीवों के लिए सबसे उपयुक्त है।

जीवाणुओं (bacteria) में, मुक्त प्रजनन (free reproduction) होता है और जनन पृथकता का स्पष्ट आधार नहीं होता। इसलिए, उनकी जाति को परिभाषित करने के लिए अक्सर आकारिकी, जैव रासायनिक गुणों और आनुवंशिक विश्लेषण जैसे अन्य मापदंडों का उपयोग किया जाता है। इस प्रकार, बैक्टीरिया के लिए 'जाति' की परिभाषा अधिक जटिल हो सकती है।

Common mistakes

  • Confusing the order of taxonomic ranks.
  • Not understanding the concept of reproductive isolation for species definition.
  • Difficulty in differentiating between individual and population characteristics.
  • Overlooking the historical context of classification system changes.

Revision tips

  • Memorize the correct sequence of taxonomic ranks (Kingdom to Species).
  • Understand the 'why' behind classification, not just the 'how'.
  • Focus on the definition of 'species' and its application.
  • Review the reasons for changes in classification systems over time.

Practice MCQs

Q1. जीवों का वर्गीकरण क्यों आवश्यक है?

Q2. वर्गीकरण प्रणाली में समय के साथ परिवर्तन का मुख्य कारण क्या है?

Q3. टैक्सोन (Taxon) को कैसे परिभाषित किया जाता है?

Q4. निम्नलिखित में से कौन सा वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम है?

Q5. उच्च पादपों और प्राणियों में 'जाति' (Species) की पहचान का मुख्य आधार क्या है?

Frequently asked questions

जीव विज्ञान में 'जीव जगत' अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?

यह अध्याय जीव विज्ञान की नींव रखता है, जिसमें जीवों के वर्गीकरण, पहचान और उनके अध्ययन के तरीकों का परिचय दिया गया है, जो आगे के अध्यायों के लिए आधार तैयार करता है।

वर्गीकरण प्रणाली को समय के साथ क्यों बदला गया है?

नए वैज्ञानिक उपकरणों, प्रौद्योगिकियों और गहन शोध के कारण जीवों की संरचना, कार्यिकी और आनुवंशिकी के बारे में हमारी समझ बढ़ी है, जिससे वर्गीकरण प्रणालियों को अधिक सटीक बनाने के लिए विकसित किया गया है।

टैक्सोन (Taxon) क्या है?

टैक्सोन किसी भी स्तर का एक वर्गिकी समूह होता है। यह किसी भी स्तर पर जीवों के एक समूह को दर्शाता है, जैसे कि प्रजाति, वंश, कुल, गण, वर्ग, संघ या जगत।

वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम क्या है?

वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम है: जाति (Species) → वंश (Genus) → गण (Order) → संघ (Phylum) → जगत (Kingdom)।

उच्च पादपों और प्राणियों के लिए 'जाति' (Species) को कैसे परिभाषित किया जाता है?

उच्च पादपों और प्राणियों के लिए, जाति को समान आकारिकी, आन्तरिक संरचना, कार्यिकी और जनन पृथकता (reproductive isolation) वाले जीवों के प्राकृतिक समूह के रूप में परिभाषित किया जाता है।

बैक्टीरिया जैसे जीवों के लिए जाति (Species) को परिभाषित करना क्यों कठिन है?

बैक्टीरिया में मुक्त प्रजनन होता है और उनमें जनन पृथकता का स्पष्ट आधार नहीं होता, जिससे उनकी जाति को परिभाषित करना उच्च पादपों और प्राणियों की तुलना में अधिक जटिल हो जाता है।

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