कक्षा 11 जीव विज्ञान: उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 11 जीव विज्ञान के अध्याय 13, 'उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें C3 और C4 पौधों के बीच अंतर, उनकी आंतरिक संरचनाओं की पहचान, और प्रकाश संश्लेषण की दक्षता को प्रभावित करने वाले कारकों पर चर्चा की गई है। समाधान यह भी बताते हैं कि क्यों C4 पौधे उच्च उत्पादकता प्रदर्शित करते हैं, भले ही जैव संश्लेषण-केत्विन पथ में कम कोशिकाएँ शामिल हों। रुबिस्को एंजाइम की भूमिका, इसके कार्बोक्सिलेज और ऑक्सीजिनेस गतिविधि, और प्रकाश श्वसन पर इसके प्रभाव का भी विश्लेषण किया गया है। इसके अतिरिक्त, क्लोरोफिल 'ए' और 'बी' जैसे सहायक वर्णकों के महत्व और प्रकाश संश्लेषण में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को प्रकाश संश्लेषण की जटिल प्रक्रिया को समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | जीव विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 13. उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण |
Chapter summary
कक्षा 11 जीव विज्ञान के अध्याय 13 'उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण' के ये NCERT समाधान, प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया पर केंद्रित हैं। इसमें C3 और C4 पौधों के बीच संरचनात्मक और कार्यात्मक अंतरों की व्याख्या की गई है, विशेष रूप से क्रान्ज शारीरिकी और द्विरूपी हरितलवक पर जोर दिया गया है। समाधान C4 पौधों की उच्च उत्पादकता के कारणों और रुबिस्को एंजाइम की दोहरी भूमिका पर भी प्रकाश डालते हैं। सहायक वर्णकों के महत्व को भी समझाया गया है।
Learning outcomes
- C3 और C4 पौधों के बीच बाह्य और आंतरिक संरचनात्मक अंतरों की पहचान करना।
- क्रान्ज शारीरिकी और द्विरूपी हरितलवक की अवधारणा को समझना।
- C4 पौधों की उच्च उत्पादकता के कारणों का विश्लेषण करना।
- रुबिस्को एंजाइम की कार्बोक्सिलेज और ऑक्सीजिनेस गतिविधियों के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- प्रकाश श्वसन की प्रक्रिया और C4 पौधों में इसके अभाव के महत्व को समझना।
- प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल 'ए', 'बी' और अन्य सहायक वर्णकों की भूमिका का वर्णन करना।
Topics covered
Paper topics
- प्रकाश संश्लेषण
- उच्च पादपों में प्रकाश संश्लेषण
- C3 पादप
- C4 पादप
- क्रान्ज शारीरिकी
- द्विरूपी हरितलवक
- रुबिस्को एंजाइम
- कार्बोक्सिलेशन
- ऑक्सीजिनेशन
- प्रकाश श्वसन
- सहायक वर्णक
- क्लोरोफिल 'ए' और 'बी'
Important topics
- C3 और C4 पौधों के बीच अंतर
- C4 पौधों की CO2 सांद्रण क्रियाविधि
- रुबिस्को की भूमिका और प्रकाश श्वसन
- वर्णकों का प्रकाश संश्लेषण में योगदान
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
C4 पौधों की पत्तियों में:
- पर्णमध्योतक (mesophyll) में खम्भ ऊतक (palisade tissue) स्पष्ट रूप से विभाजित नहीं होता या अनुपस्थित होता है।
- संवहन बंडलों (vascular bundles) के चारों ओर बड़ी, गोल मृदूतक (parenchyma) कोशिकाएँ एक परत के रूप में व्यवस्थित होती हैं। इन कोशिकाओं को पूलाच्छद (bundle sheath) कोशिकाएँ कहा जाता है।
- पूलाच्छद कोशिकाओं में बड़े हरितलवक (chloroplasts) पाए जाते हैं, जिनमें ग्रैना (grana) कम विकसित या अनुपस्थित होते हैं।
- पर्णमध्योतक कोशिकाओं में छोटे हरितलवक होते हैं, जिनमें ग्रैना अच्छी तरह से विकसित होते हैं।
- इस प्रकार, C4 पौधों में दो प्रकार के हरितलवक पाए जाते हैं, जिन्हें द्विरूपी हरितलवक (dimorphic chloroplasts) कहते हैं। प्रकाश संश्लेषण के वर्णक तंत्र II (Photosystem II) का अभाव पूलाच्छद कोशिकाओं में देखा जा सकता है।
इसके विपरीत, C3 पौधों की पत्तियों की शारीरिकी क्रान्ज प्रकार की नहीं होती है। उनमें पर्णमध्योतक में स्पष्ट खम्भ ऊतक पाया जाता है, और सभी कोशिकाओं में एक ही प्रकार के हरितलवक होते हैं जिनमें ग्रैना विकसित होते हैं। प्रकाश संश्लेषण तंत्र में दोनों वर्णक तंत्र (Photosystem I और II) उपस्थित होते हैं।
प्रश्न 3
इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- CO2 का प्रभावी अवशोषण: C4 पौधों के पर्णमध्योतक कोशिकाओं में स्थित क्लोरोप्लास्ट, वातावरण से CO2 को बहुत प्रभावी ढंग से अवशोषित करते हैं, यहाँ तक कि जब रंध्र (stomata) बहुत कम खुले होते हैं या लगभग बंद होते हैं। यह CO2 को ग्रहण करने के लिए एक प्राथमिक ग्राही (जैसे PEP) का उपयोग करके संभव होता है।
- CO2 का संवर्धन: पर्णमध्योतक कोशिकाओं में CO2 को पहले एक कार्बनिक अम्ल में स्थिर किया जाता है, जिसे बाद में पूलाच्छद कोशिकाओं में ले जाया जाता है। पूलाच्छद कोशिकाओं में, यह कार्बनिक अम्ल टूटकर CO2 और पाइरुविक अम्ल मुक्त करता है। इस प्रक्रिया से पूलाच्छद कोशिकाओं के भीतर CO2 की सांद्रता बहुत अधिक हो जाती है।
- रुबिस्को की दक्षता में वृद्धि: पूलाच्छद कोशिकाओं में CO2 की उच्च सांद्रता के कारण, रुबिस्को एंजाइम (RUBISCO) मुख्य रूप से कार्बोक्सिलेज (carboxylase) के रूप में कार्य करता है, न कि ऑक्सीजिनेस (oxygenase) के रूप में। इससे प्रकाश श्वसन (photorespiration) की दर बहुत कम हो जाती है, जो C3 पौधों में CO2 स्थिरीकरण को बाधित करता है।
- प्रकाश श्वसन का अभाव: चूँकि C4 पौधों में CO2 की सांद्रता हमेशा रुबिस्को के लिए अनुकूलित रहती है, प्रकाश श्वसन लगभग नगण्य होता है। प्रकाश श्वसन में शर्करा का निर्माण नहीं होता और ऊर्जा की हानि होती है, इसलिए इसके अभाव से C4 पौधों की उत्पादकता बढ़ जाती है।
संक्षेप में, CO2 को प्रभावी ढंग से पकड़ने और उसे रुबिस्को के पास उच्च सांद्रता में पहुँचाने की क्षमता C4 पौधों को कम CO2 सांद्रता और उच्च तापमान जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी उच्च उत्पादकता बनाए रखने में मदद करती है।
प्रश्न 4
C4 पौधों में रुबिस्को के अधिक मात्रा में कार्बोक्सिलेशन करने के कारण निम्नलिखित हैं:
- CO2 सांद्रण क्रियाविधि: C4 पौधों में एक विशेष CO2 सांद्रण क्रियाविधि होती है। पर्णमध्योतक कोशिकाएँ CO2 को ग्रहण करके उसे एक कार्बनिक अम्ल (जैसे मैलिक अम्ल) में स्थिर करती हैं। इस अम्ल को फिर पूलाच्छद कोशिकाओं में ले जाया जाता है।
- पूलाच्छद में CO2 की उच्च सांद्रता: पूलाच्छद कोशिकाओं में, यह कार्बनिक अम्ल टूटकर CO2 और पाइरुविक अम्ल मुक्त करता है। इस प्रक्रिया के कारण, पूलाच्छद कोशिकाओं के भीतर CO2 की सांद्रता बहुत अधिक हो जाती है, जो पर्णमध्योतक कोशिकाओं की तुलना में काफी अधिक होती है।
- रुबिस्को का अनुकूल वातावरण: रुबिस्को एंजाइम मुख्य रूप से पूलाच्छद कोशिकाओं में पाया जाता है। इन कोशिकाओं में CO2 की उच्च सांद्रता रुबिस्को को ऑक्सीजन के बजाय CO2 के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करती है। रुबिस्को की CO2 के प्रति बंधुता (affinity) ऑक्सीजन की तुलना में अधिक होती है, लेकिन यह बंधुता CO2 और O2 की सापेक्ष सांद्रता पर निर्भर करती है। जब CO2 की सांद्रता अधिक होती है, तो रुबिस्को कार्बोक्सिलेज के रूप में कार्य करता है।
- प्रकाश श्वसन का दमन: C3 पौधों में, जहाँ CO2 की सांद्रता कम होती है और O2 की सांद्रता अधिक, रुबिस्को अक्सर ऑक्सीजिनेस के रूप में कार्य करता है, जिससे प्रकाश श्वसन होता है। C4 पौधों में CO2 की उच्च सांद्रता के कारण प्रकाश श्वसन की दर बहुत कम हो जाती है या लगभग समाप्त हो जाती है।
इस प्रकार, C4 पौधों में CO2 सांद्रण क्रियाविधि यह सुनिश्चित करती है कि रुबिस्को एंजाइम मुख्य रूप से कार्बोक्सिलेज के रूप में कार्य करे, जिससे CO2 का अधिक प्रभावी स्थिरीकरण होता है और प्रकाश संश्लेषण की उत्पादकता बढ़ती है।
प्रश्न 5
पौधों में क्लोरोफिल 'बी' और अन्य गौण वर्णकों (जैसे कैरोटिनॉयड, जैन्थोफिल) की उपस्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- ऊर्जा का स्थानांतरण: क्लोरोफिल 'बी' और अन्य गौण वर्णक प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करते हैं, लेकिन वे सीधे प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश अभिक्रियाओं को शुरू नहीं कर सकते। वे अवशोषित ऊर्जा को क्लोरोफिल 'ए' को स्थानांतरित कर देते हैं।
- प्रकाश अवशोषण स्पेक्ट्रम का विस्तार: ये गौण वर्णक प्रकाश के उन तरंग दैर्घ्यों (wavelengths) को भी अवशोषित कर सकते हैं जिन्हें क्लोरोफिल 'ए' प्रभावी ढंग से अवशोषित नहीं कर पाता। इस प्रकार, वे प्रकाश संश्लेषण के लिए उपलब्ध प्रकाश की कुल मात्रा और तरंग दैर्घ्य सीमा को बढ़ाते हैं।
- फोटो-ऑक्सीडेशन से सुरक्षा: गौण वर्णक, विशेष रूप से कैरोटिनॉयड, क्लोरोफिल 'ए' को अत्यधिक प्रकाश ऊर्जा से होने वाले नुकसान (फोटो-ऑक्सीडेशन) से बचाने में भी मदद करते हैं। वे अतिरिक्त ऊर्जा को अवशोषित करके या उसे ऊष्मा के रूप में निष्कासित करके क्लोरोफिल को स्थिर रखते हैं।
इसलिए, क्लोरोफिल 'ए' प्रकाश संश्लेषण के लिए अनिवार्य है, जबकि क्लोरोफिल 'बी' और अन्य गौण वर्णक सहायक के रूप में कार्य करते हैं, जो प्रक्रिया की दक्षता और सुरक्षा को बढ़ाते हैं। क्लोरोफिल 'ए' की कमी वाले पौधे प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक ऊर्जा को पर्याप्त मात्रा में प्राप्त नहीं कर पाएंगे, जिससे उनकी वृद्धि और उत्तरजीविता प्रभावित होगी।
प्रश्न 6
जब क्लोरोफिल का विघटन होता है, तो पत्ती में मौजूद अन्य वर्णक, जैसे कैरोटिनॉयड (जिनमें कैरोटीन और जैन्थोफिल शामिल हैं), अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं। कैरोटीन नारंगी रंग के होते हैं और जैन्थोफिल पीले रंग के। इन वर्णकों के कारण ही अँधेरे में रखी गई पत्ती का रंग पीला या हरा-पीला दिखाई देता है।
इस स्थिति में, कैरोटिनॉयड (कैरोटीन और जैन्थोफिल) अधिक स्थायी वर्णक माने जा सकते हैं। क्लोरोफिल प्रकाश की उपस्थिति में लगातार संश्लेषित होता रहता है और प्रकाश की अनुपस्थिति में विघटित हो जाता है। इसके विपरीत, कैरोटिनॉयड अपेक्षाकृत अधिक स्थायी होते हैं और प्रकाश की अनुपस्थिति में भी पत्ती में बने रहते हैं, जिससे वे क्लोरोफिल के विघटन के बाद दिखाई देने लगते हैं। ये वर्णक प्रकाश संश्लेषण में सहायक होते हैं और क्लोरोफिल को फोटो-ऑक्सीडेशन से भी बचाते हैं।"
Common mistakes
- C3 और C4 पौधों की आंतरिक संरचनाओं के बीच अंतर करने में भ्रमित होना।
- रुबिस्को की कार्बोक्सिलेज और ऑक्सीजिनेस गतिविधियों के बीच संबंध को गलत समझना।
- प्रकाश श्वसन के महत्व और C4 पौधों में इसके न होने के कारण को न समझ पाना।
- सहायक वर्णकों की भूमिका को केवल प्रकाश अवशोषण तक सीमित समझना।
Revision tips
- C3 और C4 पौधों की आंतरिक संरचनाओं के रेखाचित्रों का अभ्यास करें।
- रुबिस्को एंजाइम की क्रियाविधि और प्रकाश श्वसन से इसके संबंध को विस्तार से समझें।
- C4 पौधों की उच्च उत्पादकता के कारणों को सूचीबद्ध करें।
- विभिन्न वर्णकों (क्लोरोफिल ए, बी, कैरोटीनॉयड) के कार्यों की तुलना करें।
Practice MCQs
Q1. C4 पौधों की पत्तियों की कौन सी शारीरिकी विशेषता उन्हें C3 पौधों से अलग करती है?
Explanation: C4 पौधों की पत्तियों में संवहन बंडलों के चारों ओर पूलाच्छद कोशिकाओं की एक विशेष व्यवस्था होती है, जिसे क्रान्ज शारीरिकी कहा जाता है, जो C3 पौधों में अनुपस्थित होती है।
Q2. C4 पौधों में द्विरूपी हरितलवक का क्या अर्थ है?
Explanation: C4 पौधों में, पर्णमध्योतक कोशिकाओं के क्लोरोप्लास्ट छोटे होते हैं और उनमें विकसित ग्रैना होते हैं, जबकि पूलाच्छद कोशिकाओं के क्लोरोप्लास्ट बड़े होते हैं और उनमें ग्रैना कम विकसित या अनुपस्थित होते हैं।
Q3. C4 पौधों में उच्च उत्पादकता का मुख्य कारण क्या है?
Explanation: C4 पौधों में एक CO2 सांद्रण क्रियाविधि होती है जो पूलाच्छद कोशिकाओं में CO2 की उच्च सांद्रता बनाए रखती है, जिससे रुबिस्को का कार्बोक्सिलेज के रूप में कार्य प्रभावी होता है और प्रकाश श्वसन कम होता है।
Q4. रुबिस्को (RUBISCO) एंजाइम की दोहरी भूमिका क्या है?
Explanation: रुबिस्को एंजाइम CO2 के साथ जुड़कर कैल्विन चक्र को शुरू कर सकता है (कार्बोक्सिलेज गतिविधि) या O2 के साथ जुड़कर प्रकाश श्वसन को शुरू कर सकता है (ऑक्सीजिनेस गतिविधि)।
Q5. प्रकाश श्वसन (Photorespiration) का क्या परिणाम होता है?
Explanation: प्रकाश श्वसन एक अवांछित प्रक्रिया है जिसमें शर्करा का निर्माण नहीं होता और न ही ऊर्जा (ATP) संचित होती है, बल्कि यह ऊर्जा की हानि करती है।
Frequently asked questions
क्या हम केवल पौधे को बाहर से देखकर बता सकते हैं कि वह C3 है या C4?
नहीं, सामान्यतः बाहर से देखकर यह बताना मुश्किल होता है। C4 पौधे अक्सर शुष्क ट्रॉपिकल क्षेत्रों के लिए अनुकूलित होते हैं, लेकिन बाह्य आकारिकी (morphology) में C3 और C4 पौधों में बहुत कम अंतर होता है।
C4 पौधों की आंतरिक संरचना कैसे उन्हें उच्च उत्पादकता में मदद करती है?
C4 पौधों में क्रान्ज शारीरिकी और द्विरूपी हरितलवक होते हैं। उनकी CO2 सांद्रण क्रियाविधि रुबिस्को एंजाइम के पास CO2 की उच्च सांद्रता बनाए रखती है, जिससे प्रकाश श्वसन कम होता है और प्रकाश संश्लेषण की दक्षता बढ़ती है।
रुबिस्को एंजाइम का 'ऑक्सीजिनेस' के रूप में कार्य करना क्यों हानिकारक है?
जब रुबिस्को ऑक्सीजन के साथ जुड़ता है (ऑक्सीजिनेस गतिविधि), तो यह प्रकाश श्वसन को प्रेरित करता है। इस प्रक्रिया में शर्करा का निर्माण नहीं होता और ऊर्जा की हानि होती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण की समग्र उत्पादकता कम हो जाती है।
क्लोरोफिल 'बी' और अन्य सहायक वर्णक प्रकाश संश्लेषण में क्या भूमिका निभाते हैं?
क्लोरोफिल 'बी', कैरोटिनॉयड और जैन्थोफिल जैसे सहायक वर्णक प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और उसे क्लोरोफिल 'ए' को स्थानांतरित करते हैं। यह प्रकाश संश्लेषण के लिए उपयोगी तरंग दैर्घ्य की सीमा को बढ़ाता है और क्लोरोफिल 'ए' को फोटो-ऑक्सीडेशन से बचाता है।
C3 पौधों की तुलना में C4 पौधों में प्रकाश श्वसन क्यों नहीं होता?
C4 पौधों में एक विशेष CO2 सांद्रण क्रियाविधि होती है। पर्णमध्योतक कोशिकाएं CO2 को ग्रहण करके उसे पूलाच्छद कोशिकाओं में ले जाती हैं, जहाँ CO2 की उच्च सांद्रता रुबिस्को को केवल कार्बोक्सिलेज के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित करती है, जिससे प्रकाश श्वसन नहीं होता।
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