CBSE Class 10 Hindi Chapter 2: जॉर्ज पंचम की नाक NCERT Solutions
This chapter, 'जॉर्ज पंचम की नाक', from CBSE Class 10 Hindi delves into a satirical commentary on the Indian government's bureaucratic approach and its obsession with British symbols even after independence. The NCERT Solutions provided here break down each question, offering clear explanations of the underlying themes. Students will explore the critique of blind imitation of Western culture, the misplaced priorities of the administration, and the symbolic meaning of 'nose' as a representation of self-respect and national pride. These solutions help in understanding the author's sharp critique of a system that prioritizes superficiality over genuine national sentiment. They are designed to aid students in grasping the nuances of the story, preparing them effectively for their Hindi examinations by clarifying complex ideas and satirical elements.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 2 जॉर्ज पंचम की नाक |
Chapter summary
NCERT Solutions for Class 10 Hindi, Chapter 2 'जॉर्ज पंचम की नाक', focuses on analyzing the satirical elements within the story. It covers the critique of governmental bureaucracy, the obsession with foreign symbols, and the symbolic representation of 'nose' as honor and self-respect. The solutions help students understand the author's commentary on post-independence India's lingering colonial mindset and misplaced priorities, aiding in a deeper comprehension of the chapter's satirical intent.
Learning outcomes
- Understand the satirical critique of bureaucracy in 'जॉर्ज पंचम की नाक'.
- Analyze the symbolism of 'nose' as a representation of honor and self-respect.
- Identify the author's commentary on post-independence colonial mentality.
- Evaluate the misplaced priorities of the government as depicted in the chapter.
- Interpret the author's views on blind imitation of Western culture.
- Explain the significance of historical context in understanding the story's satire.
Topics covered
Paper topics
- Bureaucracy and its inefficiencies
- Symbolism of 'Nose' as honor and self-respect
- Critique of colonial mindset post-independence
- Satire on misplaced priorities
- Role of media in reporting
- Blind imitation of Western culture
- Nationalism and self-pride
- Governmental apathy
- Historical context of British rule
- The concept of 'Atithi Devo Bhava'
Important topics
- Symbolism of 'Nose'
- Critique of Bureaucracy
- Colonial Hangover
- Satire on Government Priorities
- National Self-Respect
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1
अथवा
जॉर्ज पंचम की नाक को लेकर सरकारी क्षेत्र की बदहवासी किस मानसिकता की द्योतक है?सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर दिखाई गई चिंता और बदहवासी उनकी गुलाम मानसिकता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। यह इस बात का प्रतीक है कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के बावजूद, कुछ भारतीय अधिकारी अभी भी ब्रिटिश शासन के प्रति अत्यधिक सम्मान और समर्पण का भाव रखते हैं। वे उस विदेशी शासक का सम्मान करने में लगे हैं जिसने भारत को गुलाम बनाया और उसका शोषण किया। यह मानसिकता दर्शाती है कि वे अपनी राष्ट्रीय गरिमा और आत्म-सम्मान से अधिक विदेशी शासकों को खुश करने को प्राथमिकता देते हैं। वे जॉर्ज पंचम जैसे व्यक्ति के प्रति अपनी निष्ठा दिखाकर अपनी गुलामी पर मुहर लगाना चाहते हैं, बजाय इसके कि वे उनके द्वारा किए गए अत्याचारों को उजागर करें।
प्रश्न 2
रानी एलिजाबेथ के दरजी की मुख्य परेशानी यह थी कि रानी अपने भारत, पाकिस्तान और नेपाल के शाही दौरे के दौरान कौन-सी वेशभूषा धारण करेंगी। उसे यह सुनिश्चित करना था कि रानी की वेशभूषा उनकी शाही शान और आन-बान को बनाए रखे, साथ ही वह विभिन्न देशों के सांस्कृतिक परिवेश के अनुकूल भी हो।
दरजी की यह परेशानी कुछ हद तक तर्कसंगत ठहराई जा सकती है, क्योंकि शाही व्यक्ति के पहनावे का विशेष महत्व होता है। रानी की वेशभूषा न केवल उनकी व्यक्तिगत पसंद का मामला है, बल्कि यह देश की प्रतिष्ठा और कूटनीति का भी हिस्सा हो सकती है। दरजी का कार्य रानी की छवि को बनाए रखना है, इसलिए उसे विभिन्न देशों के माहौल और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त पोशाकें तैयार करनी होंगी। हालांकि, यह भी सच है कि इस पर अत्यधिक ध्यान देना अनावश्यक हो सकता है, लेकिन रानी की अपेक्षाओं को पूरा करना दरजी के लिए एक व्यावसायिक अनिवार्यता थी।
प्रश्न 3
नई दिल्ली के कायापलट के लिए निम्नलिखित प्रयत्न किए गए होंगे:
- सबसे पहले, शहर की गंदगी और कचरे के ढेरों को हटाया गया होगा ताकि एक साफ-सुथरा माहौल बन सके।
- सभी सरकारी इमारतों, सड़कों और महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों को अच्छी तरह से रंगा-पोता और सजाया-सँवारा गया होगा।
- सड़कों और इमारतों पर रात में प्रकाश की व्यवस्था की गई होगी ताकि वे आकर्षक दिखें।
- जो फव्वारे लंबे समय से बंद पड़े थे, उन्हें ठीक करके चालू किया गया होगा।
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए ट्रैफिक पुलिस की विशेष व्यवस्था की गई होगी।
- शहर को विदेशी मेहमानों के स्वागत के लिए पूरी तरह से तैयार किया गया होगा, जिसमें हर संभव सजावट और व्यवस्था शामिल होगी।
प्रश्न 4
- (क) इस प्रकार की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार हैं?
- (ख) इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विशेषकर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है?
(क) इस प्रकार की पत्रकारिता, जिसे मनोरंजन-पत्रकारिता भी कहा जाता है, चर्चित हस्तियों के व्यक्तिगत जीवन, जैसे उनके पहनावे और खान-पान की आदतों पर केंद्रित होती है। यह स्वाभाविक है कि लोग अपने पसंदीदा सितारों के बारे में जानना चाहते हैं, और फैशन तथा जीवनशैली के रुझान अक्सर इन्हीं हस्तियों से प्रभावित होते हैं। हालांकि, इस प्रकार की पत्रकारिता को अत्यधिक महत्व देना उचित नहीं है। इसे समाचार-पत्रों के मुख्य पृष्ठों के बजाय मनोरंजन-परिशिष्ट या भीतरी पृष्ठों में स्थान मिलना चाहिए। राष्ट्रीय महत्व के समाचारों की तुलना में इसे अधिक प्रमुखता देना समाचार-पत्रों के उद्देश्य से भटकाव है।
(ख) इस तरह की पत्रकारिता आम जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी को रहन-सहन के तौर-तरीकों, फैशन और जीवनशैली के प्रति जागरूक करती है। इसके सकारात्मक प्रभाव के साथ-साथ नकारात्मक प्रभाव भी हैं। युवा पीढ़ी अक्सर इन चर्चित हस्तियों के फैशन और दिखावे से अत्यधिक प्रभावित हो जाती है। इससे उनमें पढ़ाई-लिखाई या अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से अधिक ध्यान फैशन और बाहरी दिखावे पर केंद्रित होने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है, जो उनके समग्र विकास के लिए हानिकारक हो सकता है।
प्रश्न 5
जॉर्ज पंचम की लाट की नाक को पुनः स्थापित करने के लिए मूर्तिकार ने कई प्रयास किए:
- सबसे पहले, उसने उस मूल पत्थर को खोजने का प्रयास किया जिससे मूर्ति बनी थी। इसके लिए उसने सरकारी फाइलों की छानबीन करवाई।
- जब फाइलों से कोई जानकारी नहीं मिली, तो उसने भारत के सभी प्रमुख पहाड़ों और पत्थर की खानों का दौरा किया ताकि उसी प्रकार का पत्थर मिल सके।
- पत्थर न मिलने पर, उसने देश भर में घूमकर विभिन्न महापुरुषों की मूर्तियों का निरीक्षण किया, शायद यह देखने के लिए कि क्या किसी अन्य मूर्ति की नाक का माप या शैली जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर फिट हो सकती है।
- सभी प्रयास विफल होने के बाद, अंततः उसने एक जीवित व्यक्ति की नाक काटकर उसे जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर लगा दिया, जो उसकी हताशा और समस्या के समाधान के लिए किसी भी हद तक जाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
प्रश्न 6
पाठ में मौजूदा व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए कई अन्य कथन आए हैं, जो निम्नलिखित हैं:
- 'शंख इंग्लैंड में बज रहा था, गूँज हिंदुस्तान में आ रही थी।' - यह कथन ब्रिटिश शासन के प्रभाव और भारत में उसकी गूंज को दर्शाता है।
- 'गश्त लगती रही और लाट की नाक चली गई।' - यह सरकारी तंत्र की लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था की विफलता पर व्यंग्य है।
- 'सभी सहमत थे कि अगर यह नाक नहीं है तो हमारी भी नाक नहीं रह जाएगी।' - यह कथन सरकारी अधिकारियों की अपनी प्रतिष्ठा और पद की चिंता को दर्शाता है, जो राष्ट्रीय सम्मान से ऊपर है।
- 'एक की नज़र ने दूसरे से कहा कि यह बताने की जिम्मेदारी तुम्हारी है।' - यह जिम्मेदारी से बचने और एक-दूसरे पर टालने की सरकारी प्रवृत्ति को उजागर करता है।
- 'पुरातत्व विभाग की फाइलों के पेट चीरे गए पर कुछ भी पता नहीं चला।' - यह सरकारी फाइलों की निष्क्रियता और सूचनाओं के अभाव पर व्यंग्य है।
- 'एक खास कमेटी बनाई गई और उसके जिम्मे यह काम दे दिया गया।' - यह समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक समितियों के गठन और प्रक्रिया को लंबा खींचने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य है।
- 'यह छोटा–सा भाषण फ़ौरन अखबारों में छप गया।' - यह मीडिया द्वारा छोटी और महत्वहीन बातों को भी प्रमुखता देने की प्रवृत्ति पर व्यंग्य हो सकता है।
प्रश्न 7
इस व्यंग्य रचना में 'नाक' को मान-सम्मान और प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। जॉर्ज पंचम, जो भारत पर ब्रिटिश शासन के प्रतीक हैं, उनकी कटी हुई नाक उनके अपमान और भारत से उनके अलगाव का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि स्वतंत्र भारत में अब ब्रिटिश शासन की नीतियों और प्रतीकों को अस्वीकार कर दिया गया है।
रानी एलिजाबेथ के आगमन के अवसर पर, सरकारी अधिकारी अपनी नाराजगी व्यक्त करने के बजाय उनकी चापलूसी में लगे रहते हैं। जॉर्ज पंचम का भारत से कोई वास्तविक जुड़ाव नहीं था, और उनकी मूर्ति का पत्थर भी विदेशी था। इसके बावजूद, अधिकारी उनकी नाक को बचाने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये बर्बाद कर देते हैं। यह उनकी अपनी प्रतिष्ठा और पद की चिंता को दर्शाता है, जो राष्ट्रीय स्वाभिमान से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। अंततः, किसी जीवित व्यक्ति की नाक काटकर मूर्ति पर लगाना पूरे भारतीय समाज के आत्म-सम्मान पर एक गहरा आघात है, जो दर्शाता है कि कैसे सरकारी तंत्र ने राष्ट्रीय गरिमा को तुच्छ समझकर विदेशी प्रतीकों को प्राथमिकता दी।
प्रश्न 8
इस कथन के माध्यम से लेखक यह संकेत देना चाहता है कि जॉर्ज पंचम जैसे विदेशी शासक, जिन्होंने भारत को गुलाम बनाया और उसका शोषण किया, वे किसी भी भारतीय नेता या बलिदानी बच्चे से कहीं कम सम्माननीय थे। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनगिनत नेताओं (जैसे गांधी, नेहरू, सुभाष, पटेल) और वीर बच्चों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उनका बलिदान और योगदान जॉर्ज पंचम के महत्व से कहीं अधिक था।
लेखक यह बताना चाहता है कि इन महान भारतीयों का मान-सम्मान जॉर्ज पंचम से कहीं अधिक था। उनकी नाक (प्रतिष्ठा) जॉर्ज पंचम की नाक से कहीं ऊँची थी। इसलिए, जॉर्ज पंचम की लाट पर किसी भारतीय नेता या बच्चे की नाक फिट न होना यह दर्शाता है कि भारत के वास्तविक नायक वे थे, न कि विदेशी शासक। यह कथन भारतीय नायकों के प्रति सम्मान और जॉर्ज पंचम जैसे शोषकों के प्रति तिरस्कार को व्यक्त करता है।
प्रश्न 9
अखबारों ने जॉर्ज पंचम की नाक की जगह एक जीवित व्यक्ति की नाक लगाने की खबर को बड़ी चतुराई से छिपा लिया। उन्होंने इस संवेदनशील और शर्मनाक घटना को सीधे तौर पर प्रकाशित करने के बजाय, उसे अत्यंत संक्षिप्त और अस्पष्ट तरीके से प्रस्तुत किया। अखबारों ने केवल इतना छापा कि 'नाक का मसला हल हो गया है' और यह कि 'राजपथ पर इंडिया गेट के पास वाली जॉर्ज पंचम की लाट के नाक लग रही है।' इस प्रकार, उन्होंने घटना की वास्तविकता को छुपाते हुए केवल एक सतही जानकारी दी, ताकि पाठक को पूरी सच्चाई का पता न चले और सरकारी तंत्र की किरकिरी न हो।
प्रश्न 10
इस कथन के माध्यम से लेखक यह कहना चाहता है कि स्वतंत्र भारत की राजधानी नई दिल्ली में भौतिक सुख-सुविधाओं और विकास की कोई कमी नहीं थी। वहाँ सब कुछ उपलब्ध था - आधुनिक इमारतें, सड़कें, व्यवस्थाएं आदि। लेकिन, इन सबके बावजूद, एक महत्वपूर्ण चीज़ की कमी थी, और वह थी 'नाक', जिसका अर्थ है आत्म-सम्मान, स्वाभिमान और राष्ट्रीय गरिमा।
लेखक का तात्पर्य है कि भले ही भारत राजनीतिक रूप से स्वतंत्र हो गया था, लेकिन भारतीयों में अभी भी जॉर्ज पंचम जैसे विदेशी शासकों के प्रति अनावश्यक सम्मान और उनकी नीतियों को प्रश्नचिह्नित करने का साहस नहीं था। यदि जॉर्ज पंचम ने भारत को गुलाम बनाकर उसके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाई थी, तो उस कृत्य का विरोध करने या उसे अस्वीकार करने की हिम्मत अभी भी भारतीयों में पूरी तरह से विकसित नहीं हुई थी। यह कथन उस औपनिवेशिक मानसिकता पर व्यंग्य है जो अभी भी भारतीयों के मन में घर किए हुए थी।
प्रश्न 11
उस दिन सभी अखबार इसलिए चुप थे क्योंकि जॉर्ज पंचम की नाक लगने की घटना एक अत्यंत शर्मनाक और विवादास्पद कार्य था। इस अवसर पर कोई भी सार्वजनिक अभिनंदन कार्यक्रम, सम्मान-पत्र भेंट करने का आयोजन, उद्घाटन समारोह, या कोई बड़ी सार्वजनिक सभा नहीं हुई थी। किसी भी नेता ने कोई महत्वपूर्ण उद्घाटन या फीता काटने जैसा कार्य नहीं किया था, जिससे अखबारों को कोई खबर मिल सके।
इसके अतिरिक्त, हवाई अड्डे या स्टेशन पर कोई स्वागत समारोह भी नहीं हुआ था, जिसके कारण किसी नेता का ताज़ा चित्र छप सके। इस प्रकार, कोई भी ऐसी घटना नहीं हुई जिसे अखबारों में प्रमुखता से छापा जा सके या जिसे राष्ट्रीय महत्व का समाचार माना जा सके। इसलिए, अखबारों ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चुप्पी साध ली, ताकि वे सरकारी तंत्र की इस शर्मनाक कार्रवाई को सीधे तौर पर उजागर न करें और किसी भी प्रकार के विवाद से बच सकें।
Common mistakes
- Confusing the literal meaning of 'nose' with its symbolic representation of honor.
- Overlooking the satirical intent and taking the events at face value.
- Failing to connect the government's actions to the broader theme of colonial hangover.
- Not recognizing the critique of media's role in sensationalizing trivial matters.
Revision tips
- Focus on the symbolic meaning of 'nose' throughout the story.
- Identify and list instances of bureaucratic inefficiency and misplaced priorities.
- Understand the author's satirical tone and how it is conveyed.
- Relate the story's themes to India's post-independence socio-political context.
- Practice answering questions that require critical analysis of the text.
Practice MCQs
Q1. सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर चिंता किस मानसिकता को दर्शाती है?
Explanation: सरकारी तंत्र की जॉर्ज पंचम की नाक को लेकर चिंता उनकी गुलाम मानसिकता को दर्शाती है, जो स्वतंत्रता के बाद भी अंग्रेजों के प्रति समर्पण दिखाती है।
Q2. रानी एलिजाबेथ के दरजी की मुख्य परेशानी क्या थी?
Explanation: रानी के दरजी की मुख्य परेशानी यह थी कि रानी भारत, पाकिस्तान और नेपाल के शाही दौरे पर कौन-सी वेशभूषा धारण करेंगी, जो विभिन्न देशों के अनुकूल हो।
Q3. नई दिल्ली के कायापलट के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए?
Explanation: नई दिल्ली के कायापलट के लिए गंदगी के ढेरों को हटाना, सड़कों और इमारतों को सजाना-संवारना और फव्वारे चलाना जैसे प्रयत्न किए गए।
Q4. लेखक के अनुसार, 'नाक' किसका प्रतीक है?
Explanation: पाठ में 'नाक' को मान-सम्मान और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना गया है, जिसका खोना या अपमानित होना राष्ट्रीय स्वाभिमान पर चोट है।
Q5. अखबारों ने 'जिंदा नाक' लगने की खबर को कैसे प्रस्तुत किया?
Explanation: अखबारों ने जिंदा नाक लगने की खबर को कुशलता से छिपा लिया और केवल इतना छापा कि 'नाक का मसला हल हो गया है'।
Q6. लेखक ने 'फाइलें सब कुछ हजम कर चुकी हैं' कथन से किस पर व्यंग्य किया है?
Explanation: यह कथन सरकारी तंत्र की निष्क्रियता, भ्रष्टाचार और फाइलों में महत्वपूर्ण सूचनाओं के दब जाने पर व्यंग्य है।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
ये समाधान CBSE कक्षा 10 की हिंदी पुस्तक के अध्याय 2 'जॉर्ज पंचम की नाक' के लिए हैं।
'जॉर्ज पंचम की नाक' पाठ का मुख्य व्यंग्य क्या है?
पाठ का मुख्य व्यंग्य सरकारी तंत्र की जॉर्ज पंचम की मूर्ति की नाक को लेकर दिखाई गई अनावश्यक चिंता और बदहवासी पर है, जो स्वतंत्रता के बाद भी औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।
पाठ में 'नाक' शब्द का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?
पाठ में 'नाक' मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और आत्म-सम्मान का प्रतीक है। जॉर्ज पंचम की नाक का न लगना या उसका खो जाना राष्ट्रीय अपमान का प्रतीक है।
लेखक ने सरकारी अधिकारियों की किस मानसिकता पर चोट की है?
लेखक ने सरकारी अधिकारियों की उस गुलाम मानसिकता पर चोट की है, जो स्वतंत्रता के बाद भी अंग्रेजों के प्रति अनावश्यक सम्मान और अंधानुकरण दिखाती है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान पाठ की गहरी समझ, मुख्य विषयों के विश्लेषण और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने की क्षमता विकसित करने में मदद करेंगे।
पाठ में 'अतिथि देवो भव' की परंपरा पर क्या प्रश्न उठाया गया है?
लेखक यह प्रश्न उठाता है कि अतिथि का सम्मान अपनी राष्ट्रीय गरिमा और आत्म-सम्मान की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.