कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: माता का आँचल

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यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी के 'माता का आँचल' पाठ के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ बच्चों के बचपन, पिता के साथ उनके अनूठे संबंध, माँ के वात्सल्य और तत्कालीन ग्रामीण जीवन की झलक प्रस्तुत करता है। समाधानों में बच्चों के खेल, उनकी शरारतें, और विपत्ति के समय माँ की शरण लेने के कारणों पर प्रकाश डाला गया है। यह पाठ उस समय के सामाजिक परिवेश और आज के ग्रामीण जीवन के बीच के अंतर को भी दर्शाता है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter1 माता का आँचल

Chapter summary

'माता का आँचल' पाठ के ये NCERT समाधान बच्चों के बचपन की मासूमियत, पिता के साथ उनके अनौपचारिक रिश्ते और माँ के ममतामयी स्नेह का चित्रण करते हैं। समाधान तत्कालीन ग्रामीण परिवेश, बच्चों के खेल और उनकी शरारतों पर केंद्रित हैं। यह पाठ आज के शहरी और ग्रामीण जीवन के बीच के अंतर को भी स्पष्ट करता है, जिससे छात्रों को सामाजिक परिवर्तन की समझ मिलती है।

Learning outcomes

  • बच्चों और पिता के बीच के भावनात्मक जुड़ाव को समझना।
  • माँ के वात्सल्य और सुरक्षा की भावना का विश्लेषण करना।
  • तत्कालीन ग्रामीण जीवन और आज के जीवन के बीच अंतर स्पष्ट करना।
  • बच्चों के खेल और उनकी दुनिया का वर्णन करना।
  • पाठ के विभिन्न प्रसंगों के भावनात्मक प्रभाव का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • बच्चों का पिता के साथ लगाव
  • माँ का वात्सल्य
  • तत्कालीन ग्रामीण जीवन
  • बच्चों के खेल और शरारतें
  • बचपन की मासूमियत
  • सामाजिक परिवर्तन
  • पारिवारिक रिश्ते
  • पाठ का शीर्षक और उसकी सार्थकता
  • बच्चों की सुरक्षा की भावना
  • ग्रामीण संस्कृति का चित्रण

Important topics

  • पिता-पुत्र का अनूठा रिश्ता
  • माँ के आँचल का महत्व
  • तत्कालीन ग्रामीण जीवन की विशेषताएँ
  • बच्चों के खेल और उनकी दुनिया
  • पाठ के शीर्षक की सार्थकता

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?

अथवा

माँ के प्रति अधिक लगाव न होते हुए भी विपत्ति के समय भोलानाथ माँ के आँचल में ही प्रेम और शांति पाता है; इसका आप क्या कारण मानते हैं?
Solution:

यह सत्य है कि भोलानाथ का अपने पिता के साथ गहरा लगाव था और पिता भी उसके साथ दोस्तों जैसा व्यवहार करते थे, उसके लालन-पालन में पूरी रुचि लेते थे। परंतु, जब वह किसी विपदा या डर का अनुभव करता था, तो उसे अत्यधिक ममता, कोमलता और सुरक्षा की आवश्यकता होती थी। पिता का स्नेह जहाँ खेलकूद और मित्रतापूर्ण व्यवहार में झलकता था, वहीं माँ का स्नेह अत्यधिक वात्सल्यपूर्ण और सुरक्षा देने वाला होता था। बच्चे को संकट के समय माँ की गोद में वह सुकून और कोमलता मिलती है जो पिता के स्नेह से भिन्न होती है। माँ का आँचल घाव पर मरहम की तरह काम करता है, जो बच्चे को तुरंत शांति और सुरक्षा का अहसास कराता है। इसलिए, विपत्ति के समय वह पिता के पास जाने के बजाय माँ की शरण लेता है।

प्रश्न 2

आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?
Solution:

भोलानाथ अपने साथियों के साथ खेलने में अत्यधिक आनंद का अनुभव करता है। जब वह अपने दोस्तों के साथ उनकी हुल्लड़बाजी, शरारतों और खेल-कूद में शामिल हो जाता है, तो वह अपने आसपास की दुनिया और अपने दुख को पूरी तरह भूल जाता है। साथियों के साथ खेल की मस्ती और उत्साह में वह इतना मग्न हो जाता है कि रोना या सिसकना भी भूल जाता है। खेल का उल्लास उसके सारे दुखों पर हावी हो जाता है।

प्रश्न 3

आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।
Solution:

यह प्रश्न परीक्षोपयोगी नहीं है, क्योंकि इसमें छात्रों से उनके व्यक्तिगत अनुभवों और यादों के आधार पर तुकबंदी लिखने की अपेक्षा की गई है। इसका उत्तर प्रत्येक छात्र के लिए भिन्न होगा और यह पाठ के विश्लेषण से संबंधित नहीं है।

प्रश्न 4

भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?
Solution:

भोलानाथ और उसके साथियों के खेल आज के बच्चों के खेलों से काफी भिन्न हैं। उनके खेल तत्कालीन ग्रामीण परिवेश से जुड़े थे, जैसे - मिट्टी के चूल्हे-चौके बनाना, बारात निकालना, खेती करना आदि। वे कंकड़, पत्थर, मिट्टी, बाँस के टूटे-फूटे टुकड़े जैसी साधारण और प्राकृतिक सामग्री से खेलते थे। इसके विपरीत, आज के बच्चों के खेल अधिक आधुनिक, बनावटी और महंगे हो गए हैं। वे प्लास्टिक के खिलौनों, वीडियो गेम्स, और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से खेलते हैं। आज के माता-पिता बच्चों को बाहर खेलने की उतनी स्वतंत्रता नहीं देते जितनी पहले दी जाती थी। सुरक्षा कारणों से बच्चों का बाहरी दुनिया से जुड़ाव कम हो गया है, जिससे उनके खेल भी सीमित हो गए हैं। आज के खेल पहले की तरह सहज, स्वाभाविक और शरारतों से भरपूर नहीं रह गए हैं।

प्रश्न 5

पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?

अथवा

ऐसी किसी घटना का उल्लेख कीजिए जब अपनी माता या पिता का स्नेह आपके अंतर्मन को छू गया हो।
Solution:

इस पाठ में कई ऐसे प्रसंग हैं जो पाठक के हृदय को गहराई से छूते हैं। एक अत्यंत रोमांचक प्रसंग तब आता है जब एक साँप बच्चों के पीछे पड़ जाता है और वे डर के मारे गिरते-पड़ते भागकर अपनी माँ की गोद में शरण लेते हैं। यह दृश्य बच्चे की असहायता और माँ की सुरक्षा का मार्मिक चित्रण करता है।

इसके अतिरिक्त, बच्चे के पिता का अपने पुत्र के साथ बच्चों जैसा व्यवहार करना भी मन को गुदगुदा देता है। जब पिता भोलानाथ के साथ भोज, बारात या खेती जैसे खेल खेलते हैं और उसमें पूरी तरह डूब जाते हैं, तो यह पिता के वात्सल्य और पुत्र के प्रति उनके गहरे प्रेम को दर्शाता है। पिता का इस प्रकार पुत्र के साथ बच्चा बन जाना पाठक को सुखद अनुभव कराता है और यह प्रसंग भी हृदय को छू जाता है।

प्रश्न 6

इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।

अथवा

'माता का अँचल' पाठ में ग्रामीण जीवन का चित्रण हुआ है। यह आज के ग्रामीण जीवन से किस प्रकार भिन्न है?
Solution:

तीस के दशक की ग्रामीण संस्कृति और आज की ग्रामीण संस्कृति में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन आए हैं। पहले के समय में सिंचाई के लिए कुओं और रहट का प्रयोग होता था, जबकि आज ट्यूबवेल और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों का उपयोग होता है। बैलों और पारंपरिक कृषि उपकरणों की जगह अब ट्रैक्टर और अन्य मशीनों ने ले ली है। पहले के ग्रामीण जीवन में मौज-मस्ती, मेलों और सामूहिक आयोजनों का विशेष स्थान था, लेकिन आज प्रगति, भविष्य और पढ़ाई-लिखाई के दबाव के कारण वह सहजता और आनंद कम हो गया है। आज के ग्रामीण जीवन में भी शहरीकरण का प्रभाव बढ़ा है, जिससे जीवनशैली और सोच में बदलाव आया है। पहले की तरह बूढ़े दूल्हों का चलन भी अब कम हो गया है। कुल मिलाकर, आज का ग्रामीण जीवन अधिक आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत, लेकिन शायद पहले की तुलना में कम आनंदमय और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।

प्रश्न 7

पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।
Solution:

यह प्रश्न छात्रों से उनके व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं को डायरी के रूप में लिखने के लिए कहता है। इसका उत्तर प्रत्येक छात्र के लिए विशिष्ट होगा और पाठ के विश्लेषण से सीधे संबंधित नहीं है। छात्र अपने माता-पिता के साथ बिताए सुखद पलों, उनके स्नेहपूर्ण व्यवहार और अपनी भावनाओं को इसमें व्यक्त कर सकते हैं।

प्रश्न 8

यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
Solution:

'माता का आँचल' पाठ में माता-पिता के वात्सल्य का अत्यंत सजीव और मनमोहक चित्रण किया गया है। बच्चे के प्रति माता और पिता दोनों का स्नेह मानो एक प्रतियोगिता में हो। पिता अपने पुत्र भोलानाथ से माँ जैसा प्यार करते हैं। वे उसे अपने साथ सुलाते, जगाते, नहलाते-धुलाते और खाना भी खिलाते हैं। इन सब कार्यों में उन्हें गहरा आनंद मिलता है और वे कभी भी भोलानाथ को डाँटते-फटकारते नहीं। वे माँ यशोदा की तरह भोलानाथ की हर क्रीड़ा में पूरी रुचि लेते हैं, जैसे कि वे भगवान की लीलाएँ हों। वे जानबूझकर उसके साथ खेलते हुए हार जाते हैं और फिर उसे प्यार से चूमते हैं या कंधे पर बिठाकर घुमाते हैं।

वहीं, माँ भी ममता की साकार प्रतिमा है। वह जानती है कि बच्चे का पेट माँ के खिलाने से ही भरता है। उसका मन बच्चे को खिलाने-पिलाने और दुलराने के लिए व्याकुल रहता है। वह बच्चे को रिझाने और खिलाने में अत्यंत कुशल है। यहाँ तक कि भरपेट खा चुके बच्चे को भी वह अपनी वात्सल्य-कला से और अधिक खिला देती है। यही कारण है कि पिता के साथ रहने का अभ्यासी होने पर भी भोलानाथ विपत्ति में माँ का आँचल ही खोजता है। माँ का ममतालु हृदय इतना भावुक है कि वह बच्चे को डर से काँपता देखकर स्वयं रो पड़ती है। यह सजल ममता पाठक के हृदय को भी गहराई से प्रभावित करती है।

प्रश्न 9

माता का आँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।
Solution:

'माता का आँचल' शीर्षक इस पाठ के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं है क्योंकि यह एकांगी है। पाठ में लेखक के शैशव के तीन प्रमुख पहलुओं का वर्णन है: पहला, बच्चे का पिता के साथ गहरा लगाव और पिता का उसके साथ बच्चों जैसा व्यवहार; दूसरा, बचपन की मस्त और शरारती क्रीड़ाएँ; और तीसरा, माँ का वात्सल्य। 'माता का आँचल' शीर्षक केवल तीसरे पहलू को ही उजागर करता है, जबकि पहले दो महत्वपूर्ण पहलुओं को यह संबोधित नहीं करता।

इस पाठ के लिए कुछ अन्य उपयुक्त शीर्षक हो सकते हैं:

  • मेरा शैशव
  • बचपन की दुनिया
  • पिता का प्यार, माँ का आँचल
  • बचपन की यादें
  • कोई लौटा दे मेरे रस-भरे दिन!

ये शीर्षक पाठ के व्यापक भाव को अधिक अच्छे से व्यक्त कर सकते हैं।

प्रश्न 10

बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?

अथवा

बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं? अपने जीवन से संबंधित कोई घटना लिखिए जिसमें आपने अपने माता-पिता के प्रति प्रेम अभिव्यक्त किया हो।
Solution:

बच्चे अपने माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को विभिन्न तरीकों से अभिव्यक्त करते हैं। वे उनके साथ रहकर, उनकी सिखाई हुई बातों का पालन करके, उनके साथ खेलकर, उन्हें चूमकर, उनकी गोद में बैठकर या उनके कंधे पर चढ़कर अपना स्नेह जताते हैं। वे अक्सर अपने माता-पिता के कार्यों में रुचि लेकर या उनकी मदद करके भी अपना प्रेम प्रकट करते हैं।

उदाहरण के लिए:

मेरे माता-पिता की विवाह की बीसवीं वर्षगाँठ थी। मैंने उनके बीस वर्ष पुराने युगल-चित्र को एक सुंदर फ्रेम में सजाकर उन्हें भेंट किया। उसी दिन, मैंने अपने हाथों से उनके लिए सब्जियों का सूप बनाकर उन्हें आदरपूर्वक पिलाया। मेरे माता-पिता मेरे इस प्रयास से बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने मेरे प्रति अपने प्रेम को व्यक्त किया। इस प्रकार, मैंने अपने कार्यों से अपने माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त किया।

प्रश्न 11

इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?
Solution:

पाठ में वर्णित बच्चों की दुनिया मेरे बचपन की दुनिया से काफी भिन्न है। पाठ में भोलानाथ और उसके साथी पूरी तरह से आज़ाद थे। वे गलियों में नंग-धड़ंग घूमते, मिट्टी, कंकड़, बाँस आदि से खेलते, तुकबंदी करते और अपनी ही एक काल्पनिक दुनिया में मग्न रहते थे। उनके पिता भी उनके साथ बच्चों की तरह खेलते थे।

इसके विपरीत, मेरा बचपन काफी अलग रहा। मेरे पिता अपने काम में व्यस्त रहते थे और मेरे साथ उतना खुलकर नहीं खेल पाते थे। वे मुझे बाहर खेलने की पूरी स्वतंत्रता नहीं देते थे और न ही नंग-धड़ंग रहने की अनुमति थी। मुझे बचपन से ही पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने, स्कूल जाने, अच्छे अंक लाने का दबाव महसूस हुआ। मुझे छोटी उम्र में ही स्कूल भेज दिया गया और मेरी मस्ती धीरे-धीरे कम होती गई। आज के बच्चों के जीवन में खेलकूद और शरारतों की जगह पढ़ाई, ट्यूशन और भविष्य की चिंता ने ले ली है। इस प्रकार, पाठ का बचपन आज के बचपन की तुलना में अधिक स्वच्छंद, प्राकृतिक और आनंदमय था।

प्रश्न 12

फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन की आँचलिक रचनाओं को पढ़िए।
Solution:

यह प्रश्न छात्रों को फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन जैसे प्रसिद्ध आंचलिक लेखकों की रचनाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इन लेखकों ने अपने साहित्य में विशेष अंचलों (क्षेत्रों) की संस्कृति, जीवनशैली और भाषा का सजीव चित्रण किया है। छात्रों को पुस्तकालय से उनकी पुस्तकें लेकर उन्हें पढ़ना चाहिए ताकि वे आंचलिक साहित्य की विशेषताओं को समझ सकें।

Common mistakes

  • बच्चों के खेल और आज के खेलों के बीच के अंतर को सतही तौर पर देखना।
  • पिता के साथ बच्चे के लगाव को केवल बाहरी खेल तक सीमित समझना।
  • पाठ के शीर्षक की सार्थकता को केवल माँ के वात्सल्य तक सीमित रखना।
  • ग्रामीण जीवन के चित्रण को केवल अतीत का हिस्सा मान लेना।

Revision tips

  • पाठ के मुख्य पात्रों, विशेषकर भोलानाथ, पिता और माँ के चरित्रों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • तत्कालीन ग्रामीण जीवन की विशेषताओं और आज के जीवन से उसकी तुलना को समझें।
  • उन प्रसंगों को याद करें जो भावनात्मक रूप से मार्मिक या हास्यप्रद हैं।
  • पाठ के शीर्षक 'माता का आँचल' की सार्थकता पर विचार करें और वैकल्पिक शीर्षक सोचें।

Practice MCQs

Q1. विपत्ति के समय भोलानाथ माँ के आँचल में शरण क्यों लेता था?

Q2. भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता था?

Q3. पाठ के अनुसार, तीस के दशक की ग्रामीण संस्कृति की क्या विशेषता थी?

Q4. पिता भोलानाथ के साथ किस प्रकार का व्यवहार करते थे?

Q5. पाठ में वर्णित साँप वाला प्रसंग कैसा है?

Frequently asked questions

'माता का आँचल' पाठ किस कक्षा के लिए है?

यह पाठ CBSE कक्षा 10 हिंदी के पाठ्यक्रम का हिस्सा है।

इस पाठ में मुख्य रूप से किन विषयों पर चर्चा की गई है?

यह पाठ बच्चों के बचपन, पिता के साथ उनके लगाव, माँ के वात्सल्य और तत्कालीन ग्रामीण जीवन के चित्रण पर केंद्रित है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में सहायक होंगे।

पाठ में वर्णित बच्चों के खेल आज के खेलों से कैसे भिन्न हैं?

पाठ में वर्णित खेल (जैसे - भोज, बारात, खेती) प्राकृतिक और सामूहिक थे, जबकि आज के खेल अधिक आधुनिक, व्यक्तिगत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर आधारित हो गए हैं।

लेखक ने 'माता का आँचल' शीर्षक को एकांगी क्यों कहा है?

लेखक के अनुसार, शीर्षक केवल माँ के वात्सल्य पर केंद्रित है, जबकि पाठ में पिता-पुत्र के संबंध और बचपन की अन्य गतिविधियों का भी महत्वपूर्ण वर्णन है।

इस पाठ से हमें तत्कालीन समाज के बारे में क्या पता चलता है?

पाठ से पता चलता है कि उस समय ग्रामीण जीवन अधिक खुला और सरल था, बच्चे बेफिक्र होकर खेलते थे और पारिवारिक रिश्ते अधिक घनिष्ठ थे।

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