कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पाठ 4: मनुष्यता - मैथिलीशरण गुप्त NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'स्पर्श' के अध्याय 4, 'मनुष्यता' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित यह कविता मानवीयता, त्याग और आपसी भाईचारे के महत्व पर प्रकाश डालती है। समाधानों में कविता के केंद्रीय भावों को स्पष्ट किया गया है, जिसमें सुमृत्यु की अवधारणा, उदार व्यक्तियों की पहचान, महान व्यक्तियों के त्याग से प्रेरणा और सभी मनुष्यों को एक होकर चलने का संदेश शामिल है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर सरल और स्पष्ट भाषा में दिया गया है, जिससे छात्रों को कविता के गहन अर्थ को समझने में मदद मिलेगी। ये समाधान परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterSparsh ( Padd ) - Chapter 4: Mathilisharan Gupt - Manushyata

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'स्पर्श' के अध्याय 4, 'मनुष्यता' के ये NCERT समाधान, मैथिलीशरण गुप्त की कविता के माध्यम से मानवीय मूल्यों पर केंद्रित हैं। समाधान कविता के मुख्य संदेशों को स्पष्ट करते हैं, जैसे कि सार्थक मृत्यु (सुमृत्यु) क्या है, उदारता का अर्थ, और दधीचि व कर्ण जैसे महान व्यक्तियों के त्याग से प्रेरणा लेना। यह भी समझाया गया है कि हमें अहंकार रहित जीवन क्यों जीना चाहिए और 'मनुष्य मात्र बंधु है' का क्या अर्थ है। अंत में, कविता सबको एकजुट होकर चलने का आह्वान करती है, जिसे समाधानों में विस्तार से बताया गया है।

Learning outcomes

  • सुमृत्यु की अवधारणा को समझना।
  • उदार व्यक्ति के गुणों की पहचान करना।
  • महान व्यक्तियों के त्याग से प्रेरणा लेना।
  • 'मनुष्य मात्र बंधु है' के भाव को स्पष्ट करना।
  • एकता और सहयोग के महत्व को समझना।
  • कविता के माध्यम से मानवीयता का संदेश ग्रहण करना।

Topics covered

Paper topics

  • मनुष्यता का अर्थ
  • सुमृत्यु की अवधारणा
  • उदारता और त्याग
  • महान व्यक्तियों के उदाहरण (दधीचि, कर्ण)
  • अहंकार रहित जीवन
  • भाईचारे का संदेश
  • एकता में शक्ति
  • परस्पर सहयोग का महत्व
  • मैथिलीशरण गुप्त की कविता
  • स्पर्श पाठ्यपुस्तक
  • कक्षा 10 हिंदी

Important topics

  • सुमृत्यु की अवधारणा
  • जनहित के लिए त्याग का महत्व
  • 'मनुष्य मात्र बंधु है' का भाव
  • एकता और सहयोग का संदेश
  • कविता का केंद्रीय भाव

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Questions and Solutions

प्रश्न 1:

कवि ने कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहा है ?
Solution: कवि के अनुसार, वह मृत्यु सुमृत्यु कहलाती है जो दूसरों की भलाई, रक्षा या कल्याण करते हुए प्राप्त होती है। मनुष्य का शरीर नश्वर है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति दूसरों के हित के लिए अपना जीवन बलिदान कर देता है, तो उसकी मृत्यु को संसार याद रखता है और वही सच्ची मृत्यु या सुमृत्यु कहलाती है।

प्रश्न 2:

उदार व्यक्ति की पहचान कैसे हो सकती है ?
Solution: एक उदार व्यक्ति की पहचान इस बात से होती है कि उसकी कीर्ति (यश) संसार में हमेशा बनी रहती है। ऐसे व्यक्ति की कथाएँ स्वयं सरस्वती (ज्ञान की देवी) सुनाती हैं, जिसका अर्थ है कि उनके कार्यों का गुणगान हमेशा होता रहता है। ऐसे व्यक्ति संसार में सदा पूजनीय होते हैं और उन्हें ही सच्चा उदार व्यक्ति माना जाता है।

प्रश्न 3:

कवि ने दधीचि, कर्ण आदि महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर 'मनुष्यता' के लिए क्या संदेश दिया है?
Solution: कवि ने दधीचि और कर्ण जैसे महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर यह संदेश दिया है कि सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के काम आए और जनहित के लिए महान त्याग कर सके। इन व्यक्तियों ने देवताओं की भलाई के लिए अपने शरीर तक का त्याग कर दिया था, जिसके कारण वे संसार में अमर हो गए। इनका त्याग हमें सिखाता है कि हमें भी परोपकार और जन कल्याण के लिए तत्पर रहना चाहिए।

प्रश्न 4:

कवि ने किन पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए?
Solution: कवि ने निम्नलिखित पंक्तियों में यह व्यक्त किया है कि हमें गर्व-रहित जीवन व्यतीत करना चाहिए:

"रहो न भूल के मदांध तुच्छ वित्त में।

सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में।

अनाथ कौन है यहाँ, त्रिलोकनाथ साथ हैं।

दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ हैं।"

इन पंक्तियों के माध्यम से कवि समझाते हैं कि हमें तुच्छ धन-संपत्ति के मद में अंधा होकर स्वयं को सब कुछ नहीं समझना चाहिए और न ही गर्व करना चाहिए। ईश्वर हम सबके साथ है, इसलिए कोई भी अनाथ नहीं है।

प्रश्न 5:

'मनुष्य मात्र बंधु है' से आप क्या समझते हैं ? स्पष्ट कीजिए।
Solution: 'मनुष्य मात्र बंधु है' का अर्थ है कि संसार के सभी मनुष्य आपस में भाई-भाई हैं। हम सब एक ही परमपिता परमात्मा की संतान हैं। इसलिए, हमें किसी भी मनुष्य के साथ जाति, धर्म, वर्ण, लिंग या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। सभी के साथ प्रेम, समानता और भाईचारे का व्यवहार करना ही सच्ची मनुष्यता है।

प्रश्न 6:

कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?
Solution: कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा इसलिए दी है ताकि सभी मनुष्य एक-दूसरे का सहारा बनें, एक-दूसरे की सहायता करें और मिलकर आगे बढ़ें। जब हम सब मिलकर चलेंगे, एक-दूसरे का साथ देंगे और संकट के समय में एक-दूसरे के काम आएंगे, तभी समाज और संसार की प्रगति संभव हो सकेगी।

प्रश्न 7:

व्यक्ति को किस प्रकार का जीवन व्यतीत करना चाहिए? इस कविता के आधार पर लिखिए ।
Solution: इस कविता के आधार पर, व्यक्ति को ऐसा जीवन व्यतीत करना चाहिए जिसमें वह केवल अपने स्वार्थ के बारे में न सोचे, बल्कि जनहित के लिए कार्य करे। उसे उदार बनना चाहिए, दूसरों के काम आना चाहिए और त्याग की भावना रखनी चाहिए। सभी मनुष्यों को भाई समझना चाहिए और एकता व सहयोग के साथ जीवन जीना चाहिए। ऐसा जीवन ही सार्थक और स्मरणीय होता है।

Common mistakes

  • सुमृत्यु और सामान्य मृत्यु के बीच अंतर को न समझना।
  • उदारता की परिभाषा को संकुचित रूप में समझना।
  • कविता के संदेशों को व्यक्तिगत जीवन से न जोड़ पाना।
  • 'मनुष्य मात्र बंधु है' का वास्तविक अर्थ समझने में चूक।

Revision tips

  • कविता की पंक्तियों को बार-बार पढ़ें और उनके अर्थ पर विचार करें।
  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
  • महान व्यक्तियों के उदाहरणों को याद रखें और उनके त्याग के महत्व को समझें।
  • कविता के मुख्य संदेशों को सारांशित करने का प्रयास करें।

Practice MCQs

Q1. कवि के अनुसार किस प्रकार की मृत्यु को 'सुमृत्यु' कहा गया है?

Q2. उदार व्यक्ति की पहचान का मुख्य आधार क्या है?

Q3. दधीचि और कर्ण जैसे महान व्यक्तियों का उदाहरण देकर कवि क्या संदेश देना चाहते हैं?

Q4. 'मनुष्य मात्र बंधु है' का क्या अर्थ है?

Q5. कवि ने सबको एक होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श के पाठ 4 'मनुष्यता' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?

इस पाठ में मैथिलीशरण गुप्त की कविता के माध्यम से मानवीयता, त्याग, उदारता, आपसी भाईचारे और एकता के महत्व को सिखाया गया है। यह बताता है कि सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरों के काम आए।

पाठ 'मनुष्यता' के अनुसार सुमृत्यु किसे कहते हैं?

पाठ के अनुसार, वह मृत्यु सुमृत्यु कहलाती है जो दूसरों की भलाई, रक्षा या कल्याण करते हुए प्राप्त होती है। ऐसी मृत्यु को संसार हमेशा याद रखता है।

'मनुष्य मात्र बंधु है' का क्या अर्थ है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

इसका अर्थ है कि सभी मनुष्य आपस में भाई-भाई हैं और एक ही ईश्वर की संतान हैं। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जाति, धर्म, या किसी अन्य आधार पर भेदभाव को समाप्त कर एकता और प्रेम को बढ़ावा देता है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान कविता के प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में आने वाले प्रश्नों को समझने और उनका उत्तर देने में मदद मिलेगी।

मैथिलीशरण गुप्त ने किन महान व्यक्तियों का उदाहरण दिया है?

मैथिलीशरण गुप्त ने दधीचि और कर्ण जैसे महान व्यक्तियों का उदाहरण दिया है, जिन्होंने जनहित के लिए अपने शरीर तक का त्याग कर दिया था।

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