कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 3 साना-साना हाथ जोड़ि

NCERT Solutions PDF Class 10 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 10 की हिंदी पुस्तक के पाठ 'साना-साना हाथ जोड़ि' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ सिक्किम की राजधानी गंतोक की यात्रा पर आधारित है, जहाँ लेखिका मधु कांकरिया ने वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, हिमालय के विराट स्वरूप, और वहाँ के मेहनतकश लोगों के जीवन का सजीव चित्रण किया है। समाधानों में गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' कहने का कारण, श्वेत और रंगीन पताकाओं का अर्थ, जितेन नार्गे द्वारा दी गई महत्वपूर्ण जानकारियाँ, और प्रकृति के अनंत स्वरूप को देखकर लेखिका की अनुभूतियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह समाधान पत्थर तोड़ती पहाड़ी औरतों के मार्मिक दृश्य और आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में भूमिका पर भी प्रकाश डालते हैं। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter3 साना-साना हाथ जोड़ि

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी के 'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ के ये NCERT समाधान सिक्किम की यात्रा वृत्तांत पर केंद्रित हैं। इनमें गंतोक के प्राकृतिक सौंदर्य, हिमालय के विभिन्न रूपों, और वहाँ के लोगों के कठिन जीवन का वर्णन है। समाधानों में जितेन नार्गे जैसे गाइड की भूमिका, धार्मिक प्रतीकों (पताकाएँ, धर्म-चक्र) का महत्व, और मेहनतकश लोगों के योगदान को समझाया गया है। यह पाठ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय श्रम के महत्व को रेखांकित करता है।

Learning outcomes

  • गंतोक के प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालय के विराट स्वरूप का वर्णन करना।
  • सिक्किम के जनजीवन और वहाँ के लोगों की मेहनत को समझना।
  • श्वेत और रंगीन पताकाओं के प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करना।
  • एक कुशल गाइड के गुणों की पहचान करना।
  • प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय श्रम के महत्व को समझना।
  • आम जनता के आर्थिक योगदान को पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • गंतोक की यात्रा
  • सिक्किम का प्राकृतिक सौंदर्य
  • हिमालय के विभिन्न रूप
  • मेहनतकश लोगों का जीवन
  • धार्मिक प्रतीक (पताकाएँ, धर्म-चक्र)
  • जितेन नार्गे का चरित्र
  • कुशल गाइड के गुण
  • मानवीय श्रम का महत्व
  • आम जनता का आर्थिक योगदान
  • यात्रा वृत्तांत शैली

Important topics

  • गंतोक का प्राकृतिक सौंदर्य और हिमालय का विराट स्वरूप
  • मेहनतकश लोगों का जीवन और उनका योगदान
  • धार्मिक प्रतीकों का अर्थ
  • जितेन नार्गे की भूमिका और कुशल गाइड के गुण
  • मानवीय श्रम और आम जनता की आर्थिक प्रगति में भूमिका

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था?
Solution: झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका के मन पर गहरा प्रभाव डाल रहा था। इस अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य ने लेखिका को पूरी तरह से अपने वश में कर लिया था, मानो उस पर कोई जादू सा हो गया हो। इस सम्मोहन के कारण उसे समय और स्थान का बोध नहीं हो रहा था, और सब कुछ ठहरा हुआ तथा अर्थहीन सा प्रतीत हो रहा था। उसके भीतर एक प्रकार का शून्यता का अनुभव हो रहा था, जो प्रकृति की विशालता और अपनी लघुता का अहसास करा रहा था।

प्रश्न 2

गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है?
Solution: गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' इसलिए कहा गया है क्योंकि यहाँ के निवासी अत्यंत मेहनती हैं। यह एक पर्वतीय क्षेत्र है जहाँ जीवनयापन की परिस्थितियाँ बहुत कठिन होती हैं। इन कठिनाइयों के बावजूद, यहाँ के लोग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कड़ी मेहनत करने से कतराते नहीं हैं। वे अपनी मेहनत से घबराते नहीं, बल्कि ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी वे अपने जीवन का आनंद लेते हैं और मस्त रहते हैं। अपनी मेहनत के बल पर वे अपनी इच्छाओं को पूरा करते हैं, इसलिए उन्हें 'मेहनतकश बादशाह' कहा गया है।

प्रश्न 3

कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है?
Solution: पताकाओं का रंग उनके फहराने के अवसर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है।

श्वेत पताकाएँ: ये पताकाएँ किसी बुद्धिस्ट व्यक्ति की मृत्यु के अवसर पर फहराई जाती हैं। ऐसी स्थिति में, मृतक की आत्मा की शांति के लिए नगर से बाहर किसी निर्जन स्थान पर मंत्र लिखी हुई 108 पताकाएँ लगाई जाती हैं। ये पताकाएँ धीरे-धीरे अपने आप ही नष्ट हो जाती हैं और इन्हें उतारा नहीं जाता।

रंगीन पताकाएँ: ये पताकाएँ किसी शुभ कार्य के आरंभ होने का संकेत देती हैं। जब कोई नया या मंगल कार्य शुरू होता है, तो खुशी और उत्साह के प्रतीक के रूप में रंगीन पताकाएँ फहराई जाती हैं।

प्रश्न 4

जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में क्या महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ दीं, लिखिए।
Solution: जितेन नार्गे, जो लेखिका की जीप का ड्राइवर-कम-गाइड था, ने सिक्किम के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं:
  1. प्रकृति एवं भौगोलिक स्थिति: जितेन ने बताया कि सिक्किम एक अत्यंत खूबसूरत प्रदेश है। गंतोक से यूमथांग तक की 149 किलोमीटर की यात्रा में हिमालय की गहरी घाटियाँ और फूलों से लदी वादियाँ देखने को मिलती हैं। उसने यह भी बताया कि सिक्किम चीन की सीमा से सटा हुआ है।
  2. जनजीवन एवं संस्कृति: जितेन ने सिक्किम के लोगों के जीवन के बारे में बताया कि वे अधिकतर बौद्ध धर्म को मानते हैं। उसने बताया कि किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु पर आत्मा की शांति के लिए 108 पताकाएँ फहराई जाती हैं, जबकि शुभ अवसरों पर रंगीन पताकाएँ लगाई जाती हैं। उसने वहाँ के लोगों की कड़ी मेहनत का भी उल्लेख किया, जिसके कारण गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का नगर' कहा जाता है। उसने वहाँ की महिलाओं के कठोर परिश्रम का भी वर्णन किया, जो बच्चों को पीठ पर बाँधकर काम करती हैं। उसने उनके पारंपरिक परिधान 'बोकू' और चटक रंगों के प्रति उनके प्रेम का भी जिक्र किया।
  3. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: जितेन ने यह भी बताया कि पहले सिक्किम में राजशाही थी, लेकिन अब यह भारत का एक अभिन्न अंग है।
जितेन की ये जानकारियाँ लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, भूगोल और लोगों के जीवन को बेहतर ढंग से समझने में सहायक हुईं।

प्रश्न 5

लोंग स्टॉक में घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक-सी क्यों दिखाई दी?
Solution: लोंग स्टॉक में घूमते हुए धर्म-चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक-सी दिखाई दी। जब लेखिका ने जितेन से इस चक्र के बारे में पूछा, तो उसने बताया कि इसे घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं। जितेन की इस बात को सुनकर लेखिका को अपने देश भारत की याद आई। उसने महसूस किया कि मैदानी इलाकों में भी गंगा नदी के संबंध में ऐसी ही मान्यता है कि उसमें स्नान करने से पाप धुल जाते हैं। इस समानता को देखकर लेखिका को लगा कि भले ही भारत में वैज्ञानिक प्रगति हो गई हो, लेकिन लोगों की आस्थाएँ, विश्वास, अंधविश्वास और पाप-पुण्य की अवधारणाएँ आज भी एक जैसी हैं। यह एकता ही उसे पूरे भारत की आत्मा के समान लगी।

प्रश्न 6

जितेन नार्गे की गाइड की भूमिका के बारे में विचार करते हुए लिखिए कि एक कुशल गाइड में क्या गुण होते हैं?
Solution: जितेन नार्गे एक अत्यंत कुशल गाइड है, जिसके गुणों से यह स्पष्ट होता है कि एक अच्छे गाइड में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए:
  1. व्यावसायिक निपुणता: जितेन ड्राइवर-कम-गाइड है, जिसका अर्थ है कि उसे वाहन चलाने में भी कुशलता प्राप्त है। यह गुण तब उपयोगी होता है जब ड्राइवर की आवश्यकता हो।
  2. ज्ञान का भंडार: एक कुशल गाइड को अपने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, इतिहास, संस्कृति, रीति-रिवाजों और महत्वपूर्ण स्थानों की पूरी जानकारी होनी चाहिए। जितेन को सिक्किम की प्रकृति, जनजीवन, धार्मिक मान्यताओं और कठिन जीवन-स्थितियों का गहरा ज्ञान था।
  3. मनोरंजन क्षमता: जितेन ने लेखिका को बताया कि देवानंद की प्रसिद्ध फिल्म 'गाइड' की शूटिंग लोंग स्टॉक में हुई थी। इस तरह की रोचक जानकारियाँ पर्यटकों का मनोरंजन करती हैं और उनकी रुचि बढ़ाती हैं।
  4. संवाद कौशल और मानवीय संवेदना: जितेन केवल स्थानों का वर्णन ही नहीं करता, बल्कि वह वहाँ के लोगों के दुख-दर्द को भी समझता है और लेखिका से इस बारे में बात करता है। उसकी भाषा परिष्कृत और संवाद का ढंग अपनत्व से भरा है, जो पर्यटकों को सहज महसूस कराता है।
  5. ईमानदारी और संवेदनशीलता: वह पर्यटकों की भावनाओं का ध्यान रखता है और उन्हें सहजता से जानकारी प्रदान करता है।
जितेन नार्गे इन सभी गुणों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो उसे एक आदर्श गाइड बनाते हैं।

प्रश्न 7

इस यात्रा-वृत्तांत में लेखिका ने हिमालय के जिन-जिन रूपों का चित्र खींचा है, उन्हें अपने शब्दों लिखिए।
Solution: लेखिका ने इस यात्रा-वृत्तांत में हिमालय के बदलते और विविध रूपों का सजीव चित्रण किया है। जैसे-जैसे वे ऊँचाई पर चढ़ते जाते हैं, हिमालय का स्वरूप विशाल से विशालतर होता चला जाता है।
  • विशालता: छोटी-छोटी पहाड़ियाँ विशालकाय पर्वतों का रूप ले लेती हैं और घाटियाँ इतनी गहरी हो जाती हैं मानो वे पाताल में उतर गई हों।
  • हरियाली और रंग: कहीं-कहीं हिमालय हरे-भरे घास के मैदानों से ढका हुआ एक मोटी चादर जैसा प्रतीत होता है, तो कहीं वह पीलापन लिए हुए दिखाई देता है।
  • पथरीला स्वरूप: कुछ स्थानों पर हिमालय प्लास्टर उखड़ी हुई दीवार की तरह पथरीला और ऊबड़-खाबड़ नज़र आता है।
  • जलप्रपात: ऊँचाई से गिरते जलप्रपात पत्थरों के बीच से बलखाती हुई जलधाराओं के रूप में बहते हैं, जो अत्यंत मनमोहक लगते हैं।
  • फूलों की वादियाँ: चौड़ी होती वादियों में रंग-बिरंगे फूल खिले हुए दिखाई देते हैं, जो प्राकृतिक सुषमा बिखेरते हैं।
लेखिका ने हिमालय के इन विभिन्न रूपों को देखकर प्रकृति की असीम सुंदरता और विराटता का अनुभव किया है।

प्रश्न 8

प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है?
Solution: प्रकृति के अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को अनेक प्रकार की गहन अनुभूतियाँ होती हैं। हिमालय का पल-पल बदलता रूप उसे मंत्रमुग्ध कर देता है, मानो वह प्रकृति के 'माया' और 'छाया' के खेल को देखती रह जाती है। उसे ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं उसे अपना परिचय दे रही है और उसे अधिक बुद्धिमान बनाने के लिए अपने रहस्यों को उजागर कर रही है। इस विराटता के सामने उसे अपने जीवन की सार्थकता झरनों और फूलों की तरह स्वयं को समर्पित कर देने में दिखाई देती है। वह महसूस करती है कि जीवन का सच्चा अर्थ है - दूसरों के लिए जीना, अर्थात परोपकार करना। झरनों की तरह निरंतर गतिशील रहना और फूलों की तरह अपनी सुगंध बिखेरना ही जीवन का वास्तविक स्वरूप है।

प्रश्न 9

प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गए?
Solution: प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी हुई लेखिका को कुछ ऐसे दृश्य भी दिखाई दिए जिन्होंने उसे गहराई से झकझोर दिया। इनमें सबसे मार्मिक दृश्य था - सड़क बनाने के लिए पत्थर तोड़ती हुई सुंदर पहाड़ी औरतों का। लेखिका ने देखा कि जहाँ एक ओर प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य बिखरा हुआ था, वहीं दूसरी ओर कुछ पहाड़ी औरतें पत्थरों पर बैठकर कड़ी मेहनत कर रही थीं। उनके हाथों में कुदाल और हथौड़े थे, और कई औरतें अपनी पीठ पर 'डोको' (बड़ी टोकरी) में अपने छोटे बच्चों को बाँधे हुए थीं। यह दृश्य लेखिका के मन को बार-बार कचोट रहा था। उसे यह विचार झकझोर रहा था कि इतने सुंदर, स्वर्गिक वादियों और झरनों के बीच भी लोग भूख, दैन्य (गरीबी) और मृत्यु से जूझ रहे हैं। यह दृश्य प्रकृति की सुंदरता और मानवीय पीड़ा के बीच के तीव्र विरोधाभास को उजागर कर रहा था।

प्रश्न 10

सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में किन-किन लोगों का योगदान होता है, उल्लेख करें।
Solution: सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव कराने में कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान होता है:
  1. ट्रैवल एजेंसियां: ये एजेंसियां सैलानियों के लिए यात्रा की योजना बनाती हैं, वाहनों की व्यवस्था करती हैं और ठहरने की सुविधाएँ सुनिश्चित करती हैं।
  2. वाहन चालक एवं परिचालक: ये लोग सैलानियों को सुरक्षित रूप से उनके गंतव्य तक पहुँचाते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में, जहाँ बड़े वाहन नहीं जा सकते, वहाँ छोटे वाहनों के चालक अक्सर 'ड्राइवर-कम-गाइड' के रूप में कार्य करते हैं।
  3. गाइड (मार्गदर्शक): गाइड पर्यटन स्थल की जानकारी देते हैं, रोचक तथ्य बताते हैं और यात्रा को ज्ञानवर्धक बनाते हैं। जितेन नार्गे इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  4. होटल कर्मचारी: ये लोग सैलानियों के ठहरने, भोजन और अन्य सुविधाओं का ध्यान रखते हैं, जिससे उनकी यात्रा आरामदायक बनती है।
  5. स्थानीय दुकानदार और सेवा प्रदाता: पर्वतीय स्थलों पर बर्फ में चलने के लिए विशेष जूते या अन्य आवश्यक सामान किराए पर देने वाले दुकानदार, हस्तशिल्प और कलाकृतियाँ बेचने वाले विक्रेता, और फोटोग्राफर भी सैलानियों के अनुभव को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं।
इन सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों से ही सैलानी प्रकृति की सुंदरता का पूर्ण आनंद ले पाते हैं।

प्रश्न 11

"कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।" इस कथन के आधार पर स्पष्ट करें कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में क्या भूमिका है?
Solution: लेखिका का यह कथन उन पहाड़ी श्रमिक महिलाओं के संदर्भ में है जो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में काम करती हैं और बदले में बहुत कम पाती हैं, फिर भी समाज के लिए बहुत कुछ करती हैं। यह कथन भारत की आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में भूमिका को स्पष्ट रूप से दर्शाता है:
  • कठोर श्रम का योगदान: भारत की आम जनता, विशेषकर ग्रामीण और श्रमिक वर्ग, देश के विकास के लिए अथक परिश्रम करता है। सड़क, पुल, रेलवे लाइन जैसे निर्माण कार्यों में लगे श्रमिक, खेतों में अन्न उगाने वाले किसान, और विभिन्न उद्योगों में काम करने वाले मजदूर अपनी मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
  • कम पारिश्रमिक में अधिक कार्य: अक्सर इन मेहनतकश लोगों को उनके श्रम का उचित मूल्य या बहुत कम मजदूरी मिलती है। इसके बावजूद, वे देश की प्रगति के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। वे घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक उपार्जन भी करते हैं, जिससे देश की जीडीपी में वृद्धि होती है।
  • संसाधनों का उपयोग: आम जनता देश के प्राकृतिक और मानव संसाधनों का उपयोग करके उत्पादन करती है, जो अंततः देश की आर्थिक प्रगति का आधार बनता है।
  • आत्मनिर्भरता और त्याग: वे कम संसाधनों में भी गुजारा करते हुए देश के विकास में योगदान देते हैं, जो उनके त्याग और आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।
इस प्रकार, आम जनता, भले ही उसे कम मिले, देश की आर्थिक प्रगति में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आधारभूत भूमिका निभाती है।

Common mistakes

  • प्रकृति के वर्णन में केवल सुंदरता पर ध्यान देना, कठिन जीवन की उपेक्षा करना।
  • धार्मिक प्रतीकों के अर्थ को सतही तौर पर समझना।
  • गाइड की भूमिका को केवल जानकारी देने तक सीमित मानना।
  • आम जनता के श्रम के महत्व को कम आंकना।

Revision tips

  • पाठ में आए विभिन्न स्थानों (गंतोक, यूमथांग, लोंग स्टॉक) और उनके महत्व को सूचीबद्ध करें।
  • लेखिका की प्रकृति और वहाँ के लोगों के प्रति अनुभूतियों को नोट करें।
  • जितेन नार्गे के चरित्र और उसके द्वारा दी गई जानकारियों को याद करें।
  • पताकाओं और धर्म-चक्र जैसे प्रतीकों के अर्थ को समझें।
  • आम जनता के योगदान वाले प्रश्न के उत्तर को अपने शब्दों में लिखें।

Practice MCQs

Q1. लेखिका को गंतोक किस कारण सम्मोहित कर रहा था?

Q2. गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है?

Q3. सफेद पताकाएँ किस अवसर पर फहराई जाती हैं?

Q4. जितेन नार्गे की भूमिका क्या थी?

Q5. लोंग स्टॉक में घूमते चक्र को देखकर लेखिका को क्या विचार आया?

Q6. लेखिका को सड़क बनाती पहाड़ी औरतें देखकर कैसा अनुभव हुआ?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी के 'साना-साना हाथ जोड़ि' पाठ में मुख्य रूप से क्या बताया गया है?

इस पाठ में सिक्किम की राजधानी गंतोक की यात्रा का वर्णन है, जिसमें लेखिका ने वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, हिमालय के विराट स्वरूप, और वहाँ के मेहनतकश लोगों के जीवन का चित्रण किया है।

गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया है?

गंतोक को यह उपाधि इसलिए दी गई है क्योंकि वहाँ के लोग कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में भी कड़ी मेहनत करते हैं और इस मेहनत में भी वे आनंदित रहते हैं।

सफेद और रंगीन पताकाओं का क्या अर्थ है?

सफेद पताकाएँ किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु पर आत्मा की शांति के लिए फहराई जाती हैं, जबकि रंगीन पताकाएँ किसी शुभ कार्य के आरंभ होने पर लगाई जाती हैं।

जितेन नार्गे की भूमिका क्या थी और उसके क्या गुण थे?

जितेन नार्गे लेखिका की जीप का ड्राइवर-कम-गाइड था। वह कुशल, जानकार, मानवीय संवेदनाओं से युक्त और मिलनसार था।

लेखिका को पत्थर तोड़ती पहाड़ी औरतों को देखकर क्या महसूस हुआ?

लेखिका को उन औरतों का दृश्य झकझोर गया। उसने महसूस किया कि स्वर्गिक सौंदर्य के बीच भी वे भूख, दैन्य और जीवन संघर्ष से जूझ रही हैं, और वे समाज को बहुत अधिक लौटाती हैं जबकि उन्हें बहुत कम मिलता है।

यह पाठ परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?

यह पाठ के महत्वपूर्ण अंशों, पात्रों, और अवधारणाओं को स्पष्ट करता है, जिससे छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता मिलती है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.