कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी के पाठ "एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!" के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ दुलारी नामक एक गौनहारिन और टुन्नू नामक एक युवा के बीच के जटिल प्रेम संबंध को दर्शाता है। समाधान दुलारी के चरित्र की गहराई, जिसमें उसकी गायन प्रतिभा, कवित्व शक्ति, निर्भीकता और सच्ची प्रेमिका के रूप में उसकी भूमिका शामिल है, का विश्लेषण करते हैं। यह पाठ के प्रमुख विषयों जैसे कि सामाजिक उपेक्षा, प्रेम की शक्ति, और स्वतंत्रता आंदोलन में व्यक्तिगत योगदान पर भी प्रकाश डालता है। विशेष रूप से, यह बताता है कि कैसे दुलारी और टुन्नू का व्यक्तिगत प्रेम देश-प्रेम में परिवर्तित हो जाता है, जब वे विदेशी वस्त्रों की होली जलाने जैसे देशभक्ति के कार्यों में भाग लेते हैं। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 4 एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! |
Chapter summary
कक्षा 10 हिंदी के पाठ "एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!" के ये NCERT समाधान दुलारी और टुन्नू के प्रेम संबंध और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान पर केंद्रित हैं। समाधान दुलारी के बहुआयामी चरित्र, उसकी कलात्मक प्रतिभा और सामाजिक बंधनों से परे उसके प्रेम की गहराई का विश्लेषण करते हैं। यह पाठ के प्रतीकात्मक अर्थों और देशभक्ति के संदेश को भी स्पष्ट करता है।
Learning outcomes
- दुलारी के चरित्र की जटिलताओं और उसकी चारित्रिक विशेषताओं को समझना।
- दुलारी और टुन्नू के बीच प्रेम के स्वरूप और उसके विकास का विश्लेषण करना।
- स्वतंत्रता आंदोलन में पात्रों के योगदान और उसके प्रतीकात्मक अर्थ को समझना।
- पाठ में प्रयुक्त लोकगीत 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करना।
- कठोर यथार्थ का सामना करने के महत्व को समझना, जैसा कि दुलारी के संवादों से व्यक्त होता है।
Topics covered
Paper topics
- दुलारी का चरित्र चित्रण
- टुन्नू का चरित्र चित्रण
- दुलारी और टुन्नू का प्रेम
- कजली दंगल और लोक-आयोजन
- स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान
- विदेशी वस्त्रों की होली
- कला और प्रेम का संबंध
- देश-प्रेम की भावना
- सामाजिक उपेक्षा
- गीत का प्रतीकार्थ
- चरित्र की विशेषताएँ
- प्रेम की परिपक्वता
Important topics
- दुलारी का चरित्र चित्रण (विशेषताएँ)
- दुलारी और टुन्नू के प्रेम का स्वरूप और विकास
- स्वतंत्रता आंदोलन में पात्रों का योगदान
- गीत 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' का प्रतीकार्थ
- कला और देश-प्रेम का संबंध
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 2
दुलारी को आमतौर पर एक कठोर हृदय वाली महिला माना जाता था, खासकर उसके पेशे को देखते हुए जहाँ भावनात्मक कठोरता को एक गुण समझा जाता था। हालाँकि, टुन्नू की मृत्यु पर वह गहराई से विचलित हो उठी क्योंकि उसके मन में टुन्नू के लिए एक विशेष स्थान था। दुलारी ने यह महसूस कर लिया था कि टुन्नू केवल उसके बाहरी रूप या शरीर का प्रेमी नहीं था, बल्कि वह उसकी आत्मा, विशेष रूप से उसकी गायन-कला का सच्चा प्रशंसक था। जब टुन्नू, जो उसकी कला का प्रेमी था, की मृत्यु हो गई, तो गौनहारिन दुलारी का विचलित होना स्वाभाविक था, क्योंकि उसने अपने कलात्मक स्वरूप के लिए सच्चा प्रेम पाया था।
प्रश्न 3
कजली दंगल, जो भादों की तीज पर गाया जाने वाला एक लोकगायन है, में दो कजली-गायकों के बीच प्रतियोगिता होती थी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करना होता था और यह बड़ी भीड़ आकर्षित करता था। इसके अतिरिक्त, स्वतंत्रता-पूर्व काल में इन आयोजनों का उपयोग जन-प्रचार के लिए भी किया जाता था, जैसे कि लोगों के बीच देशभक्ति की भावना का प्रसार करना। आज के समय में भी ऐसे आयोजनों का उपयोग सामाजिक बुराइयों, जैसे नशा, दहेज, या भ्रूण-हत्या के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के लिए किया जाता है।
कुछ अन्य परंपरागत लोक-आयोजन इस प्रकार हैं:
- त्रिंजन (पंजाब)
- आल्हा-उत्सव (राजस्थान)
- रागनी-प्रतियोगिता (हरियाणा)
- फूल वालों की सैर (दिल्ली)
इन सभी आयोजनों में क्षेत्रीय लोक-गायकी का प्रदर्शन होता है और लोक-गायक उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं।
प्रश्न 4
दुलारी, अपने पेशे (गौनहारिन) के कारण, समाज के सामान्य सामाजिक-सांस्कृतिक दायरे से बाहर मानी जाती है और अक्सर उपेक्षित एवं तिरस्कृत होती है। इसके बावजूद, उसकी चारित्रिक विशेषताएँ उसे असाधारण रूप से विशिष्ट बनाती हैं। उसकी प्रमुख चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- (क) स्वर कोकिला: दुलारी का स्वर अत्यंत मधुर है, विशेषकर कजली गाने में उसे महारत हासिल है। उसकी इसी गायन प्रतिभा के कारण कजली-दंगल में उसे एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी माना जाता था।
- (ख) प्रतिभाशाली शायरा (कवियत्री): दुलारी के पास न केवल मधुर कंठ है, बल्कि वह तीव्र बुद्धि की भी धनी है। वह किसी भी स्थिति के अनुसार तुरंत पद (कविता) रचकर गा सकती थी, जिससे सुनने वाले दंग रह जाते थे। वह पद्य में सवाल-जवाब करने में इतनी माहिर थी कि प्रसिद्ध शायर भी उसका सम्मान करते थे और उसके सामने गाने में घबराहट महसूस करते थे।
- (ग) निर्भीक एवं स्वाभिमानी: दुलारी शारीरिक रूप से स्वस्थ और बलवान है, वह नियमित कसरत करती है और उसका शरीर पहलवानों जैसा है। वह स्वाभिमान से जीवन जीती है। जब पुलिस का मुखबिर फेंकू सरदार उससे बदतमीजी करने की कोशिश करता है, तो वह उसकी परवाह किए बिना, जो उसे सुख-सुविधाएँ देता है, उसे खरी-खोटी सुनाकर सबक सिखाती है।
- (घ) सच्ची प्रेमिका: यद्यपि दुलारी एक गौनहारिन है जहाँ प्रेम का अक्सर अभिनय किया जाता है, वह टुन्नू से सच्चा प्रेम करती है। वह जानती है कि टुन्नू उसके शरीर से नहीं, बल्कि उसकी कला से प्रेम करता है। इस सात्विक प्रेम का उत्तर वह भी उसी की तरह देती है। वह टुन्नू की तरह रेशम छोड़कर खादी अपना लेती है और टुन्नू द्वारा दी गई खादी की साड़ी पहनकर ही सरकारी कार्यक्रम में गाती है, जो उसके दुःख और प्रेम की अभिव्यक्ति है।
इन विशेषताओं के कारण दुलारी समाज के दायरे से बाहर होने के बावजूद एक विशिष्ट स्थान रखती है।
प्रश्न 5
दुलारी का टुन्नू से पहली बार परिचय तीज के अवसर पर आयोजित एक 'कजली दंगल' में हुआ था। यह कजली दंगल खोजवाँ बाज़ार में आयोजित किया गया था। इस प्रतियोगिता में, दुलारी खोजवाँ बाज़ार की ओर से प्रतिद्वंद्वी थी, जबकि बजरडीहा वालों ने टुन्नू को अपना प्रतिद्वंद्वी बनाया था। इसी प्रतियोगिता के दौरान दुलारी और टुन्नू का पहली बार एक-दूसरे से परिचय हुआ।
प्रश्न 6
टुन्नू के गायन का जवाब देते हुए दुलारी ने कहा था, "तै सरबउला बोल जिन्नगी में कब देखले लोट?" इस कथन का भाव यह था कि 'तुम जैसे सिरफिरे ने अपनी जिंदगी में कभी नोट (धन) कहाँ देखे हैं?' यहाँ 'नोट' शब्द के दो अर्थ निहित हैं: पहला, सोलह-सत्रह वर्ष की कच्ची उम्र में टुन्नू ने शायद परमेश्वरी लोट (प्रॉमिसरी नोट) जैसे कानूनी दस्तावेज़ नहीं देखे होंगे, और दूसरा, उसने धन-माया या भौतिक संपत्ति भी नहीं देखी होगी। टुन्नू के पिता एक गरीब पुरोहित थे जो बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा करते थे।
दुलारी के इस कथन में आज के युवा वर्ग के लिए यह संदेश छिपा है कि उन्हें केवल काल्पनिक या सपनों की दुनिया में नहीं जीना चाहिए, बल्कि जीवन के कठोर यथार्थ का सामना करना सीखना चाहिए। उन्हें अपनी आर्थिक और सामाजिक वास्तविकताओं को समझना चाहिए और उसी के अनुसार अपने लक्ष्यों को निर्धारित करना चाहिए।
प्रश्न 7
भारत के स्वाधीनता आंदोलन में दुलारी और टुन्नू ने अपनी-अपनी भूमिकाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया:
- टुन्नू का योगदान: टुन्नू ने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और उनकी होली जलाने के आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई। उसने उत्साहपूर्वक विदेशी वस्त्र एकत्र किए। इसी आंदोलन के दौरान पुलिस की क्रूर पिटाई का शिकार होने के कारण उसने अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।
- दुलारी का योगदान: दुलारी ने टुन्नू की देशभक्ति और बलिदान का सम्मान किया। उसने टुन्नू द्वारा भेंट की गई खादी की साड़ी पहनकर उसके प्रति अपने प्रेम को स्वीकार किया। सरकारी कार्यक्रम में, उसने टुन्नू के बलिदान पर आँसू बहाए और सार्वजनिक रूप से 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' गीत गाकर अपने प्रिय के खो जाने का शोक व्यक्त किया, जो अप्रत्यक्ष रूप से आंदोलन के प्रति उसके समर्थन को दर्शाता है।
प्रश्न 8
टुन्नू एक सोलह-सत्रह वर्ष का युवक था, जबकि दुलारी प्रौढ़ावस्था की ओर बढ़ रही थी। टुन्नू नियमित रूप से दुलारी के पास आकर बैठता और उसकी बातें सुनता था। उसका प्रेम केवल दुलारी की कला के प्रति था, न कि उसकी आयु, रंग या रूप से प्रेरित था। दुलारी भी टुन्नू की कलात्मकता को पहचानती थी और उसका सम्मान करती थी। इसी आपसी सम्मान के भाव ने धीरे-धीरे प्रेम का रूप ले लिया।
जब दुलारी ने होली के अवसर पर गाँधी आश्रम से धोती लाने वाले टुन्नू को डांटकर भगा दिया, तो बाद में उसे टुन्नू का बदला हुआ वेश, उसका कुरता और गाँधी टोपी याद आई। इससे उसे यह समझने में देर न लगी कि टुन्नू स्वतंत्रता-आंदोलन में शामिल हो गया है। एक सच्ची प्रेमिका के रूप में, दुलारी ने भी तुरंत वही रास्ता अपनाने का फैसला किया। उसने फेंकू सरदार द्वारा लाई गई विदेशी मिलों में बनी महीन धोतियों को स्वराज-आंदोलनकारियों द्वारा फैलाई गई चादर पर फेंक दिया। यह छोटा सा त्याग वास्तव में उसकी गहरी भावना की अभिव्यक्ति थी, जिसने उसके व्यक्तिगत प्रेम को देश-प्रेम की ओर मोड़ दिया।
प्रश्न 9
स्वयंसेवकों द्वारा फैलाई गई चादर पर जो विदेशी वस्त्र फेंके जा रहे थे, वे अधिकतर फटे-पुराने थे। इसके विपरीत, दुलारी ने फेंकू सरदार द्वारा लाई गई नई, विदेशी मिलों में बनी कोरी साड़ियों का पूरा बंडल ही फेंक दिया। यह कार्य उसकी दृढ़-निश्चय, टुन्नू के प्रति उसके उत्कट प्रेम और स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति उसकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वह केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि पूरी निष्ठा के साथ विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर रही थी।
प्रश्न 10
टुन्नू का यह कथन कि "मन पर किसी का बस नहीं; वह रूप या उमर का कायल नहीं होता" बिल्कुल सत्य है। टुन्नू का दुलारी के प्रति प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण या किशोरावस्था का क्षणिक मोह नहीं था, बल्कि यह आत्मिक स्तर पर था। इसीलिए उसे दुलारी की आयु या उसके रूप से कोई लेना-देना नहीं था।
उसके विवेक ने इस आत्मिक प्रेम को एक उच्चतर दिशा की ओर मोड़ा। यह प्रेम स्वार्थ से परे था और इसने टुन्नू को देश-प्रेम की ओर प्रेरित किया। उसने अपने प्रेम की अभिव्यक्ति के रूप में विदेशी वस्त्रों की होली जलाने जैसे देशभक्ति के कार्य में भाग लिया। इस प्रकार, टुन्नू और दुलारी का प्रेम उनकी आत्मा द्वारा संचालित होकर देश-प्रेम के सर्वोच्च स्वरूप में परिवर्तित हो गया, जो आत्मा की पवित्रतम भावना है।
प्रश्न 11
लोकभाषा में रचित इस गीत के मुखड़े का शाब्दिक अर्थ है - "इसी स्थान पर मेरी नाक की नथ (झुलनी) खो गई है, हे रामा!"
हालांकि, इसका प्रतीकार्थ बहुत गहरा और मार्मिक है। नाक में पहनी जाने वाली नथ (झुलनी) सुहाग का प्रतीक मानी जाती है। दुलारी एक गौनहारिन है, जो पारंपरिक रूप से किसी एक पुरुष के नाम का सुहाग चिन्ह धारण नहीं करती। लेकिन, उसने अपने मन में टुन्नू के नाम का 'सुहाग' यानी प्रेम रूपी नथ पहन ली थी। जिस स्थान पर वह यह गीत गा रही है, वहीं टुन्नू की हत्या की गई थी। अतः, दुलारी के इस कथन का प्रतीकार्थ यह है कि "यही वह स्थान है जहाँ मेरा सुहाग (टुन्नू के रूप में) लुट गया है"। यह उसके गहरे दुःख, प्रेम और प्रिय के खोने की व्यथा की अभिव्यक्ति है।
Common mistakes
- दुलारी के चरित्र को केवल उसके पेशे के आधार पर आंकना।
- टुन्नू के प्रेम को केवल किशोरावस्था का आकर्षण समझना।
- स्वतंत्रता आंदोलन में पात्रों के योगदान के महत्व को कम आंकना।
- गीत के प्रतीकात्मक अर्थ को केवल शाब्दिक अर्थ तक सीमित रखना।
Revision tips
- दुलारी के चरित्र की विभिन्न विशेषताओं (स्वर कोकिला, शायरा, निर्भीक, प्रेमिका) को सूचीबद्ध करें और उदाहरण सहित समझाएं।
- टुन्नू के प्रेम को आत्मिक और देश-प्रेम में परिवर्तित होने के कारणों पर ध्यान केंद्रित करें।
- 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' गीत के शाब्दिक और प्रतीकात्मक अर्थ को अच्छी तरह समझें।
- स्वतंत्रता आंदोलन में दुलारी और टुन्नू के योगदान को विस्तार से लिखें।
Practice MCQs
Q1. दुलारी को समाज में किस कारण उपेक्षित माना जाता था?
Explanation: दुलारी एक गौनहारिन थी, जो उस समय समाज में एक उपेक्षित पेशा माना जाता था, इसलिए उसे समाज में अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था।
Q2. टुन्नू की मृत्यु पर दुलारी क्यों विचलित हो उठी?
Explanation: दुलारी टुन्नू की मृत्यु पर इसलिए विचलित हुई क्योंकि वह समझ गई थी कि टुन्नू केवल उसके शरीर का नहीं, बल्कि उसकी गायन-कला का सच्चा प्रेमी था, जो उसकी आत्मा को महत्व देता था।
Q3. कजली दंगल का आयोजन मुख्य रूप से किस उद्देश्य से होता था?
Explanation: कजली दंगल जैसे लोक-आयोजनों का मुख्य उद्देश्य लोगों का मनोरंजन करना होता था, और स्वतंत्रता-पूर्व काल में इनके माध्यम से देशभक्ति की भावना का प्रसार भी किया जाता था।
Q4. दुलारी की चारित्रिक विशेषताओं में कौन सी शामिल नहीं है?
Explanation: दुलारी की विशेषताओं में स्वर कोकिला, प्रतिभाशाली शायरा, निर्भीक और स्वाभिमानी होना शामिल है। वह भौतिकवादी नहीं थी, बल्कि टुन्नू के प्रति अपने प्रेम में उसने विदेशी साड़ियों का त्याग किया।
Q5. 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' का प्रतीकार्थ क्या है?
Explanation: इस गीत के मुखड़े का प्रतीकार्थ गहरा है। 'झुलनी' (नथ) सुहाग का प्रतीक है, और दुलारी के लिए टुन्नू की मृत्यु के स्थान पर यह कहना कि 'यहीं मेरा सुहाग लुट गया' उसके गहरे दुःख और प्रेम की अभिव्यक्ति है।
Frequently asked questions
कक्षा 10 हिंदी के पाठ "एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!" में मुख्य पात्र कौन हैं?
इस पाठ के मुख्य पात्र दुलारी, एक गौनहारिन, और टुन्नू, एक युवा गायक हैं, जिनके प्रेम संबंध और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को दर्शाया गया है।
दुलारी को कठोर-हृदय क्यों समझा जाता था, लेकिन वह टुन्नू की मृत्यु पर विचलित क्यों हुई?
दुलारी को उसके पेशे के कारण कठोर-हृदय समझा जाता था। वह टुन्नू की मृत्यु पर इसलिए विचलित हुई क्योंकि वह जान गई थी कि टुन्नू उसके शरीर का नहीं, बल्कि उसकी गायन-कला का प्रेमी था, जो उसकी आत्मा को महत्व देता था।
पाठ में कजली दंगल का क्या महत्व है?
कजली दंगल लोकगायन की एक प्रतियोगिता थी जो मनोरंजन के साथ-साथ जन-प्रचार का माध्यम भी थी। इसी दंगल में दुलारी और टुन्नू का पहली बार परिचय हुआ था।
दुलारी और टुन्नू ने स्वतंत्रता आंदोलन में कैसे योगदान दिया?
टुन्नू ने विदेशी वस्त्रों की होली जलाने में सक्रिय भूमिका निभाई और इसी क्रम में पुलिस की पिटाई से शहीद हो गया। दुलारी ने टुन्नू के बलिदान का सम्मान करते हुए खादी की साड़ी पहनी और उसके बलिदान पर शोक व्यक्त किया, इस प्रकार उसने भी अप्रत्यक्ष रूप से योगदान दिया।
'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' गीत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है?
इस गीत का प्रतीकात्मक अर्थ है 'यही वह स्थान है जहाँ मेरा सुहाग लुट गया'। यहाँ 'झुलनी' (नाक की नथ) सुहाग का प्रतीक है, और दुलारी के लिए टुन्नू की मृत्यु के स्थान पर यह कहना उसके प्रेम और उसके प्रिय के खो जाने के गहरे दुःख को दर्शाता है।
यह पाठ आज के युवाओं के लिए क्या संदेश देता है?
यह पाठ युवाओं को सपनों की दुनिया से निकलकर कठोर यथार्थ का सामना करने और प्रेम को केवल शारीरिक आकर्षण से परे, आत्मिक और देश-प्रेम की ओर मोड़ने का संदेश देता है।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.