Class 10 Hindi Kshitij Chapter 6: Yeh Danturit Muskan & Fasal NCERT Solutions

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This comprehensive set of NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij, Chapter 6, delves into Nagarjun's poems 'Yeh Danturit Muskan' and 'Fasal'. The solutions meticulously explain the profound impact of a child's first toothy smile on the poet's emotions, contrasting it with adult smiles and highlighting the imagery used to capture its essence. For 'Fasal', the solutions clarify the poet's perspective on what constitutes a crop, emphasizing the collective contribution of natural elements like water, soil, sunlight, and air, alongside the crucial role of human labor. These solutions are designed to help students grasp the nuances of the poems, understand the literary devices employed, and prepare effectively for their board examinations by providing clear, step-by-step explanations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectक्षितिज-2
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान; फसल

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 6 cover Nagarjun's poems 'Yeh Danturit Muskan' and 'Fasal'. The solutions explain the emotional resonance of a baby's smile, its comparison with adult expressions, and the vivid imagery used by the poet. They also explore the concept of 'Fasal', detailing the essential elements like water, soil, sunlight, air, and human effort required for cultivation, and appreciating the dignity of labor involved. This chapter focuses on understanding poetic expression and the interconnectedness of nature and human effort in agriculture.

Learning outcomes

  • Understand the emotional impact of a child's smile on the poet.
  • Differentiate between a child's natural smile and an adult's smile.
  • Identify and analyze the poetic imagery used to describe the child's smile.
  • Define 'Fasal' (crop) as per the poet's perspective.
  • Recognize the essential natural and human elements required for crop cultivation.
  • Appreciate the significance of human labor ('haathon ke sparsh ki garima') in agriculture.

Topics covered

Paper topics

  • Childhood Innocence
  • Poetic Imagery
  • Nature's Elements
  • Human Labor in Agriculture
  • The Concept of 'Fasal'
  • Nagarjun's Poetry
  • Emotional Impact of a Smile
  • Contrast between Child and Adult Smiles
  • Significance of Farmer's Effort
  • Interdependence of Nature and Man

Important topics

  • The effect of a child's toothy smile on the poet
  • Imagery used to describe the smile (Shefali, Kamal, stone melting)
  • Definition of 'Fasal' as a collective effort
  • The role of water, soil, sunlight, and air in crop growth
  • The dignity and importance of human labor ('haathon ke sparsh ki garima')
  • Understanding poetic lines and their deeper meaning

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Solution: बच्चे की पहली बार दाँत निकलने पर होने वाली मुस्कान, जिसे 'दंतुरित मुसकान' कहते हैं, कवि के मन पर गहरा और मोहक प्रभाव डालती है। इस मुस्कान के प्रभाव से कवि को ऐसा महसूस होता है मानो उसके आसपास कठोर बबूल और बाँस के स्थान पर कोमल शेफालिका के फूल खिल उठे हों। यह मुस्कान इतनी सजीव और प्राणदायक है कि कवि को लगता है कि यह मृत शरीर में भी जान डाल सकती है। इस मोहक मुस्कान के प्रभाव से संन्यास की राह पर चला कवि भी गृहस्थ जीवन की ओर लौटने को प्रेरित होता है।

प्रश्न 2

बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है?
Solution: बच्चे की मुस्कान और एक बड़े व्यक्ति की मुस्कान में कई महत्वपूर्ण अंतर होते हैं:
  1. निश्छलता बनाम कृत्रिमता: बच्चों की मुस्कान स्वाभाविक, निश्छल और अबोध होती है। इसके विपरीत, बड़ों की मुस्कान में कभी-कभी कृत्रिमता या किसी विशेष अवसर की प्रतीक्षा का भाव हो सकता है।
  2. स्वाभाविकता बनाम प्रयोजन: बच्चे बिना किसी विशेष कारण के या किसी खास मौके का इंतज़ार किए बिना मुस्कुरा देते हैं। उनकी मुस्कान सहज होती है। वहीं, बड़े व्यक्ति अक्सर किसी विशेष कारण या उद्देश्य से ही मुस्कुराते हैं।
  3. आकर्षण का स्तर: बच्चे की स्वाभाविक मुस्कान सभी को सहज रूप से आकर्षित करती है और मन मोह लेती है। बड़ों की मुस्कान में वह सहज आकर्षण और व्यापक प्रभाव हमेशा नहीं होता।
संक्षेप में, बच्चे की मुस्कान हृदय से निकलती है और हृदय को छूती है, जबकि बड़ों की मुस्कान में कई बार सोच-समझकर या किसी उद्देश्य से व्यक्त होने का भाव हो सकता है।

प्रश्न 3

कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन-किन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है?
Solution: कवि नागार्जुन ने बच्चे की दंतुरित मुस्कान के सौंदर्य को निम्नलिखित बिंबों के माध्यम से अत्यंत प्रभावशाली ढंग से व्यक्त किया है:
  1. मृतक में प्राण डालना: कवि का मानना है कि बच्चे की मुस्कान इतनी जीवंत है कि वह मृत व्यक्ति में भी जान फूंक सकती है। यह मुस्कान के जीवनदायी प्रभाव को दर्शाता है।
  2. तालाब के जलजात (कमल) का उपमान: कवि बच्चे की मुस्कान की तुलना कमल के फूलों से करते हुए कहते हैं कि ये कमल तालाब में खिलने के बजाय उनकी झोंपड़ी में खिल रहे हैं। यह बच्चे की मासूमियत और उसकी मुस्कान के अनूठे सौंदर्य को दर्शाता है।
  3. कठोर पाषाण का पिघलना: कवि कल्पना करते हैं कि बच्चे की मुस्कान इतनी मधुर और प्रभावशाली है कि अत्यंत कठोर पत्थर भी उसे देखकर पिघलकर जल बन गया होगा। यह मुस्कान की कोमल प्रभावशीलता को दर्शाता है।
  4. शेफालिका के फूलों का झरना: कवि को ऐसा प्रतीत होता है कि बच्चे की मुस्कान से मानो शेफालिका के फूल झरने लगे हों। यह मुस्कान की कोमलता और मनमोहक सुगंध का बिंब प्रस्तुत करता है।
  5. तिरछी नज़रों से स्नेह: जब बच्चा तिरछी नज़रों से देखकर मुस्कुराता है, तो कवि को लगता है कि वह उनकी ओर स्नेह प्रकट कर रहा है। यह बच्चे के भोलेपन और स्नेहपूर्ण भाव को व्यक्त करता है।
ये बिंब बच्चे की मुस्कान की कोमलता, जीवंतता, मोहकता और उसके गहरे भावनात्मक प्रभाव को उजागर करते हैं।

प्रश्न 1

कवि के अनुसार फसल क्या है?
Solution: कवि के अनुसार, फसल केवल किसी एक तत्व या एक व्यक्ति की मेहनत का परिणाम नहीं है। यह अनेक प्राकृतिक तत्वों और मानव श्रम के सम्मिलित प्रयास का साकार रूप है। फसल पानी, मिट्टी, धूप, हवा और सबसे महत्वपूर्ण, किसानों के अथक परिश्रम का मिला-जुला रूप है। इन सभी के सहयोग से ही फसल का अस्तित्व संभव होता है।

प्रश्न 2

कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है। वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से हैं?
Solution: कविता में फसल उगाने के लिए निम्नलिखित आवश्यक तत्वों का उल्लेख किया गया है:
  1. पानी: फसलों की वृद्धि के लिए जल अत्यंत आवश्यक है।
  2. मिट्टी: उपजाऊ मिट्टी पोषक तत्व प्रदान करती है, जो फसल के विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
  3. सूरज की किरणें (धूप): सूर्य की रोशनी प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है, जिससे फसलें ऊर्जा प्राप्त करती हैं।
  4. हवा: हवा का संचार भी पौधों के लिए आवश्यक है।
  5. मानव श्रम: किसानों का परिश्रम और उनकी देखरेख इन सभी प्राकृतिक तत्वों को सार्थक बनाती है।
ये सभी तत्व मिलकर फसल को संभव बनाते हैं।

प्रश्न 3

फसल को 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' और 'महिमा' कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?
Solution: 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' और 'महिमा' कहकर कवि किसानों के परिश्रम और उनके महत्व को रेखांकित करना चाहता है। कवि यह स्पष्ट करना चाहता है कि यद्यपि फसल के लिए पानी, मिट्टी, धूप और हवा जैसे प्राकृतिक तत्व आवश्यक हैं, परन्तु इन तत्वों को उपयोगी और सार्थक बनाने का श्रेय किसानों के श्रम को जाता है। किसानों के अथक परिश्रम, उनकी मेहनत और लगन के बिना ये प्राकृतिक साधन व्यर्थ हैं। किसान ही इन साधनों का सही उपयोग करके धरती पर फसलें उगाता है, जिससे उसकी महिमा बढ़ती है। अतः, यह किसानों के श्रम की ही गरिमा है जो फसल को जीवन और समृद्धि प्रदान करती है।

भाव स्पष्ट कीजिए - रूपांतर है सूरज की किरणों का, सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

भाव स्पष्ट कीजिए - रूपांतर है सूरज की किरणों का, सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!
Solution: इन पंक्तियों का भाव यह है कि फसलें सूर्य की किरणों और हवा के सहयोग से ही विकसित होती हैं।
  • 'रूपांतर है सूरज की किरणों का' - इसका अर्थ है कि फसलें सूर्य की किरणों से प्राप्त ऊर्जा का ही परिवर्तित रूप हैं। सूर्य की किरणें ही फसलों को हरा-भरा बनाती हैं और उन्हें पकने में मदद करती हैं। फसल का विकास और उसकी परिपक्वता सूर्य की ऊर्जा पर निर्भर करती है।
  • 'सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का' - इसका अर्थ है कि हवा का हल्का झोंका या उसकी गति भी फसल के विकास में सहायक होती है। हवा पौधों को बढ़ने में मदद करती है और उनके लिए आवश्यक गैसों का आदान-प्रदान सुनिश्चित करती है। हवा की यह 'थिरकन' या गति फसल के जीवन का एक अभिन्न अंग है।
इस प्रकार, कवि यह बताना चाहता है कि फसलें प्रकृति के इन महत्वपूर्ण तत्वों के बिना अधूरी हैं और वे इन्हीं के सहयोग से अपना रूप और महिमा प्राप्त करती हैं।

5.1 कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है - मिट्टी के गुण-धर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?

कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है - मिट्टी के गुण-धर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?
Solution: मिट्टी के गुण-धर्म से तात्पर्य मिट्टी की उन विशेषताओं, प्राकृतिक तत्वों, खनिज पदार्थों और पोषक तत्वों से है जो उसे अन्य मिट्टियों से भिन्न बनाते हैं। यह मिट्टी की वह आंतरिक क्षमता है जो उसमें उगने वाली फसल की गुणवत्ता और मात्रा को निर्धारित करती है। प्रत्येक मिट्टी का अपना एक विशिष्ट गुण-धर्म होता है, जो उस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जलवायु और उसमें पाए जाने वाले खनिजों पर निर्भर करता है। इसी गुण-धर्म के कारण ही कुछ मिट्टियाँ गेहूँ उगाने के लिए उपयुक्त होती हैं, तो कुछ चावल या अन्य फसलें। मिट्टी की उर्वरा शक्ति और उसकी बनावट ही उसके गुण-धर्म का निर्धारण करती है, जो अंततः फसल के उत्पादन पर सीधा प्रभाव डालता है।

5.2 कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है - वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस-किस तरह प्रभावित करती है?

कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है - वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस-किस तरह प्रभावित करती है?
Solution: वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को कई नकारात्मक तरीकों से प्रभावित करती है:
  • रासायनिक खादों और कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग: आधुनिक कृषि में रासायनिक खादों और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता को नष्ट कर रहा है। ये रसायन मिट्टी में हानिकारक तत्व छोड़ते हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता कम हो जाती है और वह बंजर होने लगती है।
  • अवैज्ञानिक जुताई और अत्यधिक सिंचाई: गलत तरीके से की जाने वाली जुताई और अत्यधिक सिंचाई से मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत बह जाती है या कठोर हो जाती है, जिससे उसकी जल धारण क्षमता और वायु संचार प्रभावित होता है।
  • औद्योगिकीकरण और शहरीकरण: बढ़ते औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल कम हो रहा है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला कचरा और प्रदूषित जल भी मिट्टी को दूषित करता है।
  • जैविक विविधता का ह्रास: आधुनिक जीवन शैली के कारण मिट्टी में रहने वाले सूक्ष्मजीवों और केंचुओं जैसे लाभकारी जीवों की संख्या कम हो रही है, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • आनुवंशिक रूप से संशोधित बीजों पर निर्भरता: अत्यधिक उपज देने वाले आनुवंशिक रूप से संशोधित बीजों पर निर्भरता भी मिट्टी के प्राकृतिक गुण-धर्म को प्रभावित करती है, क्योंकि ये बीज मिट्टी से अधिक पोषक तत्व खींचते हैं।
इन सभी कारणों से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और स्वास्थ्य धीरे-धीरे क्षीण होता जा रहा है, जो भविष्य में कृषि के लिए एक गंभीर चुनौती है।

Common mistakes

  • Confusing the literal meaning of 'danturit' with its emotional significance.
  • Underestimating the role of human labor in the context of natural elements for crop growth.
  • Failing to identify the specific poetic devices and imagery used.
  • Interpreting the poems superficially without grasping the deeper philosophical undertones.

Revision tips

  • Focus on the specific imagery used by Nagarjun to describe the child's smile.
  • Understand the interconnectedness of nature and human effort as explained in the 'Fasal' poem.
  • Pay attention to the poet's appreciation for the farmer's labor.
  • Practice explaining the meaning of poetic lines and their underlying message.
  • Compare and contrast the descriptions of the child's smile with adult smiles.

Practice MCQs

Q1. बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि पर क्या प्रभाव पड़ता है?

Q2. कवि ने बच्चे की मुस्कान की तुलना किससे की है?

Q3. कविता 'फसल' के अनुसार, फसल क्या है?

Q4. 'हाथों के स्पर्श की गरिमा' से कवि क्या कहना चाहता है?

Q5. फसल को 'सूरज की किरणों का रूपांतर' क्यों कहा गया है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी क्षितिज के अध्याय 6 में कौन सी कविताएँ शामिल हैं?

कक्षा 10 हिंदी क्षितिज के अध्याय 6 में नागार्जुन द्वारा रचित 'यह दंतुरित मुसकान' और 'फसल' कविताएँ शामिल हैं।

बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि पर क्या प्रभाव होता है?

बच्चे की दंतुरित मुसकान कवि पर गहरा प्रभाव डालती है, जिससे उसे लगता है कि उसके कठोर मन में भी कोमलता आ गई है और मृतप्राय स्थिति में भी जान आ जाती है।

'फसल' कविता में कवि ने फसल को किसका रूपांतर बताया है?

कवि ने फसल को सूरज की किरणों का रूपांतर, हवा की थिरकन का संकोच, नदियों का गान और किसानों के हाथों के स्पर्श की गरिमा बताया है।

फसल उगाने के लिए किन आवश्यक तत्वों का उल्लेख किया गया है?

फसल उगाने के लिए पानी, मिट्टी, धूप, हवा और सबसे महत्वपूर्ण, मानव श्रम (किसानों का परिश्रम) जैसे तत्वों का उल्लेख किया गया है।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान कविताओं के गहन अर्थ, प्रयुक्त बिंबों और कवि के विचारों को स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले विश्लेषणात्मक प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलती है।

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