CBSE Class 10 Hindi Kshitij Chapter 13: मानवीय करुणा की दिव्य चमक - NCERT Solutions

NCERT Solutions PDF Class 10 PDF

This chapter, 'Manviya Karuna ki Divya Chamak' from CBSE Class 10 Hindi Kshitij, delves into the life and profound humanity of Father Camil Bulcke, a Belgian priest who made India his home. The NCERT Solutions provided here offer detailed explanations and insights into his life, his deep connection with Indian culture and the Hindi language, and his compassionate nature. Through the questions and answers, students will explore why Father Bulcke was seen as a symbol of divine compassion, his contributions to Hindi literature and linguistics, and how his presence was like a comforting shade. These solutions are designed to help students grasp the essence of the chapter, understand the author's portrayal of Father Bulcke, and prepare effectively for their exams by clarifying complex ideas and providing structured answers.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectक्षितिज-2
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter13. सर्वेशवऱ दयाल सक़्सेऩा - मानवीय करुणा की दिव्य चमक

Chapter summary

Chapter 13 of Kshitij, 'Manviya Karuna ki Divya Chamak,' focuses on Father Camil Bulcke, exploring his deep integration into Indian culture and his significant contributions to the Hindi language. The NCERT Solutions cover his persona, his love for India, and his linguistic endeavors, including the creation of a comprehensive Hindi-English dictionary. The solutions also address his compassionate nature, contrasting his image with traditional ascetic figures and clarifying poignant literary expressions related to his memory.

Learning outcomes

  • Understand the concept of 'divine compassion' as exemplified by Father Camil Bulcke.
  • Analyze Father Bulcke's deep connection with Indian culture and the Hindi language.
  • Identify Father Bulcke's significant contributions to Hindi literature and linguistics.
  • Explain the reasons behind Father Bulcke's presence being compared to the shade of a 'Deodar' tree.
  • Interpret literary expressions related to memory and loss concerning Father Bulcke.
  • Differentiate Father Bulcke's image from the traditional perception of a renunciate.

Topics covered

Paper topics

  • Father Camil Bulcke's personality
  • Indian culture and Father Bulcke
  • Father Bulcke's contribution to Hindi language
  • Hindi-English dictionary
  • Literary analysis of 'Manviya Karuna ki Divya Chamak'
  • Symbolism of Deodar tree
  • Compassion and humanity
  • Comparison with traditional ascetics
  • Father Bulcke's love for his birthplace
  • Interpretation of literary phrases

Important topics

  • Father Bulcke's deep integration into Indian culture
  • His significant contributions to the Hindi language and literature
  • The essence of his compassionate and humane nature
  • Symbolic meanings and literary interpretations within the chapter

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?
Solution: फ़ादर बुल्के का व्यक्तित्व मानवीय करुणा और कल्याण की भावना से परिपूर्ण था। उनकी उपस्थिति देवदार के विशाल और छायादार वृक्ष के समान थी, जो न केवल आकार में बड़ा होता है बल्कि आश्रय और शीतलता भी प्रदान करता है। जिस प्रकार देवदार का वृक्ष अपने नीचे आने वालों को सुखद छाया देता है, उसी प्रकार फ़ादर बुल्के भी अपने प्रेम, स्नेह और सांत्वना भरे शब्दों से दुखी और परेशान लोगों को शांति और सुकून देते थे। उनकी शरण में आने वाले हर व्यक्ति को आश्रय और शीतलता का अनुभव होता था।

प्रश्न 2

फ़ादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं, किस आधार पर ऐसा कहा गया है?
Solution: फ़ादर बुल्के को भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग इसलिए कहा गया है क्योंकि उन्होंने भारतीय संस्कृति को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया था और भारत को ही अपना देश मानते थे। वे हिंदी भाषा के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने हिंदी के उत्थान के लिए अथक प्रयास किए। उन्होंने हिंदी में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की, 'ब्लू-बर्ड' और 'बाइबिल' का हिंदी अनुवाद किया, और एक प्रसिद्ध अंग्रेजी-हिंदी कोश भी तैयार किया। उनका पूरा जीवन भारत और हिंदी भाषा के प्रति समर्पित था, और वे यहाँ के रीति-रिवाजों से भी भली-भाँति परिचित थे।

प्रश्न 3

पाठ में आए उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे फ़ादर बुल्के का हिंदी प्रेम प्रकट होता है?
Solution: फ़ादर बुल्के के हिंदी प्रेम के कई प्रमाण पाठ में मिलते हैं:
  1. उन्होंने सबसे प्रामाणिक अंग्रेजी-हिन्दी कोश तैयार किया, जो उनके गहन अध्ययन और हिंदी के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
  2. भारत आकर उन्होंने कलकत्ता से हिंदी में बी.ए. और इलाहाबाद से एम.ए. की उपाधि प्राप्त की।
  3. उन्होंने 'रामकथा : उत्पत्ति और विकास' विषय पर शोध करके पी.एच.डी. की उपाधि हासिल की।
  4. उन्होंने 'ब्लूबर्ड' का अनुवाद 'नील पंछी' नाम से और बाइबिल का हिंदी अनुवाद किया।
  5. वे सेंट जेवियर्स कॉलेज, राँची में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष भी रहे।
  6. वे 'परिमल' नामक साहित्यिक संस्था से जुड़े रहे और हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहे।
ये सभी कार्य उनके हिंदी भाषा के प्रति गहरे प्रेम और सम्मान को प्रकट करते हैं।

प्रश्न 4

इस पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के की जो छवि उभरती है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के का व्यक्तित्व अत्यंत सात्विक, आत्मीय और करुणामय था। वे ईश्वर के प्रति गहरी आस्था रखने वाले एक ईसाई पादरी थे, जो प्रायः सफ़ेद चोगा धारण करते थे। उनका गोरा रंग, सफ़ेद झाई मारती भूरी दाढ़ी और नीली आँखें उन्हें एक प्रभावशाली पहचान देती थीं। उनकी बाँहें हमेशा दूसरों को गले लगाने के लिए आतुर रहती थीं। वे वात्सल्य और प्रेम की प्रतिमूर्ति थे, जिनके चेहरे पर एक मंद मुस्कान हमेशा छाई रहती थी। वे दुखी और विरक्त लोगों को सांत्वना भरे शब्दों से शीतलता प्रदान करते थे। भारत देश से उन्हें गहरा प्रेम था और वे भारतीय संस्कृति में पूरी तरह रच-बस गए थे।

प्रश्न 5

लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' क्यों कहा है?
Solution: लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' इसलिए कहा है क्योंकि वे करुणा के साक्षात स्वरूप थे। उनके हृदय में सभी के लिए असीम प्रेम और वात्सल्य भरा था, जो उनके चेहरे पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। वे अपने शुभआशीषों से लोगों को भर देते थे और उनकी आँखों में गहरा स्नेह झलकता था। वे जिससे भी मिलते थे, उसके सुख-दुख में हमेशा साथ निभाते थे। किसी भी मानव का कष्ट उनसे देखा नहीं जाता था और वे यथाशक्ति उसके कष्टों को दूर करने का प्रयास करते थे। उनकी यह करुणामयी भावना ही उनके चेहरे पर एक दिव्य चमक के रूप में प्रकट होती थी।

प्रश्न 6

फ़ादर बुल्के ने संन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नयी छवि प्रस्तुत की है, कैसे?
Solution: संन्यासी की परंपरागत छवि यह है कि वह सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर केवल ईश्वर भजन में लीन रहता है और समाज से अलग रहता है। उसे सांसारिक वस्तुओं और लोगों के सुख-दुख से कोई लेना-देना नहीं होता। इसके विपरीत, फ़ादर बुल्के ने संन्यास ग्रहण करने के बाद भी अपनी एक अलग छवि प्रस्तुत की। उन्होंने अपना अध्ययन जारी रखा, कुछ समय तक कॉलेज में अध्यापन कार्य किया और विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया। वे केवल अपने धर्म तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अन्य धर्मों के लोगों के उत्सवों और संस्कारों में भी बड़े-बुजुर्गों की तरह स्नेहपूर्वक शामिल होते थे। उन्होंने धर्माचार की परवाह किए बिना सभी के साथ अपनत्व का भाव रखा। इस प्रकार, फ़ादर बुल्के की छवि परंपरागत सन्यासियों से बिल्कुल भिन्न और अधिक मानवीय थी।

प्रश्न 7

आशय स्पष्ट कीजिए - 1- नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।
Solution: इस पंक्ति का आशय यह है कि फ़ादर कामिल बुल्के की मृत्यु पर उपस्थित उनके मित्रों, परिचितों और साहित्यिक मित्रों की संख्या इतनी अधिक थी कि उन सभी को गिनना एक कठिन कार्य था। इसलिए, उन सभी की नम आँखों को गिनने का प्रयास करना या उनके दु:ख का वर्णन करने के लिए लिखना, मानो स्याही को व्यर्थ में फैलाना था। यह उनकी लोकप्रियता और उनके प्रति लोगों के गहरे स्नेह को दर्शाता है।

प्रश्न 7

आशय स्पष्ट कीजिए - 2- फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है।
Solution: इस पंक्ति का आशय यह है कि जब हम फ़ादर कामिल बुल्के को याद करते हैं, तो उनका करुणामय, शांत और स्नेहमय व्यक्तित्व हमारे मन में उभर आता है। यह स्मरण हमें एक प्रकार का दु:ख देता है, जो किसी उदास और शांत संगीत की तरह हमारे हृदय पर एक अमिट छाप छोड़ जाता है। उनके न रहने का अहसास मन में एक गहरी उदासी भर देता है, जो उस शांत संगीत की तरह ही मार्मिक और स्थायी होती है।

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 8

आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा?
Solution: मेरे विचार से फ़ादर कामिल बुल्के ने भारत आने का निर्णय कई कारणों से लिया होगा:
  1. हिंदी साहित्य और भाषा में रुचि: उन्हें हिंदी साहित्य और भाषा के बारे में गहराई से जानने की तीव्र इच्छा रही होगी।
  2. आध्यात्मिक आकर्षण: संभव है कि भारत के संत, ऋषि-मुनि और आध्यात्मिक परंपराओं ने उन्हें आकर्षित किया हो।
  3. भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षण: वे भारत की समृद्ध संस्कृति और जीवन शैली से प्रभावित रहे होंगे और उसे करीब से अनुभव करना चाहते होंगे।
  4. मिशनरी कार्य: एक पादरी के रूप में, वे अपने मिशनरी कार्यों के विस्तार के लिए भी भारत आए हो सकते हैं।
इन सभी कारणों के मिले-जुले प्रभाव से उन्होंने भारत आने का मन बनाया होगा।

प्रश्न 9

'बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि - रेम्सचैपल।' - इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएँ अभिव्यक्त होती हैं? आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं?
Solution: फ़ादर कामिल बुल्के की यह पंक्ति, "बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि - रेम्सचैपल।", उनकी अपनी जन्मभूमि के प्रति गहरी आत्मीयता, प्रेम और लगाव को व्यक्त करती है। यद्यपि उन्होंने भारत को अपना लिया था और यहीं अपना जीवन समर्पित कर दिया था, फिर भी अपनी जन्मभूमि के प्रति उनका स्नेह स्वाभाविक था। यह पंक्ति दर्शाती है कि व्यक्ति चाहे कहीं भी बस जाए, अपनी जन्मभूमि की सुंदरता और स्मृतियाँ हमेशा उसके हृदय में बसी रहती हैं। जहाँ तक मेरी जन्मभूमि का प्रश्न है, मैं भी अपनी जन्मभूमि से बहुत प्रेम करता हूँ। यह वह स्थान है जहाँ मैंने जन्म लिया, जहाँ मेरे परिवार और मित्र हैं, और जहाँ की संस्कृति, भाषा और परिवेश ने मुझे आकार दिया है। मेरी जन्मभूमि मेरे लिए गर्व, पहचान और अपनेपन का स्रोत है। मैं इसकी सुंदरता, इसकी परंपराओं और इसके लोगों के प्रति गहरा लगाव महसूस करता हूँ और इसके विकास और समृद्धि की कामना करता हूँ।

Common mistakes

  • Confusing Father Bulcke's contributions to Hindi with his religious role.
  • Underestimating the depth of his cultural assimilation into India.
  • Misinterpreting the symbolic meanings of literary phrases used to describe him.
  • Failing to connect his personal qualities to his broader impact on Indian society and language.

Revision tips

  • Focus on Father Bulcke's dual identity as a priest and a devoted Indian.
  • Note down his specific contributions to Hindi language and literature.
  • Understand the metaphors used to describe his personality and presence.
  • Reflect on the author's perspective and the overall message of the chapter.
  • Practice explaining his unique image in contrast to traditional ascetics.

Practice MCQs

Q1. फ़ादर बुल्के की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?

Q2. फ़ादर बुल्के ने हिंदी में किस उपाधि के लिए शोध किया?

Q3. लेखक ने फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' क्यों कहा है?

Q4. फ़ादर बुल्के ने किस प्रसिद्ध कृति का हिंदी अनुवाद किया?

Q5. फ़ादर बुल्के की मृत्यु पर 'नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है' का क्या आशय है?

Frequently asked questions

यह पाठ किस बारे में है?

यह पाठ 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' फ़ादर कामिल बुल्के के जीवन, उनके भारतीय संस्कृति और हिंदी भाषा के प्रति प्रेम, और उनके करुणामय व्यक्तित्व पर केंद्रित है।

फ़ादर बुल्के को 'मानवीय करुणा की दिव्य चमक' क्यों कहा गया है?

उन्हें यह उपाधि उनके असीम प्रेम, वात्सल्य और दूसरों के दु:ख दूर करने की उनकी प्रवृत्ति के कारण दी गई है, जो उनके चेहरे पर स्पष्ट झलकती थी।

फ़ादर बुल्के ने हिंदी भाषा के लिए क्या योगदान दिया?

उन्होंने हिंदी में पी.एच.डी. की, एक प्रामाणिक अंग्रेजी-हिंदी कोश तैयार किया, बाइबिल और 'ब्लू-बर्ड' का हिंदी अनुवाद किया, और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रयास किए।

फ़ादर बुल्के की उपस्थिति की तुलना देवदार के वृक्ष से क्यों की गई है?

जैसे देवदार का वृक्ष लंबा, चौड़ा और छायादार होता है, वैसे ही फ़ादर बुल्के का व्यक्तित्व भी था, जो लोगों को आश्रय, शीतलता और शांति प्रदान करता था।

पाठ के अनुसार, फ़ादर बुल्के की मृत्यु पर 'नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि फ़ादर बुल्के के चाहने वालों की संख्या इतनी अधिक थी कि उन सभी को गिनना और उनके दु:ख का वर्णन करना संभव नहीं था, यह स्याही बर्बाद करने जैसा था।

क्या फ़ादर बुल्के पारंपरिक सन्यासियों जैसे थे?

नहीं, फ़ादर बुल्के ने संन्यास लेने के बाद भी अध्ययन जारी रखा, कॉलेज में पढ़ाया और सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लिया, जिससे उनकी छवि पारंपरिक सन्यासियों से अलग थी।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.