CBSE Class 10 Hindi Kshitij Chapter 16: नौबतखाने में इबादत - NCERT Solutions

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This chapter, 'नौबतखाने में इबादत' from the CBSE Class 10 Hindi Kshitij textbook, delves into the life and musical journey of the legendary Shehnai maestro, Ustad Bismillah Khan. Authored by Yatindra Mishra, the chapter explores the significance of Dumraon, Bismillah Khan's birthplace, in the world of Shehnai. It highlights his deep devotion to music, his spiritual connection with the instrument, and his unique perspective on life, faith, and culture. The solutions provided cover key aspects of his life, including his prayers for 'sur' (musical notes), his views on the importance of purity in music over material possessions, and his sorrow over the changing cultural landscape of Kashi. These solutions aim to provide students with a clear understanding of Bismillah Khan's philosophy and his contributions to Indian classical music, aiding in their exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectक्षितिज-2
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter16. यतींद्र मिश्र - नौबतखाने में इबादत

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 16, 'नौबतखाने में इबादत', focuses on the life and musical legacy of Ustad Bismillah Khan. It explains why Dumraon is significant in the context of Shehnai, the meaning of 'Sushir Vadya', and the reasons behind Bismillah Khan being called the 'king of Shehnai'. The solutions also interpret his profound sayings about music and life, his feelings about the cultural changes in Kashi, and his embodiment of a syncretic culture and true humanity. The exercises explore the influences that shaped his musical journey.

Learning outcomes

  • Understand the significance of Dumraon in the context of Shehnai.
  • Explain why Bismillah Khan is considered the 'king of Shehnai'.
  • Interpret the philosophical statements made by Bismillah Khan regarding music and life.
  • Analyze Bismillah Khan's feelings about the cultural transformations in Kashi.
  • Recognize Bismillah Khan as a symbol of composite culture and true humanity.
  • Identify the individuals and events that influenced Bismillah Khan's musical development.

Topics covered

Paper topics

  • Ustad Bismillah Khan's life and musical journey
  • Significance of Dumraon for Shehnai
  • Meaning and types of Sushir Vadya
  • Bismillah Khan's philosophy on music and life
  • Cultural changes in Kashi
  • Composite culture and syncretism
  • Bismillah Khan's devotion and prayers
  • Influences on Bismillah Khan's music
  • The role of Shehnai in Indian culture
  • Yatindra Mishra's writing style

Important topics

  • Bismillah Khan's philosophy on 'sur' and its importance
  • His views on cultural preservation in Kashi
  • His embodiment of composite culture
  • The significance of Dumraon and Shehnai
  • Key individuals and events shaping his musical career

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
Solution: शहनाई की दुनिया में डुमराँव को दो मुख्य कारणों से विशेष रूप से याद किया जाता है। पहला, यह प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्मस्थान है, जिन्होंने शहनाई को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। दूसरा, शहनाई बजाने के लिए जिस विशेष प्रकार की रीड (नरकट) का प्रयोग होता है, वह नरकट नामक घास से बनती है, जो डुमराँव के पास सोन नदी के किनारे बहुतायत में पाई जाती है। इन दोनों कारणों से डुमराँव का शहनाई के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान है।

प्रश्न 2

बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?
Solution:शहनाई को पारंपरिक रूप से मांगलिक अवसरों, जैसे विवाह, पूजा-पाठ और अन्य शुभ समारोहों पर बजाया जाता है, इसलिए इसे 'मंगलध्वनि' का प्रतीक माना जाता है। उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ ने अपने असाधारण शहनाई वादन से इस वाद्य यंत्र को न केवल इन मांगलिक अवसरों की पहचान बनाया, बल्कि इसे शास्त्रीय संगीत के मंच पर भी प्रतिष्ठित किया। उन्होंने 15 अगस्त, 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर भी अपनी शहनाई से समां बांधा। उनके इस उत्कृष्ट योगदान और शहनाई को 'मंगलध्वनि' के पर्याय के रूप में स्थापित करने के कारण ही उन्हें 'शहनाई की मंगलध्वनि का नायक' कहा गया है।

प्रश्न 3

सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है? शहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाह' की उपाधि क्यों दी गई होगी?
Solution:सुषिर-वाद्य उन वाद्य यंत्रों को कहते हैं जिन्हें फूँक मारकर बजाया जाता है, अर्थात जिनमें हवा के प्रवाह से ध्वनि उत्पन्न होती है। इनमें बांसुरी, शहनाई, नागफनी आदि शामिल हैं। शहनाई को 'सुषिर वाद्यों में शाह' (या 'शाहे-नय') की उपाधि इसलिए दी गई होगी क्योंकि यह अन्य सभी फूँक मारकर बजाए जाने वाले वाद्यों में अपनी मधुर ध्वनि, विस्तृत वादन क्षमता और सांस्कृतिक महत्व के कारण सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इसकी ध्वनि अत्यंत कर्णप्रिय और प्रभावशाली होती है, जो इसे अन्य सुषिर वाद्यों से अलग करती है।

प्रश्न 4.1

आशय स्पष्ट कीजिए - 'फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।'
Solution:इस कथन के माध्यम से बिस्मिल्ला खाँ ने सुर (संगीत की शुद्धता और गुणवत्ता) और कपड़े (भौतिक वस्तु, धन-दौलत) के बीच तुलना करते हुए सुर के महत्व को रेखांकित किया है। उनका आशय यह है कि यदि उनका कपड़ा फट जाए तो वह कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि उसे सिलकर ठीक किया जा सकता है। लेकिन, ईश्वर उन्हें 'फटा सुर' (अर्थात बेसुरा या अप्रभावी संगीत) न दे। वे सुर की शुद्धता और उसमें वह 'तासीर' (प्रभाव) चाहते हैं जो श्रोताओं के हृदय को छू सके। यह कथन उनकी संगीत के प्रति गहरी निष्ठा और भौतिकता से अधिक कलात्मकता को महत्व देने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

प्रश्न 4.2

आशय स्पष्ट कीजिए - 'मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।'
Solution:यह कथन बिस्मिल्ला खाँ की संगीत के प्रति गहरी साधना और ईश्वर से उनकी प्रार्थना को व्यक्त करता है। वे ईश्वर से केवल सुर ही नहीं, बल्कि ऐसे 'सच्चे सुर' की प्रार्थना कर रहे हैं जिसमें इतनी शक्ति और प्रभाव (तासीर) हो कि वह श्रोताओं के हृदय को गहराई से स्पर्श कर सके। वे चाहते हैं कि उनके संगीत से निकलने वाले स्वर इतने मार्मिक और भावपूर्ण हों कि सुनने वालों की आँखों से सच्चे मोती के समान अनमोल और स्वाभाविक आँसू बह निकलें। यह उनकी संगीत की उस पराकाष्ठा की कामना है जहाँ संगीत आत्मा से जुड़कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दे।

प्रश्न 5

काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?
Solution:उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ काशी की उन परंपराओं के लुप्त होने से व्यथित थे जो शहर की पहचान थीं। वे इस बात से दुखी थे कि काशी, जो कभी अपने खानपान (जैसे कुलसुम की कचौड़ी और देशी घी की जलेबी) के लिए विख्यात था, अब वैसा नहीं रहा। संगीत, साहित्य और अदब की परंपराओं में भी कमी आ गई थी। सबसे अधिक उन्हें इस बात का दुख था कि काशी का वह पुराना प्यार, भाईचारा और आपसी सम्मान, जो हिन्दू और मुसलमानों के बीच देखने को मिलता था, धीरे-धीरे समाप्त हो रहा था। कलाकारों के बीच भी पहले जैसा सम्मान नहीं रह गया था। इन सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तनों ने उन्हें बहुत आहत किया था।

प्रश्न 6.1

पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि - बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।
Solution:बिस्मिल्ला खाँ को मिली-जुली संस्कृति का प्रतीक मानने के कई प्रसंग पाठ में मिलते हैं। एक ओर, वे एक मुस्लिम धर्म के अनुयायी थे और अपनी पाँचों वक्त की नमाज़ के प्रति पूर्णतः समर्पित थे। मुहर्रम के महीने में वे आठवीं तारीख को खड़े होकर शहनाई बजाते हुए और नौहा बजाते हुए दालमंडी से फातमान तक लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते थे, जो उनके मजहबी लगाव को दर्शाता है। दूसरी ओर, उनकी काशी विश्वनाथ जी और बालाजी मंदिर के प्रति भी अगाध श्रद्धा थी। जब वे काशी से बाहर होते थे, तो विश्वनाथ और बालाजी मंदिर की दिशा की ओर मुँह करके बैठते थे और वहीं से शहनाई बजाना शुरू करते थे। उनका यह कहना कि "काशी छोड़कर कहाँ जाए, गंगा मझ्या यहाँ, बाबा विश्वनाथ यहाँ, बालाजी का मंदिर यहाँ। मरते दम तक न यह शहनाई छूटेगी न काशी।" यह दर्शाता है कि वे अपनी धार्मिक पहचान के साथ-साथ काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी पूरी तरह अपनाते थे, जो उन्हें मिली-जुली संस्कृति का एक सशक्त प्रतीक बनाता है।

प्रश्न 6.2

पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि - वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इनसान थे।
Solution:बिस्मिल्ला खाँ को वास्तविक अर्थों में एक सच्चा इंसान मानने के कई कारण हैं। वे धर्मों के भेद से ऊपर उठकर मानवता, आपसी प्रेम और भाईचारे को सर्वोपरि मानते थे। वे न केवल अपने मुस्लिम धर्म का सम्मान करते थे, बल्कि हिंदू धर्म के प्रति भी गहरी आस्था और सम्मान रखते थे, जैसा कि काशी विश्वनाथ और बालाजी मंदिर के प्रति उनकी श्रद्धा से स्पष्ट है। भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित होने के बावजूद उनमें ज़रा भी घमंड नहीं था, वे सादगीपूर्ण जीवन जीते थे। वे बनावटीपन और दिखावे से कोसों दूर थे। उनके लिए धन-दौलत से ज़्यादा सुर की शुद्धता और उसमें निहित भाव महत्वपूर्ण थे। इन सभी गुणों के कारण वे एक सच्चे और महान इंसान के रूप में प्रतिष्ठित होते हैं।

प्रश्न 7

बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़ी उन घटनाओं और व्यक्तियों का उल्लेख करें जिन्होंने उनकी संगीत साधना को समृद्ध किया?
Solution:उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के संगीत साधना को समृद्ध करने में उनके जीवन की कुछ विशेष घटनाएँ और कुछ व्यक्ति महत्वपूर्ण रहे हैं।
  1. रसूलनबाई और बतूलनबाई: बालाजी मंदिर तक जाने वाले रास्ते में इन गायिका बहनों के यहाँ से ठुमरी, टप्पे और दादरा की आवाज़ें आती थीं। इन गायिका बहनों को सुनकर ही बिस्मिल्ला खाँ के मन में संगीत सीखने की गहरी ललक जागृत हुई।
  2. नाना का शहनाई वादन:जब बिस्मिल्ला खाँ मात्र चार वर्ष के थे, तब वे छुपकर अपने नाना को शहनाई बजाते हुए सुनते थे। उनके नाना के रियाज़ के बाद चले जाने पर, वे अपनी नाना की शहनाई ढूँढते थे और उन्हीं की तरह बजाने का प्रयास करते थे। यह घटना उनकी कम उम्र में ही शहनाई के प्रति उनके गहरे लगाव और अभ्यास की शुरुआत को दर्शाती है।
ये अनुभव और व्यक्ति उनके संगीत के प्रति समर्पण और उसकी गहराई को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुए।

Common mistakes

  • Confusing the literal meaning of 'sur' with its deeper musical and spiritual significance.
  • Underestimating the importance of cultural heritage and its preservation.
  • Failing to connect Bismillah Khan's personal prayers with his artistic aspirations.
  • Not recognizing the blend of religious devotion and artistic pursuit in his life.

Revision tips

  • Focus on understanding Bismillah Khan's core philosophy about music and life, especially his prayers.
  • Pay attention to the specific examples that illustrate his composite cultural identity.
  • Analyze the reasons behind his distress over the changes in Kashi.
  • Connect the individuals mentioned in the text to their influence on his musical journey.
  • Practice explaining his symbolic representation of humanity and syncretic culture.

Practice MCQs

Q1. डुमराँव को शहनाई की दुनिया में क्यों याद किया जाता है?

Q2. बिस्मिल्ला खाँ को 'शहनाई की मंगलध्वनि का नायक' क्यों कहा गया है?

Q3. 'फटा सुर न बख्शें' - इस कथन में बिस्मिल्ला खाँ किस बात पर ज़ोर दे रहे हैं?

Q4. काशी में हो रहे कौन से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?

Q5. बिस्मिल्ला खाँ को 'मिली-जुली संस्कृति का प्रतीक' क्यों कहा गया है?

Frequently asked questions

यह पाठ किस प्रसिद्ध संगीतकार के जीवन पर आधारित है?

यह पाठ प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के जीवन और संगीत साधना पर आधारित है।

डुमराँव का शहनाई के संदर्भ में क्या महत्व है?

डुमराँव को इसलिए याद किया जाता है क्योंकि यह उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्मस्थान है और यहाँ शहनाई बजाने के लिए आवश्यक नरकट नामक घास सोन नदी के किनारे पाई जाती है।

बिस्मिल्ला खाँ ने सुर को कपड़े से अधिक महत्वपूर्ण क्यों माना?

बिस्मिल्ला खाँ का मानना था कि फटा हुआ कपड़ा सिला जा सकता है, लेकिन फटा हुआ सुर कभी ठीक नहीं हो सकता। इसलिए वे सुर की शुद्धता और प्रभावशीलता को अधिक महत्व देते थे।

बिस्मिल्ला खाँ काशी के किन परिवर्तनों से दुखी थे?

वे काशी की पुरानी परंपराओं, जैसे खानपान, संगीत, साहित्य, अदब और आपसी भाईचारे के लुप्त होने से दुखी थे।

बिस्मिल्ला खाँ को 'सच्चा इंसान' क्यों कहा गया है?

उन्हें सच्चा इंसान इसलिए कहा गया है क्योंकि वे धर्मों से ऊपर मानवता, आपसी प्रेम और भाईचारे को महत्व देते थे, उनमें घमंड नहीं था और वे भेदभाव से दूर रहते थे।

इस पाठ के माध्यम से छात्र क्या सीख सकते हैं?

छात्र बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से संगीत के प्रति समर्पण, सादगी, मानवता और मिली-जुली संस्कृति के महत्व के बारे में सीख सकते हैं।

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