कक्षा 10 हिंदी क्षितिज: भदंत आनंद कौसल्यायन - संस्कृति NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 के हिंदी क्षितिज पुस्तक के अध्याय 17, 'संस्कृति' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, जिसे भदंत आनंद कौसल्यायन ने लिखा है। यह समाधान 'सभ्यता' और 'संस्कृति' की अवधारणाओं की गहन पड़ताल करता है, यह बताते हुए कि क्यों उनकी सही समझ अभी तक विकसित नहीं हो पाई है। इसमें आग की खोज जैसे महत्वपूर्ण आविष्कारों के महत्व और प्रेरणाओं पर चर्चा की गई है, साथ ही 'संस्कृत व्यक्ति' की परिभाषा पर भी प्रकाश डाला गया है। समाधान न्यूटन और सुई-धागे के आविष्कार जैसे उदाहरणों का उपयोग करके इन अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं। इसके अतिरिक्त, यह मानव संस्कृति की अविभाज्यता और विभाजनकारी प्रवृत्तियों पर भी विचार करता है, और आत्म-विनाश के साधनों के आविष्कार को संस्कृति या असंस्कृति मानने पर प्रश्न उठाता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए विषय की व्यापक समझ प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectक्षितिज-2
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter17. भदंत आनंद कौसल्यायन - संस्कृति

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी क्षितिज के अध्याय 17 'संस्कृति' के लिए ये NCERT समाधान 'सभ्यता' और 'संस्कृति' के बीच के जटिल संबंधों की पड़ताल करते हैं। यह समाधान आग और सुई-धागे जैसे महत्वपूर्ण आविष्कारों के पीछे की प्रेरणाओं और आवश्यकताओं को स्पष्ट करता है। यह 'संस्कृत व्यक्ति' की अवधारणा को न्यूटन के उदाहरण से समझाता है और मानव संस्कृति की अविभाज्यता पर जोर देता है, साथ ही विभाजनकारी प्रयासों और एकता के प्रमाणों का उल्लेख करता है। अंत में, यह आत्म-विनाशकारी आविष्कारों को संस्कृति मानने के औचित्य पर सवाल उठाता है।

Learning outcomes

  • सभ्यता और संस्कृति के बीच अंतर और संबंध को समझना।
  • आग और सुई-धागे जैसे महत्वपूर्ण आविष्कारों के ऐतिहासिक महत्व का विश्लेषण करना।
  • 'संस्कृत व्यक्ति' की अवधारणा को न्यूटन जैसे उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट करना।
  • मानव संस्कृति की अविभाज्यता और विभाजनकारी प्रवृत्तियों पर विचार करना।
  • आत्म-विनाशकारी आविष्कारों को संस्कृति या असंस्कृति मानने के औचित्य का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • सभ्यता और संस्कृति की अवधारणा
  • आग की खोज का महत्व
  • सुई-धागे के आविष्कार की आवश्यकताएं
  • संस्कृत व्यक्ति की परिभाषा
  • न्यूटन का उदाहरण
  • मानव संस्कृति की अविभाज्यता
  • संस्कृति को विभाजित करने के प्रयास
  • मानव संस्कृति की एकता के प्रमाण
  • आत्म-विनाश के साधनों का आविष्कार
  • संस्कृति बनाम असंस्कृति

Important topics

  • सभ्यता और संस्कृति की अवधारणा
  • आग की खोज का महत्व
  • संस्कृत व्यक्ति की परिभाषा
  • मानव संस्कृति की अविभाज्यता
  • आत्म-विनाश के साधनों का आविष्कार

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखक की दृष्टि में 'सभ्यता' और 'संस्कृति' की सही समझ अब तक क्यों नहीं बन पाई है?
Solution: लेखक के अनुसार, 'सभ्यता' और 'संस्कृति' शब्दों की सही समझ इसलिए नहीं बन पाई है क्योंकि लोग इन शब्दों का प्रयोग मनमाने ढंग से करते हैं। वे अक्सर इन शब्दों के साथ विशेषण जोड़ देते हैं, जैसे 'भौतिक-सभ्यता' या 'आध्यात्मिक-सभ्यता'। इन विशेषणों के प्रयोग से शब्दों का मूल अर्थ अस्पष्ट हो जाता है और उनका वास्तविक स्वरूप समझने में कठिनाई होती है। इसी कारण लेखक इस विषय पर अपनी कोई स्थायी या स्पष्ट राय नहीं बना पाया है।

प्रश्न 2

आग की खोज एक बहुत बड़ी खोज क्यों मानी जाती है? इस खोज के पीछे रही प्रेरणा के मुख्य स्रोत क्या रहे होंगे?
Solution: आग की खोज को एक बहुत बड़ी खोज इसलिए माना जाता है क्योंकि इसने मानव जीवन की कई मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति की। इसके पीछे मुख्य प्रेरणा स्रोत संभवतः निम्नलिखित रहे होंगे:
  1. रोशनी की आवश्यकता: अंधेरे में देखने और रात में भी कार्य करने के लिए रोशनी की जरूरत महसूस हुई होगी।
  2. भोजन की आवश्यकता: कच्चे मांस का स्वाद अच्छा न लगने और उसे पकाकर खाने की इच्छा ने आग की खोज को प्रेरित किया होगा।
  3. सुरक्षा की आवश्यकता: जंगली जानवरों से बचाव और ठण्ड से बचने के लिए आग एक महत्वपूर्ण साधन सिद्ध हुई होगी।
  4. आदिम अवस्था से छुटकारा: मनुष्य की निरंतर कुछ नया करने और बेहतर जीवन जीने की स्वाभाविक प्रवृत्ति भी इस खोज का एक महत्वपूर्ण प्रेरणा स्रोत रही होगी।
इन आवश्यकताओं की पूर्ति के कारण आग की खोज मानव सभ्यता के विकास में एक युगांतरकारी घटना साबित हुई।

प्रश्न 3

वास्तविक अर्थों में 'संस्कृत व्यक्ति' किसे कहा जा सकता है?
Solution: लेखक के अनुसार, वास्तविक अर्थों में 'संस्कृत व्यक्ति' वह है जो अपनी बुद्धि और विवेक का उपयोग करके किसी नए तथ्य का अनुसंधान करता है या किसी नए सिद्धांत का दर्शन करता है। जिस व्यक्ति में ऐसी योग्यता और क्षमता जितनी अधिक मात्रा में होगी, वह व्यक्ति उतना ही अधिक संस्कृत माना जाएगा। उदाहरण के लिए, न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार करके स्वयं को संस्कृत सिद्ध किया। इसी प्रकार, सुई-धागे जैसी महत्वपूर्ण खोज करने वाला व्यक्ति भी संस्कृत व्यक्ति कहलाता है।

प्रश्न 4

न्यूटन को संस्कृत मानव कहने के पीछे कौन से तर्क दिए गए हैं? न्यूटन द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों एवं ज्ञान की कई दूसरी बारीकियों को जानने वाले लोग भी न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकते, क्यों?
Solution: न्यूटन को संस्कृत मानव कहने का मुख्य तर्क यह है कि उन्होंने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का आविष्कार करके मानव ज्ञान में एक मौलिक वृद्धि की। उन्होंने प्रकृति के एक रहस्य को अपनी बुद्धि और अनुसंधान से उजागर किया।

इसके विपरीत, न्यूटन द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों और ज्ञान की बारीकियों को जानने वाले लोग, जैसे कि आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी, न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकते क्योंकि वे केवल न्यूटन द्वारा दिए गए ज्ञान को बढ़ा रहे हैं या उसका अध्ययन कर रहे हैं। वे स्वयं किसी नए मौलिक सिद्धांत का आविष्कार नहीं कर रहे हैं। वे न्यूटन के ज्ञान के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए वे न्यूटन से अधिक 'सभ्य' (अर्थात, अधिक जानकार) तो हो सकते हैं, लेकिन 'संस्कृत' नहीं, क्योंकि 'संस्कृति' का संबंध मौलिक अनुसंधान और सृजन से है।

प्रश्न 5

किन महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सुई-धागे का आविष्कार हुआ होगा?
Solution: सुई-धागे के आविष्कार के पीछे संभवतः निम्नलिखित महत्वपूर्ण आवश्यकताएँ रही होंगी:
  1. शरीर को ढकना और सुरक्षा: कपड़ों को सिलकर शरीर को ढकने और विभिन्न मौसमों की मार से बचाने के लिए, विशेषकर ठंड से बचाव के लिए, सुई-धागे की आवश्यकता महसूस हुई होगी।
  2. सजावट और सौंदर्य: आवश्यकतानुसार शरीर को सजाने और परिधानों को आकर्षक बनाने के लिए भी कपड़ों को जोड़ने और डिजाइन करने हेतु सुई-धागे का आविष्कार हुआ होगा।
  3. वस्त्रों की मजबूती: दो या अधिक कपड़ों के टुकड़ों को मजबूती से एक साथ जोड़ने के लिए ताकि वे आसानी से फटें नहीं, सुई-धागे का उपयोग आवश्यक रहा होगा।
इस प्रकार, सुई-धागे का आविष्कार मानव की बुनियादी ज़रूरतों और सौंदर्य बोध दोनों की पूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।

प्रश्न 6.1

मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है। किन्हीं दो प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जब मानव संस्कृति को विभाजित करने की चेष्टाएँ की गई।
Solution: पाठ के अनुसार, मानव संस्कृति को विभाजित करने की चेष्टाएँ निम्नलिखित दो प्रमुख प्रसंगों में की गई हैं:
  1. वर्ण व्यवस्था के आधार पर: प्राचीन काल से ही समाज को विभिन्न वर्णों में विभाजित किया गया है, जिसके आधार पर लोगों के बीच भेदभाव किया जाता रहा है। यह विभाजन मानव संस्कृति की एकता को खंडित करता है।
  2. धर्म के आधार पर: धर्म के नाम पर भी मानव संस्कृति को विभाजित करने के अनेक प्रयास हुए हैं। इसका एक ज्वलंत उदाहरण भारत और पाकिस्तान का विभाजन है, जो धार्मिक आधार पर हुआ था। इस तरह के विभाजन मानव को आपस में बाँटते हैं और उनकी साझा संस्कृति को कमजोर करते हैं।

प्रश्न 6.2

मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है। किन्हीं दो प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जब मानव संस्कृति ने अपने एक होने का प्रमाण दिया।
Solution: मानव संस्कृति ने अपने एक होने का प्रमाण कई अवसरों पर दिया है, जिनमें से दो प्रमुख प्रसंग निम्नलिखित हैं:
  1. मानव कल्याण के लिए त्याग: जब व्यक्तियों ने अपने व्यक्तिगत सुख-आराम को त्यागकर समस्त मानव जाति के कल्याण के लिए कार्य किया हो। उदाहरण के लिए, कार्ल मार्क्स ने मजदूरों की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, और सिद्धार्थ (बुद्ध) ने मानव कल्याण के लिए अपना राजसी जीवन त्याग दिया।
  2. सामूहिक विरोध और समर्थन: जब किसी घटना पर समस्त मानव समाज ने एक साथ प्रतिक्रिया व्यक्त की हो। जैसे, जापान पर परमाणु बम गिराए जाने की घटना का सम्पूर्ण विश्व ने विरोध किया। इसी प्रकार, सांप्रदायिक हिंसा का भी पूरा विश्व विरोध करता है और धर्म-संबंधी भेदभाव को भुलाकर एक-दूसरे की अच्छी बातों को स्वीकार करता है, जो मानव संस्कृति की एकता को दर्शाता है।

प्रश्न 7

आशय स्पष्ट कीजिए - मानव की जो योग्यता उससे आत्म-विनाश के साधनों का आविष्कार कराती है, हम उसे उसकी संस्कृति कहें या असंस्कृति?
Solution: इस कथन का आशय यह है कि मानव की आविष्कार करने की योग्यता एक दोधारी तलवार की तरह है। जब यह योग्यता मानव हित, कल्याण और प्रगति के लिए उपयोग होती है, तो उसे 'संस्कृति' कहा जाता है। उदाहरण के लिए, चिकित्सा के क्षेत्र में हुए आविष्कार मानव जीवन को बचाते हैं और उसे बेहतर बनाते हैं।

लेकिन, जब यही आविष्कारक योग्यता विनाशकारी साधनों, जैसे कि हथियार या परमाणु बम, के निर्माण में प्रयोग होती है, तो यह मानव के आत्म-विनाश का कारण बनती है। ऐसी विनाशकारी प्रवृत्तियों को 'संस्कृति' नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह 'असंस्कृति' का प्रतीक है। इसलिए, लेखक प्रश्न करता है कि क्या हमें ऐसी विनाशकारी योग्यताओं को संस्कृति का नाम देना चाहिए या असंस्कृति का। स्पष्ट रूप से, विनाश के साधनों का आविष्कार संस्कृति नहीं, बल्कि असंस्कृति है।

प्रश्न 8

लेखक ने अपने दृष्टिकोण से सभ्यता और संस्कृति की एक परिभाषा दी है। आप सभ्यता और संस्कृति के बारे में क्या सोचते हैं, लिखिए।
Solution: लेखक के अनुसार, सभ्यता और संस्कृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं, लेकिन वे एक नहीं हैं। जहाँ संस्कृति को एक विचार, चिंतन और कलात्मक सृजन के रूप में देखा जा सकता है जो जीवन को समृद्ध बनाता है, वहीं सभ्यता को जीवन जीने की कला, रहन-सहन के तरीके और भौतिक प्रगति के रूप में समझा जा सकता है।

मेरी समझ में, संस्कृति वह आंतरिक मूल्य, ज्ञान, कला और नैतिकता है जो मनुष्य को मनुष्य बनाती है और उसके जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यह व्यक्ति के विचारों, भावनाओं और रचनात्मकता का परिचायक है। दूसरी ओर, सभ्यता वह बाहरी ढाँचा है जो इन सांस्कृतिक मूल्यों को व्यवहार में लाता है। इसमें सामाजिक व्यवस्था, तकनीकी विकास, वैज्ञानिक प्रगति और जीवन की सुविधाएँ शामिल हैं। एक उन्नत सभ्यता के लिए एक समृद्ध संस्कृति का होना आवश्यक है, और संस्कृति को व्यक्त करने के लिए सभ्यता एक माध्यम प्रदान करती है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं; केवल भौतिक प्रगति (सभ्यता) बिना आंतरिक मूल्यों (संस्कृति) के खोखली हो सकती है, और केवल विचार (संस्कृति) बिना व्यवहार (सभ्यता) के अप्रभावी रह सकते हैं।

Common mistakes

  • सभ्यता और संस्कृति के बीच सूक्ष्म अंतर को समझने में भ्रमित होना।
  • आविष्कारों के पीछे की प्रेरणाओं को सतही तौर पर समझना।
  • संस्कृति को केवल भौतिक प्रगति तक सीमित मानना।
  • मानव संस्कृति की अविभाज्यता के तर्कों को नजरअंदाज करना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए तर्कों और उदाहरणों को ध्यान से पढ़ें।
  • सभ्यता और संस्कृति से संबंधित मुख्य अवधारणाओं को अपनी भाषा में लिखें।
  • आविष्कारों के महत्व और उनके पीछे की प्रेरणाओं को सूचीबद्ध करें।
  • मानव संस्कृति की एकता और विभाजन के उदाहरणों को याद करें।

Practice MCQs

Q1. लेखक की दृष्टि में 'सभ्यता' और 'संस्कृति' की सही समझ क्यों नहीं बन पाई है?

Q2. आग की खोज का एक संभावित प्रेरणा स्रोत क्या रहा होगा?

Q3. लेखक के अनुसार 'संस्कृत व्यक्ति' किसे कहा जा सकता है?

Q4. सुई-धागे के आविष्कार का एक मुख्य उद्देश्य क्या रहा होगा?

Q5. वर्ण व्यवस्था के आधार पर मानव संस्कृति को विभाजित करने की चेष्टा किस प्रकार की है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 के लिए 'संस्कृति' अध्याय के NCERT समाधान क्यों महत्वपूर्ण हैं?

ये समाधान छात्रों को 'सभ्यता' और 'संस्कृति' जैसी जटिल अवधारणाओं को समझने में मदद करते हैं, साथ ही महत्वपूर्ण आविष्कारों और मानव संस्कृति की प्रकृति पर लेखक के विचारों को स्पष्ट करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक है।

लेखक के अनुसार 'संस्कृत व्यक्ति' की क्या विशेषताएँ हैं?

लेखक के अनुसार, संस्कृत व्यक्ति वह है जो अपनी बुद्धि और विवेक का उपयोग करके किसी नए तथ्य का अनुसंधान या दर्शन करता है। उसकी योग्यता जितनी अधिक होगी, वह उतना ही अधिक संस्कृत कहलाएगा।

आग की खोज को एक बड़ी खोज क्यों माना जाता है?

आग की खोज को इसलिए एक बड़ी खोज माना जाता है क्योंकि इसने मनुष्य की कई मूलभूत आवश्यकताओं जैसे रोशनी, भोजन पकाने, ठंड से बचाव और जंगली जानवरों से सुरक्षा की पूर्ति की, जिससे उसके जीवन स्तर में अभूतपूर्व सुधार हुआ।

क्या सभ्यता और संस्कृति एक ही हैं?

नहीं, लेखक के अनुसार ये दोनों जुड़े हुए हैं लेकिन एक नहीं हैं। संस्कृति जहाँ जीवन का चिंतन और सृजन है, वहीं सभ्यता जीवन जीने की कला और रहन-सहन का तरीका है।

मानव संस्कृति को विभाजित करने के कौन से दो प्रसंग पाठ में बताए गए हैं?

पाठ में मानव संस्कृति को विभाजित करने के दो प्रसंग बताए गए हैं: वर्ण व्यवस्था के नाम पर और धर्म के नाम पर, जिसका उदाहरण भारत और पाकिस्तान का विभाजन है।

यह समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को विस्तृत और स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का सटीक उत्तर देने में सहायता मिलती है।

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