CBSE Class 10 Hindi Kshitij Chapter 5: Suryakant Tripathi - Utsah, At Nahi Rahi Hai NCERT Solutions

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This section provides detailed NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij, Chapter 5, featuring poems by Suryakant Tripathi 'Nirala': 'Utsah' and 'At Nahi Rahi Hai'. The solutions delve into the symbolism of clouds as agents of change and revolution in 'Utsah', explaining why the poet urges them to 'roar' rather than just shower. It also explores the vibrant imagery and the overwhelming beauty of spring (Phagun) in 'At Nahi Rahi Hai', where nature's exuberance is so profound it 'cannot be contained'. These solutions break down the poetic devices, themes, and underlying messages, offering clear explanations for each question. They are designed to help students grasp the nuances of Nirala's poetry, understand the significance of natural elements as metaphors, and prepare effectively for their Hindi examinations by clarifying complex ideas and poetic expressions.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectक्षितिज-2
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. सूर्यकांत त्रिपाठी निरला - उत्साह, अट नहीं रही ह

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 5 covers Suryakant Tripathi 'Nirala's' poems 'Utsah' and 'At Nahi Rahi Hai'. The solutions explain the symbolic meaning of clouds as harbingers of change and revolution in 'Utsah', and the overwhelming, all-pervading beauty of spring in 'At Nahi Rahi Hai'. They focus on understanding poetic language, imagery, and the connection between nature and human emotions, aiding students in comprehending and analyzing these significant poems.

Learning outcomes

  • Understand the symbolism of clouds as agents of change and revolution.
  • Analyze the use of sound devices (Nad-Saundarya) in poetry.
  • Explain the theme of nature's overwhelming beauty in 'At Nahi Rahi Hai'.
  • Identify the connection between inner feelings and external nature.
  • Appreciate the poetic expression of Suryakant Tripathi 'Nirala'.

Topics covered

Paper topics

  • Symbolism of Clouds in 'Utsah'
  • Theme of Revolution and Change
  • Sound Devices in Poetry (Nad-Saundarya)
  • Description of Spring (Phagun) in 'At Nahi Rahi Hai'
  • Nature's Beauty and its Effect on Human Emotion
  • Interplay of Inner Feelings and External Nature
  • Poetic Devices
  • Analysis of Suryakant Tripathi 'Nirala's' Poetry

Important topics

  • Symbolism of Clouds as Revolution
  • The concept of 'Utsah' (Enthusiasm) in the poem
  • Nature's overwhelming beauty in 'At Nahi Rahi Hai'
  • Connection between nature and human emotions
  • Sound devices and their impact

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Questions and Solutions

Question 1

कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर 'गरजने' के लिए क्यों कहता है?
Solution: कवि ने बादलों से फुहार डालने, रिमझिम करने या केवल बरसने के लिए नहीं कहा है, बल्कि उन्हें 'गरजने' के लिए प्रेरित किया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कवि बादलों को केवल जल बरसाने वाले के रूप में नहीं, बल्कि क्रांति और परिवर्तन लाने वाले एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में देखता है। 'गरजना' शब्द विद्रोह, शक्ति और एक नई शुरुआत का सूचक है। कवि चाहता है कि बादल अपनी पूरी शक्ति का प्रदर्शन करें और लोगों के मन में सोई हुई चेतना को झकझोर कर एक नया, विद्रोही भाव जगाएं, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सके। इस प्रकार, गर्जना के माध्यम से कवि एक नवीन विद्रोह का आह्वान कर रहा है।

Question 2

कविता का शीर्षक 'उत्साह' क्यों रखा गया है?
Solution: कविता का शीर्षक 'उत्साह' इसलिए रखा गया है क्योंकि यह कविता लोगों को क्रांति लाने और परिवर्तन स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती है। कवि बादलों की भयंकर गर्जना और उनकी संसार के ताप को हरने वाली शक्ति से प्रेरणा लेता है। वह चाहता है कि मनुष्य के मन में भी ऐसी ही गति, ऐसी ही भावना और शक्ति हो। बादलों का गरजना लोगों के मन में एक नई ऊर्जा और उत्साह भर देता है, जो उन्हें निष्क्रियता से निकालकर सक्रियता की ओर ले जाता है। यह शीर्षक कविता के मूल भाव को दर्शाता है, जो कि नव-चेतना और परिवर्तन के लिए उत्साह जगाना है।

Question 3

कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?
Solution: 'उत्साह' कविता में बादल कई महत्वपूर्ण अर्थों की ओर संकेत करता है:
  1. जल बरसाने वाला शक्तिस्वरूप: बादल का सबसे प्रत्यक्ष अर्थ है कि वह जल बरसाने वाली एक प्राकृतिक शक्ति है।
  2. पीड़ितों के लिए राहत: बादल प्यासी धरती और पीड़ित, प्यासे लोगों के लिए शीतलता और जीवनदायिनी वर्षा लाता है, जो उनकी पीड़ा को कम करता है।
  3. परिवर्तन और क्रांति का प्रतीक: बादल शोषितों और पीड़ितों के मन में नई चेतना और परिवर्तन लाने के लिए उत्साह भरता है। उसकी गर्जना अन्याय के विरुद्ध विद्रोह का आह्वान करती है।
  4. नव-जीवन का संचार: बादल आकर धरती की प्यास बुझाता है और चारों ओर नव-जीवन का संचार करता है।
इस प्रकार, बादल केवल वर्षा करने वाला तत्व नहीं, बल्कि शक्ति, राहत, परिवर्तन और नव-जीवन का प्रतीक है।

Question 4

शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। 'उत्साह' कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।
Solution: नाद-सौंदर्य कविता में ध्वनि के माध्यम से एक विशेष प्रभाव उत्पन्न करता है। 'उत्साह' कविता में निम्नलिखित पंक्तियों में नाद-सौंदर्य स्पष्ट रूप से मौजूद है:
  1. "घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!" - यहाँ 'घेर घेर घोर' शब्दों का बार-बार प्रयोग बादलों के घिरने और छा जाने के दृश्य को एक गंभीर और प्रभावशाली ध्वनि प्रदान करता है।
  2. "ललित ललित, काले घुँघराले," - 'ललित ललित' शब्द की पुनरावृत्ति बादलों की सुंदरता और कोमलता को दर्शाती है, जिससे एक मधुर ध्वनि उत्पन्न होती है।
  3. "बाल कल्पना के-से पाले" - यह पंक्ति भी बादलों के कोमल और मनमोहक रूप को ध्वनि के माध्यम से प्रस्तुत करती है।
  4. "विद्युत-छवि उर में" - यहाँ 'विद्युत' शब्द बिजली की चमक की ध्वनि और दृश्य का बोध कराता है, जो कविता में एक नाटकीय प्रभाव जोड़ता है।
इन शब्दों के प्रयोग से कविता में एक संगीतात्मकता और प्रभावशीलता आती है।

Question 5

जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।
Solution:

प्रकृति के सौंदर्य को देखकर मेरे मन में भी कुछ ऐसी ही भावनाएँ उमड़ती हैं, जिन्हें मैं कविता के रूप में व्यक्त करने का प्रयास कर रहा हूँ:

नील गगन में छाए घनश्याम,

मन में जागी आशा का नाम।

रिमझिम बूँदें जब गिरती हैं,

सूखी धरती प्यास हरती है।

मोर भी पंख फैलाए नाचे,

मन का उल्लास यूँ ही बाँचे।

किसान के चेहरे पर मुस्कान,

फसल की आस में है जान।

प्रकृति का यह रूप मन को भाए,

हर ओर खुशी बिखराए।

जैसे बादल लाते हैं बहार,

वैसे ही मन में भावों की फुहार।

Question 1

छायावाद की एक खास विशेषता है अन्तर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है? लिखिए।
Solution: छायावाद की यह विशेषता कि अन्तर्मन के भावों का बाहरी दुनिया से सामंजस्य बिठाया जाता है, 'अट नहीं रही है' कविता की निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर पुष्ट होती है:

"आभा फागुन की तन सट नहीं रही है। और कहीं साँस लेते हो, घर घर भर देते हो, उड़ने को नभ में तुम, पर पर कर देते हो।"

इन पंक्तियों में कवि फागुन के महीने की मादकता और सुंदरता का वर्णन कर रहा है। 'आभा फागुन की तन सट नहीं रही है' का अर्थ है कि फागुन का सौंदर्य इतना अधिक है कि वह समा नहीं पा रहा है। 'घर घर भर देते हो' पंक्ति केवल वातावरण में सुगंध फैलाने वाले फूलों की ओर ही संकेत नहीं करती, बल्कि यह मानव मन में उल्लास और खुशी के भर जाने का भी भाव व्यक्त करती है। इसी प्रकार, 'उड़ने को नभ में तुम, पर पर कर देते हो' केवल पक्षियों के उड़ने की स्वतंत्रता का वर्णन नहीं है, बल्कि यह मानव मन की उमंग और स्वतंत्रता से उड़ने की चाह को भी दर्शाता है। इस प्रकार, बाहरी प्रकृति का वर्णन कवि के अन्तर्मन की भावनाओं और इच्छाओं से जुड़ जाता है।

Question 2

कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
Solution: कवि की आँखें फागुन की सुंदरता से इसलिए नहीं हट रही हैं क्योंकि फागुन का महीना अत्यंत मनमोहक और मादक होता है। इस समय प्रकृति अपने पूरे यौवन पर होती है। चारों ओर रंग-बिरंगे फूल खिले होते हैं, हवाएँ सुगंधित होती हैं और वातावरण में एक अद्भुत उल्लास छाया रहता है। फागुन का यह अनुपम सौंदर्य कवि को मंत्रमुग्ध कर देता है। वह इस प्राकृतिक छटा में इतना खो गया है कि उसकी आँखें चाहकर भी इस मनमोहक दृश्य से हट नहीं पातीं। यह सौंदर्य कवि के मन को पूरी तरह से आकर्षित और प्रसन्न कर रहा है।

Question 3

प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?
Solution: प्रस्तुत कविता 'अट नहीं रही है' में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' ने फागुन के सर्वव्यापी और असीम सौंदर्य का वर्णन कई रूपों में किया है:
  1. सर्वत्र व्याप्त सौंदर्य: कवि कहता है कि फागुन का सौंदर्य इतना अधिक है कि वह कहीं भी समा नहीं पा रहा है ('अट नहीं रही है')। यह सौंदर्य हर जगह फैला हुआ है।
  2. सुगंध और उल्लास का प्रसार: 'घर घर भर देते हो' पंक्ति के माध्यम से कवि बताता है कि फागुन में खिले फूल अपनी सुगंध से पूरे वातावरण को भर देते हैं, जिससे हर घर में उल्लास का संचार होता है। यह केवल भौतिक सुगंध नहीं, बल्कि मन की प्रसन्नता का भी प्रतीक है।
  3. स्वतंत्रता और उड़ान की भावना: 'उड़ने को नभ में तुम, पर पर कर देते हो' पंक्ति प्रकृति की व्यापकता को दर्शाती है। यह न केवल पक्षियों को उड़ने के लिए खुला आकाश देती है, बल्कि मानव मन की भी उड़ान भरने की, स्वतंत्र होने की इच्छा को जागृत करती है।
  4. असीम विस्तार: कवि की आँखें फागुन के सौंदर्य से इसलिए नहीं हट पातीं क्योंकि यह सौंदर्य इतना व्यापक और विस्तृत है कि उसे एक जगह समेटना या उससे नजरें हटाना संभव नहीं है।
इस प्रकार, कवि ने प्रकृति की व्यापकता को उसके कण-कण में व्याप्त सौंदर्य, सुगंध, उल्लास और स्वतंत्रता की भावना के रूप में चित्रित किया है।

Common mistakes

  • Confusing the literal meaning of 'garjana' (roaring) with gentle rain.
  • Overlooking the revolutionary undertones in 'Utsah'.
  • Failing to connect the description of nature's beauty with the poet's inner feelings.
  • Misinterpreting the phrase 'At Nahi Rahi Hai' as a simple statement of containment.

Revision tips

  • Focus on the symbolic meanings of clouds and spring.
  • Pay attention to the sound devices mentioned in the solutions.
  • Relate the poems' themes to broader concepts of change and beauty.
  • Practice explaining the connection between nature and human emotions as shown in the solutions.

Practice MCQs

Q1. कविता 'उत्साह' में कवि बादल से फुहार या रिमझिम के स्थान पर 'गरजने' के लिए क्यों कहता है?

Q2. कविता 'उत्साह' का शीर्षक 'उत्साह' क्यों रखा गया है?

Q3. कविता 'उत्साह' में बादल किसका प्रतीक है?

Q4. कविता 'अट नहीं रही है' में 'घर घर भर देते हो' पंक्ति किस ओर संकेत करती है?

Q5. छायावाद की किस विशेषता का सामंजस्य 'अट नहीं रही है' कविता की पंक्तियों में दिखता है?

Frequently asked questions

What is the main theme of the poem 'Utsah'?

The main theme of 'Utsah' is the call for change and revolution, symbolized by the roaring clouds that inspire enthusiasm and action.

Why does the poet ask the clouds to 'roar' in 'Utsah'?

The poet asks the clouds to 'roar' because roaring is a symbol of rebellion and power, signifying a call to awaken and bring about change, rather than just a gentle shower.

What does the poem 'At Nahi Rahi Hai' describe?

'At Nahi Rahi Hai' describes the overwhelming and all-pervading beauty of the spring season (Phagun), which is so profound that it cannot be contained.

How does 'At Nahi Rahi Hai' show the connection between nature and human feelings?

The poem connects the vibrant beauty of spring with the exhilaration and joy felt by humans, suggesting that nature's splendor resonates deeply within the human heart.

What is 'Nad-Saundarya' (sound beauty) in poetry?

'Nad-Saundarya' refers to the use of words and sounds that create a special auditory effect or musicality within a poem, enhancing its emotional impact.

Which poetic characteristic of Chhayavad is evident in 'At Nahi Rahi Hai'?

The characteristic of Chhayavad evident in 'At Nahi Rahi Hai' is the harmonization of inner feelings with the external world, where nature's beauty reflects and amplifies human emotions.

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