कक्षा 10 हिंदी क्षितिज: जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी क्षितिज पुस्तक के अध्याय 4, 'आत्मकथ्य' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है, जिसे जयशंकर प्रसाद ने लिखा है। समाधानों में कवि द्वारा आत्मकथा लिखने से बचने के कारणों, 'अभी समय भी नहीं' कहने के पीछे के आशय, और 'पाथेय' के रूप में स्मृति के महत्व की व्याख्या की गई है। इसमें कविता की काव्यभाषा की विशेषताओं, जैसे खड़ी बोली का प्रयोग, बिंबों की सजीवता, नवीन शब्दों का प्रयोग, मानवीकरण अलंकार और अन्य अलंकारों के उदाहरणों पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को कविता के गहन अर्थ को समझने, भावार्थ स्पष्ट करने और काव्य-सौंदर्य की सराहना करने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectक्षितिज-2
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. जयशंकर प्रसाद - आत्मकथ्य

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी क्षितिज के अध्याय 4 'आत्मकथ्य' के ये NCERT समाधान कवि जयशंकर प्रसाद की आत्मकथा लिखने की अनिच्छा के कारणों पर केंद्रित हैं। समाधानों में कवि के व्यक्तिगत अनुभवों, स्मृतियों को सहारा बनाने की भावना, और सुख के अधूरे सपनों का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, कविता में प्रयुक्त खड़ी बोली, बिंब योजना, नवीन शब्दावली, मानवीकरण और अन्य अलंकारों जैसी काव्यभाषा की विशेषताओं को उदाहरण सहित समझाया गया है। यह छात्रों को कविता के मूल भाव और साहित्यिक तत्वों को समझने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • कवि द्वारा आत्मकथा लिखने से बचने के कारणों को समझना।
  • स्मृति को 'पाथेय' बनाने के कवि के आशय का विश्लेषण करना।
  • 'अभी समय भी नहीं' कहने के पीछे के कवि के भावों को स्पष्ट करना।
  • कविता में व्यक्त सुख के अधूरे सपनों की अभिव्यक्ति को समझना।
  • 'आत्मकथ्य' कविता की काव्यभाषा की विशेषताओं को उदाहरण सहित पहचानना।
  • कविता में प्रयुक्त अलंकारों और बिंबों का विश्लेषण करना।

Topics covered

Paper topics

  • आत्मकथा लिखने से कवि की अनिच्छा
  • कवि के जीवन के अनुभव
  • स्मृति का महत्व
  • सुख के अधूरे सपने
  • काव्यभाषा की विशेषताएँ
  • खड़ी बोली का प्रयोग
  • बिंब योजना
  • नवीन शब्दावली
  • मानवीकरण अलंकार
  • अन्य अलंकार (पुनरुक्ति, रूपक, अनुप्रास)
  • छायावादी काव्य प्रवृत्तियाँ
  • भावार्थ स्पष्टीकरण

Important topics

  • कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?
  • स्मृति को 'पाथेय' बनाने का आशय।
  • 'उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की' का भावार्थ।
  • 'आत्मकथ्य' कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ।
  • कविता में व्यक्त कवि के व्यक्तिगत अनुभव और भाव।

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है ?
Solution: कवि आत्मकथा लिखने से इसलिए बचना चाहता है क्योंकि वह अपने जीवन की दुर्बलताओं, कमियों और कष्टों का उल्लेख करके स्वयं का उपहास नहीं उड़ाना चाहता। उसे लगता है कि आत्मकथा लिखने के लिए अपने व्यक्तिगत अनुभवों, विशेषकर दुखद घटनाओं और असफलताओं को सार्वजनिक करना पड़ेगा, जो उसे उचित नहीं लगता। वह अपनी सरलता के कारण खाए धोखे और जीवन की पीड़ादायक स्मृतियों को फिर से याद करके दुखी नहीं होना चाहता और न ही उन्हें दूसरों के सामने प्रस्तुत कर उपहास का पात्र बनना चाहता है।

प्रश्न 2

आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में 'अभी समय भी नहीं' कवि ऐसा क्यों कहता है ?
Solution: कवि 'अभी समय भी नहीं' कहकर यह व्यक्त करना चाहता है कि उसके जीवन में अभी ऐसी कोई बड़ी उपलब्धि या प्रेरणादायक घटना नहीं घटी है जिसे वह दूसरों को सुना सके। उसका जीवन दुखों और अभावों से भरा रहा है, और वह उन पुरानी वेदनाओं को फिर से कुरेदकर दुखी नहीं होना चाहता। उसे लगता है कि आत्मकथा लिखने और सुनाने का यह उचित समय नहीं है, क्योंकि वह अपने जीवन के अनुभवों को अभी सार्वजनिक करने के लिए तैयार नहीं है।

प्रश्न 3

स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का क्या आशय है ?
Solution: 'पाथेय' का अर्थ होता है रास्ते के लिए भोजन या सहारा। कवि का 'स्मृति को पाथेय बनाने' से आशय है कि वह अपने जीवन की सुखद स्मृतियों को ही अपने जीने का सहारा बनाना चाहता है। चूँकि उसका जीवन दुखों और अभावों से भरा रहा है और उसकी प्रेयसी भी उससे दूर हो गई है, इसलिए वह केवल मधुर स्मृतियों के सहारे ही आगे बढ़ना चाहता है। ये स्मृतियाँ उसे जीवन की कठिनाइयों में बल प्रदान करेंगी।

प्रश्न 4.1

भाव स्पष्ट कीजिए - मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया। आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।
Solution: इस पंक्ति के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि उसने जीवन में जिस सुख की कल्पना की थी या जिसका स्वप्न देखा था, वह उसे कभी प्राप्त नहीं हुआ। वह सुख उसके पास आते-आते, मानो आलिंगन में समाने ही वाला था कि मुस्कुराकर दूर भाग गया। कवि का आशय है कि जीवन में सुख क्षणभंगुर होता है और उसकी प्राप्ति एक स्वप्न के समान ही है, जो जागने पर समाप्त हो जाता है। उसे कभी भी पूर्ण सुख की अनुभूति नहीं हुई।

प्रश्न 4.2

भाव स्पष्ट कीजिए - जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में। अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।
Solution: कवि यहाँ अपनी प्रेयसी के अनुपम सौंदर्य का वर्णन कर रहा है। वह कहता है कि उसकी प्रेयसी के लालिमा युक्त गालों की सुंदर छाया इतनी मनमोहक थी कि प्रेममयी भोर (उषा) भी अपनी लाली और मधुरता उसी से ग्रहण करती थी। कवि का कहने का तात्पर्य है कि प्रेयसी का सौंदर्य इतना अधिक था कि भोर की प्राकृतिक सुंदरता भी उसके सामने फीकी थी और वह उसी से प्रेरणा लेती थी।

प्रश्न 5

'उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की' - कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
Solution: इस कथन के माध्यम से कवि यह व्यक्त करना चाहता है कि उसने अपनी प्रेयसी के साथ चाँदनी रातों में जो अत्यंत सुखद और मधुर क्षण बिताए थे, वे इतने पवित्र और निजी हैं कि उन्हें सबके सामने 'उज्ज्वल गाथा' के रूप में प्रस्तुत करना उसे उचित नहीं लगता। वह नहीं चाहता कि लोग उन व्यक्तिगत और मधुर स्मृतियों को सुनें और उसका उपहास करें या उसे किसी प्रकार की पीड़ा हो। इसलिए, वह उन स्मृतियों को अपने तक ही सीमित रखना चाहता है।

प्रश्न 6

'आत्मकथ्य' कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।
Solution: 'आत्मकथ्य' कविता की काव्यभाषा की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
  1. खड़ी बोली का प्रयोग: कवि ने कविता में परिष्कृत खड़ी बोली का प्रयोग किया है, जो इसे आधुनिकता प्रदान करती है। उदाहरण: "यह लो, करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य-मलिन उपहास।"
  2. सजीव बिंबों का प्रयोग: कवि ने अपने मनोभावों को सजीव बनाने के लिए सुंदर और नवीन बिंबों का प्रयोग किया है। उदाहरण: "जिसके अरुण-कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में। अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।"
  3. नवीन और उपयुक्त शब्दावली: कवि ने भावों की गहराई को व्यक्त करने के लिए 'विडंबना', 'प्रवंचना' जैसे नवीन और सटीक शब्दों का प्रयोग किया है, जिससे काव्य सौंदर्य बढ़ा है। उदाहरण: "यह विडंबना ! अरी सरलते तेरी हँसी उड़ाऊँ मैं।"
  4. मानवीकरण अलंकार: छायावाद की प्रमुख विशेषता के रूप में, कवि ने निर्जीव या अमानवीय तत्वों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया है। उदाहरण: "थकी सोई है मेरी मौन व्यथा।" या "अरी सरलता तेरी हँसी उडाऊँ मैं।"
  5. अलंकारों का कुशल प्रयोग: कविता में विभिन्न अलंकारों का प्रयोग करके उसे और अधिक प्रभावशाली बनाया गया है। उदाहरण:
    • पुनरुक्ति अलंकार: "खिल-खिलाकर, आते-आते"
    • रूपक अलंकार: "अरुण-कपोलों" (लाल कपोलों को अरुण का रूप दिया गया है)
    • अनुप्रास अलंकार: "मेरी मौन, अनुरागी उषा"

प्रश्न 7

कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है ?
Solution: कवि ने जिस सुख का स्वप्न देखा था, उसे उसने अपनी प्रेयसी के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। कवि बताता है कि वह सुख उसके पास 'आलिंगन में आते-आते' ही था, परन्तु वह सुख (प्रेयसी) मुस्कुराकर भाग गया। इसका अर्थ यह है कि कवि जिस पूर्ण सुख या प्रेम की अभिलाषा रखता था, वह उसे कभी प्राप्त नहीं हुआ। वह सुख उसके जीवन में एक स्वप्न की तरह आया और आते ही समाप्त हो गया, जिससे उसका जीवन सुख से वंचित ही रह गया।

Common mistakes

  • आत्मकथा लिखने से कवि की अनिच्छा के कारणों को सतही तौर पर समझना।
  • स्मृति को केवल याद के रूप में देखना, न कि जीवन के सहारे के रूप में।
  • काव्यभाषा की विशेषताओं को उदाहरणों से न जोड़ पाना।
  • भावार्थ स्पष्ट करते समय मूल भाव से भटक जाना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को कवि के दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करें।
  • काव्यभाषा की विशेषताओं को चिह्नित करें और उनके उदाहरणों को याद रखें।
  • भाव स्पष्ट करने वाले प्रश्नों के उत्तरों को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
  • कविता की पंक्तियों को उनके अर्थ और संदर्भ के साथ जोड़कर पढ़ें।

Practice MCQs

Q1. कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है?

Q2. कवि 'अभी समय भी नहीं' कहकर क्या व्यक्त करना चाहता है?

Q3. स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का क्या आशय है?

Q4. कविता में 'उज्ज्वल गाथा' किसे कहा गया है?

Q5. 'आत्मकथ्य' कविता की भाषा मुख्य रूप से कौन सी है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 के लिए 'आत्मकथ्य' कविता का क्या महत्व है?

'आत्मकथ्य' कविता कवि जयशंकर प्रसाद की भावनाओं और काव्यशैली को समझने में मदद करती है। परीक्षा की दृष्टि से, इसके भावार्थ, कवि की मनोदशा और काव्यभाषा की विशेषताओं पर आधारित प्रश्न महत्वपूर्ण होते हैं।

कवि अपनी आत्मकथा क्यों नहीं लिखना चाहता?

कवि अपनी आत्मकथा इसलिए नहीं लिखना चाहता क्योंकि वह अपने जीवन की दुर्बलताओं, कष्टों और असफलताओं को सार्वजनिक नहीं करना चाहता। वह नहीं चाहता कि लोग उसकी सरलता का उपहास उड़ाएँ या उसके दुखों को याद करके उसे फिर से पीड़ा हो।

स्मृति को 'पाथेय' कहने का क्या अर्थ है?

स्मृति को 'पाथेय' कहने का अर्थ है कि कवि अपनी सुखद स्मृतियों को अपने जीवन जीने का सहारा या संबल बनाना चाहता है, विशेषकर जब उसका वर्तमान जीवन कष्टों से भरा हो।

'आत्मकथ्य' कविता में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग हुआ है?

इस कविता में कवि जयशंकर प्रसाद ने खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग किया है। भाषा सरल, प्रवाहमयी और भावों को व्यक्त करने में सक्षम है।

इन समाधानों से छात्रों को परीक्षा में कैसे मदद मिलेगी?

ये समाधान छात्रों को कविता के कठिन अंशों को समझने, भावार्थ स्पष्ट करने, और काव्यभाषा की विशेषताओं को उदाहरण सहित याद करने में मदद करते हैं, जिससे वे परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का सटीक उत्तर दे सकते हैं।

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