Class 10 Hindi Kshitij Chapter 7: Girija Kumar Mathur - Chhaya Mat Chhoona NCERT Solutions

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CBSE Class 10 Hindi Kshitij, Chapter 7, 'Chhaya Mat Chhoona' by Girija Kumar Mathur, explores the poet's reflections on life's journey. The poem advises against dwelling on past glories or illusions, emphasizing the importance of facing present realities with courage. It suggests that true happiness and fulfillment lie not in fleeting moments of fame or past joys, but in embracing the present and moving forward. The solutions delve into the poem's central message: the need to let go of past shadows and illusions to live a meaningful present. They explain the poet's perspective on the transient nature of happiness and the significance of present experiences over past achievements. This chapter encourages students to focus on the present, understand its value, and find strength in confronting life's challenges rather than seeking solace in bygone memories.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectक्षितिज-2
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. गिरिज़ाकुमार माथुर - छाया मत छून

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij Chapter 7, 'Chhaya Mat Chhoona', focuses on understanding the poem's central message. It explains the poet's advice to embrace the present reality, avoid dwelling on past pleasant memories or future uncertainties, and the ephemeral nature of success and happiness. The solutions cover the reasons for sorrow, the meaning of 'shadows' as past experiences, and the importance of living in the 'living moments'. This chapter's exercises help students analyze poetic devices and interpret the poem's philosophical undertones.

Learning outcomes

  • Understand the poet's advice to focus on present realities.
  • Analyze the concept of 'shadows' representing past memories.
  • Explain the illusory nature of fame and happiness ('Mrigtrishna').
  • Identify the reasons for sorrow as presented in the poem.
  • Appreciate the importance of living in the 'living moments'.
  • Interpret the use of adjectives to enhance poetic meaning.

Topics covered

Paper topics

  • Understanding 'Chhaya Mat Chhoona'
  • The concept of 'Kathin Yatharth'
  • Illusion of Fame ('Prabhuta')
  • The meaning of 'Mrigtrishna'
  • Past memories vs. Present reality
  • Reasons for sorrow in life
  • Poetic devices: Use of adjectives
  • Embracing the present moment
  • Symbolism in poetry
  • Life's duality: Joy and sorrow

Important topics

  • Embracing 'Kathin Yatharth'
  • The illusory nature of 'Prabhuta' and 'Mrigtrishna'
  • The role of past memories ('Chhaya')
  • Living in the present ('Jeevit Kshan')
  • The cyclical nature of joy and sorrow

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है ?
Solution: कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात इसलिए कही है क्योंकि जीवन की वास्तविकताएँ ही सत्य हैं। कवि का मानना है कि भूली-बिसरी यादें या भविष्य के सपने अक्सर मनुष्य को दुखी करते हैं। यदि हम जीवन की कठिनाइयों और दुःखों का सामना करने के बजाय उनसे मुँह मोड़ते हैं, तो हम स्वयं को या किसी मंजिल को प्राप्त नहीं कर सकते। इसलिए, मनुष्य को जीवन की कठिनाइयों को यथार्थ भाव से स्वीकार करना चाहिए और उनसे सकारात्मक रूप से निपटना चाहिए। ऐसा करने से ही वह स्वयं और दूसरों का भला कर सकता है, अन्यथा सब कुछ व्यर्थ है।

प्रश्न 2

भाव स्पष्ट कीजिए - प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है, हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।
Solution: प्रस्तुत पंक्तियाँ गिरिजाकुमार माथुर की कविता 'छाया मत छूना' से ली गई हैं। इनका भाव यह है कि बड़प्पन या महान होने का एहसास भी एक प्रकार का भ्रम (मृगतृष्णा) है। मनुष्य अक्सर प्रभुता या महानता के चक्कर में पड़कर अनेक भ्रमों में उलझ जाता है, जिससे शंकाएँ उत्पन्न होती हैं। उसे इन भ्रमों में न पड़कर अपने लिए उचित मार्ग का चयन करना चाहिए। सुख और दुःख दोनों को समान रूप से अनुभव करके ही सही मार्ग पर चला जा सकता है, न कि प्रभुता के भ्रम में फँसकर। जिस प्रकार हर चांदनी रात के पीछे एक अंधेरी रात छिपी होती है, उसी प्रकार हर सुख के बाद दुख का आना निश्चित है।

प्रश्न 3

'छाया' शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है?
Solution: 'छाया मत छूना' कविता में 'छाया' शब्द का प्रयोग अतीत की सुखद स्मृतियों या अनुभवों के लिए किया गया है। कवि ने मानव की उन स्मृतियों के पीछे भागने की प्रवृत्ति को दुखदायी माना है। हम केवल बीते हुए सुखद पलों की यादों के सहारे नहीं जी सकते; हमें वर्तमान में जीना होता है। अपने वर्तमान के कठिन पलों को अतीत की मधुर स्मृतियों से जोड़ना अत्यंत कष्टदायक हो सकता है। अतीत की वे मधुर स्मृतियाँ हमें वर्तमान के दुखों का सामना करने में कमजोर बना सकती हैं और हमारे वर्तमान के कष्ट को और भी बढ़ा सकती हैं। इसलिए, कवि ने उन्हें छूने या याद करने से मना किया है।

प्रश्न 4

कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे 'कठिन यथार्थ'। कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छाँटकर लिखिए और यह भी लिखिए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशिष्टता पैदा हुई?
Solution: कविता में विशेषणों के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशिष्टता लाने वाले कुछ अन्य उदाहरण इस प्रकार हैं:
  1. दुख दूना: यहाँ 'दूना' विशेषण का प्रयोग दुख की अधिकता या तीव्रता को व्यक्त करने के लिए किया गया है।
  2. जीवित क्षण: 'जीवित' विशेषण का प्रयोग क्षण को केवल समय का एक बिंदु न दिखाकर, उसे सजीव और अनुभव करने योग्य बनाया गया है।
  3. सुरंग-सुधियाँ: 'सुरंग' विशेषण का प्रयोग 'सुधियाँ' (यादों) के रंगीन, मनमोहक और सुखद होने का भाव दर्शाता है।
  4. एक रात कृष्णा: यहाँ 'कृष्णा' (काली) विशेषण रात के अंधकार या उदासी को स्पष्ट करता है।
  5. शरद रात: 'शरद' विशेषण शरद ऋतु की रात की मोहकता और विशेष वातावरण को उजागर करता है।
  6. रस बसंत: 'रस' विशेषण बसंत ऋतु के उल्लास, माधुर्य और सजीवता को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 5

'मृगतृष्णा' किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?
Solution: 'मृगतृष्णा' रेगिस्तान या तपते हुए मैदान में दूर से पानी के होने का भ्रम है, जो पास जाने पर नहीं मिलता। गर्मी की चिलचिलाती धूप में रेत पर पानी जैसा चमकता हुआ दिखाई देता है, पर वहाँ कुछ नहीं होता। कविता में 'मृगतृष्णा' का प्रयोग प्रभुता (बड़प्पन या महानता) की निरर्थक खोज के संदर्भ में हुआ है। जिस प्रकार हिरण पानी के भ्रम में दौड़ता रहता है और उसे कुछ नहीं मिलता, उसी प्रकार मनुष्य भी प्रभुता की चाह में भटकता रहता है, पर उसे वास्तविक सुख या संतुष्टि प्राप्त नहीं होती।

प्रश्न 6

'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले' यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?
Solution: कविता की यह पंक्ति, "जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण," में 'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले' का भाव झलकता है। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि जो हमें प्राप्त नहीं हुआ, उसे भूलकर हमें अपने भविष्य का स्वागत करना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।

प्रश्न 7

कविता में व्यक्त दुख के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
Solution: 'छाया मत छूना' कविता में कवि ने जीवन में दुख के कई कारण बताए हैं:
  1. कामनाओं और लालसाओं के पीछे भागना: कवि के अनुसार, मनुष्य की अतृप्त इच्छाएँ और लालसाएँ उसे दुख की ओर ले जाती हैं, क्योंकि इनमें असफलता के सिवाय कुछ नहीं मिलता।
  2. अतीत की सुखद स्मृतियों पर निर्भरता: हम केवल बीते हुए सुखद पलों की यादों के सहारे नहीं जी सकते। वर्तमान का सामना करना आवश्यक है, और अतीत की स्मृतियाँ वर्तमान के दुखों को बढ़ा सकती हैं।
  3. दुविधाग्रस्त मन: मन की दुविधापूर्ण स्थिति और समय के अनुसार आचरण न कर पाना भी दुख का कारण बनता है।
  4. प्रभुता या बड़प्पन का भ्रम: व्यक्ति बड़प्पन या महान होने के भ्रम में उलझकर स्वयं को दुखी करता है।
कवि इन कारणों से दूर रहकर केवल वर्तमान का सामना करने की सलाह देते हैं।

प्रश्न 8

'जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी', से कवि का अभिप्राय जीवन की मधुर स्मृतियों से है। आपने अपने जीवन की कौन-कौन सी स्मृतियाँ संजो रखी हैं?
Solution: कवि के अनुसार, जीवन में कई सुखद और रंगीन स्मृतियाँ होती हैं जो हमें प्रिय लगती हैं। मेरे जीवन की कुछ मधुर स्मृतियाँ इस प्रकार हैं:
  • बचपन में मेरी दादी द्वारा सुनाई गई कहानियाँ।
  • विद्यालय में मुझे मिला पहला पुरस्कार।
  • माता-पिता के साथ की गई वृन्दावन की यादगार यात्रा।
ये स्मृतियाँ मेरे लिए अनमोल हैं और मुझे खुशी देती हैं।

प्रश्न 9

'क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?' कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए।
Solution: 'छाया मत छूना' कविता में कवि आशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। वे कहते हैं कि यदि बसंत ऋतु के चले जाने के बाद फूल खिले, तो क्या हुआ? इसी प्रकार, यदि शरद ऋतु की रात में चाँद न निकले, तो भी कोई बात नहीं। मेरे विचार से, कवि का यह मानना काफी हद तक उचित है कि हमें वर्तमान में जो भी उपलब्ध हो, उसे स्वीकार करना चाहिए और बीते हुए सुखों को भुलाकर वर्तमान में जीना चाहिए। हालाँकि, किसी उपलब्धि का आनंद समय बीत जाने पर भी मिल सकता है, लेकिन उसका महत्व और प्रभाव शायद कम हो जाता है। फिर भी, वर्तमान की परिस्थितियों को स्वीकार करना और उनसे आनंद प्राप्त करना एक सकारात्मक जीवन जीने का तरीका है।

Common mistakes

  • Confusing 'shadows' with literal darkness instead of past memories.
  • Overemphasis on past pleasantries leading to neglect of the present.
  • Misinterpreting 'Mrigtrishna' as a literal thirst rather than an illusion of success.
  • Failing to connect the poem's themes of joy and sorrow as cyclical.

Revision tips

  • Read the poem thoroughly to grasp the central theme of living in the present.
  • Focus on understanding the symbolic meaning of 'shadows' and 'Mrigtrishna'.
  • Review the solutions for each question to ensure clarity on the poet's arguments.
  • Practice identifying and explaining the use of adjectives in the poem.
  • Connect the poem's message to real-life experiences of happiness and sorrow.

Practice MCQs

Q1. कवि ने किस यथार्थ के पूजन की बात कही है?

Q2. कविता में 'प्रभुता का शरण-बिंब' का क्या अर्थ है?

Q3. 'छाया' शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है?

Q4. कवि ने 'छाया' को छूने से क्यों मना किया है?

Q5. 'मृगतृष्णा' का प्रयोग कविता में किस अर्थ में हुआ है?

Q6. कविता की कौन सी पंक्ति 'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले' का भाव व्यक्त करती है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 के लिए 'छाया मत छूना' कविता के NCERT समाधान किस बारे में हैं?

ये समाधान गिरिजा कुमार माथुर द्वारा रचित 'छाया मत छूना' कविता के सभी प्रश्नों के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिसमें कवि की वर्तमान में जीने की सलाह, अतीत की स्मृतियों के प्रभाव और जीवन की सच्चाइयों का सामना करने पर जोर दिया गया है।

'कठिन यथार्थ' का पूजन करने से कवि का क्या तात्पर्य है?

कवि का तात्पर्य है कि हमें जीवन की वास्तविकताओं, चाहे वे कितनी भी कठिन क्यों न हों, उनका सामना करना चाहिए और उन्हें स्वीकार करना चाहिए, न कि सुखद अतीत या अनिश्चित भविष्य में खोए रहना चाहिए।

कविता में 'छाया' शब्द का क्या अर्थ है और इसे छूने से क्यों मना किया गया है?

कविता में 'छाया' का अर्थ अतीत की सुखद स्मृतियाँ हैं। कवि इन्हें छूने से मना करते हैं क्योंकि ये स्मृतियाँ वर्तमान के दुखों को और बढ़ा सकती हैं और हमें कमजोर बना सकती हैं।

'मृगतृष्णा' का प्रयोग कविता में किस संदर्भ में किया गया है?

कविता में 'मृगतृष्णा' का प्रयोग बड़प्पन या प्रभुता की निरर्थक और भ्रमपूर्ण खोज के संदर्भ में किया गया है, जो हिरण की तरह हमें भटकाती है और अंततः कुछ हासिल नहीं होता।

यह समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान कविता की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने के लिए एक संरचित दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।

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