कक्षा 9 संस्कृत पाठ 2: स्वर्णकाकः - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 संस्कृत के पाठ 'स्वर्णकाकः' (सुनहरा कौआ) के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ एक गरीब लड़की की कहानी बताता है जिसे एक सुनहरे पंखों वाला कौआ मिलता है। समाधान में पाठ के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो छात्रों को कहानी के पात्रों, जैसे कि लालची बालिका और विनम्र बालिका, के बीच अंतर को समझने में मदद करते हैं। इसमें कौए द्वारा बालिका को दिए गए सोने के महल और उसके द्वारा चुने गए सोपानों का वर्णन भी शामिल है। यह समाधान छात्रों को व्याकरणिक अभ्यासों, जैसे विलोम शब्द और संधि, को हल करने में भी सहायता करता है। परीक्षा की तैयारी के लिए यह एक उत्कृष्ट संसाधन है, जो छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और संस्कृत भाषा में अपने कौशल को निखारने में मदद करता है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 2. स्वर्णकाकः |
Chapter summary
कक्षा 9 संस्कृत के पाठ 'स्वर्णकाकः' के ये NCERT समाधान छात्रों को एक लालची बालिका और एक विनम्र बालिका की कहानी के माध्यम से नैतिक मूल्यों को समझने में मदद करते हैं। समाधान में पाठ के मुख्य प्रश्नों के उत्तर, विलोम शब्द, संधि विच्छेद और प्रश्न निर्माण जैसे अभ्यासों को शामिल किया गया है। यह छात्रों को कहानी के पात्रों के कार्यों और उनके परिणामों का विश्लेषण करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
Learning outcomes
- पाठ 'स्वर्णकाकः' के मुख्य पात्रों और कथानक का वर्णन करना।
- विनम्रता और लालच के बीच अंतर को समझना।
- पाठ में प्रयुक्त विलोम शब्दों को पहचानना और उनका अर्थ बताना।
- दिए गए शब्दों की संधि को पहचानना और उन्हें जोड़ना।
- पाठ के आधार पर प्रश्न निर्माण करना सीखना।
- संस्कृत भाषा में कहानी कहने की शैली को समझना।
Topics covered
Paper topics
- स्वर्णकाकः कहानी का सारांश
- पात्र परिचय (विनम्र बालिका, लालची बालिका, स्वर्णकाकः)
- नैतिक शिक्षा (विनम्रता का महत्व, लालच का परिणाम)
- संस्कृत व्याकरण: विलोम शब्द
- संस्कृत व्याकरण: संधि (यण संधि, गुण संधि)
- प्रश्न निर्माण
- संस्कृत शब्दावली
- कक्षा 9 संस्कृत पाठ्यपुस्तक अभ्यास
Important topics
- स्वर्णकाकः कहानी का सारांश और नैतिक शिक्षा
- पात्रों का चरित्र चित्रण
- विलोम शब्द
- संधि विग्रह और संधि कार्य
- प्रश्न निर्माण
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1
i. निर्धनायाः वृद्धायाः दुहिता कीदृशी आसीत्?
ii. बालिकया पूर्वं किं न दृष्टम् आसीत्?
iii. रुदन्तीं बालिकां काकः कथम् आश्वासयत्?
iv. बालिका किं दृष्ट्वा आश्चर्यचकिता जाता?
v. बालिका केन सोपानेन स्वर्णभवनम् आससाद?
vi. सा ताम्रस्थाल्याः चयनाय किं तर्कं ददाति?
vii. गर्विता बालिका कीदृशं सोपानम् अयाचत् कीदृशं च प्राप्नोत्।
-
i. निर्धनायाः वृद्धायाः दुहिता कीदृशी आसीत्?
उत्तर: निर्धनायाः वृद्धायाः दुहिता विनम्रा मनोहरा च आसीत्। वह स्वभाव से बहुत ही विनम्र और सुंदर थी।
-
ii. बालिकया पूर्वं किं न दृष्टम् आसीत्?
उत्तर: बालिकया पूर्वं स्वर्णपक्षः रजतचञ्जः स्वर्णकाकः न दृष्टः आसीत्। उसने पहले कभी ऐसे सुनहरे पंखों और चांदी की चोंच वाले कौए को नहीं देखा था।
-
iii. रुदन्तीं बालिकां काकः कथम् आश्वासयत्?
उत्तर: रुदन्तीं बालिकां काकः आश्वासयत् - (हे बालिके!) मा शुचः। सुर्योदयात्प्राक् ग्रामात् बहिः पिप्पल वृक्षम् अनु त्वया आगन्तवयम्। अहं तुभ्यं तण्डुलमूल्यम् दास्यामि। अर्थात्, कौए ने बालिका को आश्वासन दिया कि वह रोए नहीं, सूर्योदय से पहले गाँव के बाहर पीपल के वृक्ष के पास आए, जहाँ वह उसे चावलों का मूल्य देगा।
-
iv. बालिका किं दृष्ट्वा आश्चर्यचकिता जाता?
उत्तर: बालिका वृक्षस्य उपरि स्वर्णमयं प्रासादं दृष्ट्वा आश्चर्यचिकता जाता। उसने वृक्ष के ऊपर एक सोने का महल देखा, जिसे देखकर वह बहुत आश्चर्यचकित हो गई।
-
v. बालिका केन सोपानेन स्वर्णभवनम् आससाद?
उत्तर: बालिका स्वर्णसोपानेन स्वर्णभवनम् आससाद। उसने सोने की सीढ़ी का प्रयोग करके सोने के भवन में प्रवेश किया।
-
vi. सा ताम्रस्थाल्याः चयनाय किं तर्कं ददाति?
उत्तर: सा ताम्रस्थाल्याः चयनाय तर्कं ददाति यत् अहं निर्धना ताम्रस्थाल्याम् एव भोजनं करिष्यामि। उसने तर्क दिया कि वह गरीब है, इसलिए वह तांबे की थाली में ही भोजन करेगी।
-
vii. गर्विता बालिका कीदृशं सोपानम् अयाचत् कीदृशं च प्राप्नोत्।
उत्तर: गर्विता बालिका स्वर्णमयं सोपानम् अयाचत्, ताम्रमयं (सोपानम्) च प्राप्नोत्। उसने सोने की सीढ़ी माँगी, लेकिन उसे तांबे की सीढ़ी मिली।
प्रश्न 2
i. पश्चात् - .....
ii. हिसेतुम् - .....
iii. अध:-....
iv. श्वेतः - .....
v. सूर्यास्तः - .....
vi. सुप्तः - .....
पाठ के आधार पर विलोम शब्द इस प्रकार हैं:
-
i. पश्चात् (बाद में)
विलोमपद: पूर्वम् (पहले)
-
ii. हिसेतुम् (हँसने के लिए)
विलोमपद: रोदितुम् (रोने के लिए)
-
iii. अधः (नीचे)
विलोमपद: उपरि (ऊपर)
-
iv. श्वेतः (सफेद)
विलोमपद: कृष्णः (काला)
-
v. सूर्यास्तः (सूर्यास्त)
विलोमपद: सूर्योदयः (सूर्योदय)
-
vi. सुप्तः (सोया हुआ)
विलोमपद: प्रबुद्धः (जागा हुआ)
प्रश्न 2 (ख)
i. नि + अवसत् - .....
ii. सूर्य + उदयः - .....
iii. वृक्षस्य + उपरि - .....
iv. हि + अकारयत् - .....
v. च + एकाकिनी - .....
vi. इति + उक्त्वा - .....
vii. प्रति + अवदत् - .....
viii. प्र + उक्तम् - .....
ix. अत्र + एव - .....
x. तत्र + उपस्थिता - .....
xi. यथा + इच्छम् - .....
दिए गए शब्दों की संधि इस प्रकार है:
-
i. नि + अवसत्
संधि: न्यवसत् (यहाँ 'इ' के बाद 'अ' आने पर 'य' हुआ है, जो यण संधि का नियम है।)
-
ii. सूर्य + उदयः
संधि: सूर्योदयः (यहाँ 'अ' के बाद 'उ' आने पर 'ओ' हुआ है, जो गुण संधि का नियम है।)
-
iii. वृक्षस्य + उपरि
संधि: वृक्षस्योपरि (यहाँ 'अ' के बाद 'उ' आने पर 'ओ' हुआ है, जो गुण संधि का नियम है।)
-
iv. हि + अकारयत्
संधि: ह्यकारयत् (यहाँ 'इ' के बाद 'अ' आने पर 'य' हुआ है, जो यण संधि का नियम है।)
-
v. च + एकाकिनी
संधि: चैकाकिनी (यहाँ 'अ' के बाद 'ए' आने पर 'ऐ' हुआ है, जो वृद्धि संधि का नियम है।)
-
vi. इति + उक्त्वा
संधि: इत्युक्त्वा (यहाँ 'इ' के बाद 'उ' आने पर 'यु' हुआ है, जो यण संधि का नियम है।)
-
vii. प्रति + अवदत्
संधि: प्रत्यवदत् (यहाँ 'इ' के बाद 'अ' आने पर 'य' हुआ है, जो यण संधि का नियम है।)
-
viii. प्र + उक्तम्
संधि: प्रोक्तम् (यहाँ 'अ' के बाद 'उ' आने पर 'ओ' हुआ है, जो गुण संधि का नियम है।)
-
ix. अत्र + एव
संधि: अत्रैव (यहाँ 'अ' के बाद 'ए' आने पर 'ऐ' हुआ है, जो वृद्धि संधि का नियम है।)
-
x. तत्र + उपस्थिता
संधि: तत्रोपस्थिता (यहाँ 'अ' के बाद 'उ' आने पर 'ओ' हुआ है, जो गुण संधि का नियम है।)
-
xi. यथा + इच्छम्
संधि: यथेच्छम् (यहाँ 'आ' के बाद 'इ' आने पर 'ए' हुआ है, जो गुण संधि का नियम है।)
प्रश्न 3
i. ग्रामे <u>निर्धना स्त्री</u> अवसत्।
ii. स्वर्णकाकं निवारयन्ती बालिका प्रार्थयत्।
iii. सूर्योदयात् पूर्वमेव बालिका तत्रोपस्थिता।
iv. बालिका <u>निर्धनमातुः</u> दुहिता आसीत्।
रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न निर्माण इस प्रकार है:
-
i. ग्रामे <u>निर्धना स्त्री</u> अवसत्।
प्रश्न: ग्रामे का अवसत्?
(अर्थात्: गाँव में कौन रहता था?)
-
ii. स्वर्णकाकं निवारयन्ती बालिका प्रार्थयत्।
प्रश्न: किं निवारयन्ती बालिका प्रार्थयत्?
(अर्थात्: क्या निवारण करती हुई बालिका प्रार्थना कर रही थी?)
-
iii. सूर्योदयात् पूर्वमेव बालिका तत्रोपस्थिता।
प्रश्न: कदा बालिका तत्रोपस्थिता?
(अर्थात्: बालिका वहाँ कब उपस्थित हुई?)
-
iv. बालिका <u>निर्धनमातुः</u> दुहिता आसीत्।
प्रश्न: बालिका कस्याः दुहिता आसीत्?
(अर्थात्: बालिका किसकी पुत्री थी?)
Common mistakes
- पात्रों के चरित्र चित्रण में भ्रमित होना (जैसे लालची और विनम्र बालिका)।
- विलोम शब्दों को गलत चुनना।
- संधि नियमों को ठीक से लागू न कर पाना।
- प्रश्न निर्माण करते समय सही सर्वनाम और क्रिया का प्रयोग न करना।
Revision tips
- कहानी के मुख्य पात्रों - गरीब लड़की और सुनहरे कौए - के बीच संबंधों पर ध्यान केंद्रित करें।
- विनम्रता और लालच के परिणामों की तुलना करें।
- विलोम शब्द और संधि अभ्यास को हल करते समय पाठ में दिए गए उदाहरणों का संदर्भ लें।
- प्रश्न निर्माण अभ्यास के माध्यम से वाक्यों के विभिन्न हिस्सों को रेखांकित करके प्रश्न बनाने का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. निर्धना वृद्धा की दुहिता कैसी थी?
Explanation: पाठ के अनुसार, निर्धन वृद्धा की दुहिता विनम्र और मनोहर थी।
Q2. कौए के पंखों का रंग कैसा था?
Explanation: कौआ एक 'स्वर्णकाकः' था, अर्थात उसके पंख सुनहरे थे।
Q3. बालिका ने कौए से किस प्रकार का सोपान माँगा?
Explanation: लालची बालिका ने सोने के महल के लिए तांबे का सोपान माँगा था।
Q4. कौए ने बालिका को क्या खाने के लिए दिया?
Explanation: कौए ने बालिका को चावल खाने के लिए दिए थे।
Q5. 'वृक्षस्य + उपरि' का सही संधि रूप क्या है?
Explanation: यह 'यण संधि' का उदाहरण है जहाँ 'इ' या 'उ' के बाद कोई भिन्न स्वर आने पर 'य' या 'व' बनता है, और यहाँ 'अ' के बाद 'उ' आने पर 'ओ' बनता है (वृक्षस्य + उपरि = वृक्षस्योपरि)।
Frequently asked questions
कक्षा 9 संस्कृत के पाठ 'स्वर्णकाकः' में मुख्य संदेश क्या है?
इस पाठ का मुख्य संदेश यह है कि विनम्रता और अच्छे व्यवहार का फल मीठा होता है, जबकि लालच और अहंकार का परिणाम बुरा होता है। गरीब लेकिन विनम्र बालिका को पुरस्कार मिलता है, जबकि लालची बालिका को दंड।
पाठ में 'स्वर्णकाकः' का क्या अर्थ है?
'स्वर्णकाकः' का अर्थ है 'सुनहरा कौआ'। यह एक जादुई कौआ है जिसके पंख सोने के थे और जो एक गरीब लड़की की मदद करता है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी हैं?
हाँ, ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं क्योंकि ये पाठ के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं, जैसे कहानी, पात्रों, नैतिक मूल्यों और व्याकरणिक अभ्यासों को कवर करते हैं।
पाठ में किस प्रकार के व्याकरणिक अभ्यास शामिल हैं?
पाठ में विलोम शब्द (जैसे पश्चात् - पूर्वम्, अधः - उपरि) और संधि (जैसे वृक्षस्य + उपरि = वृक्षस्योपरि) जैसे व्याकरणिक अभ्यासों को शामिल किया गया है।
प्रश्न निर्माण अभ्यास का उद्देश्य क्या है?
प्रश्न निर्माण अभ्यास का उद्देश्य छात्रों को वाक्यों के विभिन्न हिस्सों को समझकर उनके आधार पर प्रश्न बनाने की क्षमता विकसित करना है, जिससे उनकी वाक्य संरचना की समझ बढ़ती है।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.