कक्षा 9 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 2 - मेरे संग की औरतें

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यह पृष्ठ कक्षा 9 हिंदी की पुस्तक 'कृतिका भाग 2' के अध्याय 2, 'मेरे संग की औरतें' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय लेखिका मृदुला गर्ग द्वारा अपनी माँ, नानी और परदादी के जीवन के माध्यम से महिलाओं के व्यक्तित्व और समाज में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालता है। समाधानों में लेखिका की नानी की स्वतंत्रता सेनानियों से मिलने की इच्छा, उनकी माँ की सादगी और सत्यनिष्ठा, और परदादी की लीक से हटकर सोच जैसे विषयों को शामिल किया गया है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। पाठ के माध्यम से, छात्र यह सीखते हैं कि कैसे विभिन्न महिला पात्रों ने अपनी व्यक्तिगत मान्यताओं और मूल्यों के माध्यम से समाज को प्रभावित किया। लेखिका की नानी, जिन्होंने कभी अपनी बेटी का विवाह एक क्रांतिकारी से करने की इच्छा व्यक्त की, और उनकी माँ, जिन्होंने सत्य, ईमानदारी और सादगी का जीवन जिया, दोनों ही अपने-अपने तरीके से प्रेरणादायक हैं। परदादी का अपनी बहू से पहली संतान के रूप में लड़की माँगना, उस समय की रूढ़ियों को तोड़ता है। समाधान इन पात्रों की विशेषताओं और उनके कार्यों के पीछे के कारणों का विश्लेषण करते हैं। ये समाधान छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता करेंगे, जिसमें वर्णनात्मक प्रश्न और पात्रों के विश्लेषण से संबंधित प्रश्न शामिल हैं। प्रत्येक उत्तर को स्पष्टता और सटीकता के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को आसानी से समझने में मदद मिलेगी। यह पृष्ठ छात्रों को पाठ की मुख्य सीखों को आत्मसात करने और हिंदी साहित्य में महिलाओं के चित्रण को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्रदान करता है।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. मेरे संग की औरतें - मृदुला गर्ग

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी की पुस्तक 'कृतिका भाग 2' के अध्याय 2, 'मेरे संग की औरतें' के ये NCERT समाधान, लेखिका मृदुला गर्ग की नानी, माँ और परदादी के जीवन के माध्यम से महिलाओं के सशक्त और स्वतंत्र व्यक्तित्व को दर्शाते हैं। समाधानों में इन महिलाओं की अनूठी विशेषताओं, जैसे नानी की देश प्रेम की भावना, माँ की सत्यनिष्ठा और परदादी की लीक से हटकर सोच का विश्लेषण किया गया है। यह अध्याय बताता है कि कैसे सहजता और विश्वास से लोगों को सही राह पर लाया जा सकता है, जैसा कि लेखिका की माँ ने चोर के साथ व्यवहार करके दिखाया।

Learning outcomes

  • लेखिका की नानी के व्यक्तित्व और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी अप्रत्यक्ष भागीदारी को समझना।
  • लेखिका की माँ की विशेषताओं और उनके आदर्शवादी जीवन का विश्लेषण करना।
  • परदादी के स्वतंत्र विचारों और समाज की रूढ़ियों को तोड़ने की क्षमता को पहचानना।
  • यह समझना कि कैसे सहजता और विश्वास से लोगों को सही रास्ते पर लाया जा सकता है।
  • पाठ के आधार पर विभिन्न पात्रों के चरित्र-चित्रण का वर्णन करना।
  • शिक्षा के महत्व और उसे सुलभ बनाने के प्रयासों को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • लेखिका की नानी का व्यक्तित्व
  • नानी की स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका
  • लेखिका की माँ की विशेषताएँ
  • माँ का सत्यनिष्ठा और ईमानदारी
  • परदादी के स्वतंत्र विचार
  • समाज की रूढ़ियों का खंडन
  • सहजता से किसी को सही राह पर लाना
  • शिक्षा का महत्व और अधिकार
  • महिलाओं का समाज में स्थान
  • पारिवारिक मूल्य और संस्कार

Important topics

  • लेखिका की नानी का व्यक्तित्व और प्रेरणा
  • लेखिका की माँ का आदर्शवादी जीवन
  • सहजता और विश्वास से सुधार
  • शिक्षा के अधिकार हेतु लेखिका के प्रयास
  • पाठ में वर्णित विभिन्न महिला पात्रों का विश्लेषण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थीं ?
Solution:

लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा नहीं था, फिर भी वे उनके व्यक्तित्व से गहराई से प्रभावित थीं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

  1. देश प्रेम और क्रांतिकारी विचार: लेखिका की नानी ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में प्रसिद्ध क्रांतिकारी प्यारेलाल शर्मा से मिलकर अपनी बेटी का विवाह किसी क्रांतिकारी से करवाने की इच्छा व्यक्त की थी। यह इच्छा उनके देश के प्रति अटूट प्रेम और उस समय की सामाजिक रूढ़ियों से हटकर सोचने की क्षमता को दर्शाती है।

  2. साहस और स्वतंत्रता की भावना: जीवन भर परदे में रहकर भी, उन्होंने अपनी बेटी के भविष्य के लिए एक पर-पुरुष से मिलने का साहस दिखाया। यह उनके साहसी व्यक्तित्व और मन में स्वतंत्रता की भावना के सुलगते रहने का प्रमाण है।

  3. आधुनिक सोच: भले ही वे अनपढ़, पुराने ढंग की और परदे में रहने वाली महिला रही हों, परन्तु निजी जीवन में वे आजाद विचारों वाली थीं। उन्होंने कभी भी अपने पति के विचारों का आँख बंद करके अनुसरण नहीं किया, बल्कि अपने तरीके से जीवन जिया।

इन कारणों से, लेखिका अपनी नानी के व्यक्तित्व से बहुत प्रभावित थीं, भले ही उन्होंने उन्हें कभी देखा न हो।

प्रश्न 2

लेखिका की नानी की आज़ादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही ?
Solution:

लेखिका की नानी की स्वतंत्रता आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से कोई बड़ी भूमिका नहीं रही, लेकिन उनकी भागीदारी अप्रत्यक्ष और वैचारिक स्तर पर महत्वपूर्ण थी:

  1. स्वतंत्रता की भावना का प्रसार: उन्होंने अपने मन में स्वतंत्रता की भावना को जीवित रखा और कभी भी अपने पति के अंग्रेजी जीवन-शैली के प्रति झुकाव को स्वीकार नहीं किया।

  2. क्रांतिकारी से विवाह की इच्छा: उनकी सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष भागीदारी यह थी कि उन्होंने अपनी बेटी का विवाह एक प्रसिद्ध क्रांतिकारी से करवाने की इच्छा व्यक्त की। यह इच्छा उस समय के युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित करने वाली थी।

  3. प्रेरणा का स्रोत: इस विवाह की घटना ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया और देश के अन्य क्रांतिकारियों को भी यह संदेश दिया कि समाज के अन्य लोग भी उनके कार्य में उनका साथ देने को तैयार हैं। इस प्रकार, उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से स्वतंत्रता आंदोलन को बल प्रदान किया।

इस प्रकार, लेखिका की नानी ने अपनी सोच और इच्छाओं के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन में एक अनूठी भूमिका निभाई।

प्रश्न 3.1

लेखिका की माँ परम्परा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में - लेखिका की माँ की विशेषताएँ लिखिए।
Solution:

लेखिका की माँ एक असाधारण महिला थीं, जो परम्पराओं का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों में सम्मान पाती थीं। उनकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:

  1. सादगी और स्वाभिमान: वे दुबली-पतली और सुंदर थीं, जिन्हें लेखिका ने पारिजात का फूल कहा है। वे हमेशा खद्दर की साड़ी पहनती थीं और आजीवन गाँधीजी के सिद्धांतों का पालन करती रहीं।

  2. सत्यनिष्ठा और गोपनीयता: वे अत्यंत सत्यवादी और ईमानदार थीं। वे किसी की गोपनीय बातों को कभी भी प्रकट नहीं करती थीं।

  3. स्वतंत्र सोच और जुनून: वे आम भारतीय महिलाओं की तरह घर-गृहस्थी और बच्चों की देखभाल तक सीमित नहीं थीं। उन्हें पुस्तकें पढ़ने का शौक था और वे आज़ादी के प्रति जुनून रखती थीं।

  4. प्रभावशाली व्यक्तित्व: उनका व्यक्तित्व इतना मजबूत और प्रभावी था कि किसी भी ठोस काम में केवल उनकी राय ही नहीं ली जाती थी, बल्कि उस पर पूरी तरह अमल भी किया जाता था।

  5. नाजुक मिजाज: वे स्वभाव से नाजुक मिजाज की थीं, जो उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

इन विशेषताओं के कारण, वे परम्पराओं से बंधे बिना भी सबके दिलों पर राज करती थीं।

प्रश्न 3.2

लेखिका की माँ परम्परा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी इस कथन के आलोक में - लेखिका की दादी के घर के माहौल का शब्द चित्र अंकित कीजिए।
Solution:

लेखिका की दादी का घर उस समय की प्रचलित सामाजिक मान्यताओं से काफी अलग और एक अनूठे माहौल वाला था। उस घर के माहौल का शब्द चित्र इस प्रकार है:

  1. स्वतंत्रता और समानता: दादी के घर में सभी सदस्यों को अपनी मर्जी से जीवन जीने की पूरी आज़ादी थी। पुत्र और पुत्री के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाता था। स्वयं दादी ने अपनी बहू से पहली संतान के रूप में बेटी ही माँगी थी, जो इस समानता का प्रमाण है।

  2. धार्मिक और साहित्यिक माहौल: घर का माहौल काफी धार्मिक था और स्त्रियों को उचित सम्मान दिया जाता था। साथ ही, यह साहित्यिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करता था।

  3. निजी स्वतंत्रता का सम्मान: घर के सदस्य एक-दूसरे के निजी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते थे। उदाहरण के लिए, वे एक-दूसरे के पत्र भी नहीं पढ़ते थे, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।

  4. खुलापन और स्वीकार्यता: यह माहौल खुला और स्वीकार्यता वाला था, जहाँ लीक से हटकर सोचने और कार्य करने वालों को भी जगह मिलती थी।

कुल मिलाकर, दादी का घर एक ऐसी जगह थी जहाँ व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समानता और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाता था।

प्रश्न 4

आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी ?
Solution:

लेखिका की परदादी का अपनी पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत माँगना, उनके लीक से हटकर सोचने वाले और साहसी व्यक्तित्व का परिचायक है। मेरी कल्पना के अनुसार, इसके पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:

  1. सामाजिक रूढ़ियों का विरोध: उस समय समाज में पुत्र को अधिक महत्व दिया जाता था और पुत्री के जन्म पर निराशा व्यक्त की जाती थी। परदादी शायद इस सोच का विरोध करना चाहती थीं और यह दिखाना चाहती थीं कि पुत्री भी पुत्र के समान ही महत्वपूर्ण है।

  2. स्त्री शक्ति में विश्वास: हो सकता है कि परदादी स्त्रियों की क्षमता और महत्व को गहराई से समझती हों और मानती हों कि बेटियाँ परिवार और समाज के लिए विशेष योगदान दे सकती हैं।

  3. अपनी बहू के प्रति स्नेह: शायद वे अपनी बहू को किसी भी प्रकार के सामाजिक दबाव या निराशा से बचाना चाहती थीं, जो अक्सर बेटी के जन्म पर महसूस किया जाता था।

  4. अनोखी इच्छा: यह उनकी एक अनोखी और साहसी इच्छा थी, जो उनके स्वतंत्र विचारों और लीक से अलग चलने की आदत को दर्शाती है।

इस प्रकार, परदादी की यह मन्नत उनके प्रगतिशील और साहसी विचारों का प्रतीक थी।

प्रश्न 5

डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है - पाठ के आधार पर तर्क-सहित उत्तर दीजिए ।
Solution:

यह कथन बिल्कुल सत्य है कि डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की बजाय सहजता और विश्वास से किसी भी व्यक्ति को सही राह पर लाया जा सकता है। पाठ में लेखिका की माँ का चोर के प्रति व्यवहार इसका एक सशक्त उदाहरण है:

  1. माँ का व्यवहार: जब एक चोर पकड़ा गया, तो लेखिका की माँ ने उसे न तो डांटा, न पिटवाया और न ही कोई उपदेश दिया। उन्होंने चोर को अपने घर में सेवा का अवसर दिया और उसे अपने पुत्र के समान माना।

  2. सहजता का प्रभाव: माँ ने चोर से केवल इतना कहा, "अब तुम्हारी मर्जी - चाहे चोरी करो या खेती।" इस सहज विश्वास और स्नेहपूर्ण व्यवहार ने चोर के हृदय को गहराई से छुआ।

  3. हृदय परिवर्तन: माँ के इस व्यवहार से चोर का हृदय परिवर्तित हो गया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सदा के लिए चोरी छोड़कर खेती को अपना लिया।

  4. विपरीत परिणाम की संभावना: यदि माँ चोर के साथ बुरा बर्ताव करतीं, उसे डांटती-फटकारती या सजा दिलवाती, तो शायद चोर सुधरने के बजाय और भी गलत रास्ते पर चला जाता या मन में द्वेष पाल लेता।

इस प्रकार, लेखिका की माँ ने अपने सहज और विश्वासपूर्ण व्यवहार से चोर का हृदय परिवर्तन कर उसे सही राह पर ला दिया, जो दर्शाता है कि दबाव की बजाय स्नेह और समझ से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 6

'शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है' - इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख करें।
Solution:

लेखिका मृदुला गर्ग शिक्षा के महत्व को समझती थीं और इसे बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार मानती थीं। इसी दिशा में उन्होंने महत्वपूर्ण प्रयास किए, जिसका उल्लेख पाठ में मिलता है:

  1. बागनकोट में स्कूल की स्थापना: जब लेखिका की शादी के बाद उन्हें कर्नाटक के एक छोटे से कस्बे बागनकोट में रहना पड़ा, तो उन्होंने देखा कि वहाँ उनके बच्चों की शिक्षा के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं थी।

  2. बिशप से संपर्क: उन्होंने वहाँ एक अंग्रेजी माध्यम का स्कूल खुलवाने के लिए बिशप से प्रार्थना की।

  3. स्वयं प्रयास: जब बिशप तैयार नहीं हुए, तो लेखिका ने हार नहीं मानी। उन्होंने स्वयं कोशिशें कीं और कुछ उत्साही लोगों की मदद से वहाँ एक स्कूल खोला।

  4. सरकारी मान्यता: उन्होंने इस स्कूल को सरकारी मान्यता दिलवाने का भी प्रयास किया, ताकि स्थानीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके और उन्हें शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े।

लेखिका के ये प्रयास दर्शाते हैं कि वे शिक्षा को कितना महत्व देती थीं और उसे सभी बच्चों के लिए सुलभ बनाने हेतु कितनी प्रतिबद्ध थीं।

प्रश्न 7

पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है ?
Solution:

पाठ 'मेरे संग की औरतें' के आधार पर, जीवन में ऐसे इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है जिनमें निम्नलिखित गुण होते हैं:

  1. उच्च और निस्वार्थ भावना: जो लोग बड़े और ऊँचे विचारों वाले होते हैं और बिना किसी स्वार्थ के कार्य करते हैं, उनका समाज में सम्मान होता है।

  2. दृढ़ संकल्प: जो लोग अपने संकल्पों पर अडिग रहते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं, उन्हें श्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता है।

  3. सच्चाई और ईमानदारी: जो व्यक्ति कभी झूठ नहीं बोलते, हमेशा सच का साथ देते हैं और अपने इरादों में मजबूत होते हैं, वे आदरणीय होते हैं।

  4. आत्मविश्वास और सरलता: जो लोग हीन भावना से ग्रसित नहीं होते, जिनका व्यक्तित्व सरल, सहज और पारदर्शी होता है, वे लोगों के मन में श्रद्धा उत्पन्न करते हैं।

  5. सद्भावनापूर्ण व्यवहार: जो लोग दूसरों के साथ हमेशा सद्भावना और प्रेम से व्यवहार करते हैं, वे भी श्रद्धा के पात्र बनते हैं।

पाठ में लेखिका की नानी, माँ और परदादी जैसे पात्रों के माध्यम से ऐसे ही गुणों को दर्शाया गया है, जिनके प्रति पाठक स्वतः ही श्रद्धा का भाव रखने लगता है।

Common mistakes

  • नानी की स्वतंत्रता आंदोलन में भागीदारी को केवल प्रत्यक्ष कार्यों तक सीमित समझना।
  • लेखिका की माँ के व्यक्तित्व को केवल सादगी तक सीमित कर देना, उनके अन्य गुणों को अनदेखा करना।
  • परदादी के लड़की माँगने के पीछे के सामाजिक और व्यक्तिगत कारणों का विश्लेषण न करना।
  • चोर के प्रति लेखिका की माँ के व्यवहार को केवल दयालुता समझ लेना, उसके पीछे के मनोवैज्ञानिक पहलू को न समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक महिला पात्र (नानी, माँ, परदादी) की मुख्य विशेषताओं को सूचीबद्ध करें।
  • लेखिका की माँ द्वारा चोर को सुधारने के तरीके और उसके पीछे के तर्क को समझें।
  • नानी की इच्छा और उसके सामाजिक प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करें।
  • पाठ में वर्णित 'सहजता' और 'विश्वास' के महत्व को उदाहरण सहित याद करें।
  • शिक्षा के अधिकार और लेखिका के प्रयासों से संबंधित प्रश्न तैयार करें।

Practice MCQs

Q1. लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा नहीं था, फिर भी वे उनसे प्रभावित थीं। इसका मुख्य कारण क्या था?

Q2. लेखिका की माँ की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?

Q3. लेखिका की परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की की मन्नत क्यों माँगी होगी?

Q4. चोर के पकड़े जाने पर लेखिका की माँ ने उसे क्या सलाह दी?

Q5. लेखिका ने कर्नाटक के बागनकोट में बच्चों के लिए क्या प्रयास किया?

Frequently asked questions

कक्षा 9 के हिंदी पाठ 'मेरे संग की औरतें' में मुख्य पात्र कौन हैं?

इस पाठ में मुख्य पात्र लेखिका की नानी, लेखिका की माँ और लेखिका की परदादी हैं। इनके माध्यम से लेखिका ने विभिन्न महिला चरित्रों का चित्रण किया है।

लेखिका अपनी नानी से क्यों प्रभावित थी, जबकि उन्होंने उन्हें कभी देखा नहीं था?

लेखिका अपनी नानी के साहसी और स्वतंत्र विचारों से प्रभावित थी, विशेषकर उनकी इच्छा कि वे अपनी बेटी का विवाह एक क्रांतिकारी से करवाना चाहती थीं, जो उनके देश प्रेम और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

लेखिका की माँ की सबसे बड़ी विशेषता क्या थी?

लेखिका की माँ सत्यवादी, ईमानदार, नाजुक मिजाज और आज़ादी के प्रति जुनून रखने वाली महिला थीं। उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि लोग उनकी राय का सम्मान करते थे और उसका पालन करते थे।

पाठ 'मेरे संग की औरतें' से हमें क्या सीख मिलती है?

यह पाठ हमें सिखाता है कि महिलाओं में भी साहस, स्वतंत्रता और दृढ़ संकल्प जैसे गुण हो सकते हैं। यह यह भी बताता है कि डराने-धमकाने की बजाय सहजता और विश्वास से लोगों को सही रास्ते पर लाया जा सकता है।

लेखिका ने शिक्षा के संबंध में क्या प्रयास किया?

लेखिका ने कर्नाटक के बागनकोट में बच्चों के लिए अंग्रेजी माध्यम का स्कूल खुलवाया, ताकि स्थानीय बच्चों को शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े।

इस पाठ के समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ के प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को मुख्य अवधारणाओं, पात्रों के विश्लेषण और पाठ के संदेश को समझने में मदद मिलती है, जो परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए आवश्यक है।

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