कक्षा 9 गणित अध्याय 11: रचनाएँ - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 के गणित के अध्याय 11, 'रचनाएँ', के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें 90°, 45°, 30°, 22.5°, और 15° जैसे विशिष्ट कोणों की रचना करने के चरण-दर-चरण तरीके शामिल हैं। प्रत्येक रचना के साथ, ज्यामितीय सिद्धांतों का उपयोग करके उसकी पुष्टि भी प्रदान की गई है। ये समाधान छात्रों को ज्यामितीय आकृतियों को सटीकता से बनाने की तकनीकों को समझने में मदद करते हैं। अभ्यास के लिए ये समाधान परीक्षा की तैयारी और अवधारणाओं की स्पष्ट समझ के लिए अमूल्य हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | गणित |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 11. रचनाएँ |
Chapter summary
अध्याय 11 'रचनाएँ' कक्षा 9 के गणित के लिए ज्यामितीय रचनाओं पर केंद्रित है। यह अध्याय छात्रों को दिए गए कोणों और रेखा खंडों की रचना करने के लिए आवश्यक उपकरणों और विधियों का उपयोग करना सिखाता है। प्रदान किए गए NCERT समाधान 90°, 45°, 30°, 22.5°, और 15° जैसे कोणों की रचना के लिए विस्तृत प्रक्रियाएँ प्रदान करते हैं, साथ ही प्रत्येक रचना के पीछे के औचित्य को भी समझाते हैं।
Learning outcomes
- दिए गए किरण के प्रारंभिक बिंदु पर 90° का कोण बनाना सीखें।
- दिए गए किरण के प्रारंभिक बिंदु पर 45° का कोण बनाना सीखें।
- 30°, 22.5°, और 15° जैसे विशिष्ट कोणों की रचना करना सीखें।
- प्रत्येक ज्यामितीय रचना के औचित्य को समझना।
- रचनाओं के लिए परकार और रूलर का सही उपयोग करना।
- ज्यामितीय निर्माण में सटीकता का महत्व समझना।
Topics covered
Paper topics
- कोणों की रचना
- 90° कोण की रचना
- 45° कोण की रचना
- 30° कोण की रचना
- 22.5° कोण की रचना
- 15° कोण की रचना
- ज्यामितीय रचना के चरण
- रचना का औचित्य
- परकार और रूलर का उपयोग
- कोण समद्विभाजन
- ज्यामितीय निर्माण
Important topics
- 90° और 45° कोणों की रचना
- 30°, 22.5°, और 15° कोणों की रचना
- रचना के औचित्य को समझना
- रचना के चरणों का सटीक पालन
- कोण समद्विभाजन की विधि
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Questions and Solutions
प्रश्न 1:
रचना के चरण:
- एक दी हुई किरण AB लीजिए जिसका प्रारंभिक बिंदु A है।
- A को केंद्र मानकर और कोई भी उपयुक्त त्रिज्या लेकर एक अर्धवृत्त (चाप) बनाइए जो किरण AB को बिंदु C पर प्रतिच्छेद करे।
- बिंदु C को केंद्र मानकर और वही त्रिज्या लेकर, जो अर्धवृत्त बनाने के लिए उपयोग की गई थी, एक चाप लगाइए जो अर्धवृत्त को बिंदु D पर प्रतिच्छेद करे। यह ∠CAD = 60° को दर्शाता है।
- बिंदु D को केंद्र मानकर और वही त्रिज्या लेकर, एक और चाप लगाइए जो अर्धवृत्त को बिंदु E पर प्रतिच्छेद करे। यह ∠CAE = 120° को दर्शाता है।
- अब, D और E को केंद्र मानकर और समान त्रिज्या (जो पहले उपयोग की गई त्रिज्या से अधिक हो) लेकर, दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को बिंदु F पर प्रतिच्छेद करें।
- किरण AF बनाइए। यह किरण प्रारंभिक बिंदु A पर 90° का कोण बनाती है।
रचना की पुष्टि:
रचना के अनुसार, AC = CD = DE (बराबर त्रिज्याएँ)।
इसलिए, ∆ACD और ∆ADE समबाहु त्रिभुज के भाग हैं, जिससे ∠CAD = 60° और ∠DAE = 60° होता है।
बिंदु F, D और E के चापों का प्रतिच्छेदन बिंदु है, जहाँ DF = EF (बराबर त्रिज्याएँ)।
इसलिए, AF, ∠DAE का समद्विभाजक है।
∠DAE = 60° है, इसलिए ∠DAF = ∠EAF = 60°/2 = 30°।
अब, कोण ∠FAB की गणना करें:
∠FAB = ∠CAD + ∠DAF
<math>\angle FAB = 60^{\circ} + 30^{\circ} = 90^{\circ}</math>
अतः, किरण AF द्वारा प्रारंभिक बिंदु A पर बनाया गया कोण 90° का है।
प्रश्न 2:
रचना के चरण:
- एक दी हुई किरण AB लीजिए जिसका प्रारंभिक बिंदु A है।
- A को केंद्र मानकर और कोई भी उपयुक्त त्रिज्या लेकर एक अर्धवृत्त (चाप) बनाइए जो किरण AB को बिंदु C पर प्रतिच्छेद करे।
- बिंदु C को केंद्र मानकर और वही त्रिज्या लेकर, एक चाप लगाइए जो अर्धवृत्त को बिंदु D पर प्रतिच्छेद करे (∠CAD = 60°)।
- बिंदु D को केंद्र मानकर और वही त्रिज्या लेकर, एक और चाप लगाइए जो अर्धवृत्त को बिंदु E पर प्रतिच्छेद करे (∠CAE = 120°)।
- D और E को केंद्र मानकर और समान त्रिज्या लेकर, दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को बिंदु F पर प्रतिच्छेद करें।
- किरण AF बनाइए। यह किरण प्रारंभिक बिंदु A पर 90° का कोण बनाती है।
- अब, कोण ∠CAF (जो 90° है) का समद्विभाजन करने के लिए, C और F को केंद्र मानकर और समान त्रिज्या (जो पहले उपयोग की गई त्रिज्या से अधिक हो) लेकर, दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को बिंदु G पर प्रतिच्छेद करें।
- किरण AG बनाइए। यह किरण प्रारंभिक बिंदु A पर 45° का कोण बनाती है।
रचना की पुष्टि:
रचना के चरण 1-6 से, हमने किरण AF बनाई है जो ∠FAB = 90° बनाती है।
चरण 7 में, हमने बिंदु C (जहाँ चाप AB को काटता है) और बिंदु F (जहाँ 120° का चाप लगता है) से समान त्रिज्या लेकर चाप लगाए हैं, जो बिंदु G पर प्रतिच्छेद करते हैं।
यह प्रक्रिया कोण ∠FAB का समद्विभाजन करती है।
इसलिए, ∠GAG = ∠FAB / 2
<math>\angle GAB = \frac{90^{\circ}}{2} = 45^{\circ}</math>
अतः, किरण AG द्वारा प्रारंभिक बिंदु A पर बनाया गया कोण 45° का है।
प्रश्न 3:
(i) 30° के कोण की रचना:
- एक दी हुई किरण AB लीजिए जिसका प्रारंभिक बिंदु A है।
- A को केंद्र मानकर और कोई भी उपयुक्त त्रिज्या लेकर एक अर्धवृत्त (चाप) बनाइए जो किरण AB को बिंदु C पर प्रतिच्छेद करे।
- बिंदु C को केंद्र मानकर और वही त्रिज्या लेकर, एक चाप लगाइए जो अर्धवृत्त को बिंदु D पर प्रतिच्छेद करे। यह ∠CAD = 60° को दर्शाता है।
- अब, कोण ∠CAD (जो 60° है) का समद्विभाजन करने के लिए, C और D को केंद्र मानकर और समान त्रिज्या (जो पहले उपयोग की गई त्रिज्या से अधिक हो) लेकर, दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को बिंदु E पर प्रतिच्छेद करें।
- किरण AE बनाइए। यह किरण प्रारंभिक बिंदु A पर 30° का कोण बनाती है।
(ii) 22.5° के कोण की रचना:
- पहले, प्रश्न 1 के अनुसार, प्रारंभिक बिंदु A पर 90° का कोण ∠FAB बनाइए।
- अब, कोण ∠FAB (जो 90° है) का समद्विभाजन करने के लिए, F और B को केंद्र मानकर और समान त्रिज्या (जो पहले उपयोग की गई त्रिज्या से अधिक हो) लेकर, दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को बिंदु G पर प्रतिच्छेद करें।
- किरण AG बनाइए। यह किरण प्रारंभिक बिंदु A पर 45° का कोण बनाती है।
- अब, कोण ∠GAB (जो 45° है) का समद्विभाजन करने के लिए, G और B को केंद्र मानकर और समान त्रिज्या (जो पहले उपयोग की गई त्रिज्या से अधिक हो) लेकर, दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को बिंदु H पर प्रतिच्छेद करें।
- किरण AH बनाइए। यह किरण प्रारंभिक बिंदु A पर 22.5° का कोण बनाती है।
(iii) 15° के कोण की रचना:
- पहले, प्रश्न 3(i) के अनुसार, प्रारंभिक बिंदु A पर 30° का कोण ∠EAB बनाइए।
- अब, कोण ∠EAB (जो 30° है) का समद्विभाजन करने के लिए, E और B को केंद्र मानकर और समान त्रिज्या (जो पहले उपयोग की गई त्रिज्या से अधिक हो) लेकर, दो चाप लगाइए जो एक दूसरे को बिंदु F पर प्रतिच्छेद करें।
- किरण AF बनाइए। यह किरण प्रारंभिक बिंदु A पर 15° का कोण बनाती है।
रचना की पुष्टि:
प्रत्येक रचना में, कोणों को बनाने के लिए समद्विभाजन की विधि का उपयोग किया गया है। उदाहरण के लिए, 30° बनाने के लिए 60° का समद्विभाजन किया गया, 22.5° बनाने के लिए 45° का समद्विभाजन किया गया, और 15° बनाने के लिए 30° का समद्विभाजन किया गया। कोण समद्विभाजक प्रमेय के अनुसार, यह प्रक्रिया सही कोणों का निर्माण करती है।
Common mistakes
- चाप बनाते समय परकार की त्रिज्या को बदलना।
- रचना के चरणों का सही क्रम न समझना।
- रचना के औचित्य को स्पष्ट रूप से न लिख पाना।
- मापों को गलत तरीके से विभाजित करना (जैसे 22.5° के लिए)।
Revision tips
- प्रत्येक कोण की रचना के चरणों को स्वयं अभ्यास करें।
- रचना के औचित्य वाले भाग को ध्यान से समझें और याद करें।
- विभिन्न कोणों को बनाने के लिए मूल कोणों (जैसे 60°, 90°) का उपयोग कैसे करें, इस पर ध्यान दें।
- रचना करते समय रूलर और परकार का सटीक उपयोग सुनिश्चित करें।
Practice MCQs
Q1. 90° का कोण बनाने के लिए, हम पहले किस कोण की रचना करते हैं?
Explanation: 90° का कोण बनाने के लिए, हम पहले 60° और 120° के कोण बनाते हैं, और फिर उनके समद्विभाजक से 90° का कोण प्राप्त करते हैं।
Q2. 45° का कोण बनाने के लिए, हम किस कोण का समद्विभाजन करते हैं?
Explanation: 45° का कोण 90° के कोण का आधा होता है, इसलिए हम 90° के कोण का समद्विभाजन करके 45° का कोण बनाते हैं।
Q3. 15° का कोण बनाने के लिए, हमें किन कोणों की रचना करनी होगी?
Explanation: 15° का कोण 30° का आधा होता है। इसलिए, पहले 30° का कोण बनाया जाता है और फिर उसका समद्विभाजन करके 15° का कोण प्राप्त किया जाता है।
Q4. 22.5° का कोण बनाने के लिए, हम किस कोण का समद्विभाजन करते हैं?
Explanation: 22.5° का कोण 45° का आधा होता है। इसलिए, 45° के कोण का समद्विभाजन करके 22.5° का कोण बनाया जाता है।
Q5. रचनाओं में, समान त्रिज्या के चाप बनाने का क्या उद्देश्य है?
Explanation: समान त्रिज्या के चाप बनाने से समबाहु त्रिभुज (60° के लिए) और कोण समद्विभाजक बनाने में मदद मिलती है, जो विभिन्न कोणों की रचना के लिए आवश्यक हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 9 गणित के अध्याय 11 'रचनाएँ' में कौन से मुख्य कोणों की रचना सिखाई गई है?
इस अध्याय में मुख्य रूप से 90°, 45°, 30°, 22.5°, और 15° जैसे कोणों की रचना करना सिखाया गया है।
रचना के औचित्य का क्या अर्थ है?
रचना के औचित्य का अर्थ है कि आपने जो ज्यामितीय रचना की है, वह क्यों सही है, इसके पीछे के गणितीय कारणों को सिद्ध करना।
क्या इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए किया जा सकता है?
हाँ, ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए बहुत उपयोगी हैं क्योंकि ये विस्तृत चरण और औचित्य प्रदान करते हैं, जिससे अवधारणाओं को समझना आसान हो जाता है।
कोणों की रचना के लिए किन उपकरणों का उपयोग किया जाता है?
कोणों की रचना के लिए मुख्य रूप से रूलर (बिना माप वाले किनारे के साथ) और परकार का उपयोग किया जाता है।
45° का कोण बनाने के लिए क्या विधि है?
45° का कोण बनाने के लिए, पहले 90° का कोण बनाया जाता है और फिर उस 90° के कोण को समद्विभाजित किया जाता है।
क्या इन समाधानों में केवल रचना के चरण दिए गए हैं?
नहीं, इन समाधानों में रचना के चरणों के साथ-साथ प्रत्येक रचना के पीछे के गणितीय औचित्य को भी समझाया गया है।
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