कक्षा 9 हिंदी स्पर्श: स्वामी आनंद – शुक्रतारे के समान NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 की हिंदी स्पर्श पुस्तक के पाठ 'स्वामी आनंद – शुक्रतारे के समान' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ गांधीजी के जीवन में महादेव भाई देसाई के अमूल्य योगदान पर प्रकाश डालता है, जो गांधीजी के लिए एक प्रिय सहयोगी और वारिस के समान थे। समाधानों में महादेव भाई की असाधारण लेखन क्षमता, गांधीजी के प्रति उनकी निष्ठा, और उनके द्वारा निभाई गई विभिन्न भूमिकाओं का वर्णन किया गया है। पाठ यह भी बताता है कि कैसे महादेव भाई ने गांधीजी के विचारों को प्रभावी ढंग से संप्रेषित किया और कैसे उनकी अकालिक मृत्यु ने गांधीजी को गहरा सदमा पहुँचाया। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Gadd Khand - Swami Aanand – Shukratare Ke Saman |
Chapter summary
कक्षा 9 हिंदी स्पर्श पुस्तक के पाठ 'स्वामी आनंद – शुक्रतारे के समान' के ये NCERT समाधान महादेव भाई देसाई के जीवन और गांधीजी के साथ उनके संबंधों पर केंद्रित हैं। समाधान महादेव भाई की असाधारण लेखन शैली, गांधीजी के लिए उनके महत्व, और उनके द्वारा निभाई गई विभिन्न भूमिकाओं की व्याख्या करते हैं। इसमें जलियाँवाला बाग हत्याकांड के समय गांधीजी द्वारा उन्हें वारिस घोषित करने का प्रसंग, उनके साहित्यिक अनुवाद कार्य, और उनकी आकस्मिक मृत्यु के कारणों का भी उल्लेख है। ये समाधान छात्रों को पाठ के मुख्य बिंदुओं को समझने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- महादेव भाई देसाई के गांधीजी के जीवन में महत्व को समझना।
- गांधीजी द्वारा महादेव भाई को वारिस कहने के संदर्भ को जानना।
- महादेव भाई की लेखन क्षमता और साहित्यिक योगदान का मूल्यांकन करना।
- जलियाँवाला बाग हत्याकांड और उसके परिणामों को समझना।
- महादेव भाई की आकस्मिक मृत्यु के कारणों का विश्लेषण करना।
Topics covered
Paper topics
- महादेव भाई देसाई का जीवन परिचय
- गांधीजी और महादेव भाई का संबंध
- महादेव भाई की लेखन क्षमता
- महादेव भाई का साहित्यिक योगदान
- जलियाँवाला बाग हत्याकांड
- गांधीजी के वारिस की अवधारणा
- महादेव भाई की आकस्मिक मृत्यु
- स्वामी आनंद का दृष्टिकोण
Important topics
- महादेव भाई देसाई का गांधीजी के जीवन में महत्व
- महादेव भाई की असाधारण लेखन क्षमता
- गांधीजी द्वारा महादेव भाई को वारिस घोषित करना
- महादेव भाई का साहित्यिक अनुवाद कार्य
- जलियाँवाला बाग हत्याकांड का संदर्भ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1:
गांधीजी महादेव भाई देसाई को अपने पुत्र से भी अधिक प्रिय मानते थे। जब महादेव भाई सन् 1917 में गांधीजी के पास पहुँचे, तो गांधीजी ने उन्हें तुरंत पहचान लिया और उन्हें अपने उत्तराधिकारी के रूप में स्वीकार कर लिया। विशेष रूप से, सन् 1919 में जलियाँवाला बाग हत्याकांड के दौरान, जब गांधीजी को पलवल स्टेशन पर गिरफ्तार किया गया था, उसी समय उन्होंने महादेव भाई को अपना वारिस घोषित किया था। यह घोषणा महादेव भाई के प्रति गांधीजी के गहरे विश्वास और स्नेह को दर्शाती है।
प्रश्न 2:
जब अंग्रेज सरकार से पीड़ित लोग गांधीजी से मिलने आते थे, तब महादेव भाई उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुनते थे और उनकी संक्षिप्त टिप्पणियाँ तैयार करते थे। इन टिप्पणियों को वे गांधीजी के समक्ष प्रस्तुत करते थे। इसके अतिरिक्त, वे आने वाले आगंतुकों की गांधीजी के साथ सीधी मुलाकातें भी सुनिश्चित करवाते थे, जिससे आगंतुकों को अपनी बात रखने का अवसर मिलता था और गांधीजी को स्थिति की पूरी जानकारी हो जाती थी।
प्रश्न 3:
महादेव भाई देसाई का साहित्यिक योगदान महत्वपूर्ण था, भले ही उनका मुख्य कार्यक्षेत्र गांधीजी की सेवा करना था। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं जैसे 'चित्रांगदा' और 'विदाई का अभिशाप' (कच-देवयानी की कथा पर आधारित) का अनुवाद किया। इसके साथ ही, उन्होंने शरदचंद्र चट्टोपाध्याय की कहानियों का भी अनुवाद किया। ये अनुवाद उस समय की उनकी साहित्यिक रुचि और क्षमता को दर्शाते हैं, जो गांधीजी के व्यस्त जीवन के बावजूद उन्होंने विकसित की थी।
प्रश्न 4:
महादेव भाई देसाई की अकाल मृत्यु का मुख्य कारण उनके काम का अत्यधिक बोझ और यात्राओं का प्रतिकूल प्रभाव था। वे मगनवाड़ी से सेवाग्राम तक असह्य गर्मी में भी रोज पैदल चलकर लगभग 11 मील की दूरी तय करते थे। इस निरंतर शारीरिक श्रम और अत्यधिक कार्यभार का उनके स्वास्थ्य पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उनकी समय से पहले मृत्यु हो गई।
प्रश्न 5:
जब बड़े-बड़े देशी-विदेशी राजनेता और गणमान्य व्यक्ति गांधीजी से मिलने आते थे, तो महादेव भाई एक कोने में बैठकर पूरी बातचीत को अपनी लंबी लिखावट में नोट कर लेते थे। मुलाकात के बाद, जब आगंतुक अपनी बातचीत को टाइप करवाकर गांधीजी से 'ओके' करवाने लाते थे, तब गांधीजी अक्सर कहते थे कि उन्हें महादेव भाई के लिखे 'नोट' के साथ उसका मिलान अवश्य कर लेना चाहिए। इससे महादेव भाई की सटीकता और गांधीजी द्वारा उन पर रखे गए भरोसे का पता चलता है।
प्रश्न 1:
सन् 1919 में पंजाब में ब्रिटिश फौजी शासन ने भयानक अत्याचार किए। जलियाँवाला बाग में एक निहत्थी आम सभा पर जनरल डायर के आदेश पर अंधाधुंध गोलियाँ चलाई गईं, जिसमें बूढ़े, बच्चे, पुरुष और महिलाएं सभी मारे गए। यह अंग्रेजों द्वारा किया गया सबसे बड़ा नरसंहार था जिसकी पूरे भारत में कड़ी निंदा हुई। इसके अतिरिक्त, पंजाब के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया और कईयों को काला पानी जैसी कठोर सजाएँ दी गईं।
प्रश्न 2:
महादेव भाई देसाई के कई गुणों ने उन्हें समाचार-पत्रों की दुनिया में और व्यक्तिगत रूप से सभी का प्रिय बना दिया था। उनकी बेजोड़ स्तंभ लेखन क्षमता, गहरी चौकसाई, और उच्च ब्रिटिश समाचार-पत्रों की परंपराओं का पालन करने की उनकी क्षमता प्रशंसनीय थी। गांधीजी की शिक्षा के अनुसार, वे कट्टर विरोधियों के साथ भी पूरी सत्यनिष्ठा और विनय-विवेक के साथ विवाद करते थे। इन गुणों के कारण, तीव्र मतभेदों और विरोधी प्रचार के बावजूद, महादेव भाई ने देश-विदेश के सभी समाचार-पत्रों और एंग्लो-इंडियन प्रकाशनों के बीच अपनी एक विशेष जगह बना ली थी।
प्रश्न 3:
महादेव भाई देसाई की लिखावट भारत में अद्वितीय मानी जाती थी। उनके अक्षर अत्यंत सुंदर और सुपाठ्य थे, जिसकी वजह से उन्हें 'खुशनवीश' (सुंदर अक्षर लिखने वाला) कहा जाता था। स्वयं गांधीजी के वाइसराय को भेजे जाने वाले पत्र भी महादेव भाई की लिखावट में ही जाते थे। बड़े-बड़े सिविलियन और गवर्नर भी यह मानते थे कि ब्रिटिश सरकार की सेवाओं में भी महादेव भाई के समान सुंदर अक्षर लिखने वाला कोई दूसरा व्यक्ति खोजना मुश्किल था। उनकी लिखावट की गति और सुंदरता दोनों ही असाधारण थी।
Common mistakes
- महादेव भाई के योगदान को केवल एक सहायक के रूप में देखना, न कि गांधीजी के वारिस के रूप में।
- महादेव भाई की लेखन क्षमता के महत्व को कम आंकना।
- जलियाँवाला बाग हत्याकांड के संदर्भ को ठीक से न समझना।
Revision tips
- महादेव भाई के जीवन से जुड़े मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करें।
- गांधीजी और महादेव भाई के बीच के संबंधों पर विशेष ध्यान दें।
- पाठ में उल्लिखित ऐतिहासिक घटनाओं (जैसे जलियाँवाला बाग हत्याकांड) के महत्व को समझें।
- महादेव भाई की लेखन शैली और साहित्यिक योगदान से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. गांधीजी ने महादेव भाई को अपना वारिस कब कहा था?
Explanation: सन् 1919 में जलियाँवाला बाग हत्याकांड के दिनों में, जब गांधीजी को पलवल स्टेशन पर गिरफ्तार किया गया था, उसी समय उन्होंने महादेव भाई को अपना वारिस कहा था।
Q2. महादेव भाई की लेखन क्षमता की क्या विशेषता थी?
Explanation: महादेव भाई की लिखावट अत्यंत तेज और सुंदर थी, जिसके कारण भारत में उनके अक्षरों का कोई सानी नहीं था। वाइसराय को जाने वाले गांधीजी के पत्र भी उन्हीं की लिखावट में जाते थे।
Q3. महादेव भाई की अकाल मृत्यु का मुख्य कारण क्या था?
Explanation: मगनवाड़ी से सेवाग्राम तक रोज 11 मील पैदल चलने और अन्य कार्यों के प्रतिकूल प्रभाव के कारण महादेव भाई की अकाल मृत्यु हुई।
Q4. गांधीजी से मिलने आने वाले आगंतुकों की बातों की संक्षिप्त टिप्पणियाँ कौन तैयार करता था?
Explanation: जब अंग्रेज पीड़ित दल गांधीजी से मिलने आते थे, तब महादेव भाई उनकी बातों की संक्षिप्त टिप्पणियाँ तैयार करके गांधीजी के सामने रखते थे।
Q5. महादेव भाई ने किन लेखकों के साहित्य का अनुवाद किया?
Explanation: महादेव भाई ने टैगोर की 'चित्रांगदा' और 'विदाई का अभिशाप' तथा शरदचंद्र की कहानियों का अनुवाद किया था।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 9 के हिंदी विषय के लिए है, जो स्पर्श पुस्तक के पाठ 'स्वामी आनंद – शुक्रतारे के समान' पर आधारित है।
इस पाठ में मुख्य रूप से किस व्यक्ति के बारे में बताया गया है?
इस पाठ में मुख्य रूप से महादेव भाई देसाई के जीवन, उनके गांधीजी के साथ संबंधों और उनके असाधारण योगदान के बारे में बताया गया है।
गांधीजी ने महादेव भाई को अपना वारिस क्यों कहा था?
गांधीजी महादेव भाई को अपने पुत्र से भी अधिक प्रिय मानते थे और उनकी असाधारण निष्ठा, क्षमता और गांधीजी के कार्यों के प्रति समर्पण को देखते हुए, उन्होंने उन्हें अपना वारिस कहा था।
महादेव भाई की लेखन शैली की क्या विशेषता थी?
महादेव भाई की लिखावट बहुत तेज और सुंदर थी, जिसे भारत में अद्वितीय माना जाता था। वे गांधीजी के पत्रों और महत्वपूर्ण बैठकों के नोट्स लिखने में माहिर थे।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?
यह समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ प्रदान करता है, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करता है, और परीक्षा की तैयारी में मदद करता है।
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