CBSE Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 7: Mahadevi Verma NCERT Solutions

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CBSE Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 7 delves into the life and literary contributions of Mahadevi Verma. This chapter offers a poignant look at the socio-historical realities faced by women in the early 20th century, drawing parallels and contrasts with present-day scenarios. Students will engage with critical themes like societal attitudes towards girl children, the indispensable role of education, and the ongoing journey towards gender equality. The narrative also weaves in personal reflections on overcoming learning obstacles, the dynamics of family bonds, and the vital influence of cultural and linguistic diversity within educational settings. These solutions aim to illuminate Mahadevi Verma's personal journey and her insightful observations, providing students with a deeper comprehension of the chapter's essence and bolstering their exam readiness through clear, analytical explanations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
SubjectHindi Kshitiz
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 7

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitiz Chapter 7, centered on Mahadevi Verma, offers insights into the societal conditions of women during her formative years and contrasts them with present-day scenarios. It covers her personal reflections on upbringing, education, and family, highlighting the changing perspectives on girl children. The solutions also explore themes of inter-community relations and the multilingual environment of educational institutions, providing a comprehensive understanding of the chapter's content for revision.

Learning outcomes

  • Understand the historical status of girls in early 20th century India.
  • Analyze the changes in societal attitudes towards the birth of a girl child.
  • Identify Mahadevi Verma's mother's personality traits and influences.
  • Appreciate the evolution of inter-community relationships.
  • Describe the multilingual environment of educational institutions.
  • Reflect on personal experiences in a memoir style.

Topics covered

Paper topics

  • Mahadevi Verma's early life and experiences
  • Societal status of girls in early 20th century India
  • Changes in attitudes towards girl child birth
  • Influence of Mahadevi Verma's mother
  • Inter-community relations (Hindu-Muslim)
  • Multilingual educational environments
  • Memoir writing style
  • Personal reflections on societal issues

Important topics

  • Historical context of girls' status
  • Mahadevi Verma's mother's influence
  • Evolution of societal attitudes
  • Inter-community harmony
  • Memoir writing

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Questions and Solutions

Question 1

'मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है।' इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि – उस समय लड़कियों की दशा कैसी थी ?
Solution:

यह कथन महादेवी वर्मा के जन्म के समय, जो कि सन् 1900 के आसपास का समय था, भारत में लड़कियों की दयनीय सामाजिक स्थिति को दर्शाता है। उस दौर में लड़कियों को समाज में बहुत कम महत्व दिया जाता था। कई बार तो उन्हें जन्म लेते ही मार दिया जाता था क्योंकि उन्हें परिवार पर बोझ समझा जाता था। यदि किसी घर में लड़की का जन्म होता था, तो उसे खुशी का अवसर नहीं माना जाता था, बल्कि मातम जैसा माहौल हो जाता था। इसके विपरीत, लड़के के जन्म पर पूरे घर में उत्सव मनाया जाता था। महादेवी वर्मा अपने संस्मरण में बताती हैं कि बैंड-बाजे और नौकर-चाकर भी लड़के के जन्म की प्रतीक्षा में खुश रहते थे और लड़की के जन्म की खबर मिलते ही चुपचाप चले जाते थे। ऐसे सामाजिक वातावरण में लड़कियों के पालन-पोषण, शिक्षा और भविष्य पर ध्यान देना तो दूर, उनके जन्म को ही अशुभ माना जाता था। समाज में बाल-विवाह, दहेज प्रथा और सती प्रथा जैसी अनेक कुरीतियाँ भी व्याप्त थीं, जो लड़कियों के जीवन को और भी कठिन बना देती थीं।

Question 2

'मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है। इस कथन के आलोक में आप यह पता लगाएँ कि – लड़कियों के जन्म के संबंध में आज कैसी परिस्थितियाँ हैं ?
Solution:

आज लड़कियों के जन्म के संबंध में परिस्थितियाँ पहले की तुलना में काफी बदली हैं, हालाँकि पूरी तरह से समानता नहीं आई है। शिक्षा के प्रसार और सामाजिक जागरूकता के कारण लोगों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन आया है। अब लड़का-लड़की के बीच के अंतर को कम करने का प्रयास किया जा रहा है और कई माता-पिता अपनी बेटियों को बेटों के समान ही शिक्षा और अवसर प्रदान कर रहे हैं। हालाँकि, भेदभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आज भी कुछ स्थानों पर कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर समस्याएँ मौजूद हैं, जिसके कारण सरकार को इसके विरुद्ध कड़े कानून बनाने पड़े हैं। समाज में अभी भी लड़कियों के प्रति संवेदनशीलता और समानता लाने के लिए और अधिक प्रयासों की आवश्यकता है।

Question 3

लेखिका उर्दू-फ़ारसी क्यों नहीं सीख पाई ?
Solution:

लेखिका महादेवी वर्मा को उर्दू-फ़ारसी सीखने में बिल्कुल भी रुचि नहीं थी। यद्यपि उनके पिता चाहते थे कि वे यह भाषा सीखें, लेकिन लेखिका की इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी और न ही यह उनकी क्षमता के अनुसार था। जब उर्दू पढ़ाने के लिए मौलवी साहब घर आए, तो लेखिका ने उनसे बचने के लिए चारपाई के नीचे छिपने जैसा कदम उठाया। उनकी अरुचि के कारण वे उर्दू-फ़ारसी सीखने में सफल नहीं हो पाईं।

Question 4

लेखिका ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं का उल्लेख किया है ?
Solution:

महादेवी वर्मा ने अपनी माँ के व्यक्तित्व की कई विशेषताओं का उल्लेख किया है। वे एक अत्यंत धार्मिक स्वभाव की महिला थीं और ईश्वर में गहरी आस्था रखती थीं। वे नित्य पूजा-पाठ करती थीं। सुबह वे 'कृपानिधान पंछी बन बोले' जैसे पद गाती थीं और शाम को मीरा के पद गाया करती थीं। इसके अतिरिक्त, वे स्वयं भी लेखन कार्य करती थीं। उन्हें हिंदी और संस्कृत का अच्छा ज्ञान था, जिसका प्रभाव महादेवी वर्मा पर भी पड़ा। लेखिका ने अपनी माँ के हिंदी प्रेम, गायन और लेखन के शौक का विशेष रूप से वर्णन किया है, जो उनके साहित्यिक संस्कारों का आधार बने।

Question 5

जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को लेखिका ने आज के संदर्भ में स्वप्न जैसे क्यों कहा है ?
Solution:

लेखिका ने जवारा के नवाब के साथ अपने पारिवारिक संबंधों को आज के संदर्भ में स्वप्न जैसा इसलिए कहा है क्योंकि उस समय हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच आज जैसा भेदभाव या दूरी नहीं थी। उनके संबंध इतने गहरे और आत्मीय थे कि जवारा की बेगम स्वयं को महादेवी की ताई मानती थीं और उन्होंने ही लेखिका के भाई का नामकरण भी किया था। वे हर त्योहार पर एक-दूसरे के साथ घुलमिल जाती थीं। बेगम साहिबा के घर में अवधी भाषा बोली जाती थी, लेकिन हिंदी और उर्दू का भी प्रयोग होता था। लेखिका का आशय यह है कि उस समय लोगों के बीच जो आपसी मेलजोल, निकटता और अपनत्व था, वह आज के समय में लगभग समाप्त हो गया है और ऐसे आत्मीय संबंधों की कल्पना करना भी एक स्वप्न जैसा लगता है।

Question 6

ज़ेबुन्निसा महादेवी वर्मा के लिए बहुत काम करती थी। ज़ेबुन्निसा के स्थान पर यदि आप होतीं तो महादेवी से आपकी क्या अपेक्षा होती ?
Solution:

यदि मैं ज़ेबुन्निसा के स्थान पर होती और महादेवी वर्मा की सहायता करती, तो मेरी उनसे कुछ निम्नलिखित अपेक्षाएँ होतीं:

  1. प्रेम और आदर: मैं उनसे स्नेहपूर्ण व्यवहार और आदर की अपेक्षा करती, जैसा कि किसी भी सहायक को अपने मालिक से उम्मीद होती है।
  2. पढ़ाई में सहायता: चूँकि मैं उनकी सहायता के लिए होती, तो मैं उनसे अपनी पढ़ाई या किसी अन्य कार्य में उनकी ओर से कुछ मदद की अपेक्षा रखती।
  3. रचनात्मक प्रोत्साहन: मैं उनसे उनकी स्वरचित कविताएँ या रचनाएँ सुनने की अपेक्षा रखती, ताकि मुझे उनकी प्रतिभा से प्रेरणा मिल सके।
  4. लेखन प्रोत्साहन: मैं उनसे कविता या लेखन के क्षेत्र में मुझे प्रोत्साहित करने की भी अपेक्षा रखती, ताकि मैं भी अपनी रचनात्मकता को निखार सकूँ।

Question 7

महादेवी वर्मा को काव्य प्रतियोगिता में चाँदी का कटोरा मिला था। अनुमान लगाइए कि आपको इस तरह का कोई पुरस्कार मिला हो और वह देशहित में या किसी आपदा निवारण के काम में देना पड़े तो आप कैसा अनुभव करेंगे / करेंगी ?
Solution:

यदि मुझे देशहित या किसी आपदा निवारण के लिए अपना पुरस्कार, जैसे कि चाँदी का कटोरा, देना पड़े, तो मुझे अत्यंत गर्व और संतोष का अनुभव होगा। यद्यपि किसी भी पुरस्कार से व्यक्तिगत लगाव होता है और वह मेहनत का प्रतीक होता है, परन्तु देश प्रेम और मानव सेवा का महत्व किसी भी व्यक्तिगत वस्तु से कहीं अधिक होता है। ऐसी स्थिति में, मैं बिना किसी हिचकिचाहट के अपना पुरस्कार देश के कल्याण या जरूरतमंदों की सहायता के लिए समर्पित कर दूँगी। यह अनुभव मुझे आत्मिक संतुष्टि देगा कि मैंने अपने पुरस्कार का उपयोग किसी नेक कार्य के लिए किया, जो मेरे लिए किसी भी भौतिक पुरस्कार से बढ़कर होगा।

Question 8

लेखिका ने छात्रावास के जिस बहुभाषी परिवेश की चर्चा की है उसे अपनी मातृभाषा में लिखिए।
Solution:

मेरी मातृभाषा हिंदी है। लेखिका महादेवी वर्मा ने अपने संस्मरण में क्रास्थवेट गर्ल्स कॉलेज, इलाहाबाद का वर्णन किया है, जहाँ उन्होंने पाँचवीं कक्षा में प्रवेश लिया था। यह कॉलेज एक बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक परिवेश का केंद्र था। यहाँ देश के विभिन्न प्रांतों से छात्राएँ पढ़ने आती थीं, जिसके कारण छात्रावास में एक साथ कई भाषाएँ और बोलियाँ सुनने को मिलती थीं। इनमें हिंदी, मराठी, अवधी, बुंदेली और ब्रजभाषा जैसी भाषाएँ शामिल थीं। सभी छात्राएँ हिंदी और उर्दू का अध्ययन भी करती थीं। इस प्रकार, छात्रावास का वातावरण विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के मेलजोल का एक सुंदर उदाहरण था, जहाँ छात्राएँ एक-दूसरे की भाषाओं और संस्कृतियों से परिचित होती थीं।

Question 9

महादेवी जी के इस संस्मरण को पढ़ते हुए आपके मानस-पटल पर भी अपने बचपन की स्मृति उभरकर आई होगी, उसे संस्मरण शैली में लिखिए।
Solution:

बचपन की स्मृतियाँ अक्सर अनमोल होती हैं, और महादेवी वर्मा जी के संस्मरण को पढ़कर मुझे भी अपने बचपन की एक ऐसी ही अविस्मरणीय घटना याद आ गई। यह घटना पाठशाला से घर लौटते समय की है। मैं और मेरा एक मित्र सड़क पार कर रहे थे। मैंने सावधानी से सड़क पार कर ली, लेकिन तभी सिग्नल हरा हो गया और गाड़ियाँ तेज़ी से आने लगीं। मेरे मित्र ने लापरवाही से, बिना दोनों ओर देखे ही सड़क पार करना शुरू कर दिया। कार चला रहे व्यक्ति ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह समय रहते सचेत नहीं हो पाया। कार चालक ने अचानक ब्रेक लगाने और कार को बचाने के प्रयास में उसे घुमाया, जिसके कारण कार सीधे हमारे विद्यालय के पास एक पेड़ से जा टकराई। इस टक्कर में कार चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। सौभाग्य से, पास के अस्पताल की वजह से उसे समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकी और उसकी जान बच गई। इस घटना ने मुझे और मेरे मित्र को झकझोर दिया। उस दिन के बाद से मैंने कभी भी सड़क पार करते समय लापरवाही नहीं बरती। यह घटना मेरे लिए एक बड़ा सबक बन गई और आज भी मेरे ज़हन में ताज़ा है।

Question 10

महादेवी ने कवि-सम्मेलनों में कविता-पाठ के लिए अपना नाम बुलाए जाने से पहले होने वाली बेचैनी का जिक्र किया है। अपने विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय आपको भी ऐसा अनुभव हुआ होगा, अपने अनुभव को लिखिए।
Solution:

महादेवी वर्मा जी की तरह, मुझे भी अपने विद्यालय में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते समय मंच पर अपना नाम पुकारे जाने से पहले एक विशेष प्रकार की बेचैनी और घबराहट का अनुभव होता था। जब मैं किसी कविता पाठ या नाटक में भाग लेता/लेती थी, तो मंच पर जाने से पहले मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगता था। मन में यह डर लगा रहता था कि कहीं मैं मंच पर जाकर सब कुछ भूल न जाऊँ, या कहीं कोई गलती न कर दूँ। दर्शकों की भीड़ और जजों की उपस्थिति से घबराहट और बढ़ जाती थी। हालाँकि, जैसे ही मेरा नाम पुकारा जाता और मैं मंच पर कदम रखता/रखती, एक अजीब सी ऊर्जा महसूस होती। धीरे-धीरे, मैं अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करता/करती और घबराहट कम हो जाती। प्रदर्शन के बाद मिलने वाली तालियाँ और प्रशंसा इस सारी बेचैनी को भुला देती थी और एक अद्भुत संतोष का अनुभव होता था। यह अनुभव हमेशा रोमांचक और यादगार रहा है।

Common mistakes

  • Confusing historical context with present-day situations.
  • Not elaborating on personal experiences in memoir writing.
  • Failing to connect personal expectations with the role of Zebunnisa.
  • Underestimating the emotional impact of donating a prize for a cause.

Revision tips

  • Focus on the contrast between past and present societal norms for girls.
  • Pay attention to the descriptions of Mahadevi Verma's mother and her influences.
  • Practice writing personal anecdotes in a memoir style, as demonstrated in the solutions.
  • Understand the significance of inter-community harmony depicted in the chapter.

Practice MCQs

Q1. महादेवी वर्मा के अनुसार, उनके जन्म के समय लड़कियों की स्थिति कैसी थी?

Q2. लेखिका को उर्दू-फ़ारसी सीखने में रुचि क्यों नहीं थी?

Q3. महादेवी वर्मा की माता किस पद का गायन करती थीं?

Q4. जवारा के नवाब के साथ महादेवी वर्मा के संबंध कैसे थे?

Q5. क्रास्थवेट गर्ल्स कॉलेज में छात्रावास का परिवेश कैसा था?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह समाधान कक्षा 9 के हिंदी क्षितिज के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 7 पर केंद्रित हैं।

अध्याय 7 में महादेवी वर्मा के जीवन के किन पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है?

अध्याय 7 में महादेवी वर्मा के बचपन, उनके जन्म के समय समाज में लड़कियों की स्थिति, उनकी माँ के व्यक्तित्व और पारिवारिक संबंधों जैसे पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है।

क्या ये समाधान आज की लड़कियों की स्थिति के बारे में बताते हैं?

हाँ, समाधान आज की लड़कियों की स्थिति की तुलना उस समय से करते हैं, शिक्षा के प्रसार और लिंग समानता की दिशा में हुए बदलावों पर चर्चा करते हैं।

महादेवी वर्मा को उर्दू-फ़ारसी सीखने में क्या कठिनाई हुई?

महादेवी वर्मा को उर्दू-फ़ारसी में कोई रुचि नहीं थी, इसलिए उन्होंने इसे सीखने का प्रयास नहीं किया और मौलवी साहब के आने पर छिप गईं।

जवारा के नवाब के साथ महादेवी वर्मा के पारिवारिक संबंध कैसे थे?

उनके संबंध बहुत आत्मीय थे, जवारा की बेगम उन्हें अपनी ताई मानती थीं और त्योहारों पर घुलमिल जाती थीं, जो आज के संदर्भ में स्वप्न जैसा लगता है।

छात्रावास के बहुभाषी परिवेश का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि छात्रावास में विभिन्न भाषाओं और बोलियों (जैसे हिंदी, मराठी, अवधी, बुंदेली, ब्रजभाषा) का प्रयोग होता था, जिससे एक मिश्रित सांस्कृतिक वातावरण बनता था।

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