कक्षा 9 हिंदी अभ्यासवान् भाव: अध्याय 9 समास NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 के हिंदी विषय के 'अभ्यासवान् भाव' पुस्तक के अध्याय 9, 'समास' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें छात्रों को विभिन्न प्रकार के समासों, जैसे तत्पुरुष, द्विगु और द्वंद्व समास, को समझने में मदद करने के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण शामिल हैं। समाधानों में शब्दों का विग्रह (विच्छेद) करना और समस्त पदों का निर्माण करना सिखाया गया है, साथ ही प्रत्येक समास के प्रकार की पहचान भी कराई गई है। यह अध्याय छात्रों को संस्कृत व्याकरण के महत्वपूर्ण पहलू को समझने में सहायता करता है, जो भाषा की संक्षिप्तता और अभिव्यक्ति की सुंदरता को बढ़ाता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए चरण-दर-चरण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Abhyasvan Bhav |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 9 |
Chapter summary
कक्षा 9 के लिए 'अभ्यासवान् भाव' पुस्तक के अध्याय 9 'समास' के ये NCERT समाधान छात्रों को समास की अवधारणा को समझने में मदद करते हैं। इसमें तत्पुरुष, द्विगु और द्वंद्व समासों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधानों में शब्दों का विग्रह करके समास का नाम बताना और दिए गए विग्रह से समस्त पद बनाकर समास का नाम लिखना सिखाया गया है। यह छात्रों को संस्कृत व्याकरण के इस महत्वपूर्ण भाग में निपुणता प्राप्त करने में सहायता करता है।
Learning outcomes
- समास की परिभाषा और प्रकारों को समझना।
- दिए गए समस्त पदों का विग्रह करना और समास का नाम बताना।
- दिए गए विग्रह से समस्त पद का निर्माण करना और समास का नाम बताना।
- तत्पुरुष, द्विगु और द्वंद्व समासों के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- संस्कृत भाषा में संक्षिप्त अभिव्यक्ति के महत्व को समझना।
Topics covered
Paper topics
- समास की परिभाषा
- समास के प्रकार
- तत्पुरुष समास
- द्विगु समास
- द्वंद्व समास
- समास विग्रह
- समस्त पद निर्माण
- संस्कृत व्याकरण
Important topics
- तत्पुरुष समास के भेद
- द्विगु समास की पहचान
- द्वंद्व समास के प्रकार
- समास विग्रह के नियम
- समस्त पद बनाने की प्रक्रिया
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
समस्तपदम्
विग्रह: नाम विद्यालय:
विद्यायाः आलयः
तत्परुष
i. सप्तर्षि:
......
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ii. खलसज्जनौ
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iii. गृहोद्याने
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iv. विभवहीना:
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चतुभुजम् V. vi. पत्रपुष्पे
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vii.
लौहघ
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खगोत्तम:
viii.
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ix. सुखद्:ख
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त्रिलोकी Χ. .......................................
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यहाँ दिए गए समस्त पदों का विग्रह और उनके समास के नाम निम्नलिखित हैं:
-
सप्तर्षि:
- विग्रह: सप्तानाम् ऋषीणाम् समाहारः
- नाम: द्विगुः
यह द्विगु समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें पहला पद 'सप्त' (सात) संख्यावाची है और यह ऋषियों के समूह का बोध कराता है।
-
खलसज्जनौ
- विग्रह: खलः च सज्जनः च
- नाम: द्वंद्वः
यह द्वंद्व समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें दोनों पद 'खल' (बुरा) और 'सज्जन' (अच्छा) प्रधान हैं और उनके बीच 'च' (और) का अर्थ है।
-
गृहोद्याने
- विग्रह: गृहस्य उद्याने
- नाम: षष्ठी तत्पुरुषः
यह षष्ठी तत्पुरुष समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें 'गृहस्य' पद में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग हुआ है और उत्तरपद 'उद्याने' प्रधान है।
-
विभवहीना:
- विग्रह: विभवैः हीनाः
- नाम: तृतीया तत्पुरुषः
यह तृतीया तत्पुरुष समास का उदाहरण है क्योंकि 'विभवैः' पद में तृतीया विभक्ति का प्रयोग हुआ है और यह 'हीनाः' (रहित) पद से संबंधित है।
-
चतुभुजम्
- विग्रह: चतुर्णाम् भुजानाम् समाहारः
- नाम: द्विगुः
यह द्विगु समास का उदाहरण है क्योंकि पहला पद 'चतुर्' (चार) संख्यावाची है और यह भुजाओं के समूह का बोध कराता है।
-
पत्रपुष्पे
- विग्रह: पत्रम् च पुष्पम् च
- नाम: द्वंद्वः
यह द्वंद्व समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें 'पत्रम्' (पत्ता) और 'पुष्पम्' (फूल) दोनों पद प्रधान हैं और उनके बीच 'च' (और) का अर्थ है।
-
लौहघटिता
- विग्रह: लौहेन घटिता
- नाम: तृतीया तत्पुरुषः
यह तृतीया तत्पुरुष समास का उदाहरण है क्योंकि 'लौहेन' पद में तृतीया विभक्ति का प्रयोग हुआ है और यह 'घटिता' (बनी हुई) पद से संबंधित है।
-
खगोत्तम:
- विग्रह: खगेषु उत्तमः
- नाम: सप्तमी तत्पुरुषः
यह सप्तमी तत्पुरुष समास का उदाहरण है क्योंकि 'खगेषु' पद में सप्तमी विभक्ति का प्रयोग हुआ है और यह 'उत्तमः' (श्रेष्ठ) पद से संबंधित है।
-
सुखदुःख
- विग्रह: सुखम् च दुःखम् च
- नाम: द्वंद्वः
यह द्वंद्व समास का उदाहरण है क्योंकि इसमें 'सुखम्' (सुख) और 'दुःखम्' (दुःख) दोनों पद प्रधान हैं और उनके बीच 'च' (और) का अर्थ है।
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त्रिलोकी
- विग्रह: त्रयाणाम् भुवनानाम् समाहारः
- नाम: द्विगुः
यह द्विगु समास का उदाहरण है क्योंकि पहला पद 'त्रयाणाम्' (तीन) संख्यावाची है और यह भुवनों (लोकों) के समूह का बोध कराता है।
प्रश्न 2
विग्रह: नाम i. सप्तानां पदानां समाहार:
.......................................
....................................... ii. .......................................
परेषाम उपकार:
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iii.
राम: च लक्ष्मण: च
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iv. न पेयम्
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v. धर्म: च अर्थ: च
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vi. काम: च मोक्ष: च
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vii. पञ्चानां वटानां समाहार:
.......................................
................................
viii. मातु: गृह
...........
.......................................
.......................................
ix. न इष्टम्
x. त्रयाणां भ्वन
.......................................
...........
xi. लाभ: च अलाभ: च
.......................................
.......................................
यहाँ दिए गए विग्रहों से समस्त पद और उनके समास के नाम निम्नलिखित हैं:
-
विग्रह: सप्तानां पदानां समाहार:
- समस्तपदम्: सप्तपदम्
- नाम: द्विगुः
यह द्विगु समास है क्योंकि 'सप्तानाम्' (सात) संख्यावाची है और यह पदों के समूह का बोध कराता है।
-
विग्रह: परेषाम् उपकार:
- समस्तपदम्: परोपकार:
- नाम: षष्ठी तत्पुरुषः
यह षष्ठी तत्पुरुष समास है क्योंकि 'पर' शब्द के साथ षष्ठी विभक्ति का प्रयोग हुआ है और 'उपकार' शब्द प्रधान है।
-
विग्रह: राम: च लक्ष्मण: च
- समस्तपदम्: रामलक्ष्मणौ
- नाम: द्वंद्वः
यह द्वंद्व समास है क्योंकि 'राम' और 'लक्ष्मण' दोनों पद प्रधान हैं और उनके बीच 'च' (और) का अर्थ है।
-
विग्रह: न पेयम्
- समस्तपदम्: अपेयम्
- नाम: नञ् तत्पुरुषः
यह नञ् तत्पुरुष समास है क्योंकि इसमें निषेध का बोध कराने वाला 'न' (अ) उपसर्ग लगा है और यह 'पेयम्' (पीने योग्य) का विपरीत अर्थ दे रहा है।
-
विग्रह: धर्म: च अर्थ: च
- समस्तपदम्: धर्माथौ
- नाम: द्वंद्वः
यह द्वंद्व समास है क्योंकि 'धर्म' और 'अर्थ' दोनों पद प्रधान हैं और उनके बीच 'च' (और) का अर्थ है।
-
विग्रह: काम: च मोक्ष: च
- समस्तपदम्: काममोक्षौ
- नाम: द्वंद्वः
यह द्वंद्व समास है क्योंकि 'काम' और 'मोक्ष' दोनों पद प्रधान हैं और उनके बीच 'च' (और) का अर्थ है।
-
विग्रह: पञ्चानां वटानां समाहार:
- समस्तपदम्: पञ्चवटी
- नाम: द्विगुः
यह द्विगु समास है क्योंकि 'पञ्चानाम्' (पाँच) संख्यावाची है और यह वटों (पेड़ों) के समूह का बोध कराता है।
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विग्रह: मातु: गृहे
- समस्तपदम्: मातृगृहे
- नाम: षष्ठी तत्पुरुषः
यह षष्ठी तत्पुरुष समास है क्योंकि 'मातुः' (माँ के) में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग हुआ है और यह 'गृहे' (घर) से संबंधित है।
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विग्रह: न इष्टम्
- समस्तपदम्: अनिष्टम्
- नाम: नञ् तत्पुरुषः
यह नञ् तत्पुरुष समास है क्योंकि इसमें निषेध का बोध कराने वाला 'न' (अन्) उपसर्ग लगा है और यह 'इष्टम्' (प्रिय) का विपरीत अर्थ दे रहा है।
-
विग्रह: त्रयाणां भुवनानां समाहार:
- समस्तपदम्: त्रिभुवनम्
- नाम: द्विगुः
यह द्विगु समास है क्योंकि 'त्रयाणाम्' (तीन) संख्यावाची है और यह भुवनों (लोकों) के समूह का बोध कराता है।
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विग्रह: लाभ: च अलाभ: च
- समस्तपदम्: लाभालाभौ
- नाम: द्वंद्वः
यह द्वंद्व समास है क्योंकि 'लाभ' और 'अलाभ' दोनों पद प्रधान हैं और उनके बीच 'च' (और) का अर्थ है।
Common mistakes
- समास विग्रह करते समय विभक्ति चिह्नों का गलत प्रयोग करना।
- समास के प्रकारों को पहचानने में भ्रमित होना।
- समस्त पद बनाते समय शब्दों के सही क्रम को न समझना।
- द्विगु समास में संख्यावाची शब्द और समाहार को सही ढंग से न जोड़ पाना।
Revision tips
- प्रत्येक समास के उदाहरणों को बार-बार लिखकर अभ्यास करें।
- समास विग्रह और समस्त पद निर्माण के नियमों को सारणीबद्ध करें।
- पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यासों को हल करें और अपने उत्तरों का मिलान करें।
- कठिन लगने वाले समासों के लिए अतिरिक्त उदाहरण खोजें और उनका विश्लेषण करें।
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से 'विद्यालय' का विग्रह क्या है?
Explanation: विद्यालय का अर्थ है 'विद्या के लिए आलय' (घर)। यह एक तत्पुरुष समास का उदाहरण है।
Q2. 'सप्तर्षि' में कौन सा समास है?
Explanation: 'सप्तर्षि' का अर्थ है 'सात ऋषियों का समूह'। इसमें पूर्वपद संख्यावाची है, इसलिए यह द्विगु समास है।
Q3. 'खलसज्जनौ' का विग्रह क्या है?
Explanation: 'खलसज्जनौ' का विग्रह 'खलः च सज्जनः च' होता है, जो द्वंद्व समास का उदाहरण है।
Q4. 'गृहोद्याने' में कौन सा समास है?
Explanation: 'गृहोद्याने' का विग्रह 'गृहस्य उद्याने' है। यहाँ 'गृहस्य' में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग हुआ है, जो षष्ठी तत्पुरुष समास को दर्शाता है।
Q5. 'चतुर्भुजम्' का विग्रह क्या है?
Explanation: 'चतुर्भुजम्' का विग्रह 'चतुर्णाम् भुजानाम् समाहारः' है, जिसका अर्थ है 'चार भुजाओं का समूह'। यह द्विगु समास है।
Q6. 'लौहघटिता' में कौन सा समास है?
Explanation: 'लौहघटिता' का विग्रह 'लौहेन घटिता' है। यहाँ 'लौहेन' में तृतीया विभक्ति का प्रयोग हुआ है, जो तृतीया तत्पुरुष समास को दर्शाता है।
Q7. 'सुखदुःख' का विग्रह क्या है?
Explanation: 'सुखदुःख' का विग्रह 'सुखम् च दुःखम् च' होता है, जो द्वंद्व समास का उदाहरण है।
Q8. 'त्रिलोकी' में कौन सा समास है?
Explanation: 'त्रिलोकी' का अर्थ है 'तीन लोकों का समूह'। पूर्वपद संख्यावाची 'त्रि' है, इसलिए यह द्विगु समास है।
Frequently asked questions
कक्षा 9 के लिए 'अभ्यासवान् भाव' पुस्तक में समास अध्याय का क्या महत्व है?
यह अध्याय छात्रों को संस्कृत भाषा में शब्दों को संक्षिप्त करने की कला सिखाता है, जो भाषा की अभिव्यक्ति को अधिक प्रभावशाली और सुंदर बनाता है। यह व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
तत्पुरुष, द्विगु और द्वंद्व समास में मुख्य अंतर क्या है?
तत्पुरुष समास में उत्तरपद प्रधान होता है और पूर्वपद में विभक्ति का लोप होता है। द्विगु समास में पूर्वपद संख्यावाची होता है और उत्तरपद प्रधान होता है। द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और उनके बीच 'और' का अर्थ निहित होता है।
समास विग्रह का क्या अर्थ है?
समास विग्रह का अर्थ है समस्त पद को उसके घटक शब्दों में अलग-अलग करना और उनके बीच के संबंध को स्पष्ट करना, जिसमें विभक्ति चिह्नों का प्रयोग किया जाता है।
समस्त पद बनाने की प्रक्रिया क्या है?
समस्त पद बनाने की प्रक्रिया में दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया शब्द बनाना शामिल है, जिसमें विभक्ति चिह्नों का लोप हो जाता है और अर्थ की दृष्टि से एक नया पद बनता है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण और सही उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को समास की अवधारणाओं को समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को हल करने में मदद मिलती है।
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