कक्षा 9 अभ्यासवान् भव: अध्याय 8 - उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 के छात्रों के लिए अभ्यासवान् भव पुस्तक के अध्याय 8, 'उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय उपसर्गों के प्रयोग और उनसे नए शब्दों के निर्माण की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। समाधानों में उपसर्गों को मूल धातुओं के साथ जोड़कर नए शब्द बनाने के उदाहरण दिए गए हैं, जैसे 'वि', 'सु', 'अप', और 'दुर्' उपसर्गों का प्रयोग। इसके अतिरिक्त, विभिन्न धातुओं और लकारों (जैसे लट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्) के साथ उपसर्गों को जोड़कर रिक्त स्थानों को भरने का अभ्यास भी शामिल है। यह विस्तृत समाधान छात्रों को उपसर्गों की अवधारणा को गहराई से समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में सहायता करेगा।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | Abhyasvan Bhav |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 8 |
Chapter summary
अध्याय 8, 'उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः', उपसर्गों के महत्व और उनके प्रयोग पर केंद्रित है। यह छात्रों को सिखाता है कि कैसे उपसर्गों को मूल शब्दों या धातुओं के साथ जोड़कर नए अर्थ वाले शब्द बनाए जा सकते हैं। समाधानों में 'वि', 'सु', 'अप', 'दुर्' जैसे उपसर्गों से बने शब्दों के उदाहरण और विभिन्न क्रियाओं के साथ उनके प्रयोग का अभ्यास शामिल है। यह अध्याय छात्रों को संस्कृत व्याकरण में उपसर्गों की भूमिका को समझने में मदद करता है।
Learning outcomes
- उपसर्गों को पहचानना और उनका अर्थ समझना।
- दिए गए उपसर्गों का प्रयोग करके नए शब्द बनाना।
- विभिन्न धातुओं और कालों के साथ उपसर्गों का सही प्रयोग करना।
- रिक्त स्थानों को उचित उपसर्ग-युक्त क्रिया रूपों से भरना।
- संस्कृत में शब्द-निर्माण की प्रक्रिया को समझना।
Topics covered
Paper topics
- उपसर्ग
- शब्द-निर्माण
- उपसर्ग 'वि'
- उपसर्ग 'सु'
- उपसर्ग 'अप'
- उपसर्ग 'दुर्'
- धातु रूप
- लट् लकार
- लङ् लकार
- लोट् लकार
- विधिलिङ् लकार
- संस्कृत व्याकरण
Important topics
- उपसर्गों का अर्थ और प्रयोग
- उपसर्गों से नए शब्द बनाना
- विभिन्न लकारों में उपसर्ग-युक्त क्रिया रूपों का प्रयोग
- रिक्त स्थानों की पूर्ति
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
दिए गए उपसर्गों (वि, सु, अप, दुर्) का प्रयोग करके नए शब्द बनाएँ।
उपसर्गों को मूल शब्दों या धातुओं के साथ जोड़कर नए शब्द बनाने की प्रक्रिया इस प्रकार है:
उपसर्ग 'वि' के साथ:
- वि + भाति = विभाति
- वि + नम्यति = विनश्यति
- वि + शेषः = विशेषः
- वि + कारः = विकारः
- वि + हारः = विहारः
- वि + वादः = विवादः
- वि + हाय = विहाय
उपसर्ग 'सु' के साथ:
- सु + कन्या = सुकन्या
- सु + गन्धः = सुगन्धः
- सु + बुद्धिः = सुबुद्धिः
- सु + दर्शनम् = सुदर्शनम्
उपसर्ग 'अप' के साथ:
- अप + मानः = अपमानः
- अप + कारः = अपकारः
- अप + यशः = अपयशः
उपसर्ग 'दुर्' के साथ:
- दुर् + दशा = दुर्दशा
- दुर् + बुद्धिः = दुर्बुद्धिः
- दुर् + जनः = दुर्जनः
- दुर् + आचारी = दुराचारी
प्रश्न 2
निम्नलिखित वाक्यों में दिए गए उपसर्गों और धातुओं का प्रयोग करके, उचित लकार (काल) के अनुसार क्रिया रूप लिखें और रिक्त स्थानों को भरें:
- गङ्गा हिमालयात् _____ निस्सरति। (निस् + सृ, लट्)
- कृषकाः क्षेत्रात् _____। (आ + गम्, लङ्)
- वयं नियमान् _____। (परि + पाल, लट)
- छात्राः गुरौ आगते _____। (उत् + स्था, लोट)
- विडाल: मूषकम् ____ (अनु + सृ, लट्)
- त्वं कक्षायां पाठं ध्यानेन _____। (अवगम, विधि.)
दिए गए उपसर्गों, धातुओं और लकारों के अनुसार रिक्त स्थानों की पूर्ति इस प्रकार है:
- गङ्गा हिमालयात् निस्सरति। (यहाँ 'निस्' उपसर्ग के साथ 'सृ' धातु का लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन रूप 'निस्सरति' प्रयोग होगा।) व्याख्या: 'निस्' (बाहर) + 'सृ' (जाना) = 'निस्सरति' (निकलती है)।
- कृषकाः क्षेत्रात् आगच्छन्। (यहाँ 'आ' उपसर्ग के साथ 'गम्' धातु का लङ् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन रूप 'आगच्छन्' प्रयोग होगा।) व्याख्या: 'आ' (आना) + 'गम्' (जाना) = 'आगच्छन्' (आए)।
- वयं नियमान् परिपालयामः। (यहाँ 'परि' उपसर्ग के साथ 'पाल' धातु का लट् लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन रूप 'परिपालयामः' प्रयोग होगा।) व्याख्या: 'परि' (चारों ओर) + 'पाल' (पालन करना) = 'परिपालयामः' (पालन करते हैं)।
- छात्राः गुरौ आगते उत्तिष्ठन्तु। (यहाँ 'उत्' उपसर्ग के साथ 'स्था' धातु का लोट् लकार, प्रथम पुरुष, बहुवचन रूप 'उत्तिष्ठन्तु' प्रयोग होगा।) व्याख्या: 'उत्' (ऊपर) + 'स्था' (खड़े होना) = 'उत्तिष्ठन्तु' (खड़े हों)।
- विडाल: मूषकम् अनुसरति। (यहाँ 'अनु' उपसर्ग के साथ 'सृ' धातु का लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन रूप 'अनुसरति' प्रयोग होगा।) व्याख्या: 'अनु' (पीछे) + 'सृ' (जाना) = 'अनुसरति' (पीछा करता है)।
- त्वं कक्षायां पाठं ध्यानेन अवगच्छेः। (यहाँ 'अव' उपसर्ग के साथ 'गम' धातु का विधिलिङ् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन रूप 'अवगच्छेः' प्रयोग होगा।) व्याख्या: 'अव' (अच्छी तरह) + 'गम' (समझना) = 'अवगच्छेः' (समझो)।
Common mistakes
- उपसर्गों के अर्थ को गलत समझना।
- गलत उपसर्ग का प्रयोग करना।
- धातु रूप बनाते समय उपसर्ग और धातु के बीच संधि नियमों का पालन न करना।
- काल (लकार) के अनुसार क्रिया रूप में त्रुटि करना।
Revision tips
- प्रत्येक उपसर्ग के अर्थ को अच्छी तरह याद करें।
- दिए गए उदाहरणों का अभ्यास करें और स्वयं नए शब्द बनाने का प्रयास करें।
- रिक्त स्थानों को भरने वाले प्रश्नों का अभ्यास करते समय धातु, लकार और उपसर्ग पर ध्यान दें।
- संस्कृत व्याकरण की पुस्तक में उपसर्गों पर आधारित अन्य अभ्यासों को भी हल करें।
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द 'वि' उपसर्ग से बना है?
Explanation: विशेष शब्द 'वि' उपसर्ग और 'शेष' मूल शब्द के मेल से बना है।
Q2. 'अपकार' शब्द में कौन सा उपसर्ग प्रयुक्त हुआ है?
Explanation: 'अपकार' शब्द 'अप' उपसर्ग और 'कार' मूल शब्द के योग से बना है।
Q3. गङ्गा हिमालयात् _____ निस्सरति। (निस् + सृ, लट्)
Explanation: यहाँ 'निस्' उपसर्ग के साथ 'सृ' धातु का लट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन रूप 'निस्सरति' सही होगा।
Q4. वयं नियमान् _____। (परि + पाल, लट)
Explanation: 'परि' उपसर्ग के साथ 'पाल' धातु का लट् लकार उत्तम पुरुष बहुवचन रूप 'परिपालयामः' होगा।
Q5. 'दुर्बुद्धिः' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है:
Explanation: 'दुर्बुद्धिः' शब्द 'दुर्' उपसर्ग और 'बुद्धिः' मूल शब्द के मेल से बना है।
Frequently asked questions
कक्षा 9 के लिए अभ्यासवान् भव पुस्तक का अध्याय 8 किस बारे में है?
अध्याय 8, 'उपसर्गाव्ययप्रत्ययाः', मुख्य रूप से संस्कृत में उपसर्गों के प्रयोग और उनके द्वारा नए शब्द बनाने की प्रक्रिया पर केंद्रित है।
उपसर्ग क्या होते हैं?
उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं जो किसी मूल शब्द या धातु के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन लाते हैं या उसे विशेष अर्थ प्रदान करते हैं।
इस अध्याय के समाधान छात्रों की मदद कैसे करेंगे?
ये समाधान छात्रों को उपसर्गों की अवधारणा को स्पष्ट करने, विभिन्न उपसर्गों से बने शब्दों को पहचानने और विभिन्न क्रिया रूपों में उनका सही प्रयोग करने में मदद करेंगे, जिससे परीक्षा की तैयारी बेहतर होगी।
क्या इस अध्याय में विभिन्न कालों (लकारों) का भी अभ्यास है?
हाँ, प्रश्न 2 में लट्, लङ्, लोट् और विधिलिङ् जैसे विभिन्न लकारों के साथ उपसर्गों का प्रयोग करके रिक्त स्थानों को भरने का अभ्यास शामिल है।
उपसर्ग 'वि' का क्या अर्थ होता है?
उपसर्ग 'वि' का प्रयोग विशेष रूप से, भिन्नता, या अधिकता के अर्थ में किया जाता है। उदाहरण के लिए, 'विहार', 'विशेष'।
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