कक्षा 8 हिंदी पाठ 14: बच्चों के प्रिय श्री केशव शंकर पिल्लै - NCERT समाधान

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यह खंड कक्षा 8 हिंदी के पाठ 14, 'बच्चों के प्रिय श्री केशव शंकर पिल्लै' पर केंद्रित है, जो एक प्रसिद्ध व्यक्ति के जीवन और कार्यों का परिचय देता है। समाधानों में श्री केशव शंकर पिल्लै द्वारा गुड़ियों के संग्रह में आई कठिनाइयों, बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के आयोजन के पीछे के उद्देश्य, और विश्वभर की गुड़ियों को इकट्ठा करने के उनके कारणों का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह पाठ बच्चों के लिए एक विश्वव्यापी मंच प्रदान करने और विभिन्न संस्कृतियों के बच्चों को एक साथ लाने के उनके प्रयासों पर प्रकाश डालता है। इसके अतिरिक्त, यह जवाहरलाल नेहरू के विचारों को भी शामिल करता है कि कैसे बच्चों के बीच की बातचीत खेल की तरह हो सकती है, जो भाषा और वेशभूषा की बाधाओं से परे है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapterपाठ 14 - बच्चों के प्रिय श्री केशव शंकर पिल्लै (व्यक्तित)

Chapter summary

कक्षा 8 हिंदी के पाठ 14 के ये NCERT समाधान 'बच्चों के प्रिय श्री केशव शंकर पिल्लै' के जीवन और योगदान पर केंद्रित हैं। इसमें श्री पिल्लै द्वारा गुड़ियों का संग्रह करने में आई चुनौतियों, बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के आयोजन के पीछे के उनके प्रेरक विचारों और विदेशी गुड़ियों के माध्यम से बच्चों को विश्व से जोड़ने की उनकी पहल का विश्लेषण किया गया है। समाधान यह भी बताते हैं कि कैसे श्री पिल्लै ने विभिन्न पृष्ठभूमि के बच्चों को एक साथ लाने के लिए कैंपों का आयोजन किया। पाठ के दूसरे भाग में जवाहरलाल नेहरू के विचारों पर चर्चा की गई है कि कैसे बच्चे, अपनी भिन्नताओं के बावजूद, खेल की भावना से एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं।

Learning outcomes

  • श्री केशव शंकर पिल्लै द्वारा गुड़ियों के संग्रह में आई कठिनाइयों को समझना।
  • बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के आयोजन के पीछे के उद्देश्यों का विश्लेषण करना।
  • विभिन्न संस्कृतियों के बच्चों को एक साथ लाने में श्री पिल्लै के प्रयासों को पहचानना।
  • जवाहरलाल नेहरू के बच्चों के बीच एकता पर विचारों को समझना।
  • पाठ में वर्णित 'लड़ाई भी खेल जैसी' अवधारणा की व्याख्या करना।

Topics covered

Paper topics

  • श्री केशव शंकर पिल्लै का परिचय
  • गुड़ियों का संग्रह
  • संग्रह में कठिनाइयाँ
  • बाल चित्रकला प्रतियोगिता
  • बच्चों के लिए विश्वव्यापी मंच
  • विभिन्न संस्कृतियों के बच्चों का एकीकरण
  • जवाहरलाल नेहरू के विचार
  • बच्चों के बीच एकता
  • खेल की भावना
  • भाषा और वेशभूषा की भिन्नता

Important topics

  • श्री केशव शंकर पिल्लै के योगदान
  • बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं का महत्व
  • बच्चों के बीच एकता की अवधारणा
  • जवाहरलाल नेहरू के विचार

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Questions and Solutions

अभ्यास 1: पाठ से

(क) गुड़ियों का संग्रह करने में केशव शंकर पिल्लै को कौन-कौन सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा?

Solution: गुड़ियों का संग्रह करने के कार्य में श्री केशव शंकर पिल्लै को कई प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ा। सबसे पहली कठिनाई यह थी कि गुड़ियाँ काफी महंगी थीं, जिससे उन्हें खरीदना एक चुनौती थी। दूसरी समस्या यह थी कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते समय उनके टूटने या खराब होने का डर बना रहता था। इसके अतिरिक्त, इन गुड़ियों को सुरक्षित रूप से रखने के लिए पर्याप्त जगह खोजना भी एक मुश्किल काम था।

(ख) वे बाल चित्रकला प्रतियोगिता क्यों करना चाहते थे?

Solution: श्री केशव शंकर पिल्लै बाल चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन इसलिए करना चाहते थे ताकि वे बच्चों के कल्याण में योगदान दे सकें। इस प्रतियोगिता के माध्यम से, बच्चों को अपनी कलात्मक प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए एक वैश्विक मंच मिलता था। यह न केवल उन्हें अपनी क्षमताओं को दिखाने का अवसर देता था, बल्कि देश-विदेश के बच्चों को आपस में मिलने और एक-दूसरे से जुड़ने का मौका भी प्रदान करता था।

(ग) केशव शंकर पिल्लै ने बच्चों के लिए विश्वभर की चुनी हुई गुड़ियों का संग्रह क्यों किया?

Solution: श्री केशव शंकर पिल्लै ने विश्वभर की चुनी हुई गुड़ियों का संग्रह विशेष रूप से भारतीय बच्चों के लिए किया था। इसका मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को विदेशी गुड़ियों से परिचित कराना था जो उन्हें व्यक्तिगत रूप से देखने या खरीदने में सक्षम नहीं थे। इस संग्रह के माध्यम से, बच्चे न केवल विभिन्न देशों की गुड़ियों को देख सकते थे, बल्कि उन्हें विभिन्न देशों की संस्कृति और जीवन शैली के बारे में भी जानकारी प्राप्त होती थी।

(घ) केशव शंकर पिल्लै हर वर्ष छुट्टियों में कैंप लगाकर सारे भारत के बच्चों को एक जगह मिलने का अवसर देकर क्या करना चाहते थे?

Solution: श्री केशव शंकर पिल्लै हर वर्ष छुट्टियों में कैंपों का आयोजन करके पूरे भारत के बच्चों को एक ही स्थान पर मिलने का अवसर देना चाहते थे। उनका उद्देश्य यह था कि बच्चे एक-दूसरे को जान सकें, समझ सकें और आपस में जुड़ सकें। उस समय टेलीविजन और इंटरनेट जैसी संचार की सुविधाएँ उपलब्ध नहीं थीं, इसलिए ऐसे कैंप बच्चों के लिए एक-दूसरे से संवाद करने और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम थे।

अभ्यास 2: लड़ाई भी खेल जैसी

"अनेक देशों के बच्चों की यह फ़ौज अलग-अलग भाषा, वेशभूषा में होकर भी एक जैसी ही है। कई देशों के बच्चों को इकट्ठा कर दो, वे खेलेंगे या लड़ेंगे और यह लड़ाई भी खेल जैसी ही होगी। वे रंग, भाषा या जाति पर कभी नहीं लड़ेंगे।" ऊपर के वाक्यों को पढ़ो और बताओ कि—

(क) यह कब, किसने, किसमें और क्यों लिखा?

Solution: ये वाक्य श्री जवाहर लाल नेहरू ने वर्ष 1950 में 'शंकर्स वीकली' के बाल विशेषांक में लिखे थे। श्री केशव शंकर पिल्लै का यह विचार था कि बच्चों के हित के लिए बाल चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जाना चाहिए, जिससे देश-विदेश के बच्चे आपस में मिल सकें। श्री नेहरू को यह विचार बहुत पसंद आया और उन्होंने इसी संदर्भ में यह बात लिखी, जो बच्चों के बीच स्वाभाविक एकता और सौहार्द को दर्शाती है।

(ख) क्या लड़ाई भी खेल जैसी हो सकती है? अगर हो तो कैसे और उस खेल में तुम्हारे विचार से क्या-क्या हो सकता है?

Solution: हाँ, लड़ाई को खेल जैसा बनाया जा सकता है, जिसे हम प्रतियोगिता का नाम दे सकते हैं। इस प्रकार की प्रतियोगिता में मुख्य उद्देश्य एक-दूसरे से बेहतर प्रदर्शन करना होता है, न कि किसी को वास्तविक नुकसान पहुँचाना। इस खेल में विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएँ शामिल हो सकती हैं, जैसे कि खेलकूद, कला, ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी या अन्य रचनात्मक गतिविधियाँ। इसमें सभी प्रतिभागी अपनी पूरी क्षमता से भाग लेते हैं और एक-दूसरे को प्रेरित करते हैं, जिससे यह एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का रूप ले लेती है।

Common mistakes

  • गुड़ियों के संग्रह में आई कठिनाइयों को पूरी तरह से न समझ पाना।
  • बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के आयोजन के पीछे के गहरे उद्देश्यों को अनदेखा करना।
  • बच्चों के बीच एकता और खेल की भावना के संबंध को स्पष्ट रूप से न बता पाना।

Revision tips

  • श्री केशव शंकर पिल्लै के जीवन के मुख्य योगदानों को रेखांकित करें।
  • गुड़ियों के संग्रह और बाल चित्रकला प्रतियोगिताओं के पीछे के कारणों पर विशेष ध्यान दें।
  • जवाहरलाल नेहरू के विचारों और 'लड़ाई भी खेल जैसी' अवधारणा को समझें।
  • पाठ में आए कठिन शब्दों और उनके अर्थों को याद करें।

Practice MCQs

Q1. केशव शंकर पिल्लै को गुड़ियों का संग्रह करने में मुख्य कठिनाई क्या थी?

Q2. बाल चित्रकला प्रतियोगिता करवाने का श्री पिल्लै का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Q3. श्री केशव शंकर पिल्लै ने विश्वभर की चुनी हुई गुड़ियों का संग्रह क्यों किया?

Q4. 1950 के 'शंकर्स वीकली' के बाल विशेषांक में यह किसने लिखा था?

Q5. जवाहरलाल नेहरू के अनुसार, अलग-अलग भाषा और वेशभूषा वाले बच्चे एक साथ मिलकर क्या कर सकते हैं?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान कक्षा 8 के हिंदी विषय के लिए है, जो पाठ 14 'बच्चों के प्रिय श्री केशव शंकर पिल्लै' पर आधारित है।

श्री केशव शंकर पिल्लै को गुड़ियों का संग्रह करने में क्या परेशानियाँ आईं?

उन्हें गुड़ियों के महंगे होने, उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में खराब होने के डर और संग्रह को सुरक्षित रखने के लिए जगह खोजने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

बाल चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित करने का श्री पिल्लै का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उनका उद्देश्य बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक विश्वव्यापी मंच प्रदान करना और देश-विदेश के बच्चों को एक-दूसरे से मिलने का अवसर देना था।

जवाहरलाल नेहरू ने बच्चों की लड़ाई को खेल जैसा क्यों कहा?

नेहरू जी का मानना था कि बच्चे, अपनी विभिन्नताओं के बावजूद, जब एक साथ आते हैं तो वे खेल की भावना से जुड़ते हैं, और उनकी आपसी नोक-झोंक या प्रतिस्पर्धा भी खेल की तरह ही होती है।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?

यह समाधान पाठ के महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट करता है, मुख्य अवधारणाओं की विस्तृत व्याख्या प्रदान करता है, और छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने के लिए तैयार करता है।

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