कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान: राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 8 के सामाजिक विज्ञान के अध्याय 11, 'राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह खंड ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास और संगठन की पड़ताल करता है। इसमें 1870 और 1880 के दशक में असंतोष के कारणों, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की भूमिका, प्रथम विश्व युद्ध के आर्थिक प्रभावों और मुस्लिम लीग की 1940 की प्रस्तावना पर चर्चा की गई है। समाधान मध्यमार्गी और आमूल परिवर्तनवादी दृष्टिकोणों के बीच अंतर को स्पष्ट करते हैं, साथ ही असहयोग आंदोलन के विभिन्न रूपों और लोगों की गांधीजी के प्रति समझ को भी दर्शाते हैं। ये समाधान छात्रों को राष्ट्रीय आंदोलन के महत्वपूर्ण चरणों और विभिन्न विचारधाराओं को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए एक मूल्यवान संसाधन हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectसामाजिक विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter11. राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन

Chapter summary

कक्षा 8 के सामाजिक विज्ञान के अध्याय 11 के ये NCERT समाधान राष्ट्रीय आंदोलन के संगठन पर केंद्रित हैं। यह छात्रों को ब्रिटिश शासन के प्रति बढ़ते असंतोष के कारणों, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उदय और उसके विभिन्न धड़ों (मध्यमार्गी और आमूल परिवर्तनवादी) की विचारधाराओं को समझने में मदद करता है। समाधान प्रथम विश्व युद्ध के आर्थिक प्रभावों और मुस्लिम लीग की मांगों पर भी प्रकाश डालते हैं। असहयोग आंदोलन के विभिन्न क्षेत्रीय रूपों और गांधीजी की भूमिका का विश्लेषण परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

Learning outcomes

  • 1870-80 के दशक में ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष के कारणों को समझना।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की भूमिका और उसके विभिन्न विचारधाराओं का विश्लेषण करना।
  • प्रथम विश्व युद्ध के भारत पर पड़े आर्थिक प्रभावों की पहचान करना।
  • मुस्लिम लीग की 1940 की प्रस्तावना और उसकी मांगों को समझना।
  • मध्यमार्गी और आमूल परिवर्तनवादी नेताओं के दृष्टिकोणों की तुलना करना।
  • असहयोग आंदोलन के विभिन्न रूपों और क्षेत्रीय अभिव्यक्तियों का वर्णन करना।
  • गांधीजी के प्रति लोगों की समझ का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • राष्ट्रीय आंदोलन का संगठन
  • ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष के कारण
  • आर्म्स एक्ट
  • वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट
  • इल्बर्ट बिल
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
  • मध्यमार्गी नेता
  • आमूल परिवर्तनवादी नेता
  • प्रथम विश्व युद्ध का आर्थिक प्रभाव
  • मुस्लिम लीग का 1940 का प्रस्ताव
  • असहयोग आंदोलन
  • गांधीजी की भूमिका

Important topics

  • राष्ट्रीय आंदोलन के संगठन के प्रमुख चरण
  • मध्यमार्गी बनाम आमूल परिवर्तनवादी दृष्टिकोण
  • प्रथम विश्व युद्ध का भारत पर आर्थिक प्रभाव
  • असहयोग आंदोलन के विभिन्न रूप
  • 1870-80 के दशक में असंतोष के कारण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

1870 और 1880 के दशकों में लोग ब्रिटिश शासन से क्यों असंतुष्ट थे ?
Solution: 1870 और 1880 के दशक में भारतीयों के बीच ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष के कई कारण थे, जिनमें प्रमुख निम्नलिखित थे:
  1. आर्म्स एक्ट (1878): इस अधिनियम के द्वारा भारतीयों से हथियार रखने का अधिकार छीन लिया गया, जिससे वे असुरक्षित महसूस करने लगे।
  2. वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878): इस कानून ने भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सीमित हो गई।
  3. इल्बर्ट बिल विवाद: यह बिल भारतीय न्यायाधीशों को भी वही अधिकार देने के लिए लाया गया था जो यूरोपीय न्यायाधीशों के पास थे, लेकिन अंग्रेजों के भारी विरोध के कारण इसे वापस लेना पड़ा। इस घटना ने भारतीयों को ब्रिटिश न्याय प्रणाली में भेदभाव का एहसास कराया।
  4. राजनीतिक संगठनों का उदय: उपरोक्त नीतियों के विरोध में कई राजनीतिक संगठनों का गठन हुआ, जिन्होंने ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों में असंतोष को बढ़ाया।
ये सभी कारक मिलकर ब्रिटिश शासन के प्रति भारतीयों में व्यापक असंतोष पैदा कर रहे थे।

प्रश्न 2

भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस किन लोगों के पक्ष में बोल रही थी ?
Solution: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का उद्देश्य केवल किसी एक विशेष वर्ग या समुदाय के हितों का प्रतिनिधित्व करना नहीं था, बल्कि यह पूरे भारत के सभी समुदायों और वर्गों के हितों की आवाज उठाने का प्रयास कर रही थी। कांग्रेस का लक्ष्य राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना और ब्रिटिश शासन के तहत सभी भारतीयों के अधिकारों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करना था।

प्रश्न 3

पहले विश्व युद्ध से भारत पर कौन से आर्थिक असर पड़े ?
Solution: पहले विश्व युद्ध का भारत पर गहरा आर्थिक प्रभाव पड़ा, जो निम्नलिखित थे:
  1. रक्षा व्यय में वृद्धि: युद्ध के कारण ब्रिटिश भारत सरकार के रक्षा व्यय में भारी वृद्धि हुई।
  2. करों में वृद्धि: इस बढ़े हुए खर्च को पूरा करने के लिए, सरकार ने निजी आय और व्यावसायिक मुनाफे पर करों में वृद्धि कर दी।
  3. कीमतों में उछाल: सैनिक व्यय में वृद्धि और युद्ध के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के कारण आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आया, जिससे आम लोगों का जीवनयापन कठिन हो गया।
  4. औद्योगिक वस्तुओं की मांग और आयात में कमी: युद्ध के कारण जूट के बोरे, कपड़े और पटरियों जैसी औद्योगिक वस्तुओं की मांग बढ़ी। साथ ही, युद्ध के कारण अन्य देशों से भारत आने वाले आयात में कमी आई, जिससे घरेलू उद्योगों को कुछ हद तक बढ़ावा मिला लेकिन आम उपभोक्ताओं को कठिनाई हुई।
इस प्रकार, युद्ध ने भारत की अर्थव्यवस्था पर मिश्रित प्रभाव डाला, जिसमें आम जनता के लिए कठिनाइयाँ प्रमुख थीं।

प्रश्न 4

1940 के मुस्लिम लीग के प्रस्ताव में क्या माँग की गई थी ?
Solution: 1940 में, मुस्लिम लीग ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया जिसमें देश के पश्चिमोत्तर और पूर्वी क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए 'स्वतंत्र राज्यों' की माँग की गई थी। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस प्रस्ताव में सीधे तौर पर 'पाकिस्तान' शब्द का उल्लेख नहीं था, न ही यह विभाजन की स्पष्ट माँग थी। बल्कि, यह उन क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए एक स्वायत्त व्यवस्था या एक अलग राजनीतिक इकाई की माँग थी जहाँ उनकी आबादी अधिक थी।

प्रश्न 5

मध्यमार्गी कौन थे ? वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ किस तरह का संघर्ष करना चाहते थे ?
Solution: मध्यमार्गी वे कांग्रेसी नेता थे जो अपने राजनीतिक उद्देश्यों और संघर्ष के तरीकों में संयमित या मध्यम मार्ग अपनाने वाले थे। वे देश का प्रतिनिधित्व करने के साथ-साथ ब्रिटिश सरकार के साथ मिलकर शासन में भागीदारी भी चाहते थे।

मध्यमार्गी नेता ब्रिटिश शासन के खिलाफ निम्नलिखित तरीकों से संघर्ष करना चाहते थे:

  • जनता को जागरूक करना: वे जनता को ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण और शोषणकारी चरित्र से अवगत कराना चाहते थे।
  • जनमत निर्माण: इसके लिए वे समाचार पत्र निकालते थे, लेख लिखते थे और भाषणों के माध्यम से ब्रिटिश नीतियों की आलोचना करते थे।
  • प्रतिनिधि भेजना: उन्होंने जनमत बनाने और अपनी माँगें सरकार तक पहुँचाने के लिए देश के विभिन्न भागों में अपने प्रतिनिधि भेजे।
उनका मुख्य उद्देश्य संवैधानिक तरीकों से सुधार लाना और भारतीयों के अधिकारों को सुरक्षित करना था, न कि तत्काल पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करना।

प्रश्न 6

कांग्रेस के आमूल परिवर्तनवादी धड़े की राजनीती मध्यमार्गी धड़े की राजनीती से किस तरह भिन्न थी ?
Solution: कांग्रेस के आमूल परिवर्तनवादी धड़े (जिन्हें गरम दल भी कहा जाता है) की राजनीति मध्यमार्गी धड़े (जिन्हें नरम दल कहा जाता है) से कई मायनों में भिन्न थी:
  • संघर्ष का तरीका: मध्यमार्गी नेता निवेदन, प्रार्थना और याचिका की राजनीति में विश्वास करते थे, जबकि आमूल परिवर्तनवादी नेता ब्रिटिश शासन की सीधी आलोचना करते थे और अधिक मुखर संघर्ष का समर्थन करते थे।
  • आत्मनिर्भरता बनाम सहयोग: आमूल परिवर्तनवादी नेता आत्मनिर्भरता और रचनात्मक कार्यों के महत्व पर जोर देते थे। वे मानते थे कि भारतीयों को अपने दम पर स्वराज के लिए लड़ना चाहिए। इसके विपरीत, मध्यमार्गी नेता ब्रिटिश सरकार की आलोचना तो करते थे, लेकिन उनके साथ सहयोग करके सुधार लाने का प्रयास भी करते थे।
  • लक्ष्य: आमूल परिवर्तनवादी धड़े का अंतिम लक्ष्य 'स्वराज' (पूर्ण स्वतंत्रता) प्राप्त करना था और वे इसके लिए लड़ने को तैयार थे। वहीं, मध्यमार्गी नेता ब्रिटिश सरकार से अपने अधिकारों के लिए निवेदन करने या उनके सामने अपनी माँगें रखने तक सीमित थे, और उनका लक्ष्य स्व-शासन (डोमिनियन स्टेटस) या सुधार हो सकता था।
इस प्रकार, जहाँ मध्यमार्गी संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से धीरे-धीरे सुधार लाना चाहते थे, वहीं आमूल परिवर्तनवादी अधिक आक्रामक और त्वरित परिवर्तन के पक्षधर थे।

प्रश्न 7

चर्चा करें कि भारत के विभिन्न भागों में असहयोग आन्दोलन ने किस-किस तरह के रूप ग्रहण किए ? लोग गाँधीजी के बारे में क्या समझते थे ?
Solution: असहयोग आंदोलन ने भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों के अनुसार अलग-अलग रूप धारण किए:
  • खेडा, गुजरात: यहाँ के पाटीदार किसानों ने ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए भारी लगान के खिलाफ अहिंसक आंदोलन चलाया।
  • आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्र: इन इलाकों में लोगों ने शराब की दुकानों की घेराबंदी करके अपना विरोध दर्ज कराया।
  • गुंदूर जिला, आंध्र प्रदेश: यहाँ आदिवासी और गरीब किसानों ने 'वन सत्याग्रह' जैसे आंदोलन किए, जो वनों पर उनके पारंपरिक अधिकारों से संबंधित थे।
  • सिंध और बंगाल: इन क्षेत्रों में खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन के गठबंधन ने सांप्रदायिक एकता को मजबूत किया और एक संयुक्त जन आंदोलन का रूप लिया।
लोगों की गांधीजी के बारे में समझ: लोग गांधीजी को एक ऐसे नेता के रूप में देखते थे जो सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर अन्याय का सामना कर सकता था। वे मानते थे कि गांधीजी के नेतृत्व में वे ब्रिटिश शासन से मुक्ति पा सकते हैं और अपने अधिकारों को प्राप्त कर सकते हैं। गांधीजी की सादगी, दृढ़ संकल्प और अहिंसक प्रतिरोध की रणनीति ने उन्हें आम लोगों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय बना दिया था, और वे उन्हें एक ऐसे मसीहा के रूप में देखते थे जो उन्हें स्वराज दिला सकता था।

Common mistakes

  • मध्यमार्गी और आमूल परिवर्तनवादी नेताओं के तरीकों के बीच अंतर को समझने में भ्रम।
  • प्रथम विश्व युद्ध के आर्थिक प्रभावों को केवल रक्षा व्यय तक सीमित समझना।
  • मुस्लिम लीग के 1940 के प्रस्ताव में 'पाकिस्तान' शब्द की अनुपस्थिति को नजरअंदाज करना।
  • असहयोग आंदोलन को केवल एक राष्ट्रीय स्तर की घटना के रूप में देखना, क्षेत्रीय भिन्नताओं को अनदेखा करना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए कारणों और प्रभावों को सूचीबद्ध करें।
  • मध्यमार्गी और आमूल परिवर्तनवादी नेताओं के बीच मुख्य अंतरों को एक तालिका में सारणीबद्ध करें।
  • असहयोग आंदोलन के विभिन्न क्षेत्रीय रूपों को मैप पर चिह्नित करने का प्रयास करें।
  • प्रमुख घटनाओं (जैसे आर्म्स एक्ट, वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, इल्बर्ट बिल) और उनके प्रभावों को याद रखें।

Practice MCQs

Q1. 1870 और 1880 के दशक में भारतीयों के बीच ब्रिटिश शासन के प्रति असंतोष का एक प्रमुख कारण क्या था?

Q2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Q3. पहले विश्व युद्ध के दौरान भारत पर पड़े आर्थिक प्रभावों में से कौन सा एक था?

Q4. 1940 में मुस्लिम लीग के प्रस्ताव में मुख्य रूप से क्या माँग की गई थी?

Q5. मध्यमार्गी नेता ब्रिटिश शासन के प्रति किस प्रकार का दृष्टिकोण रखते थे?

Frequently asked questions

कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 11 का मुख्य विषय क्या है?

अध्याय 11, 'राष्ट्रीय आंदोलन का संघटन', ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में राष्ट्रीय आंदोलन के विकास और संगठन पर केंद्रित है, जिसमें विभिन्न आंदोलनों, नेताओं और उनकी विचारधाराओं का वर्णन है।

ये NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?

ये समाधान छात्रों को राष्ट्रीय आंदोलन से संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं, घटनाओं और नेताओं को समझने में मदद करते हैं, जिससे उन्हें परीक्षा की तैयारी में सहायता मिलती है।

मध्यमार्गी और आमूल परिवर्तनवादी नेताओं के बीच मुख्य अंतर क्या था?

मध्यमार्गी नेता निवेदन और जनमत निर्माण द्वारा सुधार चाहते थे, जबकि आमूल परिवर्तनवादी नेता स्वराज के लिए संघर्ष और आत्मनिर्भरता पर जोर देते थे।

प्रथम विश्व युद्ध का भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा?

प्रथम विश्व युद्ध के कारण भारत सरकार के रक्षा व्यय में वृद्धि हुई, कर बढ़ाए गए और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उछाल आया, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ीं।

असहयोग आंदोलन के विभिन्न क्षेत्रीय रूप क्या थे?

असहयोग आंदोलन ने विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग रूप लिए, जैसे गुजरात में किसानों का लगान विरोधी अभियान, आंध्र प्रदेश में शराब की दुकानों की घेराबंदी और वन सत्याग्रह।

1940 में मुस्लिम लीग के प्रस्ताव का क्या महत्व था?

इस प्रस्ताव में पहली बार देश के पश्चिमोत्तर और पूर्वी क्षेत्रों में मुसलमानों के लिए 'स्वतंत्र राज्यों' की माँग की गई थी, जो बाद में विभाजन की माँग का आधार बनी।

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