कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान: अध्याय 6 हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 6, 'हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली के कामकाज और इसमें शामिल विभिन्न प्रमुख व्यक्तियों की भूमिकाओं पर प्रकाश डालता है। समाधानों में पुलिस, सरकारी वकील, बचाव पक्ष के वकील और न्यायाधीश जैसे महत्वपूर्ण हितधारकों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया है। यह भी समझाया गया है कि गवाह कौन होते हैं, आरोपी किसे कहा जाता है, और जिरह जैसी कानूनी प्रक्रियाओं का क्या अर्थ है। इसके अतिरिक्त, हिरासत के अधिकार और गिरफ्तार व्यक्ति के मौलिक अधिकारों पर भी चर्चा की गई है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत आते हैं। ये समाधान छात्रों को आपराधिक न्याय प्रणाली की जटिलताओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | सामाजिक विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. हमारी अपराधिक न्याय प्रणाली |
Chapter summary
कक्षा 8 सामाजिक विज्ञान के अध्याय 6 'हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली' के ये NCERT समाधान छात्रों को भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली के मूल सिद्धांतों से परिचित कराते हैं। इसमें पुलिस, सरकारी वकील, बचाव पक्ष के वकील और न्यायाधीश जैसे प्रमुख व्यक्तियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का वर्णन है। समाधान गवाहों, आरोपियों और जिरह जैसी महत्वपूर्ण कानूनी शब्दावली को भी स्पष्ट करते हैं। यह अध्याय गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकारों पर भी प्रकाश डालता है, जो संविधान के अनुच्छेद 22 में निहित हैं। ये समाधान छात्रों को प्रणाली की कार्यप्रणाली को समझने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- आपराधिक न्याय व्यवस्था में शामिल प्रमुख व्यक्तियों की पहचान करना।
- पुलिस, सरकारी वकील, बचाव पक्ष के वकील और न्यायाधीश की भूमिकाओं को समझना।
- गवाह, आरोपी और जिरह जैसी कानूनी शब्दावली को परिभाषित करना।
- हिरासत और गिरफ्तार व्यक्ति के मौलिक अधिकारों के बारे में जानना।
- आपराधिक न्याय प्रणाली के कामकाज की बुनियादी समझ विकसित करना।
Topics covered
Paper topics
- आपराधिक न्याय व्यवस्था
- पुलिस की भूमिका
- सरकारी वकील
- बचाव पक्ष का वकील
- न्यायाधीश
- गवाह
- आरोपी
- जिरह
- हिरासत
- गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार
- संविधान का अनुच्छेद 22
- प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR)
Important topics
- आपराधिक न्याय व्यवस्था में प्रमुख व्यक्तियों की भूमिकाएँ
- गवाह और आरोपी की परिभाषाएँ
- जिरह की प्रक्रिया
- पुलिस हिरासत में दिए गए बयानों का महत्व
- गिरफ्तार व्यक्ति के मौलिक अधिकार
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
प्रश्न 3
प्रश्न 4
प्रश्न 5
प्रश्न 6
प्रश्न 7
प्रश्न 8
- किसी भी अपराध की सूचना मिलने पर एफ.आई.आर. (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज करना।
- अपराध से संबंधित शिकायतों की जांच करना और घटना स्थल से सबूत इकट्ठा करना।
- यदि एकत्र किए गए सबूतों से आरोपी का अपराध सिद्ध होता प्रतीत होता है, तो अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल करना।
प्रश्न 9
प्रश्न 10
- गिरफ्तारी के समय उसे यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसे किस कारण से गिरफ्तार किया जा रहा है।
- उसे गिरफ्तारी के 24 घंटों के भीतर एक मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार है। इस समय सीमा में यात्रा का समय शामिल नहीं होता।
- गिरफ्तारी के दौरान या हिरासत में किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या यातना से बचने का अधिकार है।
- पुलिस हिरासत में दिए गए किसी भी इकबालिया बयान को आरोपी के खिलाफ सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
- 15 साल से कम उम्र के किसी भी बालक या किसी भी महिला को केवल पूछताछ के लिए थाने में नहीं बुलाया जा सकता है; उन्हें केवल एक महिला पुलिस अधिकारी की उपस्थिति में या उनके घर पर ही पूछताछ की जा सकती है।
Common mistakes
- पुलिस हिरासत में दिए गए बयानों के महत्व को गलत समझना।
- विभिन्न कानूनी भूमिकाओं के बीच अंतर करने में कठिनाई।
- गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकारों को पूरी तरह से न समझना।
Revision tips
- प्रत्येक व्यक्ति (पुलिस, वकील, न्यायाधीश) की भूमिका को अलग-अलग सूचीबद्ध करें।
- गवाह, आरोपी और जिरह जैसी प्रमुख शब्दावली को याद करें।
- गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकारों को अनुच्छेद 22 के संदर्भ में समझें।
- आपराधिक न्याय प्रक्रिया के चरणों को क्रम में याद करने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. आपराधिक न्याय व्यवस्था में निम्नलिखित में से कौन मुख्य भूमिका नहीं निभाता है?
Explanation: आपराधिक न्याय व्यवस्था में पुलिस, सरकारी वकील, बचाव पक्ष का वकील और न्यायाधीश मुख्य भूमिका निभाते हैं। मीडिया रिपोर्टर सूचना प्रसारित करते हैं लेकिन वे सीधे तौर पर न्याय प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होते।
Q2. जब किसी व्यक्ति को अदालत में यह बताने के लिए बुलाया जाता है कि उसने मामले के संबंध में क्या देखा या सुना है, तो उसे क्या कहा जाता है?
Explanation: वह व्यक्ति जिसे अदालत में किसी घटना के बारे में अपनी जानकारी देने के लिए बुलाया जाता है, गवाह कहलाता है।
Q3. किसी अपराध के लिए जिस व्यक्ति पर अदालत में मुकदमा चल रहा होता है, उसे क्या कहते हैं?
Explanation: जिस व्यक्ति पर किसी अपराध का आरोप लगाया जाता है और उसका मुकदमा अदालत में चलता है, उसे आरोपी कहा जाता है।
Q4. जिरह (cross-examination) का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
Explanation: जिरह के दौरान, विरोधी पक्ष का वकील गवाह से सवाल पूछता है ताकि उसके पिछले बयानों की सत्यता या विश्वसनीयता को परखा जा सके।
Q5. संविधान के अनुच्छेद 22 के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्ति को कितने समय के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार है?
Explanation: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22 यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के 24 घंटों के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाए।
Frequently asked questions
आपराधिक न्याय व्यवस्था में कौन-कौन से मुख्य लोग शामिल होते हैं?
आपराधिक न्याय व्यवस्था में मुख्य रूप से पुलिस, सरकारी वकील, बचाव पक्ष का वकील और न्यायाधीश शामिल होते हैं। ये सभी न्याय सुनिश्चित करने में अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं।
गवाह और आरोपी में क्या अंतर है?
गवाह वह व्यक्ति होता है जिसने घटना को देखा या सुना हो और अदालत में गवाही देता है। आरोपी वह व्यक्ति होता है जिस पर अपराध करने का आरोप लगाया जाता है और उसका मुकदमा अदालत में चल रहा होता है।
जिरह (cross-examination) क्यों महत्वपूर्ण है?
जिरह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दूसरे पक्ष के वकील को गवाह से सवाल पूछकर उसके बयान की सत्यता और विश्वसनीयता की जांच करने का अवसर देती है, जिससे मामले को समझने में मदद मिलती है।
क्या पुलिस हिरासत में आरोपी द्वारा दिया गया बयान अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है?
नहीं, पुलिस हिरासत में आरोपी द्वारा दिया गया बयान आमतौर पर सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता क्योंकि यह दबाव या डर में दिया गया हो सकता है। यह गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकारों में से एक है।
गिरफ्तार व्यक्ति के कौन से मौलिक अधिकार हैं?
गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार, 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार, और दुर्व्यवहार से बचने का अधिकार है। साथ ही, पुलिस हिरासत में दिए गए इकबालिया बयान का इस्तेमाल उसके खिलाफ सबूत के तौर पर नहीं किया जा सकता।
एफ.आई.आर. (FIR) का क्या मतलब है?
एफ.आई.आर. का पूरा नाम प्रथम सूचना रिपोर्ट (First Information Report) है। यह किसी संज्ञेय अपराध की सूचना पुलिस को मिलने पर दर्ज की जाने वाली पहली रिपोर्ट होती है।
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