कक्षा 8 संस्कृत: वाक्यरचना – सुद्धप्रयोगः NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 8 के छात्रों के लिए संस्कृत के 'वाक्यरचना – सुद्धप्रयोगः' अध्याय पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें क्रियापदों के शुद्ध प्रयोग, उचित विशेषणों के चयन और संज्ञाओं के सही रूपों को भरने का अभ्यास शामिल है। समाधान छात्रों को वाक्य निर्माण के नियमों को समझने और संस्कृत व्याकरण में सटीकता प्राप्त करने में मदद करते हैं। प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल छात्रों को अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने में सहायता करेगा।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 10. वाक्यरचना – सुद्धप्रयोगः |
Chapter summary
कक्षा 8 के लिए 'वाक्यरचना – सुद्धप्रयोगः' अध्याय के NCERT समाधान छात्रों को संस्कृत वाक्यों में क्रियापदों, विशेषणों और संज्ञाओं के शुद्ध प्रयोग का अभ्यास कराते हैं। इसमें क्रियाओं को कर्ता के अनुसार सही करना, विशेषणों को संज्ञा के लिंग, वचन और कारक के अनुसार चुनना, तथा विभिन्न विभक्तियों के सही प्रयोग को समझना शामिल है। यह अभ्यास छात्रों की व्याकरणिक शुद्धता को बढ़ाता है।
Learning outcomes
- क्रियापदों के शुद्ध प्रयोग को समझना।
- कर्ता के अनुसार क्रियापद का सही रूप चुनना।
- संज्ञाओं के लिंग, वचन और कारक के अनुसार उचित विशेषणों का प्रयोग करना।
- वाक्य में संज्ञाओं के सही रूपों को पहचानना और भरना।
- विभिन्न विभक्तियों के सही प्रयोग का अभ्यास करना।
Topics covered
Paper topics
- क्रियापद संशोधन
- विशेषण चयन
- संज्ञा रूप प्रयोग
- कर्ता-क्रिया अन्वय
- लिंग-वचन-कारक
- विभक्ति प्रयोग
- वाक्य रचना अभ्यास
Important topics
- क्रियापदों का शुद्ध प्रयोग
- विशेषणों का संज्ञा के अनुसार प्रयोग
- संज्ञाओं की विभक्तियों का सही उपयोग
- कर्ता-क्रिया का सामंजस्य
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
त्वम् किम् करोति ?
भवान् किम् कुर्वन्ति ?
अहम् जन्तुशालाम् अगच्छत्।
लवकुशौ रामस्य पुत्रौ आसन्।
हे बालका: ! ध्यानेन पठ।
नदीतीरे वृक्षाणाम् समृहः सन्ति ।
वाक्य में कर्ता (subject) के अनुसार क्रियापद (verb) का सही रूप प्रयोग करना आवश्यक है। यहाँ दिए गए वाक्यों में कर्ता और क्रियापद के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए उन्हें शुद्ध किया गया है:
- कर्ता 'त्वम्' (तुम - मध्यम पुरुष, एकवचन) है, इसलिए क्रियापद 'करोषि' (करते हो) होगा। वाक्य होगा:
त्वं किं करोषि?
- कर्ता 'भवान्' (आप - प्रथम पुरुष, एकवचन) है, इसलिए क्रियापद 'करोति' (करते हैं) होगा। वाक्य होगा:
भवान् किं करोति?
- कर्ता 'अहम्' (मैं - उत्तम पुरुष, एकवचन) है, इसलिए क्रियापद 'अगच्छम्' (गया) होगा। वाक्य होगा:
अहम् जन्तुशालाम् अगच्छम्।
- कर्ता 'लवकुशौ' (लव और कुश - प्रथम पुरुष, द्विवचन) है, इसलिए क्रियापद 'आस्ताम्' (थे) होगा। वाक्य होगा:
लवकुशौ रामस्य पुत्रौ आस्ताम्।
- संबोधन 'हे बालका:' (हे लड़कों - प्रथम पुरुष, बहुवचन) के लिए क्रियापद 'पठत' (पढ़ो) होगा। वाक्य होगा:
हे बालका:! ध्यानेन पठत।
- कर्ता 'समूहः' (समूह - प्रथम पुरुष, एकवचन) है, इसलिए क्रियापद 'अस्ति' (है) होगा। वाक्य होगा:
नदीतीरे वृक्षाणाम् समूह: अस्ति।
प्रश्न 2
1. हिमालय-पर्वतः अति .....। ( उन्नतम्, उन्नतः, उन्नता )
2. इदम् वस्त्रम् .....। (मलिना, मलिनः, मलिनम्)
3. गङ्गा ····· नदी मन्यते। (पवित्रः, पवित्रा, पवित्रम्)
4. दशस्थस्य ..... राज्यः आसन्। (त्रयः, तिस्तः, त्रीणि)
5. ..... सख्यौ परस्परम् अवदताम्। (द्वौ, द्वि, द्वे)
विशेषण (adjective) का प्रयोग संज्ञा (noun) के लिंग (gender), वचन (number) और कारक (case) के अनुसार किया जाता है। दिए गए वाक्यों में संज्ञा के अनुसार उचित विशेषण चुनकर वाक्य पूर्ण किए गए हैं:
- 'हिमालय-पर्वतः' (पुल्लिंग, एकवचन) है, इसलिए विशेषण 'उन्नतः' (ऊँचा) होगा। वाक्य:
हिमालय-पर्वतः अति उन्नतः।
- 'इदम् वस्त्रम्' (नपुंसकलिंग, एकवचन) है, इसलिए विशेषण 'मलिनम्' (गंदा) होगा। वाक्य:
इदम् वस्त्रम् मलिनम्।
- 'गङ्गा' (नदी - स्त्रीलिंग, एकवचन) है, इसलिए विशेषण 'पवित्रा' (पवित्र) होगा। वाक्य:
गङ्गा पवित्रा नदी मन्यते।
- 'राज्यः' (राज्य - पुल्लिंग, बहुवचन) है, इसलिए संख्यावाचक विशेषण 'त्रयः' (तीन) होगा। वाक्य:
दशस्थस्य त्रयः राज्यः आसन्।
- 'सख्यौ' (सखियाँ - स्त्रीलिंग, द्विवचन) है, इसलिए संख्यावाचक विशेषण 'द्वे' (दो) होगा। वाक्य:
द्वे सख्यौ परस्परम् अवदताम्।
प्रश्न 3
(क)
- छात्राः ..... विद्यालयम् आनयन्ति । ( पुस्तकान्, पुस्तकाः, पुस्तकानि )
- तडागे .....विकसन्ति। ( कमला:, कमलम्, कमलानि )
- किं तव ..... समीपे अस्ति ? ( गृह: , गृहम् , गृह )
- सायम् मम ..... आगमिष्यन्ति । ( मित्राः, मित्रम्, मित्राणि )
- सौचिक: .... सीव्यति। ( वस्त्रान्, वस्त्राणि, वस्त्र )
- उद्याने ..... अस्ति। ( आम्रवृक्षम्, आम्रवृक्ष, आम्रवृक्षः )
(ख)
- ..... देवालय: विशाल:। ( अयम्, इदम्, इयम् )
- ..... पुस्तकम् अति शोभनम्। ( इयम्, इदम्, अयम् )
- ..... बालकौ कुत्र अगच्छताम्? (ते, तौ, ताः)
- .....फलम् पक्वम् तत् मधुरम्। (यः, यत्, या)
- ..... परिश्रमं करोति सः उत्तमान् अङ्कान् लभते। (या, यः, यत्)
वाक्य में सही शब्द का चयन करने के लिए हमें कर्ता, कर्म और क्रिया के बीच के संबंध को समझना होगा। साथ ही, सर्वनामों का प्रयोग संज्ञा के लिंग और वचन के अनुसार किया जाता है। (क)
- 'आनयन्ति' (लाते हैं - बहुवचन) क्रिया है, और 'छात्राः' (छात्र - बहुवचन) कर्ता है। छात्र विद्यालय में 'पुस्तकानि' (पुस्तकों को - कर्म, नपुंसकलिंग, बहुवचन) लाते हैं। वाक्य:
छात्राः पुस्तकानि विद्यालयम् आनयन्ति ।
- 'विकसन्ति' (खिलते हैं - बहुवचन) क्रिया है। तालाब में 'कमलानि' (कमल - नपुंसकलिंग, बहुवचन) खिलते हैं। वाक्य:
तडागे कमलानि विकसन्ति।
- 'अस्ति' (है - एकवचन) क्रिया है। 'गृहम्' (घर - नपुंसकलिंग, एकवचन) कर्ता है। वाक्य:
किं तव गृहम् समीपे अस्ति ?
- 'आगमिष्यन्ति' (आएंगे - बहुवचन) क्रिया है। 'मित्राणि' (मित्र - नपुंसकलिंग, बहुवचन) कर्ता है। वाक्य:
सायम् मम मित्राणि आगमिष्यन्ति ।
- 'सीव्यति' (सीता है - एकवचन) क्रिया है। 'सौचिक:' (दर्जी - पुल्लिंग, एकवचन) कर्ता है। दर्जी 'वस्त्रान्' (वस्त्रों को - कर्म, पुल्लिंग, बहुवचन) सीलता है। वाक्य:
सौचिक: वस्त्रान् सीव्यति।
- 'अस्ति' (है - एकवचन) क्रिया है। 'आम्रवृक्षः' (आम का पेड़ - पुल्लिंग, एकवचन) कर्ता है। वाक्य:
उद्याने आम्रवृक्षः अस्ति।
(ख)
- 'देवालय:' (मंदिर - पुल्लिंग, एकवचन) है, इसलिए सर्वनाम 'अयम्' (यह) होगा। वाक्य:
अयम् देवालय: विशाल:।
- 'पुस्तकम्' (किताब - नपुंसकलिंग, एकवचन) है, इसलिए सर्वनाम 'इदम्' (यह) होगा। वाक्य:
इदम् पुस्तकम् अति शोभनम्।
- 'बालकौ' (दो लड़के - पुल्लिंग, द्विवचन) हैं, इसलिए सर्वनाम 'तौ' (वे दोनों) होगा। वाक्य:
तौ बालकौ कुत्र अगच्छताम्?
- 'फलम्' (फल - नपुंसकलिंग, एकवचन) है, इसलिए सर्वनाम 'यत्' (जो) होगा। वाक्य:
यत् फलम् पक्वम् तत् मधुरम्।
- 'परिश्रमं करोति' (परिश्रम करता है) के लिए 'यः' (जो - पुल्लिंग, एकवचन) सर्वनाम का प्रयोग होगा। वाक्य:
यः परिश्रमं करोति सः उत्तमान् अङ्कान् लभते।
प्रश्न 4
1. वयम् अध्यापिकया, संस्कृतं पठाम:।
2. गुरु: शिष्ये कुध्यति।
3. माम् मिष्टान्नम् न रोचते।
4. शिशुः मातरं स्निह्यति ।
5. गुरुः शिष्यात् प्रश्नं पृच्छति।
6. सः आपणेन पुस्तकम् आनयत्।
7. सः मित्रात् कलमं याचते।
वाक्य में सही विभक्ति (case) का प्रयोग क्रिया या अन्य शब्दों के साथ उसके संबंध को स्पष्ट करता है। यहाँ रेखांकित पदों में प्रयुक्त विभक्तियों को शुद्ध किया गया है:
- 'पठाम:' (पढ़ते हैं) क्रिया के साथ, जिससे पढ़ा जाता है, उसमें 'अध्यापिकायाः' (अध्यापिका से - षष्ठी विभक्ति) के स्थान पर 'अध्यापिकायाम्' (अध्यापिका में - सप्तमी विभक्ति) या 'अध्यापिकया' (अध्यापिका द्वारा - तृतीया विभक्ति) का प्रयोग हो सकता है, लेकिन यहाँ 'अध्यापिकायाः' (षष्ठी) का प्रयोग गलत है। यदि 'अध्यापिका से' पढ़ना है तो 'अध्यापिकायाः' (षष्ठी) के स्थान पर 'अध्यापिकायाः' (षष्ठी) या 'अध्यापिकायाः' (षष्ठी) का प्रयोग हो सकता है। यदि 'अध्यापिका के द्वारा' पढ़ना है तो 'अध्यापिकया' (तृतीया) का प्रयोग होगा। दिए गए उत्तर के अनुसार, 'अध्यापिकायाः' (षष्ठी) का प्रयोग किया गया है, जो 'संस्कृतम्' (कर्म) के साथ सही है। वाक्य:
वयम् अध्यापिकायाः संस्कृतम् पठामः।
- 'कुध्यति' (क्रोध करता है) धातु के योग में जिस पर क्रोध किया जाए, उसमें चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। इसलिए 'शिष्ये' (सप्तमी) के स्थान पर 'शिष्याय' (चतुर्थी) होगा। वाक्य:
गुरु: शिष्याय कुध्यति।
- 'रोचते' (अच्छा लगता है) क्रिया के साथ, जिसे कुछ अच्छा लगता है, उसमें चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है। इसलिए 'माम्' (षष्ठी/द्वितीया) के स्थान पर 'मह्यम्' (चतुर्थी) होगा। वाक्य:
मह्यम् मिष्टान्नम् न रोचते।
- 'स्निह्यति' (स्नेह करता है) धातु के योग में जिससे स्नेह किया जाए, उसमें सप्तमी विभक्ति का प्रयोग होता है। इसलिए 'मातरं' (द्वितीया) के स्थान पर 'मातरि' (सप्तमी) होगा। वाक्य:
शिशु: मातरि स्निह्यति।
- 'पृच्छति' (पूछता है) क्रिया के साथ, जिससे प्रश्न पूछा जाए, उसमें पंचमी विभक्ति का प्रयोग होता है। इसलिए 'शिष्यात्' (पंचमी) सही है। वाक्य:
गुरुः शिष्यात् प्रश्नं पृच्छति।
- 'आनयत्' (लाया) क्रिया के साथ, जहाँ से लाया जाए, उसमें पंचमी विभक्ति का प्रयोग होता है। इसलिए 'आपणेन' (तृतीया) के स्थान पर 'आपणात्' (पंचमी) होगा। वाक्य:
सः आपणात् पुस्तकम् आनयत्।
- 'याचते' (मांगता है) क्रिया के साथ, जिससे कुछ माँगा जाए, उसमें पंचमी विभक्ति का प्रयोग होता है। इसलिए 'मित्रात्' (पंचमी) सही है। वाक्य:
सः मित्रात् कलमं याचते।
Common mistakes
- कर्ता और क्रियापद के वचन में असंगति।
- विशेषण का संज्ञा के लिंग, वचन या कारक से मेल न खाना।
- संज्ञाओं के लिए गलत विभक्ति का प्रयोग।
- क्रियापदों के काल (tense) संबंधी त्रुटियाँ।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के हल को ध्यान से पढ़ें और समझें कि क्यों विशेषण या क्रियापद का वह रूप सही है।
- कर्ता-क्रिया अन्वय (agreement) के नियमों को दोहराएं।
- संज्ञाओं के विभिन्न लिंगों (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग) और वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) के रूपों का अभ्यास करें।
- वाक्य रचना के अभ्यास को पूरा करने के बाद, स्वयं कुछ वाक्य बनाकर अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. वाक्य 'त्वम् किम् करोति ?' में क्रियापद को शुद्ध करें।
Explanation: कर्ता 'त्वम्' (तुम) के साथ क्रियापद 'करोषि' (करते हो) का प्रयोग होता है।
Q2. वाक्य 'लवकुशौ रामस्य पुत्रौ आसन्।' में क्रियापद को शुद्ध करें।
Explanation: कर्ता 'लवकुशौ' (दो) द्विवचन में है, इसलिए क्रियापद 'आस्ताम्' (थे) द्विवचन का प्रयोग होगा।
Q3. वाक्य 'हिमालय-पर्वतः अति.....।' के लिए उचित विशेषण चुनें।
Explanation: कर्ता 'हिमालय-पर्वतः' (पुल्लिंग, एकवचन) है, इसलिए विशेषण 'उन्नतः' (ऊँचा) भी पुल्लिंग, एकवचन में होगा।
Q4. वाक्य 'इदम् वस्त्रम्.....।' के लिए उचित विशेषण चुनें।
Explanation: कर्ता 'इदम् वस्त्रम्' (नपुंसकलिंग, एकवचन) है, इसलिए विशेषण 'मलिनम्' (गंदा) भी नपुंसकलिंग, एकवचन में होगा।
Q5. वाक्य 'तडागे.....विकसन्ति।' के लिए उचित संज्ञा-रूप चुनें।
Explanation: क्रिया 'विकसन्ति' (खिलते हैं) बहुवचन है, इसलिए कर्ता 'कमलानि' (कमल) भी बहुवचन (नपुंसकलिंग) में होगा।
Q6. वाक्य '..... देवालय: विशाल:' के लिए उचित सर्वनाम चुनें।
Explanation: कर्ता 'देवालय:' (पुल्लिंग, एकवचन) है, इसलिए सर्वनाम 'अयम्' (यह) भी पुल्लिंग, एकवचन में होगा।
Q7. वाक्य 'गुरु: शिष्ये कुध्यति।' में रेखांकित पद में प्रयुक्त विभक्ति को शुद्ध करें।
Explanation: 'कुध्र' (क्रोध करना) धातु के योग में 'शिष्य' (जिस पर क्रोध किया जाए) में चतुर्थी विभक्ति का प्रयोग होता है, इसलिए 'शिष्याय' शुद्ध है।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह NCERT समाधान कक्षा 8 के संस्कृत विषय के लिए हैं, जो 'वाक्यरचना – सुद्धप्रयोगः' अध्याय पर केंद्रित हैं।
इन समाधानों में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?
इन समाधानों में छात्रों को संस्कृत वाक्यों में क्रियापदों, विशेषणों और संज्ञाओं के शुद्ध प्रयोग का अभ्यास कराया गया है, जिससे व्याकरणिक सटीकता बढ़े।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत हल प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने और परीक्षा में वाक्य रचना से संबंधित प्रश्नों को हल करने में मदद मिलेगी।
क्रियापद संशोधन का क्या अर्थ है?
क्रियापद संशोधन का अर्थ है वाक्य के कर्ता (subject) के अनुसार क्रियापद (verb) के सही रूप का चयन करना, जैसे कि पुरुष (first, second, third person) और वचन (singular, dual, plural) के अनुसार।
विशेषण का प्रयोग करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
विशेषण का प्रयोग करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वह संज्ञा के लिंग (gender), वचन (number) और कारक (case) के अनुसार परिवर्तित हो।
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