CBSE Class 8 Hindi Vasant Chapter 7: Kya Nirash Hua Jaye NCERT Solutions
This chapter, 'Kya Nirash Hua Jaye' (Will Hope Be Lost?), from CBSE Class 8 Hindi Vasant, delves into the human tendency to focus on negative aspects of society while overlooking the good. The NCERT Solutions provided here offer detailed explanations for each question. They explore why the author remains hopeful despite experiencing deceit, the conditions under which exposing faults becomes detrimental, and the impact of such exposures on society. The solutions also discuss the consequences of valuing dishonesty over truth and the importance of maintaining a positive outlook. These solutions are designed to help students understand the nuances of human behavior and societal challenges, aiding in their exam preparation by clarifying complex ideas and encouraging critical thinking about the themes presented in the chapter.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | Hindi Vasant III |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 7 |
Chapter summary
Chapter 7, 'Kya Nirash Hua Jaye' of CBSE Class 8 Hindi Vasant, addresses the prevalent feeling of despair due to societal ills. The NCERT Solutions focus on understanding the author's perspective on maintaining hope amidst negativity. They explain the reasons behind the author's optimism, the ethical considerations of exposing faults, and the potential societal impacts of such actions. The solutions also touch upon the challenges of upholding ideals and the importance of a positive outlook, providing students with a clear understanding of the chapter's core messages.
Learning outcomes
- Understand the author's perspective on hope and despair.
- Analyze the reasons for maintaining faith in humanity despite negative experiences.
- Evaluate the consequences of exposing societal faults.
- Discuss the challenges of adhering to ideals in practical life.
- Identify the importance of a positive outlook in navigating societal issues.
Topics covered
Paper topics
- Hope and Despair
- Humanity and Deceit
- Exposing Faults
- Societal Awareness
- Truth vs. Deception
- Upholding Ideals
- Positive Outlook
- Grammar: Dvanda Samas
Important topics
- Author's perspective on hope
- Ethical implications of exposing faults
- Consequences of societal dishonesty
- The role of positive experiences
- Dvanda Samas
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Questions and Solutions
हिंदी
वसंत- Chapter 7: क्या निराश हुआ जाए
Class 8
- लेखक ने स्वीकार किया है कि लोगों ने उन्हें भी धोखा दिया है फिर भी वह निराश नहीं हैं।
आपके विचार से इस बात का क्या कारण हो सकता है?
उत्तर:- लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का वर्णन करते हुए कहा है कि उसने धोखा भी खाया है परंतु बहुत कम स्थलों पर विश्वासघात नाम की चीज मिलती है। पर उसका मानना है कि अगर वो इन धोखों को याद रखेगा तो उसके लिए विश्वास करना बेहद कष्टकारी होगा और ऐसी घटनाएँ भी बहुत कम नहीं हैं जब लोगों ने अकारण उनकी सहायता की है,निराश मन को ढाँढस दिया है और हिम्मत बँधाई है। टिकट बाबू द्वारा बचे हुए पैसे लेखक को लौटाना, बस कंडक्टर द्वारा दूसरी बस व बच्चों के लिए दूध लाना आदि ऐसी घटनाएँ हैं। इसलिए उसे विश्वास है कि समाज में मानवता,प्रेम, आपसी सहयोग समाप्त नहीं हो सकते।
- दोषों का पर्दाफ़ाश करना कब बुरा रूप ले सकता है?
उत्तर:- दोषों का पर्दाफ़ाश करना तब बुरा रूप ले सकता है जब हम किसी के आचरण के गलत पक्ष को उद्घाटित करके उसमें रस लेते है या जब हमारे ऐसा करने से वे लोग उग्र रूप धारण कर किसी को हानि पहुँचाए।
- आजकल के बहुत से समाचार पत्र या समाचार चैनल 'दोषों का पर्दाफ़ाश' कर रहे हैं। इस
प्रकार के समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए?
उत्तर:- इस प्रकार के पर्दा फाश से समाज में व्याप्त बुराईयों से, अपने आस-पास के वातावरण तथा लोगों से अवगत हो जाते हैं और इसके कारण समाज में जागरूकता भी आती है साथ ही समाज समय रहते ही सचेत और सावधान हो जाता हैं।
- निम्नलिखित के संभावित परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं? आपस में चर्चा कीजिए, जैसे – "ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है।"परिणाम-भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
- "सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है।" .....
- "झूठ और फरेब का रोज़गार करनेवाले फल-फूल रहे हैं।" .....
- "हर आदमी दोषी अधिक दिख रहा है, गुणी कम।" .....
उत्तर:- 1. "सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है। — तानाशाही बढ़ेगी
- "झूठ और फरेब का रोज़गार करनेवाले फल-फूल रहे हैं।" — भ्रष्टाचार बढ़ेगा
- "हर आदमी दोषी अधिक दिख रहा है, गुणी कम।" – अविश्वास बढ़ेगा
- लेखक ने लेख का शीर्षक ‘क्या निराश हुआ जाए’ क्यों रखा होगा? क्या आप इससे भी बेहतर शीर्षक सुझा सकते हैं?
उत्तर:- लेखक ने इस लेख का शीर्षक ‘क्या निराश हुआ जाए’ उचित रखा है। आजकल हम अराजकता
की जो घटनाएँ अपने आसपास घटते देखते रहते हैं। जिससे हमारे मन में निराशा भर जाती है। लेकिन लेखक हमें उस समय समाज के मानवीय गुणों से भरे लोगों को और उनके कार्यों को याद करने कहा हैं जिससे हम निराश न हो।
इसका अन्य शीर्षक 'हम निराशा से आशा' भी रख सकते हैं।
- यदि 'क्या निराश हुआ जाए' के बाद कोई विराम चिहन लगाने के लिए कहा जाए तो आप दिए
गए चिह्नों में से कौन-सा चिहन लगाएँगे? अपने चुनाव का कारण भी बताइए – , । . । ? ; – , .... । उत्तर:- 'क्या निराश हुआ जाए' के बाद मैं प्रश्न चिन्ह 'क्या निराश हुआ जाए?' लगाना उचित समझता हूँ। समाज में व्याप्त बुराइयों के बीच रहते हुए भी जीवन जीने के लिए सकारात्मक दृष्टि जरूरी है।
- "आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है पर उन पर चलना बहुत कठिन है।" क्या आप इस बात से सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर:- "आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है पर उन पर चलना बहुत कठिन है।" – मैं इस कथन से सहमत हूँ क्योंकि व्यक्ति जब आदर्शों की राह पर चलता है तब उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। असामाजिक तत्वों का अकेले सामना करना पड़ता है।
• भाषा की बात
- दो शब्दों के मिलने से समास बनता है। समास का एक प्रकार है – द्वंद्व समास।
इसमें दोनों शब्द प्रधान होते हैं। जब दोनों भाग प्रधान होंगे तो एक-दूसरे में द्वंद्व (स्पर्धा, होड़) की संभावना होती है। कोई किसी से पीछे रहना नहीं चाहता,
जैसे – चरम और परम = चरम-परम, भीरु और बेबस = भीरू-बेबस। दिन और रात = दिन-रात। 'और' के साथ आए शब्दों के जोड़े को 'और' हटाकर (-) योजक चिह्न भी लगाया जाता है। कभी-कभी एक साथ भी लिखा जाता है।
द्वंद्व समास के बारह उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर:-
सुख और दुख सुख-दुख हँसना और रोना भूख और प्यास भूख-प्यास<br>हँसना-रोना आते और जाते आते-जाते राजा और रानी राजा-रानी चाचा और चाची चाचा-चाची सच्चा और झुठा सच्चा-झूठा पाना और खोना पाना-खोना पाप और पुण्य पाप-पुण्य स्त्री और पुरूष स्ती-पुरूष
Common mistakes
- Focusing solely on negative societal aspects without acknowledging positive ones.
- Misinterpreting the author's intent regarding the exposure of faults.
- Underestimating the difficulty of living by ideals.
- Failing to connect personal experiences of deceit with broader societal trends.
Revision tips
- Reread the chapter focusing on the author's personal anecdotes that illustrate hope.
- Discuss the ethical implications of 'exposing faults' with peers.
- Reflect on real-life examples that support or contradict the chapter's themes.
- Pay attention to the author's reasoning for not losing faith in humanity.
- Consider the different punctuation marks and their impact on the chapter's title.
Practice MCQs
Q1. लेखक के अनुसार, व्यक्तिगत अनुभवों में विश्वासघात की घटनाएँ कैसी हैं?
Explanation: लेखक का मानना है कि धोखे के बावजूद, विश्वासघात की घटनाएँ बहुत कम होती हैं, और अच्छे अनुभव अधिक मिलते हैं।
Q2. दोषों का पर्दाफ़ाश करना कब बुरा रूप ले सकता है?
Explanation: दोषों का पर्दाफ़ाश तब बुरा होता है जब उसमें आनंद लिया जाए या फिर उस खुलासे से लोग उग्र होकर किसी को हानि पहुँचाएँ।
Q3. समाचार पत्र और चैनल द्वारा दोषों का पर्दाफ़ाश करने से समाज में क्या आता है?
Explanation: इस प्रकार के पर्दाफ़ाश से समाज में व्याप्त बुराइयों के प्रति जागरूकता आती है और लोग सचेत हो जाते हैं।
Q4. 'सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है' - इस कथन का संभावित परिणाम क्या हो सकता है?
Explanation: यदि सच्चाई को केवल कमजोरों का हिस्सा माना जाए, तो यह स्थिति तानाशाही को बढ़ावा दे सकती है।
Q5. लेखक ने 'क्या निराश हुआ जाए' शीर्षक क्यों चुना होगा?
Explanation: यह शीर्षक पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि निराशा के बावजूद आशा की किरणें मौजूद हैं।
Q6. द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं। इसका एक उदाहरण है:
Explanation: चरम और परम दोनों शब्द प्रधान हैं, इसलिए 'चरम-परम' द्वंद्व समास का उदाहरण है।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह समाधान CBSE कक्षा 8 की हिंदी वसंत पुस्तक के अध्याय 7 'क्या निराश हुआ जाए' के लिए हैं।
अध्याय 'क्या निराश हुआ जाए' का मुख्य विषय क्या है?
अध्याय का मुख्य विषय समाज में व्याप्त बुराइयों के बावजूद मानवता और अच्छाई में विश्वास बनाए रखने और निराश न होने की प्रेरणा देना है।
लेखक व्यक्तिगत धोखे के बावजूद निराश क्यों नहीं हैं?
लेखक का मानना है कि धोखे के बावजूद, समाज में बहुत से लोग निस्वार्थ भाव से मदद करते हैं और हिम्मत बँधाते हैं, जो उन्हें आशावादी बनाए रखते हैं।
दोषों का पर्दाफ़ाश करने के क्या नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं?
दोषों का पर्दाफ़ाश तब बुरा रूप ले सकता है जब उसमें केवल रस लिया जाए या फिर उस खुलासे से लोग उग्र होकर किसी को हानि पहुँचाएँ।
क्या इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए किया जा सकता है?
हाँ, ये समाधान अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
समास के किस प्रकार पर इस अध्याय में चर्चा की गई है?
इस अध्याय में द्वंद्व समास पर चर्चा की गई है, जिसमें दोनों पद प्रधान होते हैं।
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