कक्षा 7 हमारे अतीत: अध्याय 9 - क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 के लिए 'हमारे अतीत' पुस्तक के अध्याय 9, 'क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय भारत में क्षेत्रीय संस्कृतियों के विकास की पड़ताल करता है, जिसमें भाषा, साहित्य, शास्त्रीय नृत्य रूपों जैसे भरतनाट्यम, कथकली, ओडिसी, कुचिपुड़ी और मणिपुरी, और वास्तुकला की विभिन्न शैलियों का निर्माण शामिल है। इसमें बंगाल के मंदिरों की अनूठी वास्तुकला और चारण-भाटों द्वारा शूरवीरों की उपलब्धियों के गायन जैसे विषयों पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को इन सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के ऐतिहासिक संदर्भ और महत्व को समझने में मदद करते हैं, जिससे वे परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और व्यापक समझ विकसित कर सकें।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectहमारे अतीत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter9. क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण

Chapter summary

अध्याय 9 'क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण' में, हम भारत में विभिन्न क्षेत्रीय संस्कृतियों के विकास का अध्ययन करते हैं। इसमें भाषा के विकास, साहित्य, शास्त्रीय नृत्य रूपों (जैसे भरतनाट्यम, कथकली, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी) और वास्तुकला की शैलियों पर चर्चा की गई है। विशेष रूप से बंगाल के मंदिरों की वास्तुकला और चारण-भाटों द्वारा शूरवीरों की प्रशंसा के गायन पर प्रकाश डाला गया है। यह समाधान छात्रों को इन सांस्कृतिक पहलुओं की गहरी समझ प्रदान करता है।

Learning outcomes

  • नए राज्यों के गठन और क्षेत्रीय पहचान के बीच संबंध को समझना।
  • क्षेत्रीय भाषाओं के विकास और उनके प्रारंभिक साहित्यिक कार्यों की पहचान करना।
  • प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों और उनके उत्पत्ति स्थानों को जानना।
  • बंगाल के मंदिरों की विशिष्ट वास्तुकला की विशेषताओं का वर्णन करना।
  • चारण-भाटों द्वारा शूरवीरों की उपलब्धियों के गायन के महत्व को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण
  • नए राज्यों का गठन
  • भाषाओं का विकास
  • साहित्यिक कृतियाँ
  • शास्त्रीय नृत्य (भरतनाट्यम, कथकली, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी)
  • वास्तुकला की शैलियाँ
  • बंगाल के मंदिर
  • चारण-भाट और वीर गाथाएँ
  • मौखिक परंपराएँ
  • लिखित परंपराएँ

Important topics

  • क्षेत्रीय भाषाओं और साहित्य का विकास
  • प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों का परिचय
  • बंगाल के मंदिरों की वास्तुकला
  • चारण-भाटों की भूमिका

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Questions and Solutions

पाठगत प्रश्न 1

पता लगाएँ कि पिछले दस सालों में कितने नए राज्य बनाए गए हैं। क्या इनमें से प्रत्येक राज्य एक अलग क्षेत्र है?
Solution: पिछले दस वर्षों में भारत में कई नए राज्यों का गठन हुआ है, जिनमें प्रमुख हैं झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तरांचल (अब उत्तराखंड)। ये राज्य उन राज्यों से भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से भिन्न थे जिनसे वे अलग हुए थे। इसलिए, जब हम उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों का अध्ययन करते हैं, तो इन नए राज्यों को अलग भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों के रूप में देखा जाता है, जिनकी अपनी विशिष्ट पहचान और विशेषताएँ होती हैं।

पाठगत प्रश्न 1 (जारी)

पता लगाएँ कि आपके घर में आप जो भाषा बोलते हैं, उसका लेखन में सर्वप्रथम कब प्रयोग हुआ होगा?
Solution: यह एक व्यक्तिगत प्रश्न है जिसका उत्तर आपके घर में बोली जाने वाली भाषा पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि आपके घर में हिंदी बोली जाती है, तो हिंदी भाषा का सर्वप्रथम लिखित प्रयोग संभवतः 12वीं शताब्दी के आसपास हुआ था। चन्दबरदाई द्वारा रचित 'पृथ्वीराज रासो' को हिंदी का पहला प्रमुख साहित्यिक ग्रंथ माना जाता है, जो इस भाषा के प्रारंभिक लिखित रूप को दर्शाता है।

पाठगत प्रश्न 3

भरतनाट्यम (तमिलनाडु), कथाकली (केरल), ओडिसी (उड़ीसा), कुचिपुड़ी (आन्ध्र प्रदेश), मणिपुरी (मणिपुर) में से किसी एक नृत्य के रूप में अधिक जानकारी प्राप्त करें।
Solution: हम कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश) नृत्य के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करते हैं। कुचिपुड़ी नृत्य की उत्पत्ति आंध्र प्रदेश के कुचेलपुरम नामक गाँव में हुई थी। यह एक प्रमुख नृत्य-नाटिका शैली है, जो तमिलनाडु की भागवत मेला नाटक शैली के समान है। यह शास्त्रीय नृत्य भरतमुनि के 'नाट्यशास्त्र' के सिद्धांतों का पालन करता है और इसका उद्देश्य वैदिक एवं उपनिषदों के धर्म और अध्यात्म का प्रचार करना था। इस शैली का विकास तीर्थ नारायण और सिद्धेन्द्र योगी ने किया था। मूल रूप से यह पुरुषों द्वारा किया जाने वाला नृत्य था, लेकिन हाल के वर्षों में महिलाओं ने भी इसे अपनाया है।

पाठगत प्रश्न 4

आपके विचार से द्वितीय श्रेणी की कृतियाँ लिखित रूप में क्यों नहीं रखी जाती थीं?
Solution: द्वितीय श्रेणी की कृतियाँ संभवतः लिखित रूप में इसलिए नहीं रखी जाती थीं क्योंकि वे मुख्य रूप से मौखिक परंपरा का हिस्सा थीं। मौखिक रूप से कही-सुनी जाने वाली बातों का काल निर्धारण करना कठिन होता है और उनकी विश्वसनीयता भी कम हो सकती है। इसके विपरीत, लिखित कृतियों का एक निश्चित काल होता है और उनकी प्रामाणिकता को सत्यापित करना आसान होता है, जिससे वे ऐतिहासिक अध्ययन के लिए अधिक महत्वपूर्ण बन जाती हैं।

प्रश्न-अभ्यास 1

निम्नलिखित में मेल बैठाएँ:

अनतवर्मन | जगन्नाथ | बंगाल | महोदयपुरम | उडीसा

लीला तिलकम | कागडा | मंगलकाव्य | पुरी | लघुचित्र

Solution:

सही मेल इस प्रकार है:

  • अनंतवर्मन - जगन्नाथ पुरी (उड़ीसा के शासक जिन्होंने जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करवाया)
  • महोदयपुरम - केरल (चेर शासकों की राजधानी)
  • लीला तिलकम - केरल (मणिप्रवालम भाषा में रचित एक ग्रंथ)
  • कांगड़ा - लघुचित्र (पहाड़ी लघुचित्र शैली का एक महत्वपूर्ण केंद्र)
  • बंगाल - मंगलकाव्य (बंगाल का एक लोकप्रिय काव्य रूप)

प्रश्न-अभ्यास 2

मणिप्रवालम क्या है? इस भाषा में लिखी पुस्तक का नाम बताएँ।
Solution: 'मणिप्रवालम' एक भाषा-शैली है जो केरल में विकसित हुई। इसका शाब्दिक अर्थ है 'हीरा और मुँगा'। यह शैली संस्कृत और क्षेत्रीय भाषा (मलयालम) के मिश्रण को दर्शाती है। इस भाषा-शैली में लिखी गई एक महत्वपूर्ण पुस्तक का नाम 'लीला तिलकम' है, जो व्याकरण और काव्यशास्त्र पर एक ग्रंथ है।

प्रश्न-अभ्यास 3

कत्थक के प्रमुख संरक्षक कौन थे?
Solution: कत्थक नृत्य शैली के प्रमुख संरक्षक राजस्थान के राजदरबार और लखनऊ के नवाब थे। विशेष रूप से, अवध के अंतिम नवाब, वाजिद अली शाह, के संरक्षण में कत्थक ने एक प्रमुख कला के रूप में विकास किया और अपनी पहचान बनाई।

प्रश्न-अभ्यास 4

बंगाल के मंदिरों की स्थापत्य कला के महत्त्वपूर्ण लक्षण क्या हैं?
Solution: बंगाल के मंदिरों की स्थापत्य कला के महत्त्वपूर्ण लक्षण निम्नलिखित हैं:
  1. स्थानीय देवी-देवताओं की पूजा, जो पहले गाँवों में सामान्य झोपड़ियों में होती थी, मंदिरों में स्थापित की गई।
  2. मंदिरों की आकृति स्थानीय छप्परदार झोपड़ियों की तरह 'दोचाला' (दो छतों वाली) या 'चौचाला' (चार छतों वाली) होती थी।
  3. मंदिरों का निर्माण आमतौर पर एक वर्गाकार चबूतरे पर किया जाता था, और उनके भीतरी भाग में विशेष सजावट नहीं होती थी।
  4. मंदिरों की बाहरी दीवारों को चित्रकारियों, सजावटी टाइलों या मिट्टी की पट्टियों से खूबसूरती से सजाया जाता था।

प्रश्न-अभ्यास 5

चारण-भाटों ने शूरवीरों की उपलब्धियों की उद्घोषणा क्यों की?
Solution: चारण-भाटों ने शूरवीरों की उपलब्धियों की उद्घोषणा कई कारणों से की:
  1. वे शूरवीरों के वीर कार्यों और उनकी स्मृति को काव्य और गीतों के माध्यम से जीवित रखते थे, जिससे उनका यश बना रहता था।
  2. उनसे यह अपेक्षा की जाती थी कि वे अपने गायन से अन्य लोगों को भी उन शूरवीरों के आदर्शों का अनुकरण करने और वीरतापूर्ण कार्य करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करें।

Common mistakes

  • मौखिक परंपराओं और लिखित अभिलेखों के बीच अंतर को समझने में कठिनाई।
  • विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों को उनके संबंधित राज्यों के साथ मिलाने में भ्रम।
  • क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के ऐतिहासिक संदर्भ को नजरअंदाज करना।

Revision tips

  • प्रत्येक शास्त्रीय नृत्य शैली को उसके राज्य और प्रमुख विशेषताओं के साथ सारणीबद्ध करें।
  • बंगाल के मंदिरों की वास्तुकला की मुख्य विशेषताओं को सूचीबद्ध करें।
  • क्षेत्रीय भाषाओं के विकास से संबंधित मुख्य बिंदुओं को दोहराएं।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन सा राज्य पिछले दस वर्षों में बनाया गया है?

Q2. 'मणिप्रवालम' का शाब्दिक अर्थ क्या है?

Q3. कत्थक नृत्य शैली के प्रमुख संरक्षक कौन थे?

Q4. बंगाल के मंदिरों की स्थापत्य कला की एक विशेषता क्या थी?

Q5. चारण-भाटों द्वारा शूरवीरों की उपलब्धियों का गायन क्यों किया जाता था?

Frequently asked questions

कक्षा 7 के 'हमारे अतीत' पुस्तक का अध्याय 9 किस बारे में है?

अध्याय 9 'क्षेत्रीय संस्कृतियों का निर्माण' भारत में विभिन्न क्षेत्रीय संस्कृतियों के विकास, जैसे भाषा, साहित्य, शास्त्रीय नृत्य और वास्तुकला की शैलियों पर केंद्रित है।

इस अध्याय में किन शास्त्रीय नृत्य शैलियों का उल्लेख किया गया है?

इस अध्याय में भरतनाट्यम (तमिलनाडु), कथकली (केरल), ओडिसी (उड़ीसा), कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश), और मणिपुरी (मणिपुर) जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों का उल्लेख है।

बंगाल के मंदिरों की वास्तुकला की मुख्य विशेषता क्या है?

बंगाल के मंदिरों की वास्तुकला की मुख्य विशेषता उनकी छतों का स्थानीय छप्परदार झोपड़ियों की तरह दोचाला या चौचाला होना और बाहरी दीवारों पर चित्रकारियों या टाइलों से सजावट है।

'मणिप्रवालम' क्या है और इसका क्या महत्व है?

मणिप्रवालम एक भाषा-शैली है जिसका अर्थ 'हीरा और मुँगा' है। यह संस्कृत और क्षेत्रीय भाषा के एक साथ प्रयोग को दर्शाता है, जैसा कि केरल में देखा गया।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?

ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझने, प्रमुख तथ्यों को याद रखने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करते हैं।

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