कक्षा 7 इतिहास: अध्याय 8 ईश्वर से अनुराग - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 8, 'ईश्वर से अनुराग' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय भक्ति आंदोलन के विभिन्न महत्वपूर्ण संतों और उनके विचारों पर केंद्रित है। इसमें आठवीं शताब्दी के दार्शनिक शंकर के अद्वैतवाद, ग्यारहवीं शताब्दी के संत रामानुज के विशिष्टाद्वैतवाद, और वीरशैव आंदोलन के प्रवर्तक वसवन्ना के विचारों का गहन विश्लेषण किया गया है। साथ ही, यह कबीर के एकेश्वरवाद और भक्ति के माध्यम से मोक्ष की अवधारणा, और मीराबाई द्वारा राजमहल त्यागकर कृष्ण भक्ति को अपनाने के कारणों पर भी प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को इन भक्ति संतों के दर्शन, उनके द्वारा समाज में लाए गए बदलावों और उनके उपदेशों को समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectहमारे अतीत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter8. ईश्वर से अनुराग

Chapter summary

कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 8 'ईश्वर से अनुराग' के NCERT समाधान भक्ति आंदोलन के प्रमुख विचारकों और उनकी शिक्षाओं पर केंद्रित हैं। इसमें शंकर के अद्वैतवाद, रामानुज के विशिष्टाद्वैतवाद, वसवन्ना के वीरशैव मत, और कबीर व मीराबाई जैसे संतों के भक्ति-केंद्रित विचारों का सार प्रस्तुत किया गया है। ये समाधान छात्रों को विभिन्न दार्शनिक मतों और भक्ति के विभिन्न रूपों को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • शंकर और रामानुज के प्रमुख दार्शनिक विचारों को समझना।
  • वसवन्ना द्वारा प्रस्तुत वीरशैव मत के सिद्धांतों को जानना।
  • कबीर के एकेश्वरवाद और भक्ति के महत्व को समझना।
  • मीराबाई के कृष्ण प्रेम और उनके द्वारा राजमहल त्यागने के कारणों का विश्लेषण करना।
  • भक्ति आंदोलन के विभिन्न रूपों और संतों के योगदान को पहचानना।

Topics covered

Paper topics

  • शंकर का अद्वैतवाद
  • रामानुज का विशिष्टाद्वैतवाद
  • वसवन्ना और वीरशैव मत
  • कबीर के विचार
  • मीराबाई की भक्ति
  • अलवार और नयनार संत
  • भक्ति आंदोलन का प्रसार
  • धार्मिक समूहों का उदय
  • मोक्ष की अवधारणा
  • सामाजिक अंतरों पर आलोचना

Important topics

  • शंकर और रामानुज के दार्शनिक सिद्धांत
  • कबीर के एकेश्वरवाद और भक्ति का महत्व
  • मीराबाई की कृष्ण भक्ति
  • भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत और उनके योगदान

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

शंकर या रामानुज के विचारों के बारे में पता लगाने का प्रयत्न करें।
Solution:

यहाँ शंकर और रामानुज के प्रमुख विचारों का विवरण दिया गया है:

शंकर (जन्म 8वीं शताब्दी, केरल):

  1. अद्वैतवाद: शंकर अद्वैतवाद के प्रमुख समर्थक थे। इस दर्शन के अनुसार, जीवात्मा (व्यक्तिगत आत्मा) और परमात्मा (सार्वभौमिक आत्मा) मूल रूप से एक ही हैं।
  2. ब्रह्म की प्रकृति: उन्होंने शिक्षा दी कि ब्रह्म, जो एकमात्र परम सत्य है, वह निर्गुण (बिना गुणों वाला) और निराकार (बिना रूप वाला) है।
  3. संसार और मोक्ष: शंकर ने हमारे चारों ओर के संसार को मिथ्या या माया माना। उन्होंने मोक्ष प्राप्त करने के लिए संसार का परित्याग करने (संन्यास लेने) और ज्ञान के मार्ग को अपनाने का उपदेश दिया, ताकि ब्रह्म की वास्तविक प्रकृति को समझा जा सके।

रामानुज (जन्म 11वीं शताब्दी, तमिलनाडु):

  1. भक्ति मार्ग: रामानुज विष्णु भक्त अलवार संतों से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने मोक्ष प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण उपाय विष्णु के प्रति अनन्य भक्ति भाव रखना बताया।
  2. एकाकार होने का परमानंद: उनका मानना था कि भगवान विष्णु की कृपा से भक्त उनके साथ एकाकार होकर परमानंद की अनुभूति कर सकता है।
  3. विशिष्टाद्वैत: रामानुज ने विशिष्टाद्वैत के सिद्धांत को प्रतिपादित किया। इस सिद्धांत के अनुसार, आत्मा, परमात्मा से जुड़ने के बाद भी अपनी एक अलग सत्ता या पहचान बनाए रखती है, अर्थात वह पूरी तरह से परमात्मा में विलीन नहीं होती।

प्रश्न 2

बसवन्ना ईश्वर को कौन-सा मंदिर अर्पित कर रहा है?
Solution:

बसवन्ना, जो वीरशैव आंदोलन के एक प्रमुख संत थे, ईश्वर को अपने शरीर रूपी मंदिर को अर्पित कर रहे थे। उनका मानना था कि ईश्वर किसी बाहरी मंदिर में नहीं, बल्कि मनुष्य के अपने शरीर और आत्मा में निवास करता है।

प्रश्न 3

आपके विचार से मीरा ने राणा का राजमहल क्यों छोड़ा?
Solution:

मीराबाई ने राणा का राजमहल संभवतः निम्नलिखित कारणों से छोड़ा:

  1. गहन कृष्ण भक्ति: मीराबाई भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त थीं और उनका सारा जीवन कृष्ण की आराधना में समर्पित था। राजमहल की सांसारिक जिम्मेदारियाँ और वैभव उनकी आध्यात्मिक साधना में बाधक हो सकते थे।
  2. सामाजिक बंधनों से मुक्ति: वे रविदास जैसे संत की अनुयायी थीं, जिन्हें उस समय समाज में निम्न जाति का माना जाता था। राजमहल के सामाजिक नियमों और बंधनों से मुक्त होकर वे अपनी भक्ति को अधिक स्वतंत्रता से व्यक्त करना चाहती थीं।
  3. आध्यात्मिक शांति की तलाश: राजमहल के जीवन की अपेक्षा उन्होंने एकांत और आध्यात्मिक शांति को अधिक महत्व दिया, जहाँ वे पूरी तरह से अपने आराध्य कृष्ण के प्रति समर्पित रह सकें।

उन्होंने अपने भजनों के माध्यम से अपने गहरे भक्ति-भाव को अभिव्यक्त किया, जो उनकी आंतरिक भावनाओं और ईश्वर के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

प्रश्न 4

निम्नलिखित का मेल बैठाएँ:

बुद्ध

शंकरदेव

निजामुद्दीन औलिया

नयनार

अलवार

नामघर

विष्णु की पूजा

सामाजिक अंतरों पर सवाल उठाए

सुफ़ी संत

शिव की पूजा

Solution:

सही मेल इस प्रकार है:

  • बुद्ध - सामाजिक अंतरों पर सवाल उठाए
  • शंकरदेव - नामघर
  • निजामुद्दीन औलिया - सुफ़ी संत
  • नयनार - शिव की पूजा
  • अलवार - विष्णु की पूजा

प्रश्न 5

रिक्त स्थान की पूर्ति करें:
  1. शंकर ..... के समर्थक थे।
  2. रामानुज ...... के द्वारा प्रभावित हुए थे।
  3. ...... वीरशैव मत के समर्थक थे।
  4. ...... महाराष्ट्र में भक्ति परंपरा का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र था।
Solution:
  1. शंकर अद्वैत के समर्थक थे।
  2. रामानुज अलवार संतों के द्वारा प्रभावित हुए थे।
  3. वसवन्ना, अल्लामा-प्रभु, अक्कमहादेवी वीरशैव मत के समर्थक थे।
  4. पंढरपुर महाराष्ट्र में भक्ति परंपरा का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र था।

प्रश्न 6

नाथपंथियों, सिद्धों और योगियों के विश्वासों और आचार-व्यवहारों का वर्णन करें।
Solution:

नाथपंथियों, सिद्धों और योगियों जैसे धार्मिक समूहों ने उस काल में रूढ़िवादी धर्म की कर्मकांडीय प्रथाओं और सामाजिक व्यवस्था की आलोचना की। उनके विश्वास और आचार-व्यवहार निम्नलिखित थे:

  • संसार का त्याग: उन्होंने संसार का त्याग करने का समर्थन किया, क्योंकि उनका मानना था कि यह भौतिक संसार वास्तविक नहीं है।
  • निराकार परम सत्य: उनके विचार से, निराकार परम सत्य का चिन्तन-मनन और उसके साथ एक हो जाने की अनुभूति ही मोक्ष का मार्ग है।
  • कठोर प्रशिक्षण: मोक्ष प्राप्ति के लिए उन्होंने मन और शरीर को कठोर प्रशिक्षण देने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके लिए वे योगासन, प्राणायाम और ध्यान जैसी क्रियाओं का अभ्यास करते थे।
  • आलोचनात्मक दृष्टिकोण: उन्होंने तत्कालीन रूढ़िवादी धर्म की आलोचना की, जिसने आगे चलकर उत्तरी भारत में लोकप्रिय भक्ति मार्ग के लिए आधार तैयार किया।

प्रश्न 7

कबीर द्वारा अभिव्यक्त प्रमुख विचार क्या-क्या थे ? उन्होंने इन विचारों को कैसे अभिव्यक्त किया ?
Solution:

कबीर द्वारा अभिव्यक्त प्रमुख विचार निम्नलिखित थे:

  1. निराकार ईश्वर में विश्वास: कबीर पूरी तरह से निराकार परमेश्वर में विश्वास करते थे और सभी प्रकार की मूर्ति पूजा तथा कर्मकांडों का विरोध करते थे।
  2. भक्ति से मोक्ष: उनका मानना था कि ईश्वर की प्राप्ति या मोक्ष केवल सच्ची भक्ति के माध्यम से ही संभव है, न कि बाहरी आडंबरों से।
  3. सामाजिक समानता: कबीर ने जाति-पाति, धार्मिक भेदभाव और सामाजिक असमानता का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने सभी मनुष्यों की समानता पर बल दिया।

कबीर ने अपने विचारों को मुख्य रूप से भजन और दोहों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। उनकी भाषा सरल, सीधी और जनसाधारण की समझ में आने वाली थी, जिससे उनके संदेश दूर-दूर तक फैल सके।

Common mistakes

  • शंकर और रामानुज के दार्शनिक मतों के बीच अंतर को समझने में भ्रम।
  • कबीर के विचारों को केवल एकेश्वरवाद तक सीमित समझना, जबकि उन्होंने सामाजिक सुधारों पर भी जोर दिया।
  • भक्ति संतों के कालक्रम और उनके प्रभाव क्षेत्र को लेकर अस्पष्टता।

Revision tips

  • प्रत्येक संत के मुख्य दार्शनिक विचार को एक वाक्य में लिखें।
  • भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों और उनके योगदान की एक सूची बनाएं।
  • मीराबाई और कबीर जैसे संतों द्वारा समाज पर डाले गए प्रभाव पर विचार करें।

Practice MCQs

Q1. शंकर के अनुसार, परम सत्य (ब्रह्म) की प्रकृति कैसी है?

Q2. रामानुज ने मोक्ष प्राप्त करने का कौन-सा मार्ग बताया?

Q3. वसवन्ना ईश्वर को कौन-सा मंदिर अर्पित कर रहा था?

Q4. कबीर किस प्रकार के ईश्वर में विश्वास करते थे?

Q5. मीराबाई किस संत की अनुयायी थीं?

Frequently asked questions

कक्षा 7 के इतिहास के अध्याय 8 'ईश्वर से अनुराग' में मुख्य रूप से किन संतों के बारे में बताया गया है?

इस अध्याय में मुख्य रूप से शंकर, रामानुज, वसवन्ना, कबीर और मीराबाई जैसे भक्ति संतों के विचारों और उनके योगदान के बारे में बताया गया है।

शंकर के अद्वैतवाद का क्या अर्थ है?

शंकर के अद्वैतवाद के अनुसार, जीवात्मा और परमात्मा दोनों एक ही हैं। उन्होंने यह भी सिखाया कि ब्रह्म निर्गुण और निराकार है, और संसार को मिथ्या या माया माना।

रामानुज ने मोक्ष प्राप्ति के लिए क्या मार्ग सुझाया?

रामानुज ने मोक्ष प्राप्त करने के लिए विष्णु के प्रति अनन्य भक्ति भाव रखने का मार्ग सुझाया। उन्होंने विशिष्टाद्वैत का सिद्धांत दिया, जिसके अनुसार आत्मा परमात्मा से जुड़ने के बाद भी अपनी अलग सत्ता बनाए रखती है।

कबीर के प्रमुख विचार क्या थे?

कबीर निराकार परमेश्वर में विश्वास करते थे और उनका मानना था कि भक्ति के माध्यम से ही मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने सामाजिक बुराइयों और कर्मकांडों की भी आलोचना की।

मीराबाई ने राजमहल क्यों छोड़ा?

मीराबाई कृष्ण की अनन्य भक्त थीं और रविदास जैसे संत की अनुयायी थीं। कृष्ण के प्रति अपने गहरे भक्ति-भाव के कारण उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं से युक्त राजमहल को छोड़ दिया।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को भक्ति आंदोलन के विभिन्न पहलुओं, प्रमुख संतों के विचारों और उनके दार्शनिक सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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