कक्षा 6 संस्कृत: सूक्तिस्तवकः NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 6 के संस्कृत पाठ 'सूक्तिस्तवकः' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इस पाठ में जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाने वाली संस्कृत सूक्तियों का संग्रह है। इसमें 'सु' उपसर्ग और 'उक्ति' शब्द से बने 'सूक्ति' शब्द का अर्थ समझाया गया है, जिसका अर्थ है 'अच्छा वचन'। समाधान प्रत्येक सूक्ति के शब्दार्थ, अन्वय (वाक्य-विन्यास) और सरलार्थ (सरल व्याख्या) प्रदान करते हैं। यह पाठ छात्रों को सिखाता है कि कैसे अल्प शब्दों में जीवन के बहुमूल्य तथ्यों को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। इसमें बालकों से भी अच्छी बातें सीखने, पुस्तकों में पढ़ी बातों को जीवन में उतारने और मधुर वचन बोलने के महत्व पर जोर दिया गया है। ये समाधान छात्रों को सूक्तियों के गहन अर्थ को समझने और उन्हें अपने जीवन में लागू करने में मदद करेंगे, जिससे परीक्षा की तैयारी प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 6 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 8. सूक्तिस्तवकः |
Chapter summary
कक्षा 6 के संस्कृत पाठ 'सूक्तिस्तवकः' के ये NCERT समाधान छात्रों को संस्कृत साहित्य की सुंदर सूक्तियों से परिचित कराते हैं। प्रत्येक सूक्ति का शब्दार्थ, अन्वय और सरलार्थ विस्तार से समझाया गया है। समाधान जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों जैसे कि अल्पबुद्धि वाले से भी सीखना, पढ़े हुए ज्ञान को जीवन में उतारना और मधुर वाणी का महत्व पर प्रकाश डालते हैं। यह पाठ छात्रों को कम शब्दों में गहरी बातें कहने की कला सिखाता है।
Learning outcomes
- सूक्ति का अर्थ और महत्व समझना।
- प्रत्येक सूक्ति के शब्दार्थ, अन्वय और सरलार्थ को समझना।
- जीवन में ज्ञान प्राप्त करने के विभिन्न स्रोतों को पहचानना।
- पढ़े हुए ज्ञान को व्यवहारिक जीवन में लागू करने का महत्व समझना।
- मधुर वाणी के महत्व और उसके प्रभाव को समझना।
- निरंतर प्रयास के महत्व को समझना।
Topics covered
Paper topics
- सूक्ति का अर्थ
- ज्ञान ग्रहण का महत्व
- बालकों से सीखना
- पढ़े हुए ज्ञान का जीवन में अनुप्रयोग
- मधुर वाणी का महत्व
- प्रिय वचन
- वाणी में उदारता
- निरंतर प्रयास
- चींटी का उदाहरण
- गरुड़ का उदाहरण
Important topics
- सूक्ति का अर्थ और महत्व
- पढ़े हुए ज्ञान को जीवन में उतारना
- मधुर वाणी का महत्व
- निरंतर प्रयास का महत्व
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
(क)
इस श्लोक का अर्थ है कि बुद्धिमान व्यक्ति को अल्पबुद्धि वाले (बालक) से भी उपयुक्त बात ग्रहण कर लेनी चाहिए। जिस प्रकार सूर्य के न होने पर दीपक प्रकाश करता है, उसी प्रकार किसी भी स्रोत से प्राप्त होने वाली अच्छी बात को स्वीकार करना चाहिए।
शब्दार्थ:
- बालात् अपि - बालक से भी
- ग्रहीतव्यम् - ग्रहण करना चाहिए
- युक्तम् उक्तम् - उचित कहा गया
- मनीषिभिः - बुद्धिमानों द्वारा
- रवेः अविषये - सूर्य के न होने पर
- प्रदीपस्य - दीपक का
- प्रकाशनम् - प्रकाश करना
अन्वय: बालात् अपि युक्तं ग्रहीतव्यम् इति मनीषिभिः उक्तम्। कि रवेः अविषये प्रदीपस्य प्रकाशनम् न?
सरलार्थ: बुद्धिमानों का कथन है कि बालक से भी उचित बात ग्रहण करनी चाहिए। क्या सूर्य के न होने पर दीपक प्रकाश नहीं करता? अर्थात, दीपक भी प्रकाश करता है, इसलिए हमें हर जगह से अच्छी बात सीखनी चाहिए।
भाव: हमें ज्ञान प्राप्त करने में संकोच नहीं करना चाहिए, भले ही वह किसी ऐसे व्यक्ति से मिले जिसे हम कम बुद्धिमान समझते हों।
(ख)
यह सूक्ति बताती है कि पुस्तक में पढ़ा गया पाठ तभी उपयोगी है जब उसे जीवन में अपनाया जाए। यदि पढ़ा हुआ ज्ञान जीवन में काम न आए, तो उस ज्ञान का कोई अर्थ नहीं है।
शब्दार्थ:
- पुस्तके पठितः पाठः - पुस्तक में पढ़ा गया पाठ
- जीवने - जीवन में
- नैव साधितः - कभी नहीं अपनाया गया / उपयोग नहीं किया गया
- किं भवेत् - क्या लाभ होगा
- सार्थकः न - सार्थक नहीं है
अन्वय: यदि पुस्तके पठितः पाठः जीवने न साधितः (तर्हि) यः पाठः जीवने सार्थकः न (अस्ति) तेन पाठेन किं भवेत्।
सरलार्थ: यदि पुस्तक में पढ़ा गया पाठ जीवन में उपयोग में नहीं लाया गया, तो उस पाठ से क्या लाभ जो जीवन में सार्थक ही नहीं है? अर्थात, ऐसे पाठ का कोई मूल्य नहीं है।
भाव: केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, उसे अपने जीवन में उतारना और उसका सदुपयोग करना ही उसे सार्थक बनाता है।
(ग)
यह सूक्ति मधुर वचन बोलने के महत्व पर प्रकाश डालती है। इसके अनुसार, प्रिय वचन सुनने पर सभी मनुष्य प्रसन्न होते हैं, इसलिए हमें हमेशा प्रिय और मधुर वचन ही बोलने चाहिए। वाणी के प्रयोग में कंजूसी या कृपणता क्यों करनी चाहिए?
शब्दार्थ:
- प्रियवाक्यप्रदानेन - प्रिय वचन बोलने से
- सर्वे मानवाः - सभी मनुष्य
- तुष्यन्ति - प्रसन्न होते हैं
- तस्मात् - इसलिए
- प्रियं हि वक्तव्यम् - प्रिय ही बोलना चाहिए
- वचने - बोलने में
- का दरिद्रता - कैसी कंजूसी / कृपणता
अन्वय: सर्वे मानवाः प्रियवाक्यप्रदानेन तुष्यन्ति। तस्मात् प्रियं हि वक्तव्यम्। वचने का दरिद्रता (स्यात्)?
सरलार्थ: सभी मनुष्य प्रिय वचन बोलने से प्रसन्न हो जाते हैं। इसलिए हमें हमेशा प्रिय वचन ही बोलने चाहिए। बोलने में कंजूसी क्यों करनी चाहिए? अर्थात, हमें उदारतापूर्वक मधुर वाणी का प्रयोग करना चाहिए।
भाव: मीठे बोल बोलकर दूसरों को प्रसन्न रखना सबसे सरल और प्रभावी तरीका है।
(घ)
यह सूक्ति निरंतर प्रयास के महत्व को दर्शाती है। इसमें बताया गया है कि यदि एक चींटी भी लगातार चलती रहे, तो वह सैकड़ों योजन (बहुत लंबी दूरी) तय कर सकती है। इसके विपरीत, यदि गरुड़ (जो बहुत तेज उड़ने वाला पक्षी है) भी चलना बंद कर दे, तो वह एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकता।
शब्दार्थ:
- गच्छन् - चलता हुआ
- पिपीलकः - चींटी
- याति - जाता है
- योजनानां शतान्यपि - सैकड़ों योजन भी
- अगच्छन् - न चलता हुआ
- वैनतेयः अपि - गरुड़ भी
- पदम् एकम् - एक कदम
- न गच्छति - नहीं जाता है
अन्वय: गच्छन् पिपीलकः शतान्यपि योजनानि याति। अगच्छन् वैनतेयः अपि पदम् एकं न गच्छति।
सरलार्थ: यदि चलती हुई चींटी सैकड़ों योजन भी चली जाए (तो पहुँच जाती है)। परन्तु यदि न चलने वाला गरुड़ भी (एक कदम भी) आगे नहीं जाता है।
भाव: निरंतर प्रयास और कर्म करते रहने से ही सफलता मिलती है, चाहे वह कार्य कितना भी छोटा क्यों न हो। आलस्य या प्रयास न करने से बड़ी शक्ति भी निष्फल हो जाती है।
Common mistakes
- सूक्तियों के शाब्दिक अर्थ पर ही ध्यान देना, भावार्थ को अनदेखा करना।
- पढ़े हुए ज्ञान को जीवन में न उतारना।
- वाणी में कटुता या कंजूसी दिखाना।
- प्रयास न करने के कारण असफलता को स्वीकार कर लेना।
Revision tips
- प्रत्येक सूक्ति के मूल भाव को समझने पर ध्यान केंद्रित करें।
- सूक्तियों को याद करने के लिए उन्हें अपने जीवन के उदाहरणों से जोड़ें।
- शब्दार्थ और अन्वय को समझकर सरलार्थ को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
- मधुर वचन बोलने और दूसरों की बातों को ध्यान से सुनने का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. सूक्ति का क्या अर्थ है?
Explanation: सूक्ति शब्द 'सु' उपसर्ग और 'उक्ति' शब्द से बना है, जिसका अर्थ 'अच्छा वचन' होता है।
Q2. पहली सूक्ति हमें क्या सिखाती है?
Explanation: पहली सूक्ति बताती है कि बुद्धिमानों को अल्पबुद्धि वाले से भी उपयुक्त बात ग्रहण कर लेनी चाहिए, जैसे सूर्य न होने पर दीपक प्रकाश करता है।
Q3. दूसरी सूक्ति का मुख्य संदेश क्या है?
Explanation: यह सूक्ति सिखाती है कि पुस्तक में पढ़ा गया पाठ तभी सार्थक है जब उसे जीवन में अपनाया जाए।
Q4. प्रिय वचन बोलने से क्या होता है?
Explanation: तीसरी सूक्ति के अनुसार, प्रिय वचन बोलने से सभी मनुष्य प्रसन्न होते हैं।
Q5. वाणी के प्रयोग में कंजूसी क्यों नहीं करनी चाहिए?
Explanation: वाणी में कंजूसी नहीं करनी चाहिए क्योंकि मधुर वचन बोलने से सभी मनुष्य प्रसन्न होते हैं।
Q6. चौथी सूक्ति किस बारे में है?
Explanation: यह सूक्ति चींटी के निरंतर चलने और गरुड़ के न चलने पर भी एक कदम न चलने का उदाहरण देकर निरंतर प्रयास के महत्व को दर्शाती है।
Frequently asked questions
कक्षा 6 के संस्कृत पाठ 'सूक्तिस्तवकः' में क्या सिखाया गया है?
इस पाठ में संस्कृत की कुछ महत्वपूर्ण सूक्तियों का संकलन है, जो जीवन के बहुमूल्य तथ्यों को कम शब्दों में समझाती हैं। यह छात्रों को अच्छी बातें सीखने, पढ़े हुए ज्ञान को जीवन में उतारने और मधुर वचन बोलने के महत्व के बारे में सिखाता है।
सूक्ति का क्या अर्थ होता है?
सूक्ति शब्द 'सु' (अच्छा) और 'उक्ति' (कथन) से मिलकर बना है। इसका अर्थ है 'अच्छा कथन' या 'सुंदर उक्ति', जो कम शब्दों में गहरी बात कहती है।
क्या इन समाधानों से परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी?
हाँ, ये समाधान प्रत्येक सूक्ति के शब्दार्थ, अन्वय और सरलार्थ को स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने में मदद मिलेगी।
पाठ की पहली सूक्ति क्या संदेश देती है?
पहली सूक्ति यह संदेश देती है कि हमें अच्छी बात किसी से भी सीख लेनी चाहिए, चाहे वह बालक हो या अल्पबुद्धि वाला व्यक्ति, ठीक वैसे ही जैसे सूर्य के न होने पर दीपक प्रकाश करता है।
दूसरी सूक्ति जीवन में किस बात पर जोर देती है?
दूसरी सूक्ति इस बात पर जोर देती है कि पुस्तक में पढ़ा गया पाठ तभी सार्थक है जब उसे जीवन में अपनाया जाए। केवल पढ़ना पर्याप्त नहीं है, उसे व्यवहार में लाना आवश्यक है।
मधुर वचन बोलने का क्या महत्व है?
पाठ के अनुसार, मधुर वचन बोलने से सभी मनुष्य प्रसन्न होते हैं। इसलिए, वाणी के प्रयोग में कंजूसी नहीं करनी चाहिए और हमेशा प्रिय वचन बोलने चाहिए।
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.