कक्षा 12 भौतिकी अध्याय 12 परमाणु NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 12 'परमाणु' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें परमाणु की संरचना को समझने के लिए थॉमसन और रदरफोर्ड के विभिन्न मॉडलों की तुलना, पाशन श्रेणी की न्यूनतम तरंगदैर्घ्य की गणना, ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण से उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य का निर्धारण, और हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में गतिज और स्थितिज ऊर्जा की गणना जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। ये समाधान छात्रों को परमाणु भौतिकी की मूलभूत अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectभौतिकी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter12. परमाणु

Chapter summary

कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 12 'परमाणु' के लिए NCERT समाधान परमाणु की संरचना और व्यवहार से संबंधित प्रमुख अवधारणाओं को कवर करते हैं। इसमें थॉमसन और रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की तुलना, अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के निहितार्थ, हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में पाशन श्रेणी की न्यूनतम तरंगदैर्घ्य की गणना, ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण से जुड़े फोटॉन की आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य का निर्धारण, और हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में गतिज और स्थितिज ऊर्जा की गणना शामिल है।

Learning outcomes

  • परमाणु के विभिन्न मॉडलों (थॉमसन और रदरफोर्ड) के बीच अंतर को समझना।
  • अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामों का विश्लेषण करना।
  • पाशन श्रेणी के लिए न्यूनतम तरंगदैर्घ्य की गणना करना।
  • ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण से उत्सर्जित फोटॉन की आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य की गणना करना।
  • हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में गतिज और स्थितिज ऊर्जा का निर्धारण करना।

Topics covered

Paper topics

  • परमाणु मॉडल (थॉमसन और रदरफोर्ड)
  • अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग
  • नाभिक की खोज
  • हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम
  • पाशन श्रेणी
  • तरंगदैर्घ्य और आवृत्ति की गणना
  • ऊर्जा स्तर
  • इलेक्ट्रॉन संक्रमण
  • गतिज ऊर्जा
  • स्थितिज ऊर्जा
  • क्वांटम संख्याएँ
  • बोहर मॉडल (अंतर्निहित)

Important topics

  • परमाणु मॉडल की तुलना
  • अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के निष्कर्ष
  • स्पेक्ट्रमी रेखाओं की तरंगदैर्घ्य गणना
  • ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण
  • हाइड्रोजन परमाणु की ऊर्जा अवस्थाएँ

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

प्रत्येक कथन के अन्त में दिए गए संकेतों में से सही विकल्प का चयन करके निम्नलिखित कथनों को पूरा कीजिए:

  1. थॉमसन मॉडल में परमाणु का साइज, रदरफोर्ड मॉडल में परमाणवीय साइज से ..... होता है। (अपेक्षाकृत काफी अधिक, भिन्न नहीं, अपेक्षाकृत काफी कम)
  2. ..... में निम्नतम अवस्था में इलेक्ट्रॉन स्थायी साम्य में होते हैं जबकि ..... में इलेक्ट्रॉन, सदैव नेट बल अनुभव करते हैं। (थॉमसन मॉडल, रदरफोर्ड मॉडल)
  3. ..... पर आधारित किसी क्लासिकी परमाणु का नष्ट होना निश्चित है। (थॉमसन मॉडल, रदरफोर्ड मॉडल)
  4. किसी परमाणु के द्रव्यमान का ..... में लगभग सतत वितरण होता है लेकिन ..... में अत्यन्त असमान द्रव्यमान वितरण होता है। (थॉमसन मॉडल, रदरफोर्ड मॉडल)
  5. ..... में परमाणु के धनावेशित भाग का द्रव्यमान सर्वाधिक होता है। (रदरफोर्ड मॉडल, दोनों मॉडलों)
हल:
  1. अपेक्षाकृत काफी कम। थॉमसन मॉडल में, धनावेशित पदार्थ में इलेक्ट्रॉन धंसे होते हैं, जिससे परमाणु का आकार बड़ा माना जाता है। रदरफोर्ड मॉडल में, नाभिक बहुत छोटा होता है, जिससे परमाणु का प्रभावी आकार कम हो जाता है।
  2. थॉमसन मॉडल, रदरफोर्ड मॉडल। थॉमसन मॉडल में इलेक्ट्रॉन धनावेशित माध्यम में वितरित होते हैं, जिससे वे स्थायी साम्य में रह सकते हैं। रदरफोर्ड मॉडल में, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते हैं और अभिकेन्द्रीय बल का अनुभव करते हैं।
  3. रदरफोर्ड मॉडल। क्लासिकी विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत के अनुसार, त्वरित आवेशित कण (जैसे नाभिक के चारों ओर घूमता इलेक्ट्रॉन) ऊर्जा का विकिरण करेगा और अंततः नाभिक में गिर जाएगा, जिससे परमाणु का विनाश हो जाएगा।
  4. थॉमसन मॉडल, रदरफोर्ड मॉडल। थॉमसन मॉडल में, धनावेशित पदार्थ पूरे परमाणु में समान रूप से वितरित होता है, जिससे द्रव्यमान का वितरण लगभग सतत होता है। रदरफोर्ड मॉडल में, सारा धनावेश और अधिकांश द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित होता है, जिससे द्रव्यमान वितरण अत्यन्त असमान होता है।
  5. रदरफोर्ड मॉडल। रदरफोर्ड मॉडल में, परमाणु का सारा धनावेश और लगभग सारा द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित होता है, जो परमाणु के आयतन का एक बहुत छोटा हिस्सा होता है।

प्रश्न 2

मान लीजिए कि स्वर्ण पन्नी के स्थान पर ठोस हाइड्रोजन की पतली शीट का उपयोग करके आपको α-कण प्रकीर्णन प्रयोग दोहराने का अवसर प्राप्त होता है। (हाइड्रोजन 14 K से नीचे ताप पर ठोस हो जाती है।) आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं?

हल:

यदि स्वर्ण पन्नी के स्थान पर ठोस हाइड्रोजन की पतली शीट का उपयोग किया जाता है, तो α-कण प्रकीर्णन प्रयोग का मूल उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसका कारण यह है कि हाइड्रोजन (परमाणु भार ≈ 1 amu) α-कण (हीलियम नाभिक, परमाणु भार ≈ 4 amu) की अपेक्षा बहुत हल्की होती है।

प्रत्यास्थ संघट्ट के सिद्धांत के अनुसार, जब एक भारी कण (α-कण) एक बहुत हल्के कण (हाइड्रोजन नाभिक) से टकराता है, तो भारी कण का विक्षेपण बहुत कम होता है। इसके विपरीत, यदि α-कण एक भारी नाभिक (जैसे सोना) से टकराता है, तो प्रतिकर्षण बल के कारण उसका विक्षेपण महत्वपूर्ण हो सकता है।

इस स्थिति में, हाइड्रोजन नाभिक α-कण की अपेक्षा बहुत अधिक गति से गतिमान होगा, और α-कणों का विक्षेपण बहुत कम या नगण्य होगा। हम हाइड्रोजन नाभिक के आकार का परिकलन करने के लिए इस प्रयोग से प्राप्त डेटा का उपयोग नहीं कर सकते हैं, जैसा कि रदरफोर्ड ने सोने के नाभिक के साथ किया था।

प्रश्न 3

पाशन श्रेणी में विद्यमान स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम तरंगदैर्घ्य क्या है?

हल:

पाशन श्रेणी में, इलेक्ट्रॉन की संक्रमण ऊर्जा स्तर निम्नतम मुख्य क्वांटम संख्या n_1 = 3 होती है। स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम तरंगदैर्घ्य (अर्थात, उच्चतम ऊर्जा) तब प्राप्त होती है जब इलेक्ट्रॉन उच्चतम संभव ऊर्जा स्तर, अर्थात अनंत (n_2 = \infty) से n_1 = 3 स्तर में संक्रमण करता है।

हम रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करते हैं:

\frac{1}{\lambda} = R \left[ \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right]

जहाँ R रिडबर्ग नियतांक है।

लघुत्तम तरंगदैर्घ्य के लिए, हम n_1 = 3 और n_2 = \infty रखते हैं:

\frac{1}{\lambda_{min}} = R \left[ \frac{1}{3^2} - \frac{1}{\infty^2} \right] = R \left[ \frac{1}{9} - 0 \right] = \frac{R}{9}

इसलिए, लघुत्तम तरंगदैर्घ्य है:

\lambda_{min} = \frac{9}{R}

रिडबर्ग नियतांक R \approx 1.097 \times 10^7 \, m^{-1} का मान रखने पर:

\lambda_{min} = \frac{9}{1.097 \times 10^7 \, m^{-1}} \approx 8.204 \times 10^{-7} \, m

इसे नैनोमीटर में बदलने पर:

\lambda_{min} \approx 820.4 \, \text{nm}

अतः, पाशन श्रेणी में विद्यमान स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम तरंगदैर्घ्य लगभग 820.4 nm है।

प्रश्न 4

2.3 eV ऊर्जा अंतर किसी परमाणु में दो ऊर्जा स्तरों को पृथक कर देता है। उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति क्या होगी यदि परमाणु में इलेक्ट्रॉन उच्च स्तर से निम्न स्तर में संक्रमण करता है?

हल:

दो ऊर्जा स्तरों के बीच ऊर्जा अंतर E = 2.3 \, \text{eV} दिया गया है। जब इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में संक्रमण करता है, तो यह ऊर्जा अंतर के बराबर ऊर्जा का एक फोटॉन उत्सर्जित करता है।

सबसे पहले, हम ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) से जूल (J) में परिवर्तित करते हैं:

E = 2.3 \, \text{eV} \times (1.6 \times 10^{-19} \, \text{J/eV}) = 3.68 \times 10^{-19} \, \text{J}

हम जानते हैं कि उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा E और उसकी आवृत्ति v के बीच संबंध प्लांक के समीकरण द्वारा दिया जाता है:

E = hv

जहाँ h प्लांक नियतांक है (h \approx 6.63 \times 10^{-34} \, \text{J-s})।

उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति v की गणना करने के लिए, हम समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करते हैं:

v = \frac{E}{h}

मान रखने पर:

v = \frac{3.68 \times 10^{-19} \, \text{J}}{6.63 \times 10^{-34} \, \text{J-s}}

v \approx 5.55 \times 10^{14} \, \text{Hz}

अतः, उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति लगभग 5.55 \times 10^{14} \, \text{Hz} होगी।

प्रश्न 5

हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में ऊर्जा -13.6 eV है। इस अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज और स्थितिज ऊर्जाएँ क्या होंगी?

हल:

हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था (ground state) में कुल ऊर्जा E दी गई है:

E = -13.6 \, \text{eV}

हाइड्रोजन परमाणु के लिए, बोहर मॉडल के अनुसार, निम्नतम अवस्था में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा, गतिज ऊर्जा (KE) और स्थितिज ऊर्जा (PE) का योग होती है: E = KE + PE

यह भी ज्ञात है कि एक स्थिर कक्षा में परिक्रमा करने वाले इलेक्ट्रॉन के लिए, गतिज ऊर्जा कुल ऊर्जा के ऋणात्मक के बराबर होती है, और स्थितिज ऊर्जा कुल ऊर्जा की दोगुनी ऋणात्मक होती है:

KE = -E

PE = 2E = -2 \times KE

इन संबंधों का उपयोग करके, हम निम्नतम अवस्था में गतिज और स्थितिज ऊर्जा की गणना कर सकते हैं:

गतिज ऊर्जा (KE):

KE = -E = -(-13.6 \, \text{eV}) = 13.6 \, \text{eV}

स्थितिज ऊर्जा (PE):

PE = 2E = 2 \times (-13.6 \, \text{eV}) = -27.2 \, \text{eV}

हम यह भी जांच सकते हैं कि KE + PE = 13.6 \, \text{eV} + (-27.2 \, \text{eV}) = -13.6 \, \text{eV}, जो कुल ऊर्जा E के बराबर है।

अतः, हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा 13.6 \, \text{eV} और स्थितिज ऊर्जा -27.2 \, \text{eV} होगी।

प्रश्न 6

निम्नतम अवस्था में विद्यमान एक हाइड्रोजन परमाणु फोटॉन को अवशोषित करता है जो इसे n=4 स्तर तक उत्तेजित कर देता है। फोटॉन की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति ज्ञात कीजिए।

हल:

हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में मुख्य क्वांटम संख्या n_1 = 1 होती है। जब परमाणु एक फोटॉन अवशोषित करता है जो इसे n=4 स्तर तक उत्तेजित करता है, तो इलेक्ट्रॉन n_1 = 1 से n_2 = 4 ऊर्जा स्तर में संक्रमण करता है।

इस संक्रमण के दौरान अवशोषित फोटॉन की ऊर्जा, इन दो ऊर्जा स्तरों के बीच के अंतर के बराबर होती है। हाइड्रोजन परमाणु के लिए ऊर्जा स्तर का सूत्र है:

E_n = -\frac{13.6}{n^2} \, \text{eV}

इसलिए, n=1 और n=4 स्तरों पर ऊर्जाएँ हैं:

E_1 = -\frac{13.6}{1^2} = -13.6 \, \text{eV}

E_4 = -\frac{13.6}{4^2} = -\frac{13.6}{16} = -0.85 \, \text{eV}

अवशोषित फोटॉन की ऊर्जा \Delta E है:

\Delta E = E_4 - E_1 = (-0.85 \, \text{eV}) - (-13.6 \, \text{eV}) = 13.6 - 0.85 = 12.75 \, \text{eV}

अब हम इस ऊर्जा के फोटॉन की आवृत्ति (v) और तरंगदैर्घ्य (\lambda) ज्ञात कर सकते हैं।

आवृत्ति की गणना:

फोटॉन की ऊर्जा \Delta E = hv होती है। सबसे पहले, ऊर्जा को जूल में बदलें:

\Delta E = 12.75 \, \text{eV} \times (1.6 \times 10^{-19} \, \text{J/eV}) = 20.4 \times 10^{-19} \, \text{J}

आवृत्ति v = \frac{\Delta E}{h}:

v = \frac{20.4 \times 10^{-19} \, \text{J}}{6.63 \times 10^{-34} \, \text{J-s}} \approx 3.077 \times 10^{15} \, \text{Hz}

तरंगदैर्घ्य की गणना:

फोटॉन की ऊर्जा \Delta E = \frac{hc}{\lambda} होती है। तरंगदैर्घ्य \lambda = \frac{hc}{\Delta E}:

\lambda = \frac{(6.63 \times 10^{-34} \, \text{J-s}) \times (3 \times 10^8 \, \text{m/s})}{20.4 \times 10^{-19} \, \text{J}}

\lambda = \frac{19.89 \times 10^{-26}}{20.4 \times 10^{-19}} \, \text{m} \approx 0.975 \times 10^{-7} \, \text{m}

इसे नैनोमीटर में बदलने पर:

\lambda \approx 97.5 \, \text{nm}

अतः, अवशोषित फोटॉन की आवृत्ति लगभग 3.077 \times 10^{15} \, \text{Hz} और तरंगदैर्घ्य लगभग 97.5 \, \text{nm} होगी।

Common mistakes

  • विभिन्न परमाणु मॉडलों की तुलना करते समय उनके आकार और द्रव्यमान वितरण के बारे में भ्रमित होना।
  • अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग में हल्के नाभिक के साथ टकराव के परिणामों को गलत समझना।
  • स्पेक्ट्रमी रेखाओं की गणना करते समय सही मुख्य क्वांटम संख्याओं (n1 और n2) का चयन न कर पाना।
  • ऊर्जा (eV) को जूल में परिवर्तित करते समय या इसके विपरीत गणना में त्रुटियाँ करना।

Revision tips

  • थॉमसन और रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की मुख्य विशेषताओं और सीमाओं की एक सारणी बनाएं।
  • स्पेक्ट्रमी रेखाओं की गणना के लिए उपयोग किए जाने वाले सूत्रों को याद करें, विशेष रूप से विभिन्न श्रेणियों (लाइमन, बामर, पाशन आदि) के लिए n1 मान।
  • ऊर्जा स्तरों के बीच संक्रमण से संबंधित समस्याओं को हल करने का अभ्यास करें, जिसमें आवृत्ति और तरंगदैर्घ्य की गणना शामिल है।
  • हाइड्रोजन परमाणु की विभिन्न अवस्थाओं में गतिज और स्थितिज ऊर्जा के बीच संबंध को समझें।

Practice MCQs

Q1. थॉमसन मॉडल की तुलना में रदरफोर्ड मॉडल में परमाणु का आकार कैसा होता है?

Q2. किस परमाणु मॉडल के अनुसार एक क्लासिकी परमाणु का नष्ट होना निश्चित है?

Q3. पाशन श्रेणी में विद्यमान स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम तरंगदैर्घ्य किस ऊर्जा स्तर संक्रमण से संबंधित है?

Q4. यदि किसी परमाणु में दो ऊर्जा स्तरों के बीच ऊर्जा का अंतर 2.3 eV है, तो उत्सर्जित फोटॉन की आवृत्ति क्या होगी?

Q5. हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा कितनी होती है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 12 'परमाणु' में कौन से मुख्य परमाणु मॉडल शामिल हैं?

इस अध्याय में मुख्य रूप से थॉमसन का परमाणु मॉडल और रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल शामिल हैं, जिनकी तुलना और विश्लेषण किया गया है।

अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग से क्या महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकले?

इस प्रयोग से पता चला कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और धनावेश एक अत्यंत छोटे से केंद्रीय भाग में केंद्रित होता है, जिसे नाभिक कहा जाता है।

पाशन श्रेणी की लघुत्तम तरंगदैर्घ्य की गणना कैसे की जाती है?

पाशन श्रेणी के लिए, इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर (n₂ > 3) से तीसरे ऊर्जा स्तर (n₁ = 3) में संक्रमण करता है। लघुत्तम तरंगदैर्घ्य तब प्राप्त होती है जब संक्रमण अनंत ऊर्जा स्तर से होता है।

ऊर्जा स्तरों के बीच इलेक्ट्रॉन के संक्रमण से संबंधित गणनाओं में किन भौतिक राशियों की आवश्यकता होती है?

इन गणनाओं में ऊर्जा अंतर (E), प्लांक नियतांक (h), प्रकाश की गति (c), और तरंगदैर्घ्य (λ) या आवृत्ति (v) जैसी राशियों की आवश्यकता होती है, जो E = hv और E = hc/λ जैसे सूत्रों से संबंधित हैं।

हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में गतिज और स्थितिज ऊर्जा का क्या संबंध है?

निम्नतम अवस्था में, हाइड्रोजन परमाणु की कुल ऊर्जा -13.6 eV होती है। गतिज ऊर्जा (KE) कुल ऊर्जा के ऋणात्मक के बराबर होती है (KE = 13.6 eV), और स्थितिज ऊर्जा (PE) कुल ऊर्जा की दोगुनी ऋणात्मक होती है (PE = -27.2 eV)।

ये NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत, चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों को हल करने का अभ्यास करने में मदद मिलती है।

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