CBSE Class 12 Physics: Chapter 4 Atoms NCERT Solutions

NCERT Solutions PDF Class 12 PDF

This set of NCERT Solutions for Class 12 Physics, Chapter 4, "Atoms," provides detailed explanations and answers to the exercises. The chapter delves into various atomic models, including the Thomson and Rutherford models, highlighting their strengths and limitations. It explores the concept of atomic size, the stability of atoms, and the distribution of mass within them. The solutions also cover important topics like spectral lines, energy levels in hydrogen atoms, and the calculation of wavelength and frequency of emitted photons during electron transitions. These solutions are designed to help students grasp the fundamental principles of atomic structure and prepare effectively for their board examinations by offering clear, step-by-step problem-solving approaches.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectभौतिकी विज्ञान-II
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 4

Chapter summary

Chapter 4 of NCERT Class 12 Physics, "Atoms," focuses on the historical development of atomic models and their experimental basis. This solution set covers questions related to the Thomson and Rutherford atomic models, the alpha-particle scattering experiment, and the characteristics of spectral lines like the Paschen series. It also includes problems on calculating energy levels, kinetic and potential energies of electrons in hydrogen atoms, and determining the wavelength and frequency of photons emitted during electronic transitions. The exercises reinforce understanding of atomic structure and quantum concepts.

Learning outcomes

  • Understand the differences and limitations of Thomson and Rutherford atomic models.
  • Analyze the results and implications of alpha-particle scattering experiments.
  • Calculate the shortest wavelength of spectral lines in different series (e.g., Paschen series).
  • Determine the frequency of emitted radiation when an electron transitions between energy levels.
  • Calculate the kinetic and potential energies of an electron in the ground state of a hydrogen atom.
  • Find the wavelength and frequency of a photon absorbed or emitted during electron excitation or de-excitation.

Topics covered

Paper topics

  • Atomic Models (Thomson, Rutherford)
  • Alpha-particle Scattering Experiment
  • Atomic Size
  • Stability of Atoms
  • Mass Distribution in Atoms
  • Spectral Lines
  • Paschen Series
  • Energy Levels in Hydrogen Atom
  • Kinetic Energy of Electron
  • Potential Energy of Electron
  • Photon Absorption and Emission
  • Wavelength and Frequency of Radiation

Important topics

  • Rutherford's Atomic Model and its limitations
  • Calculation of spectral line wavelengths (Paschen series)
  • Energy transitions and photon properties (frequency, wavelength)
  • Kinetic and Potential energy in hydrogen atom's ground state

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

प्रत्येक कथन के अन्त में दिए गए संकेतों में से सही विकल्प का चयन कीजिए:
  1. थॉमसन मॉडल में परमाणु का साइज, रदरफोर्ड मॉडल में परमाणवीय साइज से ..... होता है। (अपेक्षाकृत काफी अधिक, भिन्न नहीं, अपेक्षाकृत काफी कम)
  2. ....... में निम्नतम अवस्था में इलेक्ट्रॉन स्थायी साम्य में होते हैं जबकि ....... में इलेक्ट्रॉन, सदैव नेट बल अनुभव करते हैं। (थॉमसन मॉडल, रदरफोर्ड मॉडल)
  3. ...... पर आधारित किसी क्लासिकी परमाणु का नष्ट होना निश्चित है। (थॉमसन मॉडल, रदरफोर्ड मॉडल)
  4. किसी परमाणु के द्रव्यमान का ....... में लगभग सतत वितरण होता है लेकिन ....... में अत्यन्त असमान द्रव्यमान वितरण होता है। (थॉमसन मॉडल, रदरफोर्ड मॉडल)
  5. ...... में परमाणु के धनावेशित भाग का द्रव्यमान सर्वाधिक होता है। (रदरफोर्ड मॉडल, दोनों मॉडलों)
Solution:

यहाँ प्रत्येक कथन के लिए सही विकल्प दिए गए हैं:

  1. अपेक्षाकृत काफी कम। रदरफोर्ड मॉडल में, परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और धनावेश एक छोटे से नाभिक में केंद्रित होता है, जिससे परमाणु का प्रभावी आकार थॉमसन मॉडल की तुलना में बहुत छोटा हो जाता है।
  2. थॉमसन मॉडल, रदरफोर्ड मॉडल। थॉमसन मॉडल में, इलेक्ट्रॉन एक धनावेशित गोले में वितरित होते हैं, जिससे वे स्थायी साम्य में रह सकते हैं। रदरफोर्ड मॉडल में, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते हुए लगातार बल अनुभव करते हैं।
  3. रदरफोर्ड मॉडल। रदरफोर्ड मॉडल के अनुसार, घूमते हुए इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण करते हुए अंततः नाभिक में गिर जाएंगे, जिससे परमाणु नष्ट हो जाएगा।
  4. थॉमसन मॉडल, रदरफोर्ड मॉडल। थॉमसन मॉडल में, धनावेश और इलेक्ट्रॉन समान रूप से वितरित होते हैं, जिससे द्रव्यमान का वितरण लगभग सतत होता है। रदरफोर्ड मॉडल में, द्रव्यमान नाभिक में केंद्रित होता है, जिससे वितरण अत्यंत असमान होता है।
  5. दोनों मॉडल। दोनों मॉडलों में, परमाणु के धनावेशित भाग (थॉमसन में गोला, रदरफोर्ड में नाभिक) में परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान केंद्रित होता है।

प्रश्न 2

मान लीजिए कि स्वर्ण पन्नी के स्थान पर ठोस हाइड्रोजन की पतली शीट का उपयोग करके आपको α-कण प्रकीर्णन प्रयोग दोहराने का अवसर प्राप्त होता है। (हाइड्रोजन 14 K से नीचे ताप पर ठोस हो जाती है।) आप किस परिणाम की अपेक्षा करते हैं?
Solution:

यदि स्वर्ण पन्नी के स्थान पर ठोस हाइड्रोजन की पतली शीट का उपयोग किया जाता है, तो α-कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणाम महत्वपूर्ण रूप से भिन्न होंगे। इसकी अपेक्षा के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • द्रव्यमान का अंतर: α-कण (हीलियम नाभिक) का द्रव्यमान हाइड्रोजन (एक प्रोटॉन) की तुलना में बहुत अधिक होता है। जब एक भारी कण (α-कण) एक बहुत हल्के कण (हाइड्रोजन नाभिक) से टकराता है, तो प्रकीर्णन का व्यवहार अलग होता है।
  • प्रत्यास्थ संघट्ट की शर्त: प्रत्यास्थ संघट्ट (elastic collision) में, ऊर्जा और संवेग दोनों संरक्षित रहते हैं। जब एक भारी कण हल्के कण से टकराता है, तो हल्का कण बहुत अधिक गति प्राप्त कर सकता है, और भारी कण की दिशा में बड़ा परिवर्तन हो सकता है, लेकिन यह बड़े कोणों पर प्रकीर्णन की संभावना को कम कर देता है जैसा कि सोने के साथ देखा गया था।
  • नाभिकीय आकार का निर्धारण: रदरफोर्ड के प्रयोग का मुख्य उद्देश्य परमाणु के नाभिक के आकार और संरचना का पता लगाना था। हाइड्रोजन नाभिक (प्रोटॉन) बहुत छोटा होता है, और α-कणों के साथ इसकी अंतःक्रिया से नाभिक के आकार का सटीक निर्धारण करना मुश्किल होगा, जैसा कि सोने के भारी नाभिक के साथ संभव था।

संक्षेप में, ठोस हाइड्रोजन का उपयोग करने पर, α-कणों का प्रकीर्णन बहुत कम कोणों पर होने की संभावना है, और प्रयोग से परमाणु के नाभिक के बारे में वैसी जानकारी नहीं मिलेगी जैसी सोने की पन्नी के प्रयोग से मिली थी। इसलिए, प्रकीर्णन प्रयोग का मूल उद्देश्य (नाभिकीय संरचना का अध्ययन) पूरा नहीं हो पाएगा।

प्रश्न 3

पाश्चन श्रेणी में विद्यमान स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम तरंगदैर्घ्य क्या है?
Solution:

पाश्चन श्रेणी में, इलेक्ट्रॉन संक्रमण निम्नतम ऊर्जा स्तर $n_1 = 3$ से उच्च ऊर्जा स्तरों में होता है। स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम तरंगदैर्घ्य (अर्थात् उच्चतम ऊर्जा) तब प्राप्त होती है जब इलेक्ट्रॉन अनंत ऊर्जा स्तर ($n_2 = \infty$) से $n_1 = 3$ स्तर में संक्रमण करता है।

हम रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करते हैं:

\frac{1}{\lambda} = R \left[ \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right]

जहाँ $R$ रिडबर्ग नियतांक है ($R \approx 1.097 \times 10^7 \, \text{m}^{-1}$)।

लघुत्तम तरंगदैर्घ्य के लिए, हम $n_1 = 3$ और $n_2 = \infty$ लेते हैं:

\frac{1}{\lambda_{min}} = R \left[ \frac{1}{3^2} - \frac{1}{\infty^2} \right]

\frac{1}{\lambda_{min}} = R \left[ \frac{1}{9} - 0 \right] = \frac{R}{9}

\lambda_{min} = \frac{9}{R}

रिडबर्ग नियतांक का मान रखने पर:

\lambda_{min} = \frac{9}{1.097 \times 10^7 \, \text{m}^{-1}} \approx 8.204 \times 10^{-7} \, \text{m}

इसे नैनोमीटर (nm) में बदलने पर:

\lambda_{min} \approx 8.204 \times 10^{-7} \times 10^9 \, \text{nm} = 820.4 \, \text{nm}

अतः, पाश्चन श्रेणी में विद्यमान स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम तरंगदैर्घ्य लगभग 820.4 nm है।

प्रश्न 4

2.3 eV ऊर्जा अन्तर किसी परमाणु में दो ऊर्जा स्तरों को पृथक कर देता है। उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति क्या होगी यदि परमाणु में इलेक्ट्रॉन उच्च स्तर से निम्न स्तर में संक्रमण करता है?
Solution:

जब कोई इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में संक्रमण करता है, तो ऊर्जा का अंतर फोटॉन के रूप में उत्सर्जित होता है। उत्सर्जित फोटॉन की ऊर्जा दो स्तरों के बीच के ऊर्जा अंतर के बराबर होती है।

दिया गया ऊर्जा अंतर, $E = 2.3 \, \text{eV}$।

इस ऊर्जा को जूल (J) में बदलने के लिए, हम इलेक्ट्रॉन वोल्ट को जूल में बदलने वाले स्थिरांक से गुणा करते हैं ($1 \, \text{eV} = 1.6 \times 10^{-19} \, \text{J}$):

E = 2.3 \times 1.6 \times 10^{-19} \, \text{J} = 3.68 \times 10^{-19} \, \text{J}

उत्सर्जित फोटॉन की आवृत्ति ($v$) प्लांक के समीकरण द्वारा दी जाती है:

E = hv

जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है ($h \approx 6.63 \times 10^{-34} \, \text{J-s}$)।

आवृत्ति ज्ञात करने के लिए, हम समीकरण को पुनर्व्यवस्थित करते हैं:

v = \frac{E}{h}

मान रखने पर:

v = \frac{3.68 \times 10^{-19} \, \text{J}}{6.63 \times 10^{-34} \, \text{J-s}}

v \approx 0.555 \times 10^{15} \, \text{Hz}

v \approx 5.55 \times 10^{14} \, \text{Hz}

अतः, उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति लगभग $5.55 \times 10^{14} \, \text{Hz}$ होगी।

प्रश्न 5

हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में ऊर्जा -13.6 eV है। इस अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज और स्थितिज ऊर्जाएँ क्या होंगी?
Solution:

हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था (ground state) में कुल ऊर्जा ($E$) -13.6 eV दी गई है।

हाइड्रोजन परमाणु के लिए, कुल ऊर्जा ($E$), गतिज ऊर्जा (KE), और स्थितिज ऊर्जा (PE) के बीच संबंध इस प्रकार हैं:

  • कुल ऊर्जा ($E$) = गतिज ऊर्जा (KE) + स्थितिज ऊर्जा (PE)
  • गतिज ऊर्जा (KE) = - कुल ऊर्जा ($E$)
  • स्थितिज ऊर्जा (PE) = 2 × कुल ऊर्जा ($E$) = 2 × गतिज ऊर्जा (KE)

दिए गए मान के अनुसार:

कुल ऊर्जा, $E = -13.6 \, \text{eV}$

1. गतिज ऊर्जा (KE):

\text{KE} = -E = -(-13.6 \, \text{eV}) = 13.6 \, \text{eV}

2. स्थितिज ऊर्जा (PE):

\text{PE} = 2E = 2 \times (-13.6 \, \text{eV}) = -27.2 \, \text{eV}

हम यह भी जाँच सकते हैं कि KE + PE = E होता है:

13.6 \, \text{eV} + (-27.2 \, \text{eV}) = -13.6 \, \text{eV}

यह कुल ऊर्जा के दिए गए मान से मेल खाता है।

अतः, हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा 13.6 eV और स्थितिज ऊर्जा -27.2 eV होगी।

प्रश्न 6

निम्नतम अवस्था में विद्यमान एक हाइड्रोजन परमाणु फोटॉन को अवशोषित करता है जो इसे $n=4$ स्तर तक उत्तेजित कर देता है। फोटॉन की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Solution:

हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था $n=1$ होती है। जब परमाणु फोटॉन अवशोषित करता है, तो इलेक्ट्रॉन उच्च ऊर्जा स्तर में उत्तेजित हो जाता है। यहाँ, इलेक्ट्रॉन $n=1$ से $n=4$ स्तर तक उत्तेजित होता है।

हाइड्रोजन परमाणु के लिए ऊर्जा स्तर का सूत्र है:

E_n = -\frac{13.6}{n^2} \, \text{eV}

1. ऊर्जा स्तरों की गणना:

  • निम्नतम अवस्था ($n=1$) की ऊर्जा: $E_1 = -\frac{13.6}{1^2} = -13.6 \, \text{eV}$
  • उत्तेजित अवस्था ($n=4$) की ऊर्जा: $E_4 = -\frac{13.6}{4^2} = -\frac{13.6}{16} = -0.85 \, \text{eV}$

2. अवशोषित फोटॉन की ऊर्जा:

अवशोषित फोटॉन की ऊर्जा दोनों ऊर्जा स्तरों के अंतर के बराबर होती है:

\Delta E = E_4 - E_1 = (-0.85 \, \text{eV}) - (-13.6 \, \text{eV})

\Delta E = -0.85 + 13.6 = 12.75 \, \text{eV}

3. फोटॉन की आवृत्ति ($v$) ज्ञात करना:

फोटॉन की ऊर्जा $E = hv$ होती है, जहाँ $h$ प्लांक नियतांक है।

पहले ऊर्जा को जूल में बदलें: $1 \, \text{eV} = 1.6 \times 10^{-19} \, \text{J}$

\Delta E = 12.75 \times 1.6 \times 10^{-19} \, \text{J} = 20.4 \times 10^{-19} \, \text{J}

अब आवृत्ति ज्ञात करें:

v = \frac{\Delta E}{h} = \frac{20.4 \times 10^{-19} \, \text{J}}{6.63 \times 10^{-34} \, \text{J-s}}

v \approx 3.077 \times 10^{15} \, \text{Hz}

4. फोटॉन की तरंगदैर्घ्य ($\lambda$) ज्ञात करना:

फोटॉन की ऊर्जा और तरंगदैर्घ्य के बीच संबंध $E = \frac{hc}{\lambda}$ है।

तरंगदैर्घ्य ज्ञात करने के लिए, हम सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करते हैं:

\lambda = \frac{hc}{\Delta E}

जहाँ $c$ प्रकाश की गति है ($c \approx 3 \times 10^8 \, \text{m/s}$)।

\lambda = \frac{(6.63 \times 10^{-34} \, \text{J-s}) \times (3 \times 10^8 \, \text{m/s})}{20.4 \times 10^{-19} \, \text{J}}

\lambda = \frac{19.89 \times 10^{-26}}{20.4 \times 10^{-19}} \, \text{m}

\lambda \approx 0.975 \times 10^{-7} \, \text{m}

\lambda \approx 9.75 \times 10^{-8} \, \text{m}

इसे नैनोमीटर (nm) में बदलने पर:

\lambda \approx 9.75 \times 10^{-8} \times 10^9 \, \text{nm} = 97.5 \, \text{nm}

अतः, अवशोषित फोटॉन की आवृत्ति लगभग $3.077 \times 10^{15} \, \text{Hz}$ और तरंगदैर्घ्य लगभग $97.5 \, \text{nm}$ होगी।

Common mistakes

  • Confusing the relative sizes of atoms in different models.
  • Incorrectly applying the conditions for elastic scattering with light nuclei.
  • Errors in calculating wavelengths for spectral lines, especially with infinite upper states.
  • Mistakes in converting energy units (eV to Joules) for frequency calculations.
  • Incorrectly relating total energy to kinetic and potential energy in atomic systems.

Revision tips

  • Review the key postulates and experimental evidence for Thomson's and Rutherford's atomic models.
  • Practice calculating spectral line wavelengths using the Rydberg formula for different series.
  • Understand the relationship between energy level differences and photon frequency/wavelength.
  • Memorize the formulas for kinetic and potential energy in the hydrogen atom and their relation to total energy.
  • Work through all example problems to solidify understanding of problem-solving techniques.

Practice MCQs

Q1. थॉमसन मॉडल की तुलना में रदरफोर्ड मॉडल में परमाणु का आकार कैसा होता है?

Q2. किस परमाणु मॉडल के अनुसार, क्लासिकी भौतिकी के नियमों के आधार पर परमाणु का नष्ट होना निश्चित है?

Q3. पाश्चन श्रेणी में विद्यमान स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम तरंगदैर्घ्य किस संक्रमण से प्राप्त होती है?

Q4. यदि किसी परमाणु में दो ऊर्जा स्तरों के बीच ऊर्जा का अंतर 2.3 eV है, तो उत्सर्जित फोटॉन की आवृत्ति क्या होगी?

Q5. हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में इलेक्ट्रॉन की स्थितिज ऊर्जा कितनी होती है?

Frequently asked questions

क्लास 12 भौतिकी के अध्याय 4 'परमाणु' में कौन से मुख्य परमाणु मॉडल शामिल हैं?

इस अध्याय में मुख्य रूप से थॉमसन का परमाणु मॉडल और रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल शामिल हैं, जो परमाणु की संरचना को समझने के प्रारंभिक प्रयास थे।

रदरफोर्ड के α-कण प्रकीर्णन प्रयोग का क्या महत्व है?

इस प्रयोग ने परमाणु के नाभिक की खोज की, जिसमें परमाणु का अधिकांश धनावेश और द्रव्यमान केंद्रित होता है, और इसने थॉमसन के मॉडल को गलत साबित किया।

हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा स्तरों से संबंधित मुख्य सूत्र क्या हैं?

हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में कुल ऊर्जा -13.6 eV होती है। गतिज ऊर्जा (KE) = -E और स्थितिज ऊर्जा (PE) = 2E होती है, जहाँ E कुल ऊर्जा है।

स्पेक्ट्रमी रेखाओं की लघुत्तम तरंगदैर्घ्य की गणना कैसे की जाती है?

लघुत्तम तरंगदैर्घ्य (उच्चतम ऊर्जा) की गणना रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करके की जाती है, जब इलेक्ट्रॉन अनंत ऊर्जा स्तर (n₂=∞) से किसी निम्न ऊर्जा स्तर (n₁) में संक्रमण करता है।

ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत, चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और विभिन्न प्रकार की समस्याओं को हल करने का तरीका सीखने में मदद मिलती है।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.