कक्षा 12 भौतिकी अध्याय 6: अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक्स-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 6, 'अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक्स-पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें n-प्रकार और p-प्रकार के अर्धचालकों की विशेषताओं, ऊर्जा बैंड अंतराल की तुलना, p-n संधि के व्यवहार और ट्रांजिस्टर के संचालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों को स्पष्टता के लिए चरण-दर-चरण समझाया गया है, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद मिलती है। यह संसाधन छात्रों को अर्धचालक भौतिकी की मूल बातें और उनके अनुप्रयोगों को समझने में सहायता करता है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | भौतिकी विज्ञान-II |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 6 |
Chapter summary
कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 6 के ये NCERT समाधान अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक्स की मूल बातें, जैसे कि n-प्रकार और p-प्रकार के अर्धचालक, ऊर्जा बैंड अंतराल और p-n संधि के निर्माण और कार्यप्रणाली को कवर करते हैं। इसमें ट्रांजिस्टर के संचालन और प्रवर्धक के रूप में उनके उपयोग पर भी चर्चा की गई है। समाधान छात्रों को इन अवधारणाओं को समझने और संबंधित प्रश्नों को हल करने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- n-प्रकार और p-प्रकार के अर्धचालकों के बीच अंतर को समझना।
- कार्बन, सिलिकॉन और जर्मेनियम के ऊर्जा बैंड अंतराल की तुलना करना।
- p-n संधि पर अग्र और उत्क्रम अभिनत के प्रभाव को समझना।
- ट्रांजिस्टर के संचालन के लिए आवश्यक शर्तों की पहचान करना।
- ट्रांजिस्टर प्रवर्धक के वोल्टेज लाभ की विशेषताओं का विश्लेषण करना।
Topics covered
Paper topics
- अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक्स
- n-प्रकार के अर्धचालक
- p-प्रकार के अर्धचालक
- ऊर्जा बैंड अंतराल
- p-n संधि
- अग्र अभिनत
- उत्क्रम अभिनत
- ट्रांजिस्टर
- ट्रांजिस्टर प्रवर्धक
- वोल्टेज लाभ
Important topics
- n-प्रकार और p-प्रकार के अर्धचालक
- p-n संधि का निर्माण और कार्यप्रणाली
- अग्र और उत्क्रम अभिनत
- ट्रांजिस्टर का संचालन
- ऊर्जा बैंड अंतराल की तुलना
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
(a) इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अपमिश्रक हैं।
(b) इलेक्ट्रॉन अल्पसंख्यक वाहक हैं और पंचसंयोजी परमाणु अपिमश्रक हैं।
(c) विवर (होल) अल्पसंख्यक वाहक हैं और पंचसंयोजी परमाणु अपिमश्रक हैं।
(d) विवर (होल) बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अपिमश्रक हैं।
n-प्रकार के अर्धचालक बनाने के लिए, शुद्ध सिलिकॉन या जर्मेनियम में पंचसंयोजी तत्व (जैसे फॉस्फोरस या आर्सेनिक) की अशुद्धियाँ मिलाई जाती हैं। इन पंचसंयोजी परमाणुओं में संयोजकता बैंड में चार इलेक्ट्रॉनों के अलावा एक अतिरिक्त मुक्त इलेक्ट्रॉन होता है। यह अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में आसानी से चला जाता है और धारा प्रवाह में योगदान देता है। इसलिए, n-प्रकार के अर्धचालक में, इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक होते हैं और विवर (होल) अल्पसंख्यक वाहक होते हैं। त्रिसंयोजी परमाणु (जैसे बोरॉन या एल्यूमीनियम) p-प्रकार के अर्धचालक बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
अतः, सही कथन है: (c) विवर (होल) अल्पसंख्यक वाहक हैं और पंचसंयोजी परमाणु अपिमश्रक हैं।
प्रश्न 2
p-प्रकार के अर्धचालक बनाने के लिए, शुद्ध सिलिकॉन या जर्मेनियम में त्रिसंयोजी तत्व (जैसे बोरॉन या एल्यूमीनियम) की अशुद्धियाँ मिलाई जाती हैं। इन त्रिसंयोजी परमाणुओं में संयोजकता बैंड में केवल तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिससे एक सहसंयोजक बंध में एक इलेक्ट्रॉन की कमी रह जाती है। इस कमी को विवर (होल) कहा जाता है। ये विवर चालन में योगदान करते हैं। पास के परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन इन विवरों को भरने के लिए आ सकता है, जिससे विवर का स्थानांतरण होता है। इसलिए, p-प्रकार के अर्धचालक में, विवर (होल) बहुसंख्यक वाहक होते हैं और इलेक्ट्रॉन अल्पसंख्यक वाहक होते हैं। पंचसंयोजी परमाणु n-प्रकार के अर्धचालक बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
अतः, p-टाइप के अर्द्धचालकों के लिए सत्य कथन है: विवर (होल) बहुसंख्यक वाहक हैं और त्रिसंयोजी परमाणु अपिमश्रक हैं।
प्रश्न 3
(a)
(b)
(c)
(d)
ऊर्जा बैंड अंतराल (Energy Band Gap), , किसी पदार्थ के संयोजकता बैंड और चालन बैंड के बीच ऊर्जा की वह न्यूनतम मात्रा है जो एक इलेक्ट्रॉन को संयोजकता बैंड से चालन बैंड में कूदने के लिए आवश्यक होती है। यह पदार्थ की विद्युत चालकता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्बन (हीरा), सिलिकॉन और जर्मेनियम के लिए ऊर्जा बैंड अंतराल के मान लगभग इस प्रकार हैं:
- कार्बन (हीरा): (यह एक विद्युत रोधी है)
- सिलिकॉन: (यह एक अर्धचालक है)
- जर्मेनियम: (यह भी एक अर्धचालक है)
इन मानों से स्पष्ट है कि कार्बन का ऊर्जा बैंड अंतराल सबसे अधिक है, उसके बाद सिलिकॉन का और फिर जर्मेनियम का, जिसका ऊर्जा बैंड अंतराल सबसे कम है। इसलिए, हम कह सकते हैं कि ।
अतः, सही प्रकथन है: (c)
प्रश्न 4
(a) n-क्षेत्र में मुक्त इलेक्ट्रॉन उन्हें आकर्षित करते हैं।
(b) ये विभवान्तर के कारण सन्धि के पार गति करते हैं।
(c) p-क्षेत्र में होल-सान्द्रता, n-क्षेत्र में इनकी सान्द्रता से अधिक है।
(d) उपरोक्त सभी
जब एक p-n संधि बिना किसी बाहरी वोल्टेज (बायस) के होती है, तो संधि के दोनों ओर आवेश वाहकों की सांद्रता में अंतर होता है। p-क्षेत्र में बहुसंख्यक वाहक होल होते हैं और n-क्षेत्र में बहुसंख्यक वाहक इलेक्ट्रॉन होते हैं। p-क्षेत्र में होल की सांद्रता n-क्षेत्र की तुलना में बहुत अधिक होती है। इसी प्रकार, n-क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनों की सांद्रता p-क्षेत्र की तुलना में बहुत अधिक होती है।
भौतिकी के एक मौलिक सिद्धांत के अनुसार, आवेश वाहक हमेशा उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर विसरित होते हैं। इसलिए, p-क्षेत्र में होल की उच्च सांद्रता के कारण, वे संधि को पार करके n-क्षेत्र की ओर विसरित होते हैं। इसी तरह, n-क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनों की उच्च सांद्रता के कारण, वे संधि को पार करके p-क्षेत्र की ओर विसरित होते हैं। यह विसरण संधि के आर-पार एक विभव रोधक (potential barrier) उत्पन्न करता है, जो आगे विसरण को रोकता है।
विकल्प (a) गलत है क्योंकि n-क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन आकर्षित करने के बजाय प्रतिकर्षित करते हैं जब तक कि वे संधि पार न कर लें। विकल्प (b) गलत है क्योंकि बिना बायस के, यह विसरण ही है जो संधि के पार गति का कारण बनता है, न कि कोई बाहरी विभवान्तर।
अतः, सबसे सटीक कारण यह है कि p-क्षेत्र में होल-सान्द्रता, n-क्षेत्र में इनकी सान्द्रता से अधिक है।
सही विकल्प है: (c) p-क्षेत्र में होल-सान्द्रता, n-क्षेत्र में इनकी सान्द्रता से अधिक है।
प्रश्न 5
(a) विभव रोधक बढ़ाता है।
(b) बहुसंख्यक वाहक घारा को शून्य कर देता है।
(c) विभव रोघक को कम कर देता है।
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं।
जब एक p-n संधि पर अग्र अभिनत (forward bias) लगाया जाता है, तो बाहरी वोल्टेज स्रोत का धनात्मक टर्मिनल p-क्षेत्र से और ऋणात्मक टर्मिनल n-क्षेत्र से जोड़ा जाता है। यह आरोपित वोल्टेज संधि के आर-पार उत्पन्न विभव रोधक (potential barrier) के विपरीत दिशा में कार्य करता है।
विभव रोधक, जो कि संधि के दोनों ओर आवेश वाहकों के विसरण के कारण उत्पन्न होता है, एक आंतरिक विद्युत क्षेत्र बनाता है। अग्र अभिनत में लगाया गया बाहरी वोल्टेज इस आंतरिक विद्युत क्षेत्र को कमजोर करता है। परिणामस्वरूप, विभव रोधक का मान कम हो जाता है। जब आरोपित वोल्टेज विभव रोधक से अधिक हो जाता है, तो बहुसंख्यक वाहक (p-क्षेत्र में होल और n-क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन) संधि को आसानी से पार कर जाते हैं, जिससे एक बड़ी धारा प्रवाहित होती है।
इसके विपरीत, उत्क्रम अभिनत (reverse bias) में, आरोपित वोल्टेज विभव रोधक को बढ़ाता है। अग्र अभिनत में धारा शून्य नहीं होती, बल्कि काफी बढ़ जाती है।
अतः, अग्र अभिनत बायस लगाने पर p-n संधि का विभव रोधक कम हो जाता है।
सही विकल्प है: (c) विभव रोघक को कम कर देता है।
प्रश्न 6
(a) आधार, उत्सर्जक और संग्राहक क्षेत्रों की आमाप और अपमिश्रण सान्द्रता समान होनी चाहिए।
(b) आघार क्षेत्र बहुत बारीक और कम अपमिश्रित होना चाहिए।
(c) उत्सर्जक सन्धि अग्र अभिनत है और संग्राहक सन्धि उत्क्रम अभिनत है।
(d) उत्सर्जक सन्धि और संग्राहक सन्धि दोनों ही अग्र अभिनत हैं।
एक ट्रांजिस्टर (जैसे NPN या PNP) में तीन क्षेत्र होते हैं: उत्सर्जक (Emitter), आधार (Base) और संग्राहक (Collector)। ट्रांजिस्टर के प्रभावी प्रवर्धन (amplification) के लिए, इन क्षेत्रों की संरचना और बायसिंग महत्वपूर्ण होती है।
- आधार क्षेत्र (Base Region): ट्रांजिस्टर के प्रवर्धन कार्य के लिए आधार क्षेत्र को बहुत पतला और कम अपमिश्रित (lightly doped) होना चाहिए। पतला आधार यह सुनिश्चित करता है कि उत्सर्जक से इंजेक्ट किए गए अधिकांश आवेश वाहक (इलेक्ट्रॉन या होल) संग्राहक तक पहुँच सकें, न कि आधार में पुनर्संयोजित (recombine) हों। कम अपमिश्रण सांद्रता भी आधार में पुनर्संयोजन को कम करती है।
- संधि बायसिंग (Junction Biasing): ट्रांजिस्टर को सामान्यतः प्रवर्धक के रूप में कार्य करने के लिए, उत्सर्जक-आधार संधि (Emitter-Base junction) को अग्र अभिनत (forward biased) रखा जाता है, और आधार-संग्राहक संधि (Base-Collector junction) को उत्क्रम अभिनत (reverse biased) रखा जाता है। अग्र अभिनत उत्सर्जक से आधार की ओर आवेश वाहकों के इंजेक्शन को सुगम बनाता है, जबकि उत्क्रम अभिनत संग्राहक को इन आवेश वाहकों को आकर्षित करने और एकत्र करने में मदद करता है।
विकल्प (a) गलत है क्योंकि तीनों क्षेत्रों के आमाप और अपमिश्रण सांद्रता भिन्न होती है। विकल्प (d) गलत है क्योंकि संग्राहक संधि उत्क्रम अभिनत होती है, अग्र अभिनत नहीं।
इसलिए, ट्रांजिस्टर की क्रिया हेतु सही कथन हैं: (b) आधार क्षेत्र बहुत बारीक और कम अपमिश्रित होना चाहिए, और (c) उत्सर्जक संधि अग्र अभिनत है और संग्राहक संधि उत्क्रम अभिनत है।
प्रश्न 7
(a) सभी आवृत्तियों के लिए समान रहती है।
(b) उच्च और निम्न आवृत्तियों पर उच्च होती है तथा मध्य आवृत्ति परिसर में अचर रहती है।
(c) उच्च और निम्न आवृत्तियों पर कम होती है और मध्य आवृत्तियों पर अचर रहती है।
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं।
एक ट्रांजिस्टर प्रवर्धक (transistor amplifier) का वोल्टेज लाभ (voltage gain) लागू किए गए इनपुट सिग्नल की आवृत्ति पर निर्भर करता है। आदर्श रूप से, एक प्रवर्धक को सभी आवृत्तियों पर समान लाभ प्रदान करना चाहिए, लेकिन व्यवहार में ऐसा नहीं होता है।
- मध्य आवृत्ति रेंज (Mid-frequency Range): इस आवृत्ति रेंज में, ट्रांजिस्टर के आंतरिक कैपेसिटेंस (capacitances) का प्रभाव नगण्य होता है, और प्रवर्धक का वोल्टेज लाभ अधिकतम और लगभग स्थिर (constant) रहता है।
- निम्न आवृत्ति रेंज (Low-frequency Range): बहुत कम आवृत्तियों पर, युग्मन कैपेसिटेंस (coupling capacitances) और बायपास कैपेसिटेंस (bypass capacitances) का प्रभाव महत्वपूर्ण हो जाता है। ये कैपेसिटेंस इनपुट और आउटपुट सिग्नलों के बीच फेज शिफ्ट (phase shift) उत्पन्न करते हैं और वोल्टेज लाभ को कम कर देते हैं।
- उच्च आवृत्ति रेंज (High-frequency Range): बहुत उच्च आवृत्तियों पर, ट्रांजिस्टर के आंतरिक जंक्शन कैपेसिटेंस (जैसे और ) महत्वपूर्ण हो जाते हैं। ये कैपेसिटेंस सिग्नल को बायपास करने लगते हैं या आउटपुट सिग्नल को कम कर देते हैं, जिससे वोल्टेज लाभ कम हो जाता है।
इसलिए, एक सामान्य ट्रांजिस्टर प्रवर्धक का वोल्टेज लाभ उच्च और निम्न आवृत्तियों पर कम होता है, और मध्य आवृत्ति परिसर में यह अधिकतम और अचर रहता है।
सही विकल्प है: (c) उच्च और निम्न आवृत्तियों पर कम होती है और मध्य आवृत्तियों पर अचर रहती है।
Common mistakes
- n-प्रकार और p-प्रकार के अर्धचालकों में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक वाहकों की पहचान करने में भ्रमित होना।
- p-n संधि पर अग्र और उत्क्रम अभिनत के प्रभाव को गलत समझना।
- ट्रांजिस्टर के निर्माण और संचालन के लिए आवश्यक शर्तों को याद रखने में कठिनाई।
- ऊर्जा बैंड अंतराल के संबंध में विभिन्न अर्धचालकों की तुलना करने में त्रुटियाँ।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के हल को ध्यान से पढ़ें और मुख्य अवधारणाओं को समझें।
- n-प्रकार और p-प्रकार के अर्धचालकों के बीच अंतर को सारणीबद्ध करें।
- p-n संधि पर अग्र और उत्क्रम अभिनत के प्रभाव को दर्शाने वाले आरेख बनाएं।
- ट्रांजिस्टर के संचालन के लिए आवश्यक शर्तों को याद रखने के लिए फ्लैशकार्ड का उपयोग करें।
Practice MCQs
Q1. किसी n-प्रकार के सिलिकॉन में कौन-सा कथन सत्य है?
Explanation: n-टाइप अर्धचालक में, पंचसंयोजी अशुद्धियाँ मिलाई जाती हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक बनते हैं और विवर (होल) अल्पसंख्यक वाहक होते हैं।
Q2. p-टाइप के अर्द्धचालकों के लिए कौन-सा कथन सत्य है?
Explanation: p-टाइप अर्धचालक में, त्रिसंयोजी अशुद्धियाँ मिलाई जाती हैं, जिससे विवर (होल) बहुसंख्यक वाहक बनते हैं और इलेक्ट्रॉन अल्पसंख्यक वाहक होते हैं।
Q3. कार्बन, सिलिकॉन और जर्मेनियम के ऊर्जा बैंड अंतराल (Eg) के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
Explanation: कार्बन का ऊर्जा बैंड अंतराल सबसे अधिक होता है, उसके बाद सिलिकॉन और फिर जर्मेनियम का आता है, जिसका ऊर्जा बैंड अंतराल सबसे कम होता है।
Q4. बिना बायस वाली p-n संधि से, होल p-क्षेत्र से n-क्षेत्र की ओर क्यों विसरित होते हैं?
Explanation: आवेश वाहकों का विसरण हमेशा उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर होता है। p-n संधि में, p-क्षेत्र में होल की सांद्रता n-क्षेत्र की तुलना में अधिक होती है।
Q5. जब p-n संधि पर अग्र अभिनत बायस लगाया जाता है, तो क्या होता है?
Explanation: अग्र अभिनत में, आरोपित वोल्टेज संधि के विभव रोधक के विपरीत कार्य करता है, जिससे विभव रोधक कम हो जाता है और धारा प्रवाह सुगम हो जाता है।
Q6. ट्रांजिस्टर की क्रिया के लिए कौन-से कथन सही हैं?
Explanation: ट्रांजिस्टर के प्रभावी संचालन के लिए, आधार क्षेत्र को पतला और कम अपमिश्रित रखा जाता है। साथ ही, उत्सर्जक संधि को अग्र अभिनत और संग्राहक संधि को उत्क्रम अभिनत रखा जाता है।
Frequently asked questions
n-प्रकार और p-प्रकार के अर्धचालकों में मुख्य अंतर क्या है?
n-प्रकार के अर्धचालकों में पंचसंयोजी अशुद्धियाँ मिलाई जाती हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक होते हैं। p-प्रकार के अर्धचालकों में त्रिसंयोजी अशुद्धियाँ मिलाई जाती हैं, जिससे विवर (होल) बहुसंख्यक वाहक होते हैं।
p-n संधि पर अग्र अभिनत का क्या प्रभाव पड़ता है?
अग्र अभिनत में, p-n संधि पर लगाया गया वोल्टेज विभव रोधक को कम कर देता है, जिससे धारा का प्रवाह आसान हो जाता है।
ट्रांजिस्टर के प्रभावी संचालन के लिए किन शर्तों का पालन किया जाना चाहिए?
ट्रांजिस्टर के प्रभावी संचालन के लिए, आधार क्षेत्र को पतला और कम अपमिश्रित होना चाहिए, उत्सर्जक संधि अग्र अभिनत होनी चाहिए और संग्राहक संधि उत्क्रम अभिनत होनी चाहिए।
कार्बन, सिलिकॉन और जर्मेनियम के ऊर्जा बैंड अंतराल में क्या अंतर है?
कार्बन का ऊर्जा बैंड अंतराल सबसे अधिक होता है, उसके बाद सिलिकॉन और फिर जर्मेनियम का आता है, जिसका ऊर्जा बैंड अंतराल सबसे कम होता है।
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए उपयोगी है?
यह समाधान कक्षा 12 भौतिकी के छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो अध्याय 6 'अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक्स' का अध्ययन कर रहे हैं।
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