CBSE कक्षा 12 भौतिकी: अध्याय 3 विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ CBSE कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 3, 'विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय प्रकाश की द्वैत प्रकृति, फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव, आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण, और डी-ब्रोग्ली परिकल्पना जैसे महत्वपूर्ण विषयों को कवर करता है। समाधानों में X-किरणों की अधिकतम आवृत्ति और न्यूनतम तरंग दैर्ध्य की गणना, सीज़ियम धातु पर प्रकाश के आपतन से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा, निरोधी विभव और अधिकतम चाल का निर्धारण, तथा अंतक वोल्टता से संबंधित गणनाएँ शामिल हैं। प्रत्येक प्रश्न का हल चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे छात्रों को इन अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी और पुनरीक्षण के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं, जो छात्रों को जटिल समस्याओं को हल करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectभौतिकी विज्ञान-II
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 3

Chapter summary

कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 3, 'विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति' के लिए NCERT समाधान, प्रकाश-विद्युत प्रभाव और डी-ब्रोग्ली परिकल्पना पर केंद्रित हैं। समाधानों में X-किरणों की विशेषताओं की गणना, विभिन्न आवृत्तियों के प्रकाश के लिए फोटोइलेक्ट्रिक उत्सर्जन की ऊर्जा, निरोधी विभव और इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम चाल का निर्धारण शामिल है। यह अध्याय छात्रों को विकिरण और पदार्थ दोनों के तरंग और कण दोनों गुणों को समझने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • X-किरणों की अधिकतम आवृत्ति और न्यूनतम तरंग दैर्ध्य की गणना करना सीखें।
  • फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव के लिए आइंस्टीन के समीकरण का उपयोग करके उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा ज्ञात करें।
  • फोटोइलेक्ट्रिक उत्सर्जन के लिए निरोधी विभव (कट-ऑफ वोल्टेज) की गणना करें।
  • उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम चाल का निर्धारण करें।
  • प्रकाश-विद्युत प्रभाव से संबंधित विभिन्न मापदंडों की गणना के लिए दिए गए सूत्रों को लागू करें।

Topics covered

Paper topics

  • प्रकाश-विद्युत प्रभाव
  • आइंस्टीन का प्रकाश-विद्युत समीकरण
  • कार्य-फलन (Work Function)
  • निरोधी विभव (Stopping Potential)
  • प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन
  • X-किरणों की उत्पत्ति
  • X-किरणों की आवृत्ति और तरंग दैर्ध्य
  • डी-ब्रोग्ली परिकल्पना
  • पदार्थ की द्वैत प्रकृति
  • फोटॉन की ऊर्जा
  • इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा
  • तरंग दैर्ध्य और आवृत्ति में संबंध

Important topics

  • प्रकाश-विद्युत प्रभाव और आइंस्टीन का समीकरण
  • कार्य-फलन और निरोधी विभव की गणना
  • X-किरणों की अधिकतम आवृत्ति और न्यूनतम तरंग दैर्ध्य
  • डी-ब्रोग्ली तरंग दैर्ध्य की अवधारणा
  • पदार्थ की द्वैत प्रकृति

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

30 kV इलेक्ट्रॉनों के द्वारा उत्पन्न X-किरणों की:
  1. उच्चतम आवृत्ति तथा
  2. निप्नतम तरंगदैर्घ्य प्राप्त कीजिए।
Solution:

दिया गया है, इलेक्ट्रॉनों के लिए विभवान्तर V = 30 \text{ kV} = 30 \times 10^3 \text{ V}। इलेक्ट्रॉन का आवेश e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C} और प्लांक नियतांक h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ Js} है।

  1. उच्चतम आवृत्ति:

    जब इलेक्ट्रॉन इस विभवान्तर से त्वरित होते हैं, तो उनकी अधिकतम ऊर्जा E = eV होती है। यह ऊर्जा X-किरण फोटॉन की अधिकतम ऊर्जा के बराबर होती है, जिसे E = hv_{max} द्वारा व्यक्त किया जाता है।

    अतः, hv_{max} = eV

    अधिकतम आवृत्ति v_{max} = \frac{eV}{h}

    v_{max} = \frac{(1.6 \times 10^{-19} \text{ C}) \times (30 \times 10^3 \text{ V})}{6.63 \times 10^{-34} \text{ Js}}

    v_{max} = \frac{4.8 \times 10^{-16}}{6.63 \times 10^{-34}} \approx 7.24 \times 10^{18} \text{ Hz}

    इसलिए, उत्पन्न X-किरणों की उच्चतम आवृत्ति 7.24 \times 10^{18} \text{ Hz} है।

  2. निप्नतम तरंगदैर्घ्य:

    X-किरणों की न्यूनतम तरंगदैर्घ्य (\lambda_{min}) उच्चतम आवृत्ति (v_{max}) से संबंधित होती है, जहाँ \lambda_{min} = \frac{c}{v_{max}}। यहाँ c प्रकाश की चाल है, जिसका मान 3 \times 10^8 \text{ m/s} है।

    \lambda_{min} = \frac{3 \times 10^8 \text{ m/s}}{7.24 \times 10^{18} \text{ Hz}}

    \lambda_{min} \approx 0.414 \times 10^{-10} \text{ m}

    इसे नैनोमीटर (nm) में बदलने पर:

    \lambda_{min} = 0.0414 \times 10^{-9} \text{ m} = 0.0414 \text{ nm}

    अतः, उत्पन्न X-किरणों की निप्नतम तरंगदैर्घ्य 0.0414 \text{ nm} है।

प्रश्न 2

सीज़ियम धातु का कार्य-फलन 2.14 eV है। जब 6 \times 10^{14}~{\rm Hz} आवृत्ति का प्रकाश घातुपृष्ठ पर आपतित होता है, तब इलेक्ट्रॉनों का प्रकाशिक उत्सर्जन होता है।
  1. उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा,
  2. निरोधी विभव और
  3. उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम चाल कितनी है?
Solution:

दिया गया है, सीज़ियम धातु का कार्य-फलन \phi_0 = 2.14 \text{ eV}। आपतित प्रकाश की आवृत्ति v = 6 \times 10^{14} \text{ Hz} है। प्लांक नियतांक h = 6.63 \times 10^{-34} \text{ Js} और इलेक्ट्रॉन का आवेश e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C} है।

  1. उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा:

    आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार, उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा (KE_{max}) निम्न द्वारा दी जाती है:

    KE_{max} = hv - \phi_0

    पहले आपतित फोटॉन की ऊर्जा (hv) की गणना करें:

    hv = (6.63 \times 10^{-34} \text{ Js}) \times (6 \times 10^{14} \text{ Hz}) = 3.978 \times 10^{-19} \text{ J}

    इस ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) में बदलें: 1 \text{ eV} = 1.6 \times 10^{-19} \text{ J}

    hv = \frac{3.978 \times 10^{-19} \text{ J}}{1.6 \times 10^{-19} \text{ J/eV}} \approx 2.49 \text{ eV}

    अब, अधिकतम गतिज ऊर्जा की गणना करें:

    KE_{max} = 2.49 \text{ eV} - 2.14 \text{ eV} = 0.35 \text{ eV}

    इसलिए, उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा 0.35 \text{ eV} है।

  2. निरोधी विभव:

    निरोधी विभव (V_0) वह विभव है जिसके लिए अधिकतम गतिज ऊर्जा वाले इलेक्ट्रॉन भी धातु की सतह तक नहीं पहुँच पाते। यह KE_{max} = eV_0 द्वारा संबंधित है।

    चूंकि KE_{max} = 0.35 \text{ eV}, हम लिख सकते हैं:

    0.35 \text{ eV} = e V_0

    अतः, निरोधी विभव V_0 = 0.35 \text{ V} है।

  3. उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम चाल:

    इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा को KE_{max} = \frac{1}{2} m v_{max}^2 के रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ m इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान (9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}) और v_{max} अधिकतम चाल है।

    हमें गतिज ऊर्जा को जूल में बदलना होगा: KE_{max} = 0.35 \text{ eV} = 0.35 \times 1.6 \times 10^{-19} \text{ J} = 0.56 \times 10^{-19} \text{ J}

    अब, v_{max} के लिए हल करें:

    \frac{1}{2} m v_{max}^2 = 0.56 \times 10^{-19} \text{ J}

    v_{max}^2 = \frac{2 \times (0.56 \times 10^{-19} \text{ J})}{9.1 \times 10^{-31} \text{ kg}}

    v_{max}^2 = \frac{1.12 \times 10^{-19}}{9.1 \times 10^{-31}} \approx 0.123 \times 10^{12} \text{ m}^2/\text{s}^2

    v_{max} = \sqrt{0.123 \times 10^{12}} \approx 0.3507 \times 10^6 \text{ m/s}

    v_{max} \approx 3.507 \times 10^5 \text{ m/s}

    इसे किलोमीटर प्रति सेकंड में व्यक्त करने पर: v_{max} \approx 350.7 \text{ km/s}

    अतः, उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम चाल लगभग 3.507 \times 10^5 \text{ m/s} या 350.7 \text{ km/s} है।

प्रश्न 3

एक विशिष्ट प्रयोग में प्रकाश-विद्युत प्रभाव की अंतक वोल्टता 1.5 V है। उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा कितनी है?
Solution:

दिया गया है, प्रकाश-विद्युत प्रभाव की अंतक वोल्टता (निरोधी विभव) V_0 = 1.5 \text{ V} है।

उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा (KE_{max}) को अंतक वोल्टता से संबंधित किया जा सकता है:

KE_{max} = eV_0

जहाँ e इलेक्ट्रॉन का आवेश है (1.6 \times 10^{-19} \text{ C})।

यदि हम ऊर्जा को इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) में व्यक्त करते हैं, तो:

KE_{max} = 1.5 \text{ eV}

यदि हमें ऊर्जा जूल (J) में चाहिए, तो हम e के मान से गुणा करते हैं:

KE_{max} = 1.5 \times (1.6 \times 10^{-19} \text{ C}) = 2.4 \times 10^{-19} \text{ J}

अतः, उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा 1.5 \text{ eV} या 2.4 \times 10^{-19} \text{ J} है।

Common mistakes

  • कार्य-फलन (work function) और आपतित फोटॉन की ऊर्जा के बीच अंतर करने में त्रुटि।
  • फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव के लिए ऊर्जा की इकाइयों (eV और जूल) को परिवर्तित करने में गलती।
  • निरोधी विभव और आपतित प्रकाश की आवृत्ति के बीच संबंध को गलत समझना।
  • डी-ब्रोग्ली तरंग दैर्ध्य की गणना करते समय संवेग (momentum) के सूत्र को गलत लागू करना।

Revision tips

  • फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव के लिए आइंस्टीन के समीकरण को अच्छी तरह समझें: <math>KE_{max} = hv - \phi_0</math>।
  • कार्य-फलन (<math>\phi_0</math>) और निरोधी विभव (<math>V_0</math>) के बीच संबंध (<math>KE_{max} = eV_0</math>) को याद रखें।
  • X-किरणों की अधिकतम आवृत्ति और न्यूनतम तरंग दैर्ध्य की गणना के लिए ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का उपयोग करें।
  • सभी गणनाओं में भौतिक स्थिरांक (जैसे h, c, e, m) के सही मानों का उपयोग सुनिश्चित करें।

Practice MCQs

Q1. 30 kV इलेक्ट्रॉनों द्वारा उत्पन्न X-किरणों की उच्चतम आवृत्ति क्या है?

Q2. सीज़ियम धातु का कार्य-फलन 2.14 eV है। यदि <math>6 \times 10^{14}</math> Hz आवृत्ति का प्रकाश आपतित होता है, तो उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा कितनी होगी?

Q3. यदि फोटोइलेक्ट्रिक प्रभाव के लिए अंतक वोल्टता (निरोधी विभव) 1.5 V है, तो उत्सर्जित प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों की उच्चतम गतिज ऊर्जा जूल में कितनी है?

Q4. सीज़ियम धातु के लिए, <math>6 \times 10^{14}</math> Hz आवृत्ति के प्रकाश के आपतन पर निरोधी विभव कितना है, यदि कार्य-फलन 2.14 eV है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 3 में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

अध्याय 3, 'विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रकृति', मुख्य रूप से प्रकाश-विद्युत प्रभाव, आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण, कार्य-फलन, निरोधी विभव, और डी-ब्रोग्ली परिकल्पना जैसे विषयों पर केंद्रित है। यह विकिरण और पदार्थ दोनों के कण और तरंग गुणों की द्वैत प्रकृति की पड़ताल करता है।

ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। वे जटिल गणनाओं को हल करने के तरीके प्रदर्शित करते हैं और महत्वपूर्ण सूत्रों और सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हैं, जो परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए आवश्यक हैं।

प्रकाश-विद्युत प्रभाव क्या है?

प्रकाश-विद्युत प्रभाव वह घटना है जिसमें जब उपयुक्त आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु की सतह पर पड़ता है, तो उससे इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। इन उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन कहा जाता है।

कार्य-फलन (Work Function) का क्या अर्थ है?

कार्य-फलन वह न्यूनतम ऊर्जा है जो किसी धातु की सतह से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक होती है। इसे <math>\phi_0</math> से दर्शाया जाता है और यह धातु की प्रकृति पर निर्भर करता है।

निरोधी विभव (Stopping Potential) क्या है?

निरोधी विभव वह ऋणात्मक विभव है जो एनोड पर लगाया जाता है ताकि प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों को कैथोड तक पहुँचने से रोका जा सके। यह उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम गतिज ऊर्जा से संबंधित है (<math>KE_{max} = eV_0</math>)।

डी-ब्रोग्ली परिकल्पना क्या है?

डी-ब्रोग्ली परिकल्पना के अनुसार, गतिमान प्रत्येक कण के साथ एक तरंग जुड़ी होती है, जिसकी तरंग दैर्ध्य (<math>\lambda</math>) उसके संवेग (p) के व्युत्क्रमानुपाती होती है (<math>\lambda = \frac{h}{p}</math>)।

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