कक्षा 11 जीव विज्ञान: पाचन एवं अवशोषण NCERT समाधान
कक्षा 11 जीव विज्ञान के अध्याय 16 'पाचन एवं अवशोषण' के लिए यह विस्तृत समाधान मार्गदर्शिका छात्रों को पाचन तंत्र की जटिलताओं को समझने में मदद करती है। इसमें भोजन के विभिन्न घटकों जैसे प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट के पाचन की क्रियाविधि, विभिन्न पाचक रसों और एंजाइमों की भूमिका, और पोषक तत्वों के अवशोषण की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। समाधानों में अंकुरों (villi) की संरचना और कार्य, एंजाइमों का सक्रियण, और पित्त की महत्वपूर्ण भूमिका जैसे विषयों को शामिल किया गया है। यह मार्गदर्शिका छात्रों को अभ्यास प्रश्नों के उत्तर देने, अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने में सहायता करती है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | जीव विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 16. पाचन एवं अवशोषण |
Chapter summary
यह अध्याय 16, 'पाचन एवं अवशोषण', मानव पाचन तंत्र की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत करता है। इसमें आहार नाल के विभिन्न भागों में भोजन के पाचन की प्रक्रिया, विभिन्न पाचक एंजाइमों (जैसे पेप्सिन, ट्रिप्सिन, लाइपेज) की क्रियाविधि, और पित्त तथा अग्न्याशयी रस की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया है। साथ ही, अवशोषण की प्रक्रिया, विशेषकर छोटी आँत में अंकुरों (villi) के माध्यम से, और दंत सूत्र जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी शामिल किया गया है। ये समाधान छात्रों को इन अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- पाचन तंत्र के विभिन्न अंगों और उनके कार्यों को समझना।
- विभिन्न पाचक एंजाइमों और उनकी क्रियाविधि का विश्लेषण करना।
- प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट के पाचन की प्रक्रिया को स्पष्ट करना।
- पित्त और अग्न्याशयी रस की पाचन में भूमिका का वर्णन करना।
- छोटी आँत में पोषक तत्वों के अवशोषण की क्रियाविधि को समझना।
- अंकुरों (villi) के महत्व और संरचना को पहचानना।
Topics covered
Paper topics
- पाचन तंत्र का परिचय
- आहारनाल की भित्ति की संरचना
- पाचक ग्रंथियाँ (लार ग्रंथि, जठर ग्रंथि, अग्न्याशय, यकृत, आंत्र ग्रंथि)
- पाचक रस (लार, जठर रस, अग्न्याशयी रस, आंत्रिक रस, पित्त)
- एंजाइमों द्वारा पाचन (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा)
- पेप्सिन और रेनिन की क्रिया
- ट्रिप्सिन और काइमोट्रिप्सिन की क्रिया
- लाइपेज की क्रिया
- पित्त की भूमिका (इमल्सीकरण)
- अंकुर (Villi) और अवशोषण
- दंत सूत्र
- पाचन संबंधी विकार (संक्षिप्त उल्लेख)
Important topics
- विभिन्न पाचक रसों और एंजाइमों की क्रियाविधि
- प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट का पाचन
- पित्त की भूमिका और वसा का इमल्सीकरण
- छोटी आँत में अंकुरों (villi) द्वारा अवशोषण
- एंजाइमों का सक्रियण (प्रोएंजाइम से सक्रिय एंजाइम)
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Questions and Solutions
प्रश्न 1. निम्न में से सही उत्तर छाँटें—
(क) आमाशय रस में होता है—
- पेप्सिन, लाइपेज और रेनिन
- ट्रिप्सिन, लाइपेज और रेनिन
- ट्रिप्सिन, पेप्सिन और लाइपेज
- ट्रिप्सिन, पेप्सिन और रेनिन
(ख) सक्कस एंटेरिकस नाम दिया गया है—
- क्षुद्रांत्र (ileum) और बड़ी आँत के संधि स्थल के लिए
- आंत्रिक रस के लिए
- आहारनाल में सूजन के लिए
- परिशेषिका (appendix) के लिए
(क) आमाशय रस में मुख्य रूप से पेप्सिनोजन (जो HCl की उपस्थिति में सक्रिय होकर पेप्सिन बनता है) और रेनिन एंजाइम पाए जाते हैं। लाइपेज भी थोड़ी मात्रा में मौजूद हो सकता है। इसलिए, विकल्प (a) 'पेप्सिन, लाइपेज और रेनिन' सबसे उपयुक्त है, यह मानते हुए कि पेप्सिनोजन सक्रिय रूप में है।
(ख) सक्कस एंटेरिकस (Succus Entericus) आंत्रिक रस का दूसरा नाम है, जो क्षुद्रांत्र (छोटी आँत) की ग्रंथियों द्वारा स्रावित होता है। यह कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उत्तर: (क) (a), (ख) (b)।
प्रश्न 2. स्तम्भ I का स्तम्भ II से मिलान कीजिए—
स्तम्भ I
- बिलिरुबिन व बिलिवर्डिन
- मंड (स्टार्च) का जल अपघटन
- वसा का पाचन
- लार ग्रन्थि
स्तम्भ II
- पैरोटिड
- पित्त
- लाइपेज
- एमाइलेज
स्तम्भ I और स्तम्भ II का सही मिलान इस प्रकार है:
- बिलिरुबिन व बिलिवर्डिन (ii) पित्त - ये पित्त वर्णक हैं जो यकृत द्वारा स्रावित पित्त में पाए जाते हैं।
- मंड (स्टार्च) का जल अपघटन (iv) एमाइलेज - एमाइलेज एंजाइम (जैसे लार में टाइलिन और अग्न्याशय में एमाइलेज) स्टार्च को शर्करा में तोड़ते हैं।
- वसा का पाचन (iii) लाइपेज - लाइपेज एंजाइम वसा को फैटी एसिड और ग्लिसरॉल में तोड़ता है।
- लार ग्रन्थि (i) पैरोटिड - पैरोटिड सबसे बड़ी लार ग्रंथि है।
उत्तर: (a) (ii), (b) (iv), (c) (iii), (d) (i)।
प्रश्न 3. संक्षेप में उत्तर दें---
(क) अंकुर (villi) छोटी आँत में होते हैं, आमाशय में क्यों नहीं?
अंकुर (villi) छोटी आँत में पाए जाते हैं क्योंकि छोटी आँत का मुख्य कार्य पचे हुए भोजन का अवशोषण करना है। अंकुरों की उपस्थिति छोटी आँत की आंतरिक सतह के क्षेत्रफल को बहुत बढ़ा देती है, जिससे अवशोषण की प्रक्रिया अधिक कुशल हो जाती है। प्रत्येक अंकुर में रक्त केशिकाओं का एक घना जाल और एक बड़ी लसीका वाहिनी (लेक्टिअल) होती है, जो क्रमशः पोषक तत्वों को रक्तप्रवाह और लसीका तंत्र में ले जाती हैं। आमाशय का मुख्य कार्य भोजन का भंडारण और प्रारंभिक पाचन है, अवशोषण का कार्य नगण्य होता है, इसलिए वहाँ अंकुरों की आवश्यकता नहीं होती है।
प्रश्न 3. संक्षेप में उत्तर दें---
(ख) पेप्सिनोजन अपने सक्रिय रूप में कैसे परिवर्तित होता है?
पेप्सिनोजन एक निष्क्रिय प्रोएंजाइम है जो आमाशय की जठर ग्रंथियों द्वारा स्रावित होता है। जब यह आमाशय के अम्लीय वातावरण में आता है, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) द्वारा बनाए रखा जाता है, तो HCl पेप्सिनोजन को उसके सक्रिय रूप, पेप्सिन, में परिवर्तित कर देता है। यह सक्रिय पेप्सिन फिर प्रोटीन के पाचन का कार्य शुरू करता है।
प्रश्न 3. संक्षेप में उत्तर दें---
(ग) आहारनाल की दीवार के मूल स्तर क्या हैं?
आहारनाल की भित्ति चार मूल स्तरों से बनी होती है, जो बाहर से अंदर की ओर इस प्रकार हैं:
- सीरोसा (Serosa): यह सबसे बाहरी संयोजी ऊतक की परत होती है।
- मस्कुलेरिस (Muscularis): इसमें चिकनी पेशियों की दो परतें होती हैं - एक अनुदैर्ध्य (longitudinal) और एक वृत्तीय (circular) परत, जो भोजन को आगे बढ़ाने में मदद करती हैं।
- सबम्यूकोसा (Submucosa): यह ढीले संयोजी ऊतक की परत होती है जिसमें रक्त वाहिकाएँ, लसीका वाहिकाएँ और तंत्रिकाएँ होती हैं।
- म्यूकोसा (Mucosa): यह सबसे भीतरी परत होती है और इसमें श्लेष्म (mucus) स्रावित करने वाली ग्रंथियाँ होती हैं, जो पाचन और अवशोषण में सहायता करती हैं।
प्रश्न 3. संक्षेप में उत्तर दें---
(घ) वसा के पाचन में पित्त कैसे मदद करता है?
पित्त, जिसका स्रावण यकृत द्वारा होता है, वसा के पाचन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, यद्यपि इसमें कोई पाचक एंजाइम नहीं होता। पित्त वसा का इमल्सीकरण (emulsification) करता है। इसका अर्थ है कि पित्त वसा के बड़े ग्लोब्यूल्स को छोटे-छोटे कणों में तोड़ देता है। यह प्रक्रिया वसा के पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम, लाइपेज, की क्रिया के लिए सतह क्षेत्र को बढ़ा देती है। इमल्सीकृत वसा पर लाइपेज अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर पाता है और वसा को फैटी एसिड और ग्लिसरॉल में तोड़ देता है।
प्रश्न 4. प्रोटीन के पाचन में अग्न्याशयी रस की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
प्रोटीन के पाचन में अग्न्याशयी रस की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
अग्न्याशयी रस क्षारीय प्रकृति का होता है (pH 7.5-8.3) और इसमें प्रोटीन पाचन के लिए कई महत्वपूर्ण एंजाइम होते हैं। ये एंजाइम निष्क्रिय रूपों (प्रोएंजाइम) में स्रावित होते हैं और सक्रिय होने पर प्रोटीन को पचाते हैं:
- ट्रिप्सिनोजन (Trypsinogen): यह अग्न्याशयी रस का एक निष्क्रिय प्रोएंजाइम है। जब यह छोटी आँत में पहुँचता है, तो आंत्र रस में मौजूद एंटेरोकाइनेज (Enterokinase) एंजाइम इसे सक्रिय एंजाइम ट्रिप्सिन (Trypsin) में बदल देता है।
- काइमोट्रिप्सिनोजन (Chymotrypsinogen): यह भी एक निष्क्रिय प्रोएंजाइम है। सक्रिय ट्रिप्सिन इस काइमोट्रिप्सिनोजन को सक्रिय एंजाइम काइमोट्रिप्सिन (Chymotrypsin) में परिवर्तित करता है।
क्रिया:
सक्रिय ट्रिप्सिन और काइमोट्रिप्सिन प्रोटीन को छोटे पेप्टाइड्स (peptides) और पॉलीपेप्टाइड्स (polypeptides) में तोड़ देते हैं। ट्रिप्सिन, काइमोट्रिप्सिन और अन्य प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम (जैसे कार्बोक्सीपेप्टिडेज) मिलकर प्रोटीन को अमीनो एसिड (amino acids) में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को पूरा करते हैं।
संक्षेप में, अग्न्याशयी रस में मौजूद प्रोटीयोलाइटिक एंजाइम प्रोटीन के जटिल अणुओं को सरल पेप्टाइड्स और अंततः अमीनो एसिड में तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो अवशोषण के लिए आवश्यक हैं।
प्रश्न 5. आमाशय में प्रोटीन के पाचन की क्रिया का वर्णन कीजिए।
आमाशय में प्रोटीन के पाचन की क्रिया का वर्णन कीजिए।
आमाशय में प्रोटीन का पाचन मुख्य रूप से जठर रस (gastric juice) द्वारा होता है, जो आमाशय की जठर ग्रंथियों से स्रावित होता है। जठर रस अम्लीय होता है (pH 0.9-3.5) क्योंकि इसमें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) होता है। जठर रस में निम्नलिखित मुख्य घटक होते हैं जो प्रोटीन पाचन में सहायक होते हैं:
- पेप्सिनोजन (Pepsinogen): यह एक निष्क्रिय प्रोएंजाइम है। HCl की उपस्थिति में, यह सक्रिय एंजाइम पेप्सिन (Pepsin) में परिवर्तित हो जाता है।
- रेनिन (Rennin): यह एंजाइम शिशुओं में दूध प्रोटीन (केसीन) के पाचन के लिए महत्वपूर्ण है। यह भी एक प्रोएंजाइम (प्रोरेनिन) के रूप में स्रावित होता है और HCl द्वारा सक्रिय होता है।
- गैस्ट्रिक लाइपेज (Gastric Lipase): यह वसा के पाचन में थोड़ी भूमिका निभाता है, लेकिन प्रोटीन पाचन में पेप्सिन और रेनिन प्रमुख हैं।
क्रिया:
पेप्सिन: सक्रिय पेप्सिन प्रोटीन को छोटे पॉलीपेप्टाइड और पेप्टोन (peptones) में तोड़ देता है। यह प्रोटीन के जटिल अणुओं को सरल इकाइयों में विघटित करने की प्रक्रिया शुरू करता है।
रेनिन: शिशुओं में, रेनिन दूध में मौजूद केसीन प्रोटीन को पैराकेसीन (paracasein) में परिवर्तित करता है, जो कैल्शियम आयनों की उपस्थिति में अवक्षेपित (precipitate) हो जाता है। यह अवक्षेप फिर पेप्सिन द्वारा पचाया जाता है। वयस्कों में रेनिन की क्रिया बहुत कम होती है।
इस प्रकार, आमाशय में प्रोटीन का पाचन आंशिक रूप से होता है, जिससे वे पॉलीपेप्टाइड्स और पेप्टोन में बदल जाते हैं, जिन्हें आगे छोटी आँत में पचाया जाता है।
प्रश्न 6. मनुष्य का दंत सूत्र बताइए।
मनुष्य का दंत सूत्र बताइए।
मनुष्य का दंत सूत्र वयस्क के लिए है।
यह सूत्र दर्शाता है कि जबड़े के प्रत्येक आधे भाग में (ऊपरी या निचले जबड़े के एक तरफ) दांतों की व्यवस्था इस प्रकार है:
- 2 कृंतक (Incisors): काटने के लिए।
- 1 रदनक (Canine): चीरने के लिए।
- 2 अग्रचवर्णक (Premolars): चबाने के लिए।
- 3 चवर्णक (Molars): पीसने के लिए।
इस सूत्र को 2 से गुणा करने पर पूरे मुंह में दांतों की कुल संख्या प्राप्त होती है (32 दांत)।
प्रश्न 7. पित्त रस में कोई पाचक एंजाइम नहीं होते, फिर भी यह पाचन के लिए महत्त्वपूर्ण है; क्यों?
पित्त रस में कोई पाचक एंजाइम नहीं होते, फिर भी यह पाचन के लिए महत्त्वपूर्ण है; क्यों?
पित्त रस, जिसका स्रावण यकृत (liver) द्वारा होता है और पित्ताशय (gallbladder) में संग्रहित होता है, पाचन क्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, भले ही इसमें कोई पाचक एंजाइम न हो। इसके महत्वपूर्ण कार्य निम्नलिखित हैं:
- वसा का इमल्सीकरण (Emulsification of Fats): पित्त में मौजूद पित्त लवण (bile salts) वसा के बड़े कणों को छोटे-छोटे कणों में तोड़ देते हैं। इससे वसा के पाचन के लिए जिम्मेदार एंजाइम, लाइपेज, की क्रिया के लिए सतह क्षेत्र बढ़ जाता है, जिससे वसा का पाचन अधिक प्रभावी ढंग से होता है।
- क्षारीय माध्यम प्रदान करना: पित्त क्षारीय होता है और यह आमाशय से आने वाले अम्लीय भोजन (काइम) को उदासीन या हल्का क्षारीय बनाता है। यह क्षारीय वातावरण अग्न्याशयी रस और आंत्रिक रस में मौजूद पाचक एंजाइमों की इष्टतम क्रिया के लिए आवश्यक है।
- वसा अवशोषण में सहायता: पित्त लवण वसा के पाचन उत्पादों (फैटी एसिड और ग्लिसरॉल) के अवशोषण में भी सहायता करते हैं, जिससे वे आंत की दीवार से आसानी से गुजर सकें।
- हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करना: पित्त में कुछ जीवाणुरोधी गुण भी होते हैं, जो भोजन के साथ आए हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने में मदद करते हैं।
इस प्रकार, पित्त वसा पाचन को सुगम बनाने, एंजाइमों के लिए सही वातावरण बनाने और अवशोषण में सहायता करके पाचन प्रक्रिया में एक अनिवार्य भूमिका निभाता है।
Common mistakes
- एंजाइमों के सक्रियण (जैसे पेप्सिनोजन से पेप्सिन) को गलत समझना।
- विभिन्न पाचक रसों (जैसे आमाशय रस, अग्न्याशयी रस, आंत्रिक रस) के घटकों और कार्यों में भ्रमित होना।
- पित्त की भूमिका को केवल वसा पाचन तक सीमित समझना, जबकि यह क्षारीय माध्यम भी प्रदान करता है।
- अंकुरों (villi) के कार्य को केवल अवशोषण तक सीमित मानना, जबकि वे सतह क्षेत्र बढ़ाते हैं।
Revision tips
- पाचन तंत्र का एक आरेख बनाएं और प्रत्येक अंग के कार्य को लिखें।
- विभिन्न एंजाइमों की सूची बनाएं, उनके स्रोत, सब्सट्रेट और उत्पाद लिखें।
- प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट के पाचन के लिए अलग-अलग फ्लोचार्ट बनाएं।
- पित्त और अग्न्याशयी रस की भूमिका पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि ये महत्वपूर्ण हैं।
- अंकुरों (villi) की संरचना और अवशोषण में उनकी भूमिका को समझें।
Practice MCQs
Q1. आमाशय रस में मुख्य रूप से कौन से एंजाइम पाए जाते हैं जो प्रोटीन पाचन में सहायक होते हैं?
Explanation: आमाशय रस में पेप्सिनोजन (जो सक्रिय होकर पेप्सिन बनता है) और रेनिन एंजाइम पाए जाते हैं, जो प्रोटीन और केसीन (दूध प्रोटीन) के पाचन में सहायक होते हैं। लाइपेज भी थोड़ी मात्रा में मौजूद हो सकता है।
Q2. सक्कस एंटेरिकस (Succus Entericus) किसे कहा जाता है?
Explanation: सक्कस एंटेरिकस आंत्रिक रस का दूसरा नाम है, जो क्षुद्रांत्र (छोटी आँत) की ग्रंथियों द्वारा स्रावित होता है और पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Q3. स्तम्भ I में दिए गए पाचन घटकों का स्तम्भ II में दिए गए संबंधित एंजाइमों से मिलान करें:
Explanation: बिलिरुबिन और बिलिवर्डिन पित्त वर्णक हैं। मंड (स्टार्च) का जल अपघटन एमाइलेज (लार में टाइलिन और अग्न्याशय में एमाइलेज) द्वारा होता है। वसा का पाचन लाइपेज द्वारा होता है। पैरोटिड एक प्रकार की लार ग्रन्थि है।
Q4. छोटी आँत में अंकुर (villi) क्यों पाए जाते हैं, आमाशय में क्यों नहीं?
Explanation: छोटी आँत में अंकुरों की उपस्थिति अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र को बहुत बढ़ा देती है। इन अंकुरों में रक्त केशिकाएँ और लेक्टिअल (लसीका वाहिनी) होती हैं, जो पचे हुए भोजन के अवशोषण में मदद करती हैं।
Q5. पेप्सिनोजन को उसके सक्रिय रूप पेप्सिन में बदलने के लिए किस अम्ल की आवश्यकता होती है?
Explanation: पेप्सिनोजन एक निष्क्रिय प्रोएंजाइम है जो आमाशय में स्रावित होता है। आमाशय में उपस्थित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) पेप्सिनोजन को सक्रिय एंजाइम पेप्सिन में परिवर्तित करता है।
Frequently asked questions
कक्षा 11 जीव विज्ञान के अध्याय 16 'पाचन एवं अवशोषण' में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में मानव पाचन तंत्र की संरचना, विभिन्न पाचक रसों और एंजाइमों द्वारा कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पाचन की क्रियाविधि, पित्त की भूमिका, और छोटी आँत में पोषक तत्वों के अवशोषण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया गया है।
पेप्सिनोजन को सक्रिय पेप्सिन में बदलने के लिए क्या आवश्यक है?
पेप्सिनोजन, जो आमाशय की जठर ग्रंथियों से स्रावित होता है, एक निष्क्रिय प्रोएंजाइम है। आमाशय में उपस्थित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) की उपस्थिति में यह सक्रिय एंजाइम पेप्सिन में परिवर्तित हो जाता है।
पित्त रस पाचन में कैसे सहायता करता है, जबकि इसमें कोई पाचक एंजाइम नहीं होता?
पित्त रस वसा का इमल्सीकरण करता है, जिससे वसा के बड़े कण छोटे कणों में टूट जाते हैं। यह लाइपेज एंजाइम के लिए क्रिया करने हेतु सतह क्षेत्र को बढ़ाता है। साथ ही, यह आमाशय से आए अम्लीय भोजन को क्षारीय बनाता है, जो अग्न्याशयी एंजाइमों की क्रिया के लिए आवश्यक है।
छोटी आँत में अंकुर (villi) का क्या महत्व है?
अंकुर छोटी आँत की आंतरिक सतह पर पाई जाने वाली उंगली जैसी संरचनाएँ हैं। ये अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र को कई गुना बढ़ा देती हैं, जिससे पचे हुए पोषक तत्वों का रक्त और लसीका में अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से हो पाता है।
अग्न्याशयी रस को 'पूर्ण पाचक रस' क्यों कहा जाता है?
अग्न्याशयी रस में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा तीनों प्रकार के पोषक तत्वों के पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम (जैसे एमाइलेज, ट्रिप्सिन, लाइपेज) पाए जाते हैं। इसलिए, इसे पूर्ण पाचक रस कहा जाता है।
मनुष्य का दंत सूत्र क्या है और यह क्या दर्शाता है?
मनुष्य का दंत सूत्र <math>\frac{2123}{2123} \times 2</math> है। यह सूत्र ऊपरी और निचले जबड़े में प्रत्येक तरफ पाए जाने वाले दांतों के प्रकार और संख्या को दर्शाता है: 2 कृंतक (incisors), 1 रदनक (canine), 2 अग्रचवर्णक (premolars), और 3 चवर्णक (molars)। इसे 2 से गुणा करने पर पूरे मुंह के दांतों की संख्या मिलती है।
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