कक्षा 11 जीव विज्ञान: श्वसन और गैसों का विनिमय NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 11 जीव विज्ञान के अध्याय 17, 'श्वसन और गैसों का विनिमय' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें श्वसन आयतन, गैसों के विनिमय की प्रक्रिया, और कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है। समाधानों में जैव क्षमता की परिभाषा और महत्व, सामान्य श्वसन के बाद फेफड़ों में बची वायु की मात्रा, और गैस विनिमय केवल कूपिकाओं में ही क्यों होता है, जैसे प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन की विभिन्न विधियों की व्याख्या भी की गई है। ये समाधान छात्रों को इन जटिल विषयों को समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में सहायता करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectजीव विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter17. श्वसन और गैसों का विनिमय

Chapter summary

अध्याय 17, 'श्वसन और गैसों का विनिमय' के लिए NCERT समाधान, श्वसन से संबंधित प्रमुख अवधारणाओं पर केंद्रित हैं। इसमें श्वसन आयतन की परिभाषाएँ, जैसे जैव क्षमता और कार्यात्मक अवशेष क्षमता, और उनके महत्व की व्याख्या की गई है। समाधान यह भी स्पष्ट करते हैं कि गैस विनिमय विशेष रूप से फेफड़ों की कूपिकाओं में क्यों होता है, जो विसरण के लिए अनुकूलित संरचना प्रदान करती हैं। कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन की विभिन्न क्रियाविधियों का विस्तृत विवरण भी शामिल है। यह खंड छात्रों को श्वसन तंत्र की कार्यप्रणाली और गैसों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।

Learning outcomes

  • जैव क्षमता और कार्यात्मक अवशेष क्षमता जैसी श्वसन आयतन की परिभाषाओं को समझें।
  • गैसों के विनिमय के लिए कूपिकाओं के महत्व का विश्लेषण करें।
  • कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन की विभिन्न विधियों की व्याख्या करें।
  • श्वसन क्रिया से संबंधित विभिन्न शब्दावली को पहचानें और उनका उपयोग करें।

Topics covered

Paper topics

  • श्वसन आयतन
  • जैव क्षमता
  • कार्यात्मक अवशेष सामर्थ्य
  • गैसों का विनिमय
  • कूपिकाएँ
  • श्वसन कला
  • आंशिक दबाव
  • कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन
  • प्लाज्मा में घुलना
  • बाइकार्बोनेट के रूप में परिवहन
  • लाल रुधिराणुओं द्वारा परिवहन
  • कार्बोनिक एनहाइड्रेज

Important topics

  • जैव क्षमता की परिभाषा और महत्व
  • गैसों का विनिमय कूपिकाओं में ही क्यों होता है?
  • कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन की क्रियाविधि
  • श्वसन आयतन की विभिन्न मात्राएँ

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Questions and Solutions

प्रश्न 1. जैव क्षमता की परिभाषा दीजिए और इसका महत्त्व बताइए।

जैव क्षमता की परिभाषा दीजिए और इसका महत्त्व बताइए।
Solution:

जैव क्षमता (Vital Capacity): जैव क्षमता फेफड़ों की वह अधिकतम वायु मात्रा है जिसे एक व्यक्ति पूरी शक्ति से साँस अंदर लेने के बाद पूरी शक्ति से साँस बाहर छोड़ने पर निकाल सकता है। यह अन्त:श्वास आरक्षित आयतन (IRV), प्रवाही आयतन (TV), और उच्छ्वास आरक्षित आयतन (ERV) का योग होती है।

जैव क्षमता = IRV + TV + ERV

सामान्य मान लगभग 4600 मिली होता है (IRV ≈ 3000 मिली, TV ≈ 500 मिली, ERV ≈ 1100 मिली)।

महत्त्व:

  • ऊर्जा उत्पादन: जिस व्यक्ति की जैव क्षमता जितनी अधिक होती है, उसके शरीर की जैविक क्रियाओं के लिए उतनी ही अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
  • शारीरिक क्षमता: खिलाड़ियों, पर्वतारोहियों और तैराकों जैसे शारीरिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों की जैव क्षमता सामान्य व्यक्ति से अधिक होती है, जो उनकी बेहतर कार्य क्षमता को दर्शाता है।
  • आयु और लिंग: सामान्यतः युवकों की जैव क्षमता प्रौढ़ों से अधिक होती है, और पुरुषों की जैव क्षमता स्त्रियों से अधिक होती है।

यह फेफड़ों की कार्यक्षमता का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

प्रश्न 2. सामान्य निःश्वसन के उपरान्त फेफड़ों में शेष वायु के आयतन को बताएँ।

सामान्य निःश्वसन के उपरान्त फेफड़ों में शेष वायु के आयतन को बताएँ।
Solution:

सामान्य निःश्वसन (exhalation) के बाद भी फेफड़ों में कुछ वायु शेष रह जाती है। इस शेष वायु के आयतन को कार्यात्मक अवशेष सामर्थ्य (Functional Residual Capacity, FRC) कहते हैं।

यह उच्छ्वास आरक्षित आयतन (ERV) और अवशेष आयतन (Residual Volume, RV) का योग होता है।

FRC = ERV + RV

सामान्यतः, ERV लगभग 1100 मिली और RV लगभग 1200 मिली होता है।

अतः, FRC का सामान्य मान लगभग:

FRC = 1100 \text{ मिली} + 1200 \text{ मिली} = 2300 \text{ मिली}

इसलिए, सामान्य निःश्वसन के उपरान्त फेफड़ों में लगभग 2300 मिली वायु शेष रहती है।

प्रश्न 3. गैसों का विसरण केवल कूपकीय क्षेत्र में होता है, श्वसन तन्त्र के किसी अन्य भाग में नहीं, क्यों?

गैसों का विसरण केवल कूपकीय क्षेत्र में होता है, श्वसन तन्त्र के किसी अन्य भाग में नहीं, क्यों?
Solution:

गैसों का विनिमय (विसरण) फेफड़ों की कूपिकाओं (alveoli) में ही होता है, श्वसन तंत्र के अन्य भागों जैसे श्वासनाल (trachea), श्वसनी (bronchus), श्वसनिका (bronchiole) आदि में नहीं, इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. कूपिकाओं की संरचना: मनुष्य के फेफड़ों में लगभग 30 करोड़ कूपिकाएँ होती हैं। इनकी भित्ति अत्यंत पतली (एकल कोशिका स्तर की) होती है और इसके चारों ओर रक्त केशिकाओं (blood capillaries) का एक घना जाल फैला होता है। यह पतली भित्ति और केशिकाओं का जाल मिलकर 'श्वसन कला' (respiratory membrane) बनाते हैं, जो गैसों के विसरण के लिए आदर्श सतह प्रदान करती है।
  2. अन्य श्वसन भागों की संरचना: श्वासनाल, श्वसनी और श्वसनिकाओं की भित्ति कूपिकाओं की तुलना में मोटी होती है और इनमें रक्त केशिकाओं का घना जाल नहीं होता। इसलिए, ये भाग गैस विनिमय के लिए उपयुक्त नहीं होते।
  3. वायु का आयतन: सामान्यतः हम लगभग 500 मिली वायु (प्रवाही वायु) साँस के साथ अंदर लेते हैं, जिसमें से केवल लगभग 350 मिली ही कूपिकाओं तक पहुँच पाती है। शेष वायु श्वसन मार्ग (जैसे श्वासनाल, श्वसनी) में ही रह जाती है और गैस विनिमय में भाग नहीं लेती।
  4. विसरण का सिद्धांत: गैसों का विसरण उच्च आंशिक दबाव वाले क्षेत्र से निम्न आंशिक दबाव वाले क्षेत्र की ओर होता है। कूपिकाओं में ऑक्सीजन (O2) का आंशिक दबाव (लगभग 104 mm Hg) रक्त केशिकाओं में मौजूद अशुद्ध रुधिर की तुलना में अधिक होता है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का आंशिक दबाव (लगभग 40 mm Hg) रक्त केशिकाओं में अधिक होता है। यह अंतर गैसों के कुशल विनिमय को सुनिश्चित करता है।

इन संरचनात्मक और कार्यात्मक अनुकूलनों के कारण, गैसों का विनिमय विशेष रूप से कूपकीय क्षेत्र में ही प्रभावी ढंग से होता है।

प्रश्न 4. CO2 के परिवहन (ट्रांसपोर्ट) की मुख्य क्रियाविधि क्या है? व्याख्या कीजिए।

CO2 के परिवहन (ट्रांसपोर्ट) की मुख्य क्रियाविधि क्या है? व्याख्या कीजिए।
Solution:

ऊतकों में उपापचय क्रियाओं के फलस्वरूप उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) विसरण द्वारा रुधिर केशिकाओं में पहुँचती है। रुधिर द्वारा CO2 का परिवहन श्वसनांगों (फेफड़ों) तक मुख्य रूप से तीन विधियों द्वारा होता है:

  1. प्लाज्मा में घुलकर (Dissolved in Plasma): लगभग 7% CO2 रुधिर प्लाज्मा में घुलकर परिवहन करती है। यह मुख्य रूप से कार्बोनिक अम्ल (H2CO3) के रूप में होती है।
  2. बाइकार्बोनेट आयनों के रूप में (As Bicarbonate Ions): लगभग 70% CO2 का परिवहन बाइकार्बोनेट आयनों (HCO3-) के रूप में होता है। यह प्रक्रिया लाल रुधिराणुओं (RBCs) के अंदर होती है। CO2 लाल रुधिराणुओं में प्रवेश करती है और वहाँ कार्बोनिक एनहाइड्रेज (Carbonic Anhydrase) नामक एंजाइम की उपस्थिति में जल के साथ क्रिया करके कार्बोनिक अम्ल बनाती है। यह कार्बोनिक अम्ल फिर हाइड्रोजन आयन (H+) और बाइकार्बोनेट आयन (HCO3-) में वियोजित हो जाता है। बाइकार्बोनेट आयन फिर प्लाज्मा में चले जाते हैं, जबकि H+ आयन हीमोग्लोबिन से जुड़ जाते हैं।

CO_2 + H_2O \xrightarrow{\text{कार्बोनिक एनहाइड्रेज}} H_2CO_3 \longrightarrow H^+ + HCO_3^-

यह प्रक्रिया फेफड़ों में विपरीत दिशा में होती है, जहाँ बाइकार्बोनेट आयन वापस लाल रुधिराणुओं में आते हैं, H+ आयन मुक्त होते हैं, और CO2 जल से मिलकर पुनः CO2 बनाती है जो फेफड़ों में विसरित हो जाती है।

  1. कार्बनॉक्सीहीमोग्लोबिन के रूप में (As Carbaminohemoglobin): लगभग 20-23% CO2 लाल रुधिराणुओं के हीमोग्लोबिन (Hb) के अमीनो समूहों (-NH2) से सीधे जुड़कर कार्बनॉक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है।

इस प्रकार, रुधिर ऊतकों से CO2 को ग्रहण करके फेफड़ों तक पहुँचाता है, जहाँ यह गैस विनिमय के माध्यम से बाहर निकल जाती है।

Common mistakes

  • श्वसन आयतन की विभिन्न मात्राओं को याद रखने में भ्रमित होना।
  • गैसों के विनिमय के लिए कूपिकाओं की संरचनात्मक अनुकूलन को अनदेखा करना।
  • कार्बन डाइऑक्साइड परिवहन के विभिन्न तंत्रों के प्रतिशत को गलत याद रखना।

Revision tips

  • जैव क्षमता और कार्यात्मक अवशेष क्षमता जैसे श्वसन आयतन को परिभाषित करने का अभ्यास करें।
  • कूपिकाओं की संरचना और गैस विनिमय में उनकी भूमिका को दर्शाने वाले चित्र का अध्ययन करें।
  • कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन के विभिन्न तरीकों और उनके योगदान प्रतिशत को सारणीबद्ध करें।
  • महत्वपूर्ण शब्दावली जैसे विसरण, आंशिक दबाव, और श्वसन कला को याद रखें।

Practice MCQs

Q1. सामान्य निःश्वसन के उपरान्त फेफड़ों में शेष रहने वाली वायु की मात्रा को क्या कहते हैं?

Q2. गैसों का विनिमय मुख्य रूप से फेफड़ों के किस भाग में होता है?

Q3. कार्बन डाइऑक्साइड का कितना प्रतिशत प्लाज्मा में घुलकर परिवहन होता है?

Q4. लाल रुधिराणुओं में कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन में कौन सा एंजाइम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है?

Frequently asked questions

जैव क्षमता क्या है और इसका क्या महत्व है?

जैव क्षमता अन्त:श्वास आरक्षित वायु, प्रवाही वायु और उच्छ्वास आरक्षित वायु का योग है। यह फेफड़ों की वह कुल मात्रा है जिसे पूरी चेष्टा द्वारा अंदर लिया और बाहर निकाला जा सकता है। अधिक जैव क्षमता बेहतर ऊर्जा उत्पादन और कार्य क्षमता से जुड़ी होती है, जो खिलाड़ियों और पर्वतारोहियों में अधिक देखी जाती है।

सामान्य निःश्वसन के बाद फेफड़ों में कितनी वायु शेष रहती है?

सामान्य निःश्वसन के बाद फेफड़ों में शेष रहने वाली वायु की मात्रा को कार्यात्मक अवशेष सामर्थ्य (FRC) कहते हैं। इसका सामान्य मान लगभग 2300 मिली होता है, जो उच्छ्वास आरक्षित वायु (ERV) और अवशेष वायु (RV) का योग है।

गैसों का विनिमय केवल कूपिकाओं में ही क्यों होता है?

गैसों का विनिमय केवल कूपिकाओं में होता है क्योंकि उनकी भित्ति बहुत पतली होती है और रक्त केशिकाओं का घना जाल होता है, जो मिलकर श्वसन कला बनाते हैं। यह संरचना गैसों (O2 और CO2) के उच्च आंशिक दबाव से निम्न आंशिक दबाव की ओर सुगम विसरण की अनुमति देती है। श्वसन तंत्र के अन्य भागों की भित्ति मोटी होती है और उनमें रक्त केशिकाओं का जाल नहीं होता।

कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन रुधिर द्वारा कैसे होता है?

कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन तीन मुख्य तरीकों से होता है: लगभग 7% प्लाज्मा में घुलकर, लगभग 70% बाइकार्बोनेट के रूप में (लाल रुधिराणुओं में कार्बोनिक एनहाइड्रेज की मदद से), और शेष भाग लाल रुधिराणुओं के हीमोग्लोबिन से जुड़कर।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को 'श्वसन और गैसों का विनिमय' अध्याय के प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को विस्तार से समझने में मदद करते हैं। प्रत्येक उत्तर को स्पष्ट चरणों और अतिरिक्त जानकारी के साथ फिर से लिखा गया है, जिससे विषय की गहरी समझ विकसित होती है और परीक्षा की तैयारी मजबूत होती है।

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