कक्षा 10 मनिका NCERT समाधान: राष्ट्रं संरक्ष्यमेव हि
यह पृष्ठ कक्षा 10 के लिए मनिका पाठ 'राष्ट्रं संरक्ष्यमेव हि' के NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ विज्ञान के सदुपयोग और दुरुपयोग के परिणामों पर प्रकाश डालता है, जिसमें बताया गया है कि कैसे विज्ञान का सही उपयोग राष्ट्र के कल्याण के लिए होता है, जबकि इसका दुरुपयोग विनाश का कारण बन सकता है। समाधान में पाठ के संवादों और महाभारत की पृष्ठभूमि पर आधारित प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं, जिसमें युधिष्ठिर, भीम और द्रौपदी के पुत्रों की मृत्यु के बाद के संवाद शामिल हैं। यह खंड छात्रों को संस्कृत भाषा की समझ को गहरा करने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | मनिका |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 9. राट्रं संरषयमेव ही |
Chapter summary
कक्षा 10 मनिका के 'राष्ट्रं संरक्ष्यमेव हि' पाठ के ये NCERT समाधान छात्रों को विज्ञान के नैतिक उपयोग और राष्ट्र की रक्षा के महत्व को समझने में मदद करते हैं। इसमें पाठ के संवादों, व्याकरणिक विश्लेषण (जैसे प्रत्यय, समास, संधि-विच्छेद) और प्रश्नोत्तर शामिल हैं। समाधान महाभारत के प्रसंगों से जुड़े प्रश्नों पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ मिलती है।
Learning outcomes
- विज्ञान के सदुपयोग और दुरुपयोग के परिणामों को समझना।
- महाभारत के प्रसंगों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देना।
- संस्कृत व्याकरण के विभिन्न पहलुओं, जैसे प्रत्यय, समास और संधि-विच्छेद का अभ्यास करना।
- पाठ के संवादों का विश्लेषण करना और पात्रों के भावों को समझना।
- राष्ट्र की रक्षा के महत्व को समझना।
Topics covered
Paper topics
- विज्ञान का सदुपयोग और दुरुपयोग
- राष्ट्र की रक्षा का महत्व
- महाभारत के प्रसंग
- संस्कृत संवाद
- व्याकरण: प्रत्यय
- व्याकरण: समास
- व्याकरण: संधि-विच्छेद
- शब्दार्थ
- पात्र परिचय (युधिष्ठिर, भीम, द्रौपदी)
- नैतिक शिक्षा
Important topics
- विज्ञान के नैतिक उपयोग का महत्व
- राष्ट्र की सुरक्षा और नागरिकों का कर्तव्य
- संस्कृत व्याकरण के अभ्यास (प्रत्यय, समास, संधि)
- महाभारत के प्रसंगों से सीख
- संवादों का विश्लेषण
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- के स्व-अनुभवान् श्रावयन्ति? (कौन अपने अनुभव सुना रहे हैं?)
- कस्य सत्प्रयोगः राष्ट्रस्य कल्याणाय भवति? (किसका सदुपयोग राष्ट्र के कल्याण के लिए होता है?)
(i) विद्यालय में बालकों का शिविर चल रहा है, और सायंकाल सभी बालक अपने-अपने अनुभव सुना रहे हैं। इसलिए, यहाँ **छात्राः** (छात्र) अपने अनुभव सुना रहे हैं।
(ii) पाठ के अनुसार, **विज्ञानस्य** (विज्ञान का) सदुपयोग राष्ट्र के कल्याण के लिए होता है, जबकि उसका दुरुपयोग विनाश का कारण बनता है।
प्रश्न 2
केषाम् प्रयोगः मानवेषु वर्जितः आसीत्? (किनका प्रयोग मनुष्यों पर वर्जित था?)
पाठ में बताया गया है कि प्राचीनकाल में भी **आणविक-अस्त्राणाम्** (आणविक हथियारों का) प्रयोग मनुष्यों पर वर्जित था।
प्रश्न 3
'एतादृशानि अस्त्राणि' अत्र विशेष्यपदम् किम्? (यहाँ विशेष्य पद क्या है?)
- (क) अस्त्राणि
- (ख) अस्त्रम्
- (ग) एतादृशम्
- (घ) एतादृशानि
इस वाक्यांश में, 'एतादृशानि' (इस प्रकार के) विशेषण है जो 'अस्त्राणि' (हथियारों) की विशेषता बता रहा है। इसलिए, विशेष्य पद **(क) अस्त्राणि** है।
प्रश्न 4
- (क) विनाशाय
- (ख) कल्याणाय
- (ग) विधाय
- (घ) संरक्ष्यम्
'ल्यप्' प्रत्यय का प्रयोग तब होता है जब धातु से पहले कोई उपसर्ग लगा हो और क्रिया वर्तमान काल में न हो। दिए गए विकल्पों में से, **(ग) विधाय** (बनाकर) में 'वि' उपसर्ग और 'धा' धातु के साथ 'ल्यप्' प्रत्यय है। अन्य विकल्प चतुर्थी विभक्ति या यत् प्रत्यय के उदाहरण हैं।
प्रश्न 5
- (क) सदुपयोगः
- (ख) सत्प्रयोग:
- (ग) सत्यप्रयोग:
- (घ) सदुपदेश:
पाठ में विज्ञान के संदर्भ में 'सत्प्रयोगः' (अच्छा प्रयोग) का उल्लेख है, जिसका विपरीतार्थक शब्द **(ख) सत्प्रयोग:** (अच्छा प्रयोग) है। हालाँकि, सामान्य अर्थ में 'दुरुपयोग' का विलोम 'सदुपयोग' होता है। दिए गए विकल्पों में, पाठ के संदर्भ को ध्यान में रखते हुए 'सत्प्रयोगः' सबसे उपयुक्त है।
प्रश्न 6
- (क) राष्ट्रस्य
- (ख) विज्ञानस्य
- (ग) जगत:
- (घ) संसारस्य
पाठ की शुरुआत में कहा गया है, "विचित्रः अयं संसारः" (यह संसार विचित्र है)। यहाँ 'विचित्रः' (विचित्र) विशेषण पद **(घ) संसारस्य** (संसार का) के लिए प्रयुक्त हुआ है।
प्रश्न 7
- (क) जनाः
- (ख) छात्राः
- (ग) अन्ये
- (घ) केचन
वाक्य है: "अन्ये च आणविक-अस्त्राणां निर्माणं विधाय जगतः संहारं कर्तुम् इच्छन्ति।" (और अन्य आणविक हथियारों का निर्माण करके संसार का विनाश करना चाहते हैं)। यहाँ 'इच्छन्ति' (चाहते हैं) क्रिया का कर्ता पद **(ग) अन्ये** (अन्य लोग) है।
प्रश्न 8
- अयं संसार: विचित्रो वर्तते। (यह संसार विचित्र है।)
- अयं पाठ: महाभारते आधारित: वर्तते। (यह पाठ महाभारत पर आधारित है।)
- प्राचीने काले आणविकास्त्राणां मानवेषु प्रयोग: निषिद्ध: आसीत्। (प्राचीन काल में आणविक हथियारों का मनुष्यों पर प्रयोग निषिद्ध था।)
- विज्ञानस्य तु दुरुपयोगः अभिशापः एव। (विज्ञान का दुरुपयोग तो अभिशाप ही है।)
- पुरा अपि एतादृशानि अस्त्राणि आसन्। (पहले भी ऐसे हथियार थे।)
दिए गए वाक्यों के लिए प्रश्न निर्माण इस प्रकार हैं:
- कीदृशः (कैसा): कीदृशः अयं संसारः वर्तते?
- कस्मिन् (किसमें): कस्मिन् आधारितः अयं पाठः वर्तते?
- कदा (कब) या केषाम् (किनका): कदा आणविकास्त्राणां मानवेषु प्रयोगः निषिद्धः आसीत्? या केषाम् प्रयोगः मानवेषु निषिद्धः आसीत्?
- कस्य (किसका): कस्य दुरुपयोगः अभिशापः एव?
- कानि (कौन से) या कीदृशानि (किस प्रकार के): पुरा अपि कानि अस्त्राणि आसन्? या पुरा अपि कीदृशानि अस्त्राणि आसन्?
प्रश्न 9
(क) शब्दाः (शब्द)
- अहिंसायाः (अहिंसा का)
- सत्प्रयोगः (अच्छा प्रयोग)
- विनाशाय (विनाश के लिए)
- प्रत्यक्षम् (प्रत्यक्ष)
- अभिशापः (शाप)
- निर्माणम् (निर्माण)
- प्रातः (सुबह)
(ख) विपर्ययाः (विलोम)
- विनाशम् (विनाश)
- वरदानम् (वरदान)
- हिंसाया: (हिंसा का)
- सायम् (शाम)
- कल्याणाय (कल्याण के लिए)
- दुरुपयोगः (बुरा प्रयोग)
- परोक्षम् (परोक्ष)
दिए गए शब्दों के उचित विलोम इस प्रकार हैं:
- अहिंसायाः (1) का मिलान **(iii) हिंसाया:** से होगा।
- सत्प्रयोगः (2) का मिलान **(vi) दुरुपयोगः** से होगा।
- विनाशाय (3) का मिलान **(v) कल्याणाय** से होगा।
- प्रत्यक्षम् (4) का मिलान **(vii) परोक्षम्** से होगा।
- अभिशापः (5) का मिलान **(ii) वरदानम्** से होगा।
- निर्माणम् (6) का मिलान **(i) विनाशम्** से होगा।
- प्रातः (7) का मिलान **(iv) सायम्** से होगा।
अतः सही मिलान है: (1)-(iii), (2)-(vi), (3)-(v), (4)-(vii), (5)-(ii), (6)-(i), (7)-(iv)।
प्रश्न 10
द्रौपदी: (दीर्घं नि:श्वस्य) हा हन्त। किम् इदं घोरम् आपतितम्। पापकर्मणा द्रौणिना मे पुत्रा: भ्रातर: च हता:। अग्नि: इव दहति माम् अयं शोक:।
युधिष्ठिर: शुभे! धैर्यं धारय। नूनं तव पुत्राः वीरगतिम् एव प्राप्ताः। वीरजननी त्वं शोचितुं न अर्हसि।
द्रौपदी: कथं मन्दभाग्या अहं धैर्यं धारयामि। यावत् असौ क्रूरकर्मा न दण्ड्यते, तावत् अहम् इतः न गमिष्यामि, अत्रैव प्राणत्यागं च करिष्यामि।
युधिष्ठिर: प्रिये! मा एवं ब्रूयाः स पापकर्मा कुत्र गतः, इति न जानीमः। अतिदूरं किञ्चिद् दुर्गमवनं प्रविष्टः भवेत्।
द्रौपदी: (भीमं प्रति) आर्यपुत्र! क्षत्रधर्मम् अनुस्मरन् मां शोकसागरात् रक्ष। अस्मिन् संसारे कश्चित् अपि त्वया सदृश: पराक्रमी नास्ति। पुरा वारणावते त्वमेव पाण्डवान् रक्षितवान्। विराट-नगरे अपि त्वं मां प्राणसंकटात् उद्धृतवान्।
हिंदी अनुवाद (Hindi Translation):
(तब पुत्रशोक से सन्तप्त युधिष्ठिर, भीम और द्रौपदी रणभूमि में प्रवेश करते हैं।)
(लम्बी साँस लेकर) अरे! खेद है। यह कितना घोर पाप है। पापी द्रोणपुत्र ने मेरे पुत्र और भाई मार डाले। यह शोक मुझे आग की भौति जला रहा है।
कल्याणी! धैर्य धारण करो। निश्चित रूप से तुम्हारे पुत्र वीरगति को ही प्राप्त हुए हैं। वीरों की माता तुम शोक करने योग्य नहीं हो।
मैं अभागिनी किस प्रकार धैर्य धारण करूँ। जब तक यह कुकर्मी दण्डित नहीं किया जाता, तब तक मैं यहाँ से नहीं जाऊँगी और यहीं पर प्राणत्याग करूँगी।
प्रिये! ऐसा मत बोलो। वह पापी कहाँ गया, यह नहीं जानते। बहुत दूर किसी घने वन में प्रवेश कर गया हो।
(भीम की ओर) आर्यपुत्र! क्षत्रिय धर्म का पालन करते हुए शोकसागर से मेरी रक्षा करो। इस संसार में कोई भी तुम्हारे सदृश पराक्रमी नहीं है। पहले वारणावत में तुम्हीं ने पाण्डवों की रक्षा की थी। विराट-नगर में भी तुमने मुझे प्राणसंकट से बचाया था।
यह प्रश्न एक नाट्यांश और उसके हिंदी अनुवाद को प्रस्तुत करता है। इसमें पात्रों के संवादों के माध्यम से पुत्रों की मृत्यु पर द्रौपदी के शोक और युधिष्ठिर के धैर्य धारण के उपदेश को दर्शाया गया है। द्रौपदी अपने पुत्रों और भाइयों की मृत्यु के लिए द्रोणपुत्र (अश्वत्थामा) को दोषी ठहराती है और भीम से उस पापी को दंडित करने का आग्रह करती है। वह भीम की वीरता का स्मरण दिलाती है कि कैसे उसने पहले भी पांडवों और स्वयं उसे संकट से बचाया था। यह अंश महाभारत के युद्ध के बाद की परिस्थितियों को दर्शाता है और राष्ट्र की रक्षा के साथ-साथ व्यक्तिगत धर्म और कर्तव्य पर भी प्रकाश डालता है।
प्रश्न 11
द्रौणिना-द्रोणपुत्रेण, द्रोण के पुत्र द्वारा (By Drona's Ashwatthama)। इत:-अत्रत्य:, यहाँ से (From here)। पराक्रमी-वीर:, ताकतवर (Brave)। उद्धृतवान्-रक्षितवान्, बचाया (Saved)।
यह प्रश्न पाठ में प्रयुक्त कुछ महत्वपूर्ण शब्दों के संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी में अर्थ प्रदान करता है। ये शब्द छात्रों को पाठ को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।
- द्रौणिना का अर्थ है 'द्रोण के पुत्र द्वारा', जो यहाँ अश्वत्थामा के लिए प्रयुक्त हुआ है।
- इतः का अर्थ है 'यहाँ से'।
- पराक्रमी का अर्थ है 'वीर' या 'ताकतवर'।
- उद्धृतवान् का अर्थ है 'बचाया' या 'रक्षा की'।
प्रश्न 12
पुत्रशोकसंतप्ताः - पुत्राणाम् शोकः (षष्ठी तत्पुरुषः) तेन संतप्ताः (तृतीया तत्पुरुषः)।
वीरगतिम् - वीराणाम् गतिम् (षष्ठी तत्पुरुष:)।
वीरजननी - वीराणाम् जननी (षष्ठी तत्पुरुष:)।
क्रूरकर्मा - क्रूरं कर्म यस्य सः (बहुव्रीहिः)।
क्षत्रधर्मम् - क्षत्राणाम् धर्मम् (षष्ठी तत्पुरुषः)।
शोकः सागरः इव, तस्मात् (कर्मधारयः)।
प्राणत्यागम् - प्राणानाम् त्यागम् (षष्ठी तत्पुरुषः)।
मन्दभाग्या - मन्दः भाग्यः यस्याः सा (बहुव्रीहिः)।
यह खंड पाठ में प्रयुक्त विभिन्न सामासिक पदों का विश्लेषण करता है, उनके विग्रह (विच्छेद) और समास के प्रकार को बताता है:
- पुत्रशोकसंतप्ताः: यह दो समास से बना है - 'पुत्राणाम् शोकः' (षष्ठी तत्पुरुष) और 'तेन संतप्ताः' (तृतीया तत्पुरुष)।
- वीरगतिम्: 'वीराणाम् गतिम्' (षष्ठी तत्पुरुष)।
- वीरजननी: 'वीराणाम् जननी' (षष्ठी तत्पुरुष)।
- क्रूरकर्मा: 'क्रूरं कर्म यस्य सः' (बहुव्रीहि)।
- क्षत्रधर्मम्: 'क्षत्राणाम् धर्मम्' (षष्ठी तत्पुरुष)।
- शोकसागरात्: 'शोकः सागरः इव' (कर्मधारय)।
- प्राणत्यागम्: 'प्राणानाम् त्यागम्' (षष्ठी तत्पुरुष)।
- मन्दभाग्या: 'मन्दः भाग्यः यस्याः सा' (बहुव्रीहि)।
प्रश्न 13
अत्रैव -- अत्र + एव (वृद्धिसन्धि:)।
कश्चित् -- कः + चित् (विसर्गसन्धिः)।
किञ्चिद् -- किम् + चित् (परसवर्ण सन्धि:)।
उद्धृतवान् – उत् + धृतवान् (जश् सन्धि:)।
यह खंड पाठ में प्रयुक्त संधि-विच्छेदों को उनके प्रकार सहित प्रस्तुत करता है:
- अत्रैव का संधि-विच्छेद 'अत्र + एव' है और यह वृद्धिसन्धि का उदाहरण है।
- कश्चित् का संधि-विच्छेद 'कः + चित्' है और यह विसर्गसन्धि का उदाहरण है।
- किञ्चिद् का संधि-विच्छेद 'किम् + चित्' है और यह परसवर्ण सन्धि का उदाहरण है।
- उद्धृतवान् का संधि-विच्छेद 'उत् + धृतवान्' है और यह जश् सन्धि का उदाहरण है।
Common mistakes
- व्याकरणिक प्रश्नों में प्रत्यय, समास या संधि-विच्छेद की पहचान में त्रुटियाँ।
- संवादों के संदर्भ को समझने में कठिनाई।
- विज्ञान के दुरुपयोग के परिणामों को कम आंकना।
- राष्ट्र की रक्षा के महत्व को केवल सैन्य संदर्भ में देखना।
Revision tips
- पाठ के मुख्य संदेश को समझने के लिए संवादों को ध्यान से पढ़ें।
- व्याकरणिक अभ्यासों को हल करते समय संबंधित नियमों को दोहराएं।
- विज्ञान के नैतिक उपयोग पर चर्चा करें और वास्तविक जीवन के उदाहरण सोचें।
- महाभारत के प्रसंगों को याद करें जो पाठ में संदर्भित हैं।
Practice MCQs
Q1. विज्ञान का सही प्रयोग किसके लिए होता है?
Explanation: पाठ के अनुसार, विज्ञान का सदुपयोग राष्ट्र के कल्याण के लिए होता है।
Q2. द्रौपदी अपने पुत्रों और भाइयों की मृत्यु पर किसे दोषी ठहराती है?
Explanation: द्रौपदी द्रोणपुत्र अश्वत्थामा को अपने पुत्रों और भाइयों की मृत्यु का दोषी ठहराती है।
Q3. 'विधाय' शब्द में कौन सा प्रत्यय प्रयुक्त हुआ है?
Explanation: 'विधाय' शब्द में 'वि' उपसर्ग और 'धा' धातु के साथ 'ल्यप्' प्रत्यय लगा है।
Q4. 'सत्प्रयोगः' का विपर्यय (विलोम) शब्द क्या है?
Explanation: पाठ में 'सत्प्रयोगः' का विपर्यय 'दुरुपयोगः' बताया गया है।
Q5. युधिष्ठिर द्रौपदी को क्या धारण करने की सलाह देते हैं?
Explanation: युधिष्ठिर द्रौपदी को धैर्य धारण करने की सलाह देते हैं।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 10 के मनिका विषय के लिए है।
'राष्ट्रं संरक्ष्यमेव हि' पाठ का मुख्य विषय क्या है?
इस पाठ का मुख्य विषय विज्ञान का सदुपयोग राष्ट्र के कल्याण के लिए और दुरुपयोग विनाश के लिए होता है, तथा राष्ट्र की रक्षा का महत्व है।
क्या इन समाधानों में व्याकरणिक अभ्यास शामिल हैं?
हाँ, इन समाधानों में प्रत्यय, समास और संधि-विच्छेद जैसे व्याकरणिक अभ्यासों के उत्तर भी शामिल हैं।
यह समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेगा?
यह समाधान पाठ के सभी प्रश्नों के विस्तृत उत्तर, व्याकरणिक स्पष्टीकरण और मुख्य अवधारणाओं की समझ प्रदान करके परीक्षा की तैयारी में मदद करता है।
पाठ में महाभारत का संदर्भ क्यों दिया गया है?
महाभारत के प्रसंगों का उपयोग पाठ के भावनात्मक और नैतिक पहलुओं को उजागर करने के लिए किया गया है, विशेष रूप से पुत्रों की मृत्यु के बाद के संवादों में।
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