CBSE Class 10 मनिका NCERT Solutions: साधुवृत्ति समाचरेत्
This section provides detailed NCERT Solutions for Class 10 मनिका, Chapter 6, titled 'साधुवृत्ति समाचरेत्' (One Should Practice Good Conduct). The chapter delves into a narrative about a young man named Prachchannabhagya who, due to his association with a thief named Dushtabuddhi, gets involved in criminal activities. The solutions cover comprehension questions based on the provided Sanskrit text, focusing on understanding the story, identifying characters, their actions, and motivations. It also includes linguistic exercises such as identifying compound words (समास), analyzing suffixes (प्रत्यय), and understanding the usage of adverbs and adjectives. These solutions aim to help students grasp the nuances of the Sanskrit language and the moral lessons embedded in the story, aiding in their exam preparation.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | मनिका |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. साधुवृत्ति समाचरेत् |
Chapter summary
Chapter 6, 'साधुवृत्ति समाचरेत्', of the Class 10 मनिका textbook presents a narrative illustrating the consequences of bad company and the importance of choosing the right path. The NCERT Solutions for this chapter offer a thorough breakdown of the Sanskrit text, including Hindi translations, word meanings, and detailed explanations for grammatical exercises like compound words and suffixes. Students will find clear answers to comprehension questions, helping them understand the story's plot and characters, and reinforcing their learning of Sanskrit grammar and vocabulary.
Learning outcomes
- Understand the narrative of 'साधुवृत्ति समाचरेत्' and its moral implications.
- Identify and explain the meaning of key Sanskrit vocabulary used in the text.
- Analyze Sanskrit sentences to answer comprehension questions accurately.
- Recognize and explain Sanskrit compound words (समास) and suffixes (प्रत्यय).
- Differentiate between appropriate and inappropriate conduct as depicted in the story.
Topics covered
Paper topics
- Character introduction (Prachchannabhagya, Dushtabuddhi)
- Themes of bad company and consequences
- Moral conduct (Sadhavritti)
- Sanskrit comprehension
- Hindi translation of Sanskrit text
- Vocabulary building (Word meanings)
- Sanskrit grammar: Compound words (Samas)
- Sanskrit grammar: Suffixes (Pratyay)
- Sanskrit grammar: Sandhi (Word joining)
- Adverbs and adjectives in Sanskrit
- Narrative analysis
- Moral lessons from literature
Important topics
- Understanding the narrative and moral of 'साधुवृत्ति समाचरेत्'
- Analysis of compound words (समास)
- Identification of suffixes (प्रत्यय)
- Comprehension of Sanskrit text and its Hindi translation
- Vocabulary related to conduct and actions
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
(i) कुमारस्य नाम किम् आसीत्?
(ii) दुष्टबुद्धिना किमर्थं ग्रामान्तरं प्रस्थित:?
(II) पूर्णवाक्येन उत्तरत-
(i) क: कुत्र च निरत: सञ्जात:?
(ii) तौ कुत्र प्रस्थितौ?
(III) भाषिककार्यम्-
(i) 'एकस्मिन् समये' इति अर्थे अत्र किम् अव्ययपदं प्रयुक्तम्?
(घ) केनचित्
(ग) सार्धम्
(क) विरत:
(ख) एकदा
(ii) 'सञ्जात:' इति पदे का मूलधातु:?
(क) जन्
(ख) जा
(घ) जात्
(ग) ज्ञा
(iii) 'शैशवावस्थायाम्' इति अर्थे के पदे प्रयुक्ते?
(क) चौर्यकर्मणि
(घ) बाल्ये वयसि
(ख) वयसि
(ग) बाल्ये
(iv) 'बाल्ये वयसि' इति अनयो: पदयो: विशेषणपदं किम्?
(ग) बाल्ये
(क) वचिस
(घ) बाल्य:
(ख) वय:
(v) 'श्रेष्ठिन:' इति पदे क: प्रत्यय:?
(ग) णिन:
(घ) णिच्
(क) इन् (ख) इन:
यहाँ दिए गए पाठ के आधार पर प्रश्नों के उत्तर इस प्रकार हैं:
(I) एकपदेन उत्तरत (एक शब्द में उत्तर दें):
- कुमारस्य नाम प्रच्छन्नभाग्यः आसीत्। (कुमार का नाम प्रच्छन्नभाग्य था।)
- दुष्टबुद्धिना धनहरणार्थम् ग्रामान्तरं प्रस्थितः। (दुष्टबुद्धि धन चुराने के उद्देश्य से दूसरे गाँव गया था।)
(II) पूर्णवाक्येन उत्तरत (पूर्ण वाक्य में उत्तर दें):
- प्रच्छन्नभाग्यः बाल्ये वयसि केनचित् दुष्टबुद्धिनाम्ना चौरेण सह चौर्यकर्मणि निरतः सञ्जात:। (प्रच्छन्नभाग्य बाल्यावस्था में दुष्टबुद्धि नामक चोर के साथ चोरी के काम में लगा हुआ था।)
- तौ कस्यचित् श्रेष्ठिनः गेहे धनहरणार्थं ग्रामान्तरं प्रस्थितौ। (वे दोनों किसी सेठ के घर धन चुराने के लिए दूसरे गाँव में गए थे।)
(III) भाषिककार्यम् (भाषाई कार्य):
- 'एकस्मिन् समये' (एक समय में) इस अर्थ के लिए यहाँ (ख) एकदा अव्ययपद प्रयुक्त हुआ है।
- 'सञ्जात:' (हुआ) इस पद में मूल धातु (क) जन् है। (सम् + जन् + क्त = सञ्जात:)।
- 'शैशवावस्थायाम्' (बचपन में) इस अर्थ के लिए यहाँ (घ) बाल्ये वयसि पद प्रयुक्त हुआ है।
- 'बाल्ये वयसि' (बचपन में) इन दोनों पदों में विशेषणपद (ग) बाल्ये है, जो 'वयसि' (आयु) की विशेषता बता रहा है।
- 'श्रेष्ठिन:' (सेठ का) इस पद में (क) इन् प्रत्यय है (श्रेष्ठ + इन् = श्रेष्ठिन्, जिसका षष्ठी एकवचन श्रेष्ठिन: है)।
प्रश्न 2
हिंदी अनुवाद (Hindi Translation): जाते हुए वे दोनों गड्ढों से भरे हुए रास्ते में खेलते हुए कुछ बालकों को देखकर बोले-हे बालको! आप सब इस ऊँचे-नीचे कठिन (समतल हीन) मार्ग पर क्यों खेल रहे हैं? यदि कोई गड्ढे में गिर जाए तो वह विकलांग होकर बहुत लम्बे समय तक दु:खी रहेगा। उसे सुनकर उनमें से कोई शरारती बालक बोला—अरे यदि ऐसा है तो आप दोनों श्रेष्ठ मार्ग को छोड़कर इस कुमार्ग से जाने के लिए क्यों उद्यत हैं? क्या यह कल्याणकारी है?
शब्दार्थाः (Word-meanings Sanskrit to Sanskrit, Hindi and English): व्रजन्तौ-गच्छन्तौ, जाते हुए दोनों (While going)। गर्ते संकुले-गर्तपरिपूर्णे, गड्ढों से भरे हुए (Full of potholes)। प्रेक्ष्य-दृष्ट्वा, देखकर (Having seen)।
समासाः (Compounds): नतोन्नते - नतः च उन्नतः च, तस्मिन् (द्वन्द्वः)। श्रेयस्करम् – श्रेयः करोति इति (उपपद तत्पुरुषः)। कुपथेन - कुत्सितेन पथेन (कर्मधारय:)। गर्तसङ्कले - गर्तै: सङ्कले (तृतीया तत्पुरुष:)। विकलाङ्ग - विकलानि अङ्गानि यस्य सः (बहुव्रीहिः)। सुपथम् - पथस्य समृद्धिः (अव्ययीभावः)।
सन्धि-विच्छेद: (Disjoin Sandhi): कांश्चित् - कान् + चित् (अनुस्वार सन्धि:)। विकलाङ्ग: - विकल + अङ्ग: (दीर्घ सन्धि:)। कश्चिद् - क: + चिद् (विसर्ग सिन्ध:)। तच्छत्वा – तत् + श्रुत्वा (छत्व सन्धि:)। यद्येवम् - यदि + एवम् (यण् सन्धि:)। श्रेयस्करम् - श्रेयः + करम् (विसर्ग सन्धिः)। नतोन्नते - नत + उन्नते (गुण सन्धि:)।
यह प्रश्न पाठ के दूसरे भाग से संबंधित है, जिसमें दो पात्र (संभवतः प्रच्छन्नभाग्य और दुष्टबुद्धि) बच्चों के एक समूह से बात करते हैं। यहाँ दिए गए पाठ के आधार पर, हम इस संवाद और संबंधित व्याकरणिक विश्लेषण को समझ सकते हैं।
संवाद का विश्लेषण:
- दो पात्र (व्रजन्तौ) एक गड्ढों से भरे, ऊँचे-नीचे और विषम मार्ग (नतोन्नते विषमे मार्गे) पर खेलते हुए बच्चों को देखकर उनसे पूछते हैं कि वे ऐसे खतरनाक रास्ते पर क्यों खेल रहे हैं। वे चेतावनी देते हैं कि यदि कोई गड्ढे में गिर गया तो वह विकलांग (विकलाङ्ग) होकर लंबे समय तक कष्ट (क्लेशम्) भोगेगा।
- बच्चों के समूह में से एक उद्दण्ड (शरारती) बालक उत्तर देता है कि यदि यह मार्ग इतना खतरनाक है, तो आप दोनों (भवन्तौ) अच्छे मार्ग (सुपथम्) को छोड़कर इस बुरे मार्ग (कुपथेन) पर क्यों जा रहे हैं? वह पूछता है कि क्या यह आपके लिए कल्याणकारी (श्रेयस्करम्) है?
व्याकरणिक विश्लेषण (समास और संधि):
- नतोन्नते: यह द्वंद्व समास है, जिसका अर्थ है 'नत (नीचा) च उन्नत (ऊँचा) च' (नीचा और ऊँचा)।
- श्रेयस्करम्: यह उपपद तत्पुरुष समास है, जिसका अर्थ है 'जो कल्याण करता है'।
- कुपथेन: यह कर्मधारय समास है, जिसका अर्थ है 'कुत्सितः पन्थाः' (बुरा रास्ता)।
- गर्तसङ्कले: यह तृतीया तत्पुरुष समास है, जिसका अर्थ है 'गर्तैः सङ्कले' (गड्ढों से भरा हुआ)।
- विकलाङ्ग: यह बहुव्रीहि समास है, जिसका अर्थ है 'विकलानि अङ्गानि यस्य सः' (जिसके अंग विकल हों)।
- सुपथम्: यह अव्ययीभाव समास है, जिसका अर्थ है 'पथस्य समृद्धिः' (अच्छे मार्ग की समृद्धि)।
- संधि-विच्छेद: पाठ में 'कांश्चित्', 'विकलाङ्ग:', 'कश्चिद्', 'तच्छत्वा', 'यद्येवम्', 'श्रेयस्करम्', 'नतोन्नते' जैसी संधियों का विश्लेषण भी दिया गया है, जो शब्दों को उनके मूल रूपों में तोड़ने में मदद करता है।
यह भाग छात्रों को न केवल कहानी के पात्रों के बीच संवाद को समझने में मदद करता है, बल्कि संस्कृत भाषा के व्याकरणिक पहलुओं जैसे समास और संधि का भी अभ्यास कराता है।
Common mistakes
- Misinterpreting the meaning of Sanskrit words and phrases.
- Difficulty in identifying the correct compound word formation or suffix.
- Confusing the actions or motivations of different characters.
- Inaccurate translation of Sanskrit sentences into Hindi.
Revision tips
- Read the Hindi translation carefully to understand the story's plot and characters.
- Pay close attention to the 'शब्दार्थाः' section to build vocabulary.
- Review the 'समासाः' and 'प्रत्ययाः' sections to reinforce grammatical knowledge.
- Practice answering the comprehension questions without referring to the answers initially.
Practice MCQs
Q1. कर्मपुर नामक नगर में रहने वाले कुमार का नाम क्या था?
Explanation: पाठ के अनुसार, कर्मपुर नामक नगर में प्रच्छन्नभाग्य नामक कुमार रहता था।
Q2. प्रच्छन्नभाग्य किस कार्य में संलग्न हो गया था?
Explanation: प्रच्छन्नभाग्य बाल्यावस्था में विद्या से विमुख होकर दुष्टबुद्धि नामक चोर के साथ चोरी के काम में संलग्न हो गया था।
Q3. दुष्टबुद्धि और प्रच्छन्नभाग्य किस उद्देश्य से ग्रामान्तर प्रस्थित हुए?
Explanation: वे दोनों एक बार किसी श्रेष्ठिन (सेठ) के घर में धनहरण (धन चुराने) के लिए दूसरे गाँव में गए थे।
Q4. दूसरे श्लोक में, जाते हुए दोनों (व्रजन्तौ) किस मार्ग का वर्णन करते हैं?
Explanation: दूसरे श्लोक में, जाते हुए दोनों ने गड्ढों से भरे हुए ऊँचे-नीचे और विषम मार्ग का वर्णन किया है।
Q5. शरारती बालक ने प्रच्छन्नभाग्य और दुष्टबुद्धि से क्या प्रश्न पूछा?
Explanation: शरारती बालक ने उनसे पूछा कि वे सुपथ (श्रेष्ठ मार्ग) को छोड़कर इस कुमार्ग (बुरा मार्ग) से जाने के लिए क्यों प्रवृत्त हुए हैं।
Q6. 'विद्यापराङ्मुखः' का क्या अर्थ है?
Explanation: 'विद्यापराङ्मुखः' का अर्थ है विद्या से विमुख या विद्या के प्रति रुचि न रखने वाला।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 10 के मनिका विषय के लिए है।
अध्याय 6 'साधुवृत्ति समाचरेत्' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?
यह अध्याय बुरे संगति के परिणामों और सही आचरण (साधुवृत्ति) के महत्व को सिखाता है, जिसमें एक कहानी के माध्यम से नैतिक शिक्षा दी गई है।
इन समाधानों में किस प्रकार के प्रश्न शामिल हैं?
इन समाधानों में पाठ पर आधारित बोधगम्यता प्रश्न (comprehension questions), संस्कृत शब्दावली, समास, प्रत्यय और संधि जैसे भाषाई कार्य (linguistic exercises) शामिल हैं।
क्या इन समाधानों में संस्कृत पाठ का हिंदी अनुवाद भी है?
हाँ, इन समाधानों में संस्कृत पाठ का विस्तृत हिंदी अनुवाद और महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ भी दिए गए हैं।
ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ, व्याकरणिक अवधारणाओं को स्पष्ट करने और अभ्यास प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करके परीक्षा की तैयारी को मजबूत करेंगे।
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