CBSE Class 10 मनिका Chapter 7: रमणीया की सृष्टि - ऐषा NCERT Solutions

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This chapter, 'रमणीया की सृष्टि - ऐषा' (This Creation is Indeed Beautiful) from CBSE Class 10 मनिका, explores the beauty and importance of nature through a short play and related exercises. The solutions cover the introduction to the play, its Hindi translation, word meanings, grammar exercises focusing on sandhi, compound words, and suffixes, and comprehension questions. It also includes a dialogue between a swan and a crow, highlighting the crow's defense of its actions and appearance against the swan's criticism. The solutions provide clear answers to questions about characters, their actions, and grammatical aspects, aiding students in understanding the text and reinforcing their Sanskrit language skills for effective exam revision.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectमनिका
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. रमणीया की सृष्टि - ऐषा

Chapter summary

Chapter 7, 'रमणीया की सृष्टि - ऐषा', of CBSE Class 10 मनिका, focuses on appreciating the beauty of creation. The NCERT Solutions provide a detailed breakdown of the chapter's content, including a Sanskrit play, its Hindi translation, vocabulary, and grammar exercises. The solutions address questions related to the characters, their dialogues, and grammatical concepts like sandhi, samasa, and pratyaya, ensuring students grasp the nuances of the Sanskrit text.

Learning outcomes

  • Understand the theme of nature's beauty and interconnectedness.
  • Identify and comprehend characters and dialogues in a Sanskrit play.
  • Translate Sanskrit passages into Hindi accurately.
  • Define and identify Sanskrit vocabulary (word meanings).
  • Apply knowledge of Sanskrit grammar, including Sandhi, Samasa, and Suffixes.
  • Answer comprehension questions based on the provided text.

Topics covered

Paper topics

  • Introduction to the play 'रमणीया की सृष्टि - ऐषा'
  • Hindi Translation of the play
  • Sanskrit Vocabulary (Word Meanings)
  • Sandhi (Disjoining Sandhi)
  • Samasa (Compounds)
  • Pratyaya (Suffixes)
  • Comprehension Questions (Ekpaden, Purnavakyan)
  • Grammar Exercises (Bhashik Karya)
  • Question Formation (Prashnamal)
  • Antonyms (Viparyay Chayan)
  • Character Analysis (Rajahamsa, Rajahansi, Kaka)
  • Themes of Nature and Beauty

Important topics

  • Understanding the play's theme and dialogues
  • Sanskrit to Hindi translation
  • Sandhi and Samasa identification
  • Answering comprehension questions accurately
  • Vocabulary building

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

एकपदेन उत्तरत:
  1. रङ्गमञ्चे कति पात्रे स्त:?
  2. का स्नेहेन पालयित?
Solution:

यहाँ एक-एक शब्द में उत्तर देने वाले प्रश्न दिए गए हैं:

  1. रङ्गमञ्चे कति पात्रे स्त:? (मंच पर कितने पात्र हैं?)

    उत्तर: द्वे (दो)

    स्पष्टीकरण: पाठ के आरम्भ में नट और नटी का प्रवेश होता है, जो दो पात्रों को दर्शाता है।

  2. का स्नेहेन पालयित? (कौन स्नेह से पालन करता है?)

    उत्तर: प्रकृति: (प्रकृति)

    स्पष्टीकरण: वाक्य 'प्रकृति: माता सर्वान् स्नेहेन परिपालयति।' से स्पष्ट है कि प्रकृति माता सभी का स्नेह से पालन करती है।

प्रश्न 2

पूर्णवाक्येन उत्तरत:
  1. सुष्टि: केन दूषिता न कर्तव्या?
  2. का सौन्दर्यमयी अस्ति?
Solution:

यहाँ पूर्ण वाक्यों में उत्तर देने वाले प्रश्न दिए गए हैं:

  1. सुष्टि: केन दूषिता न कर्तव्या? (सृष्टि को किससे दूषित नहीं करना चाहिए?)

    उत्तर: सृष्टि: परस्परं कलहेन विवादेन च दूषिता न कर्तव्या। (सृष्टि को आपस में कलह और विवाद से दूषित नहीं करना चाहिए।)

    स्पष्टीकरण: नट के संवाद में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सृष्टि को लड़ाई-झगड़े से खराब नहीं करना चाहिए।

  2. का सौन्दर्यमयी अस्ति? (कौन सुन्दर है?)

    उत्तर: इयं सृष्टि: अति सौन्दर्यमयी अस्ति। (यह सृष्टि बहुत सुन्दर है।)

    स्पष्टीकरण: नटी के संवाद में यह उल्लेख किया गया है कि सृष्टि अत्यंत सुन्दर है।

प्रश्न 3

भाषिककार्यम्-
  1. 'परिपालयति' इति क्रियायाः कर्तृपदम् किम्?
  • (क) माता (ख) प्रकृति: (ग) भार्या (घ) पुत्री
  1. 'शुभे अवसरे' इति अनयो: पदयो: विशेषणपदं किम्?
  • (क) शुभ: (ख) अवसरे (ग) शुभे (घ) अवसर:
  1. 'एषा' इति सर्वनामपदस्य प्रयोग: कस्मै अभवत्?
  • (क) मात्रे (ख) तस्यै (ग) बालिकायै (घ) सृष्ट्यै
  1. 'विश्व पर्यावरणदिवस: ' कस्मिन् मासे मन्यते?
  • (क) मई मासे (ख) जून मासे (ग) अप्रैल मासे (घ) जुलाई मासे
Solution:

यहाँ भाषा-संबंधी कार्य के प्रश्न दिए गए हैं:

  1. 'परिपालयति' (पालन करती है) इस क्रिया का कर्ता पद क्या है?

    उत्तर: (ख) प्रकृति:

    स्पष्टीकरण: वाक्य 'प्रकृति: माता सर्वान् स्नेहेन परिपालयति।' में 'प्रकृति:' शब्द क्रिया 'परिपालयति' का कर्ता है।

  2. 'शुभे अवसरे' (शुभ अवसर पर) इन दोनों पदों में विशेषण पद कौन सा है?

    उत्तर: (ग) शुभे

    स्पष्टीकरण: 'शुभे' शब्द 'अवसर' (अवसर) की विशेषता बता रहा है, इसलिए यह विशेषण है।

  3. 'एषा' (यह) इस सर्वनाम पद का प्रयोग किसके लिए हुआ है?

    उत्तर: (घ) सृष्ट्यै (सृष्टि के लिए)

    स्पष्टीकरण: नाटिका का शीर्षक 'रमणीया हि सृष्टिः एषा' है, जहाँ 'एषा' सर्वनाम 'सृष्टि' के लिए प्रयुक्त हुआ है।

  4. 'विश्व पर्यावरणदिवस:' (विश्व पर्यावरण दिवस) किस महीने में मनाया जाता है?

    उत्तर: (ख) जून मासे (जून महीने में)

    स्पष्टीकरण: पाठ में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 'अद्य जूनमासस्य पञ्चमी तारिका। अद्य तु विश्वपर्यावरणदिवस:'।

प्रश्न 4

प्रश्निर्माणम् (प्रश्न निर्माण करें):
  1. अद्य जून मासस्य पञ्चमी तारिका।
  2. प्रकृति: माता सर्वान् स्नेहेन पालयति।
  3. रमणीया हि सृष्टि: एषा।
  4. रङ्गमञ्चे नटी नट: च प्रविशत:।
  5. अद्य विश्व पर्यावरणस्य दिवसः वर्तते।
Solution:

दिए गए वाक्यों के आधार पर प्रश्न निर्माण इस प्रकार हैं:

  1. अद्य जून मासस्य पञ्चमी तारिका। (आज जून महीने की पाँच तारीख है।)

    प्रश्न: अद्य कस्यां तारिकायां विश्व पर्यावरणदिवस: वर्तते? या प्रश्न: अद्य कस्यां तारिकायां जूनमासस्य?

  2. प्रकृति: माता सर्वान् स्नेहेन पालयति। (प्रकृति माता सभी का स्नेह से पालन करती है।)

    प्रश्न: का सर्वान् स्नेहेन पालयति?

  3. रमणीया हि सृष्टि: एषा। (निश्चय ही यह सृष्टि बहुत सुन्दर है।)

    प्रश्न: कीदृशी हि सृष्टि: एषा? या प्रश्न: का हि सृष्टि: एषा?

  4. रङ्गमञ्चे नटी नट: च प्रविशत:। (मंच पर नटी और नट प्रवेश करते हैं।)

    प्रश्न: रङ्गमञ्चे के प्रविशत:?

  5. अद्य विश्व पर्यावरणस्य दिवसः वर्तते। (आज विश्व पर्यावरण का दिन है।)

    प्रश्न: अद्य कस्य दिवसः वर्तते?

प्रश्न 5

विपर्यय चयनं कुरुत लिखत च (विपरीतार्थक शब्द चुनें और लिखें):

(क) स्नेहेन (ख) कुरूपा

  1. नटी
  2. दूषिता
  3. सौन्दर्यमयी

(ग) शुद्धा (घ) तिरस्कारेण

  1. वरिष्ठ:

(ङ) कनिष्ठ:

Solution:

दिए गए शब्दों के विपरीतार्थक शब्द इस प्रकार हैं:

  1. नटी (अभिनेत्री) का विपरीतार्थक शब्द है: (क) नट: (अभिनेता)
  2. दूषिता (दूषित) का विपरीतार्थक शब्द है: (ग) शुद्धा (शुद्ध)
  3. सौन्दर्यमयी (सुन्दर) का विपरीतार्थक शब्द है: (ख) कुरूपा (कुरूप)
  4. वरिष्ठ: (बड़ा/वरिष्ठ) का विपरीतार्थक शब्द है: (ङ) कनिष्ठ: (छोटा/कनिष्ठ)
  5. स्नेहेन (स्नेह से) का विपरीतार्थक शब्द है: (घ) तिरस्कारेण (तिरस्कार से)

स्पष्टीकरण: प्रत्येक शब्द का सही विपरीतार्थक शब्द दिए गए विकल्पों में से चुना गया है।

प्रश्न 6

[स्थानं–सरस्तीरम्! समय:-प्रभातवेला। तत्र राजहंस: हंसी च विहरत:। नेपथ्ये काकध्वनि: श्रूयते।]

राजहंसः: अये! किन्तु खलु सरस्तीरे विहरति मिय केनापि कर्कशैः 'का का' शब्दैः वातावरणम् आकुलीक्रियते?

राजहंसी: भर्तः! काकात् अन्यः को भवितुमर्हति? अस्य वर्णः अपि कृष्णः, कर्म अपि कृष्णम्। मेध्यम् अमेध्यं सर्वमेव भक्षयति। कर्णकटुशब्दै:-

काकः (प्रविश्य, सक्रोधम्): आः किम् उक्तवती भवती? यदि अहं कृष्णवर्णः तर्हि श्रीरामस्य वर्णः कीदृशः? श्रीवासुदेवस्य वर्णः कीदृशः? मुग्धे! अहं तु अतीव कर्तव्यपरायणः। प्रभाते 'का-का' ध्वनिना सुप्तान् प्रबोधयामि कर्मसु च विनियोजयामि।

राजहंसः: हुं! किमनेन? एतत् कार्यं तु कुक्कुटोऽपि करोति।

हिंदी अनुवाद:

[स्थान-सरोवर का किनारा। समय-सुबह का समय। वहाँ राजहंस और हंसी घूम रहे हैं। परदे के पीछे कौवे की आवाज सुनाई देती है।]

राजहस: अरे! मेरे द्वारा सरोवर के किनारे घूमते हुए किसके द्वारा कठोर 'काँव-काँव' शब्दों से वातावरण को दूषित किया जा रहा है।

राजहंसी: स्वामी! कौवे के अतिरिक्त दूसरा कौन हो सकता है। इसका रंग भी काला होता है और इसका कार्य भी काला होता है। पवित्र-अपवित्र (शुद्धाशुद्ध) सबको खाने वाला है। कानों में चुभने वाले शब्दों से... (वातावरण को दूषित कर रहा है।)

कौआ (प्रवेश करके गुस्से से): अरे, क्या कह रही हैं आप? यदि मैं काले रंग का हूँ तो भगवान श्रीराम का रंग कैसा है? भगवान श्रीकृष्ण का रंग कैसा है? अरी भोली! मैं तो बड़ा कर्त्तव्यनिष्ठ हूँ। प्रात:काल 'काँव-काँव' की ध्वनि से सोए हुए को जगाता हूँ और कार्यों में लगाता हूँ।

राजहंस: हूँ! इससे क्या? यह कार्य तो मुर्गा भी कर देता है।

Solution:

यह प्रश्न एक नाटिका के अंश पर आधारित है, जिसमें राजहंस, राजहंसी और कौवे के बीच संवाद है।

नाटिका का सारांश:

स्थान और समय: सरोवर का किनारा, सुबह का समय।

पात्र: राजहंस, राजहंसी, कौआ।

घटना:

  1. राजहंस और राजहंसी सरोवर के किनारे घूम रहे हैं। तभी उन्हें कौवे की कर्कश 'काँव-काँव' की ध्वनि सुनाई देती है, जिससे राजहंस परेशान होता है।
  2. राजहंसी कौवे के काले रंग और उसके द्वारा सब कुछ खा लेने की प्रवृत्ति की आलोचना करती है।
  3. कौआ क्रोधित होकर प्रवेश करता है और अपनी सफाई में कहता है कि यदि उसका रंग काला है, तो भगवान राम और श्रीकृष्ण का रंग भी काला माना जाता है। वह स्वयं को कर्तव्यनिष्ठ बताता है और कहता है कि वह सुबह की ध्वनि से लोगों को जगाता है।
  4. राजहंस कौवे के तर्क को महत्वहीन बताते हुए कहता है कि यह कार्य तो मुर्गा भी कर देता है।

मुख्य बिंदु:

  • यह अंश प्रकृति की सुन्दरता और विभिन्न जीवों के महत्व को दर्शाता है।
  • कौआ अपने काले रंग और ध्वनि के लिए आलोचना का शिकार होता है, लेकिन वह अपने कर्मों का बचाव करता है।
  • यह संवाद विभिन्न प्राणियों के दृष्टिकोण और उनके कार्यों पर प्रकाश डालता है।

शब्दार्थाः (Word-meanings)

नेपथ्ये-परोक्षे, पर्दे के पीछे (Back ground)। मेध्यम्-शोधनम्, अच्छा (Good)। प्रविश्य-प्रवेशं कृत्वा, प्रवेश करके (After entry)।

Solution:

यहाँ दिए गए शब्दों के अर्थ संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी में स्पष्ट किए गए हैं:

  • नेपथ्ये: (संस्कृत) परोक्षे, (हिंदी) पर्दे के पीछे, (English) Back ground.
  • मेध्यम्: (संस्कृत) शोधनम्, (हिंदी) अच्छा/पवित्र, (English) Good/Pure.
  • प्रविश्य: (संस्कृत) प्रवेशं कृत्वा, (हिंदी) प्रवेश करके, (English) After entry.

सन्धि-विच्छेदः (Disjoin Sandhi)

सरस्तीरम् - सर: + तीरम् (विसर्गसन्धि:)। कुक्कुटोऽपि – कुक्कुट: + अपि (पूर्वरूप सन्धि:)। अतीव अति + इव (दीर्घसन्धि:)। किन् किम् + नु (परसवर्ण सन्धि:)। समासाः (Compounds) सरस्तीरम् सरसः तीरम् (षष्ठी तत्पुरुषः)। प्रभातवेला प्रभातस्य वेला (षष्ठी तत्पुरुष:)। काकध्वनि: – काकस्य ध्विन: (षष्ठी तत्पुरुष:)।

Solution:

यहाँ पाठ में प्रयुक्त कुछ शब्दों का सन्धि-विच्छेद और समास विग्रह दिया गया है:

सन्धि-विच्छेद:

  • सरस्तीरम्: सर: + तीरम् (विसर्ग सन्धि)
  • कुक्कुटोऽपि: कुक्कुट: + अपि (पूर्वरूप सन्धि)
  • अतीव: अति + इव (दीर्घ सन्धि)
  • किन् नु: किम् + नु (परसवर्ण सन्धि)

समास:

  • सरस्तीरम्: सरसः तीरम् (षष्ठी तत्पुरुष समास) - सरोवर का किनारा।
  • प्रभातवेला: प्रभातस्य वेला (षष्ठी तत्पुरुष समास) - प्रभात का समय।
  • काकध्वनि: काकस्य ध्वनि: (षष्ठी तत्पुरुष समास) - कौवे की ध्वनि।

Common mistakes

  • Incorrectly identifying grammatical elements like subject-verb agreement or case endings.
  • Misinterpreting the meaning of Sanskrit words or phrases.
  • Errors in applying Sandhi rules during disjunction or conjunction.
  • Confusing different types of compound words (Samasa).

Revision tips

  • Read the Hindi translation carefully to grasp the play's essence before diving into Sanskrit.
  • Memorize the word meanings and practice using them in sentences.
  • Review the grammar sections (Sandhi, Samasa, Suffixes) with the examples provided.
  • Attempt to answer the questions without looking at the solutions first to test your understanding.

Practice MCQs

Q1. रङ्गमञ्चे कति पात्रे स्त:?

Q2. विश्व पर्यावरणदिवस: कस्मिन् मासे मन्यते?

Q3. राजहंसी काकस्य वर्णं कथम् अवर्णयत्?

Q4. 'परिपालयति' इति क्रियायाः कर्तृपदं किम्?

Q5. कस्य वर्णः अपि कृष्णः, कर्म अपि कृष्णम्?

Frequently asked questions

What is the main theme of Chapter 7, 'रमणीया की सृष्टि - ऐषा'?

The main theme of the chapter is the appreciation of the beauty of creation and nature, emphasizing that all beings have importance and should not be harmed by conflict.

What kind of exercises are included in these NCERT Solutions?

The solutions include exercises for one-word answers, full-sentence answers, grammatical tasks like identifying verbs and adjectives, question formation, and selecting antonyms.

How do these solutions help in understanding the Sanskrit text?

The solutions provide a Hindi translation, word meanings, and step-by-step answers to comprehension and grammar questions, making the Sanskrit text more accessible and understandable.

What grammatical concepts are covered in this chapter?

The chapter covers concepts like Sandhi (disjoining sandhi), Samasa (compounds), and Pratyaya (suffixes), with examples from the text.

Who are the main characters in the play presented in this chapter?

The play features a Rajahamsa (Swan), a Rajahansi (Swan-female), and a Kaka (Crow).

What is the significance of World Environment Day mentioned in the chapter?

World Environment Day, celebrated on June 5th, is mentioned to set the context for the play, which revolves around the theme of nature and creation's beauty.

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