कक्षा 10 मनिका: अभ्यासवशगं मनः NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 मनिका के 'अभ्यासवशगं मनः' (मन अभ्यास से वश में होता है) अध्याय के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें भगवद गीता के श्लोकों का हिंदी अनुवाद, अन्वय, शब्दार्थ, भावार्थ, संधि-विच्छेद, समास और प्रत्यय का गहन विश्लेषण शामिल है। समाधान छात्रों को श्लोकों के अर्थ को समझने, व्याकरणिक संरचनाओं को पहचानने और संस्कृत भाषा की बारीकियों को सीखने में मदद करते हैं। यह अभ्यास छात्रों को श्लोकों के अर्थ को समझने, व्याकरणिक संरचनाओं को पहचानने और संस्कृत भाषा की बारीकियों को सीखने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectमनिका
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. अभ्यासवशगं मनः

Chapter summary

कक्षा 10 मनिका के 'अभ्यासवशगं मनः' अध्याय के ये NCERT समाधान श्लोकों के अर्थ, व्याकरण और शब्दावली पर केंद्रित हैं। इसमें श्लोकों का हिंदी अनुवाद, अन्वय, शब्दार्थ, भावार्थ, संधि-विच्छेद, समास और प्रत्यय का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। यह छात्रों को संस्कृत पाठ को समझने और विश्लेषण करने के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करता है, जिससे उनकी भाषा प्रवीणता और परीक्षा प्रदर्शन में सुधार होता है।

Learning outcomes

  • श्लोक 1 और 2 का हिंदी अनुवाद समझना।
  • श्लोक के पदों का अन्वय क्रम में व्यवस्थित करना।
  • दिए गए श्लोकों से संस्कृत शब्दों के अर्थ (हिंदी और अंग्रेजी में) पहचानना।
  • श्लोक के भावार्थ को समझना।
  • संधि-विच्छेद के नियमों को लागू करना।
  • दिए गए शब्दों के समास और प्रत्यय की पहचान करना।
  • व्याकरणिक कार्यों (जैसे पर्याय, सर्वनाम, अव्यय) को हल करना।

Topics covered

Paper topics

  • श्लोक 1 का हिंदी अनुवाद
  • श्लोक 2 का हिंदी अनुवाद
  • अन्वय (Prose Order)
  • शब्दार्थ (Sanskrit-Hindi-English)
  • भावार्थ (Summary)
  • संधि-विच्छेद
  • समास
  • प्रत्यय
  • व्याकरणिक कार्य (पर्याय, सर्वनाम, अव्यय)
  • काम और क्रोध का संबंध
  • मनुष्य की प्रवृत्तियाँ
  • भगवद गीता के श्लोक

Important topics

  • श्लोक 1 और 2 का गहन विश्लेषण
  • काम और क्रोध का संबंध (भगवद गीता के अनुसार)
  • संधि-विच्छेद और समास की पहचान
  • शब्दार्थ और भावार्थ की समझ
  • व्याकरणिक कार्य का अभ्यास

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Questions and Solutions

अभ्यासवशगं मनः

अभ्यासवशगं मनः<br>(मन अभ्यास से वश में होता है)

  1. अर्जुनः उवाच अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुषः, अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय! बलादिव नियोजित:॥1॥

हिंदी अनुवाद (Hindi Translation)

अर्जुन बोले- हे कृष्ण! फिर यह मानव न चाहता हुआ भी बलपूर्वक लगाए हुए की भौति किसके द्वारा प्रेरित होकर पापकर्म करता है।

अन्वयः (Prose-order) अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुषः, अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय! बलादिव नियोजित:॥1॥ वार्ष्णेय! अथ केन (i) ...................................

  1. ..... चरति। मञ्जूषा - नियोजित:, अनिच्छन्, पापम्, प्रयुक्त: उत्तराणि-(i) प्रयुक्त: (ii) अनिच्छन् (iii) नियोजित: (iv) पापम्

शब्दार्थाः (Word-meanings Sanskrit to Sanskrit, Hindi and English)

शारदा-वार्ष्णेय:! हे श्रीकृष्ण! हे श्रीकृष्ण (O, Krishna)। बलात्-हटात्, बलपूर्वक (By force)। प्रयुक्त:-प्रेरित:, प्रेरित (Encouraged)। अनिच्छन् – न इच्छन्, न चाहते हुए (Not wishing)।

संस्कृते भावार्थः (Summary)

अथ केन प्रयुक्तोऽयं पापं चरति पूरुषः, अनिच्छन्नपि वार्ष्णेय! बलादिव नियोजित:॥1॥ अस्य भावोऽस्ति, यत्-अर्जुन: (i) """ पृच्छति-हे कृष्ण! पुन: अयं (ii) """ न इच्छन् अपि

  1. ...... भूत्वा पापकर्म आचरति? मञ्जूषा - बलपूर्वकम्, श्रीकृष्णं, प्रेरितः, मनुष्यः उत्तराणि-(i) श्रीकृष्णं (ii) मनुष्य: (iii) बलपूर्वकम् (iv) प्रेरित:

सन्धि-विच्छेदः (Disjoin Sandhi)

प्रयुक्तोऽयम् – प्रयुक्तः + अयम् (विसर्ग सन्धिः) बलादिव – बलात् + इव (व्यंजन सन्धिः)। अनिच्छन्नपि - अनिच्छन् + अपि (व्यंजन सन्धि:)।

समासाः (Compounds)

वार्ष्णेय - वृष्णिषु जन्म यस्य सः, सम्बोधने (बहुव्रीहिः) अनिच्छन् - न इच्छन् (नञ् तत्पुरुषः)। पूरुष: - पुर्याम् शेते इति (उपपद तत्पुरुष:)। प्रत्ययाः (Suffixes) प्रयुक्तः - प्र + युज् + क्त। नियोजितः - नि + युज् + णिच् + क्त। इच्छन् - इष् + शतृ।

प्रश्नाः (Questions)

  1. एकपदेन उत्तरत- अत्र श्रीकृष्णाय सम्बोधनपदम् किम्?
  1. पूर्णवाक्येन उत्तरत- अनिच्छन् पुरुषः किम् करोति?
  1. भाषिककार्यम्-
  2. 'करोति' अस्य पर्याय: श्लोकात् एव चित्वा लिखत।
  • (क) गच्छति (ग) नियोजित: (घ) प्रयुक्त:
  1. 'अयम्' इति सर्वनामपदस्य प्रयोगः कस्मै अभवत्?
  • (क) अर्जुनाय (ख) श्रीकृष्णाय (ग) जनाय (घ) पुरुषाय
  1. 'न इच्छन्' इति स्थाने किम् अव्ययपदं प्रयुक्तम्? (घ) इच्छत:
  1. 'इच्छन्' इति पदे क: प्रत्यय:?
  • (क) क्त (ख) क्तवतु (ग) शतृ (घ) शानच्

उत्तराणि- (I) वार्ष्णेय।

  1. अनिच्छन् अपि पुरुष: पापं करोति।
  2. (i) (ख) चरति (ii) (घ) पुरुषाय (iii) (क) अनिच्छन् (vi) (ग) शतृ।

प्रश्निर्माणम् (i) पुरुष: पापं चरति।

  1. अनिच्छन्निप पुरुष: पापं करोति।
  2. पुरुष: एव बलादिव नियुक्त: भवति।

उत्तराणि—(i) किम् (ii) कथम् (iii) कीदृश:।

  1. श्रीकृष्णः उवाच काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः। महाशनो महापाप्पा विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥२॥

हिंदी अनुवाद (Hindi Translation)

श्रीकृष्ण बोले-रजोगुण से उत्पन्न होने वाला यह काम ही क्रोध है। यह सब कुछ खाने वाला और महापापी है। इसे ही यहाँ (इस संसार में) शत्रु समझो।

अन्वयं लिखत (Prose-order) काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः। महाशनो महापाप्पा विव्ध्येनमिह वैरिणम्॥२॥ रजोगुणसमुद्रभव: (i) काम: एष: (ii) महाशना: (iii) एनम् इह

  1. "" विद्धि। मञ्जूषा - क्रोध:, वैरिणं, महापाप्मा, एष: उत्तराणि –(i) एष: (ii) क्रोध: (iii) महापाप्मा (iv) वैरिणं

शब्दार्थाः (Word-meanings Sanskrit to Sanskrit, Hindi and English)

महाशान:-सर्वभोजी, सब कुछ खाने वाला (Glutton oracious eater)। महापाप्पा-महापापी, महापापी (Great sinner)। विद्धि-अवगच्छ, जानो (To know)।

संस्कृते भावार्थः (Summary)

काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः। महाशनो महापाप्पा विद्ध्येनमिह वैरिणम्॥२॥ अस्य भावोऽस्ति-श्रीकृष्ण: (i) अवदत्-रजोगुणात् (ii) अयं काम: क्रोध: च अस्ति। एष: सर्वभोजी (iii) ..... च वर्तते। त्वम् अस्मिन् (शरीरे) एनम् एव (iv) ...... जानीहि। मञ्जूषा - समुत्पन्नः, शत्रुम्, अर्जुनम्, महापापी उत्तराणि-(i) अर्जुनम् (ii) समुत्पन्न: (iii) महापापी (iv) शत्रुम्

समासाः (Compounds)

रजोगुणसमुद्भवः - रजोगुणात् समुद्भवः (पञ्चमी तत्पुरुषः)। महाशन: महत् अशनम् यस्य सः (बहुव्रीहिः)। महापाप्मा – महान् पाप्मा (कर्मधारय:)।

Common mistakes

  • श्लोक के अर्थ को समझने में कठिनाई।
  • अन्वय क्रम को सही ढंग से व्यवस्थित न कर पाना।
  • संधि-विच्छेद या समास की पहचान में त्रुटियाँ।
  • प्रत्ययों को गलत पहचानना।
  • व्याकरणिक प्रश्नों के उत्तर में भ्रम।

Revision tips

  • प्रत्येक श्लोक के हिंदी अनुवाद को ध्यान से पढ़ें और समझें।
  • अन्वय को अभ्यास करके श्लोक के वाक्य-विन्यास को समझें।
  • शब्दार्थों को याद करें और वाक्यों में उनके प्रयोग को समझें।
  • संधि, समास और प्रत्यय के नियमों का पुनरीक्षण करें और उन्हें श्लोकों पर लागू करें।
  • व्याकरणिक कार्य वाले प्रश्नों का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. श्लोक 1 में अर्जुन ने श्रीकृष्ण को किस संबोधन पद से पुकारा है?

Q2. श्रीकृष्ण के अनुसार, कौन सा भाव रजोगुण से उत्पन्न होता है?

Q3. श्लोक 2 में 'महाशनः' शब्द का क्या अर्थ है?

Q4. श्लोक 1 में 'बलादिव नियोजितः' का क्या अर्थ है?

Q5. श्रीकृष्ण ने श्लोक 2 में किसे 'वैरिणम्' (शत्रु) कहा है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान CBSE कक्षा 10 के मनिका विषय के लिए है, विशेष रूप से 'अभ्यासवशगं मनः' अध्याय पर केंद्रित है।

'अभ्यासवशगं मनः' का क्या अर्थ है?

'अभ्यासवशगं मनः' का अर्थ है कि मन अभ्यास के द्वारा वश में होता है। यह अध्याय मन की चंचलता और उसे नियंत्रित करने के उपायों पर प्रकाश डालता है।

इन समाधानों में क्या-क्या शामिल है?

इन समाधानों में श्लोकों का हिंदी अनुवाद, अन्वय, शब्दार्थ, भावार्थ, संधि-विच्छेद, समास, प्रत्यय और व्याकरणिक कार्य (जैसे पर्याय, सर्वनाम, अव्यय) का विस्तृत विश्लेषण शामिल है।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेगा?

यह समाधान छात्रों को श्लोकों के अर्थ, व्याकरणिक संरचनाओं और शब्दावली को समझने में मदद करता है, जो मनिका परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

श्लोक 1 में अर्जुन श्रीकृष्ण से क्या प्रश्न पूछते हैं?

अर्जुन पूछते हैं कि मनुष्य न चाहते हुए भी, किसके द्वारा प्रेरित होकर बलपूर्वक पाप कर्म करता है।

श्रीकृष्ण के अनुसार, संसार में असली शत्रु कौन है?

श्रीकृष्ण के अनुसार, रजोगुण से उत्पन्न होने वाला काम ही क्रोध है, जो महाभोगी और महापापी है, और उसे ही संसार में शत्रु समझना चाहिए।

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