कक्षा 10 मनिका: पाठ 2 आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 के लिए मनिका पाठ्यपुस्तक के पाठ 2, 'आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया' के NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ एक राजा के दरबार में एक भेड़ और रसोइयों के बीच होने वाले निरंतर झगड़े की कहानी बताता है, और कैसे यह स्थिति बंदरों के झुंड के नेता को एक महत्वपूर्ण सबक सिखाने के लिए प्रेरित करती है। समाधान में पाठ का हिंदी अनुवाद, अन्वय, शब्दार्थ, संस्कृत में भावार्थ, समास, संधि-विच्छेद, प्रत्यय और अभ्यास प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं। यह सामग्री छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इन समाधानों के माध्यम से, छात्र पाठ के नैतिक संदेश और व्याकरणिक पहलुओं को प्रभावी ढंग से सीख सकते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectमनिका
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया

Chapter summary

कक्षा 10 मनिका के पाठ 2 'आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया' के ये NCERT समाधान छात्रों को एक राजा के दरबार में घटित एक घटना के माध्यम से महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों को समझने में मदद करते हैं। समाधान में पाठ का विस्तृत हिंदी अनुवाद, श्लोक का अन्वय, कठिन शब्दों के अर्थ (संस्कृत-हिंदी-अंग्रेजी), संस्कृत में भावार्थ, समास-विग्रह, संधि-विच्छेद और प्रत्यय विश्लेषण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पाठ पर आधारित विभिन्न प्रकार के प्रश्न, जैसे एक-पद, पूर्ण-वाक्य, भाषिक कार्य (पर्यायवाची, विशेष्य, विशेषण, क्रिया का कर्ता) और प्रश्न निर्माण के उत्तर दिए गए हैं। यह सामग्री छात्रों को पाठ की विषय-वस्तु और व्याकरणिक संरचना को सुदृढ़ करने में सहायता करती है।

Learning outcomes

  • पाठ 'आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया' के हिंदी अनुवाद को समझना।
  • श्लोक के अन्वय को पूरा करना और उसका अर्थ समझना।
  • दिए गए श्लोक का संस्कृत में भावार्थ लिखना।
  • पाठ में प्रयुक्त समास, संधि-विच्छेद और प्रत्ययों की पहचान करना।
  • पाठ पर आधारित विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देना।
  • नैतिक शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण सबक सीखना।

Topics covered

Paper topics

  • पाठ का हिंदी अनुवाद
  • श्लोक का अन्वय
  • शब्दार्थ (संस्कृत-हिंदी-अंग्रेजी)
  • संस्कृत में भावार्थ
  • समास
  • संधि-विच्छेद
  • प्रत्यय
  • एक-पद उत्तर
  • पूर्ण-वाक्य उत्तर
  • भाषिक कार्य (पर्यायवाची, विशेष्य, कर्ता)
  • प्रश्न निर्माण
  • नैतिक शिक्षा

Important topics

  • पाठ का हिंदी अनुवाद और मुख्य संदेश
  • श्लोक का अन्वय और भावार्थ
  • समास और संधि-विच्छेद का अभ्यास
  • भाषिक कार्य से संबंधित प्रश्न
  • नैतिक शिक्षा का महत्व

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Questions and Solutions

प्रश्न 1: एकपदेन उत्तरत-

1. भूपते: नाम किम् आसीत्? (ii) क: वानराणां विनाशकारणं भविष्यति ?
Solution:

(i) राजा का नाम चन्द्र था।

(ii) रसोइयों और भेड़ के बीच का झगड़ा बंदरों के विनाश का कारण बनेगा।

प्रश्न 2: पूर्णवाक्येन उत्तरत-

1. क: रहस्यम् अवदत्? (ii) यूथप: कान् रहिस अवदत्?
Solution:

(i) वानरयूथपति ने रहस्य में बात कही।

(ii) वानरयूथपति ने सभी बंदरों (कपीन्) को एकांत में बुलाया और उनसे बात की।

प्रश्न 3: भाषिककार्यम्-

1. 'एकान्ते' इति अर्थे किं पदं प्रयुक्तम्?
  • (क) रहसि
  • (ख) अवेक्ष्य
  • (ग) आशु
  • (घ) पुष्टिम्
(ii) 'बालवाहनयोग्यम्' इति पदस्य विशेष्यपदं किम्?
  • (क) मेषम्
  • (ख) यूथम्
  • (ग) मेषयूथम्
  • (घ) वानरयूथम्
(iii) 'ताडयन्ति स्म' इति क्रियायाः कर्तृपदं किम्?
  • (क) बालकाः
  • (ख) राजपुत्राः
  • (ग) वानराः
  • (घ) सूपकाराः
(iv) 'भाजनम्' इति पदस्य पर्यायपदं गद्यांशात् एव चित्वा लिखत।
  • (क) कलहं
  • (ख) पात्रं
  • (ग) मृणत्यं
  • (घ) काष्ठं
Solution:

(i) 'एकान्ते' (एकांत में) इस अर्थ में प्रयुक्त पद **(क) रहसि** है।

(ii) 'बालवाहनयोग्यम्' (बच्चों के वाहन के योग्य) इस पद का विशेष्य पद **(ग) मेषयूथम्** (भेड़ों का झुंड) है। यह भेड़ों के झुंड की विशेषता बता रहा है।

(iii) 'ताडयन्ति स्म' (मारते थे) इस क्रिया का कर्ता पद **(घ) सूपकाराः** (रसोइए) हैं। रसोइए ही भेड़ को मारते थे।

(iv) 'भाजनम्' (बर्तन) इस पद का पर्याय पद गद्यांश से **(ख) पात्रं** है।

प्रश्न 4: प्रश्निर्माणम्-

1. यूथप: सर्वान् कपीन् आहूय रहसि अवदत्। (ii) कस्मिंश्चित् नगरे चन्द्रो नाम भूपित: प्रतिवसित स्म । (iii) एतेषां कलहः न वानराणां हिताय। (iv) राजपुत्राः वानस्यूथं नित्यं पुष्टिं नयन्ति स्म। (v) तेन तम् आशु ताडयन्ति स्म।
Solution:

(i) यूथप: सर्वान् कपीन् आहूय कुत्र अवदत्? (बंदरों का स्वामी सभी बंदरों को बुलाकर कहाँ बोला? - उत्तर: एकांत में/रहस्य में)

(ii) कस्मिंश्चित् नगरे चन्द्रो नाम भूपित: प्रतिवसित स्म । (किस नगर में राजा चन्द्र निवास करते थे? - उत्तर: किसी नगर में)

(iii) केषाम् कलहः न वानराणां हिताय। (किनका झगड़ा बंदरों के लिए हितकर नहीं था? - उत्तर: इनका/इनका झगड़ा)

(iv) के राजपुत्राः वानस्यूथं नित्यं पुष्टिं नयन्ति स्म। (कौन राजकुमार बंदरों के झुंड को नित्य पुष्ट करते थे? - उत्तर: राजकुमार)

(v) केन तम् आशु ताडयन्ति स्म। (किसके द्वारा उसे शीघ्र मारते थे? - उत्तर: उसके द्वारा/रसोइयों द्वारा)

प्रश्न 5: श्लोक का अन्वय पूरा करें।

तस्मात् यत्र गृहे-(i) ______ अकारण: कलह: (ii) ______ जीवितं (iii) ______ तत् गृहं

  1. "" परिवर्जयेत्।

मञ्जूषा- दूरतः, वाञ्छन्, स्यात्, नित्यम्

Solution:

श्लोक का अन्वय इस प्रकार पूरा होगा:

तस्मात् यत्र गृहे (i) नित्यम् अकारण: कलह: (ii) स्यात् जीवितं (iii) वाञ्छन् तत् गृहं (iv) दूरतः परिवर्जयेत्।

अर्थ: इसलिए, जहाँ घर में नित्य बिना कारण झगड़ा होता हो, वहाँ जीवन की इच्छा रखने वाले को उस घर को दूर से ही छोड़ देना चाहिए।

प्रश्न 6: श्लोक का संस्कृत में भावार्थ लिखें।

यदि कश्चित् नर: (i) ______ इच्छिति तर्हि स: तत् (ii) ______ अवश्यमेव त्यजेत् यत्र नित्यम्

  1. भवति। यतो हि (iv) ______ कलहः सर्वदा विनाशस्य कारणं भवति।

मञ्जूषा – अकारणः, सुखी जीवनम्, कलहः, गृहम्

Solution:

श्लोक का संस्कृत में भावार्थ इस प्रकार है:

यदि कश्चित् नर: (i) सुखी जीवनम् इच्छिति तर्हि स: तत् (ii) गृहम् अवश्यमेव त्यजेत् यत्र नित्यम् (iii) कलहः भवति। यतो हि (iv) अकारणः कलहः सर्वदा विनाशस्य कारणं भवति।

सरलार्थ: यदि कोई मनुष्य सुखी जीवन की इच्छा रखता है, तो उसे उस घर को अवश्य ही छोड़ देना चाहिए जहाँ नित्य झगड़ा होता है। क्योंकि बिना कारण का झगड़ा हमेशा विनाश का कारण बनता है।

प्रश्न 7: दिए गए श्लोक का हिंदी अनुवाद करें।

तस्मात् स्यात् कलहो यत्र गृहे नित्यमकारण:।

तद्गृहं जीवितं वाञ्छन् दूरतः परिवर्जयेत्॥ 1॥

ततः सर्वेषां संक्षयो न भवेत्, तदेतद् राजभवनं परित्यन्य वनं गच्छामः। यतः- 'कलहान्तानि हर्म्याणि कुवाक्यान्तं च सौहृदम्। कुराजान्तानि राष्ट्राणि कुकर्मान्तं यशो नॄणाम्॥ 2॥'

Solution:

श्लोक 1 का हिंदी अनुवाद:

इसलिए, जहाँ घर में नित्य बिना कारण झगड़ा होता हो, उस घर को जीवन की इच्छा रखने वाले को दूर से ही छोड़ देना चाहिए।

श्लोक 2 का हिंदी अनुवाद:

इसलिए (हम सभी का) विनाश न हो जाए, हम इस राजभवन को छोड़कर वन को जाते हैं। क्योंकि - झगड़ों से महलों का अंत हो जाता है, बुरे वाक्यों से मित्रता का अंत हो जाता है, बुरे शासकों से राष्ट्रों का अंत हो जाता है, और बुरे कर्मों से मनुष्यों के यश का अंत हो जाता है।

Common mistakes

  • श्लोक के अन्वय को भरते समय सही शब्दों का चयन न कर पाना।
  • संस्कृत के भावार्थ को समझने या लिखने में कठिनाई।
  • समास, संधि-विच्छेद और प्रत्ययों की पहचान में त्रुटियाँ।
  • प्रश्नों के उत्तर देते समय पाठ के प्रसंग को भूल जाना।

Revision tips

  • पाठ के हिंदी अनुवाद को ध्यान से पढ़ें और मुख्य पात्रों तथा घटनाओं को समझें।
  • श्लोक के अन्वय और भावार्थ को पूरा करने का अभ्यास करें।
  • समास, संधि-विच्छेद और प्रत्ययों की सूची बनाएं और उनका नियमित रूप से पुनरीक्षण करें।
  • अभ्यास प्रश्नों को हल करें और अपने उत्तरों का मिलान समाधान से करें।

Practice MCQs

Q1. किसी नगर में किस नाम का राजा रहता था?

Q2. भेड़ अपनी किस आदत के कारण रसोईघर में घुस जाती थी?

Q3. नीतिज्ञों में अग्रणी कौन था?

Q4. श्लोक के अनुसार, जिस घर में नित्य झगड़ा होता है, उसे क्या करना चाहिए?

Q5. 'अहर्निशम्' का क्या अर्थ है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह NCERT समाधान कक्षा 10 के लिए मनिका विषय के पाठ 2 'आज्ञा गुरूणां हि अविचारणीया' के लिए है।

समाधान में क्या-क्या शामिल है?

समाधान में पाठ का हिंदी अनुवाद, श्लोक का अन्वय, शब्दार्थ, संस्कृत में भावार्थ, समास, संधि-विच्छेद, प्रत्यय और अभ्यास प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं।

क्या यह समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेगा?

हाँ, यह समाधान पाठ की गहरी समझ, व्याकरणिक पहलुओं और प्रश्न-उत्तर अभ्यास के माध्यम से परीक्षा की तैयारी में बहुत सहायक है।

पाठ का मुख्य संदेश क्या है?

पाठ का मुख्य संदेश यह है कि जहाँ निरंतर बिना कारण झगड़ा होता है, ऐसे स्थान को जीवन की सुरक्षा के लिए दूर से ही छोड़ देना चाहिए।

श्लोक का अन्वय क्या है?

श्लोक का अन्वय है: 'तस्मात् यत्र गृहे नित्यम् अकारण: कलह: स्यात्, जीवितं वाञ्छन् तत् गृहं दूरतः परिवर्जयेत्।'

व्याकरणिक भाग में किन विषयों को कवर किया गया है?

व्याकरणिक भाग में समास, संधि-विच्छेद और प्रत्ययों का विश्लेषण शामिल है।

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