CBSE Class 10 Hindi स्पर्श Chapter 8: NCERT Solutions

NCERT Solutions PDF Class 10 PDF

This section provides detailed NCERT Solutions for Chapter 8 of the CBSE Class 10 Hindi textbook 'स्पर्श'. The chapter focuses on a powerful poem by Rabindranath Tagore, emphasizing self-reliance, inner strength, and maintaining faith during difficult times. The solutions break down the poem's core message: the poet's prayer is not to be shielded from life's hardships, but to be endowed with the courage and resilience to face them. It explores themes of seeking strength rather than escape, finding confidence amidst challenges, and the importance of unwavering faith in God even when facing adversity or betrayal. These solutions help students understand the nuances of the poem, its philosophical depth, and its relevance to personal growth and spiritual fortitude, making them an excellent resource for exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectस्पर्श
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 8

Chapter summary

Chapter 8 of CBSE Class 10 Hindi 'स्पर्श' features a profound poem by Rabindranath Tagore. The NCERT Solutions provided here delve into the poem's central theme: the poet's prayer for inner strength and self-reliance rather than avoidance of difficulties. The solutions explain the poet's request for courage to face challenges, maintain faith, and find confidence, even when alone or facing setbacks. They clarify the meaning of 'आत्मत्राण' (self-protection/liberation) and highlight the poem's unique approach to prayer, focusing on resilience over seeking divine intervention for comfort.

Learning outcomes

  • Understand the central theme of self-reliance and inner strength in Rabindranath Tagore's poem.
  • Analyze the poet's prayer for courage and resilience instead of escaping adversity.
  • Interpret the meaning of 'आत्मत्राण' (self-protection) in the context of the poem.
  • Explain the difference between seeking divine help for comfort versus seeking strength to endure.
  • Appreciate the importance of unwavering faith and confidence in oneself during challenging times.
  • Relate the poem's message to personal experiences and the pursuit of goals.

Topics covered

Paper topics

  • आत्मत्राण (Self-Protection/Liberation)
  • प्रार्थना का स्वरूप (Nature of Prayer)
  • आत्मविश्वास और आत्मबल (Self-confidence and Inner Strength)
  • कठिनाइयों का सामना (Facing Adversity)
  • धैर्य और सहनशीलता (Patience and Endurance)
  • ईश्वर में आस्था (Faith in God)
  • रवींद्रनाथ टैगोर की कविता (Poem by Rabindranath Tagore)
  • स्पर्श पाठ्यपुस्तक (Sparsh Textbook)
  • कक्षा 10 हिंदी (Class 10 Hindi)
  • NCERT Solutions

Important topics

  • आत्मत्राण का अर्थ और महत्व
  • कवि की प्रार्थना का मूल भाव (शक्ति की या बचाव की)
  • आत्मविश्वास बनाए रखने का महत्व
  • कठिनाइयों के प्रति कवि का दृष्टिकोण
  • ईश्वर में अटूट विश्वास

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

कवि किससे और क्या प्रार्थना कर रहा है?
Solution: कवि करुणामय ईश्वर से यह प्रार्थना कर रहा है कि वह उसे जीवन की कठिनाइयों और विपदाओं से पूरी तरह दूर न रखे, बल्कि उसे इतनी शक्ति और सामर्थ्य प्रदान करे कि वह उन मुश्किलों का सामना कर सके और उन पर विजय प्राप्त कर सके। वह यह भी प्रार्थना करता है कि दुख की घड़ियों में भी वह ईश्वर को न भूले और उसका विश्वास अटल बना रहे। कवि वंचना, निराशा और दुखों के बीच भी ईश्वर की कृपा, शक्ति और सत्ता में अपना आत्मविश्वास बनाए रखना चाहता है।

प्रश्न 2

'विपदाओं से मुझे बचाओं, यह मेरी प्रार्थना नहीं' - कवि इस पंक्ति के द्वारा क्या कहना चाहता है?
Solution: इस पंक्ति के माध्यम से कवि ईश्वर से यह स्पष्ट करना चाहता है कि उसकी प्रार्थना जीवन में आने वाली किसी भी विपदा या दुख से बचने के लिए नहीं है। बल्कि, वह यह चाहता है कि जब विपदाएँ आएँ तो वह उनसे घबराए नहीं, बल्कि उनमें आत्म-विश्वास के साथ निर्भीक होकर हर परिस्थिति का सामना करने का साहस विकसित कर सके। वह समस्याओं से पलायन नहीं चाहता, बल्कि उनसे लड़ने की क्षमता चाहता है।

प्रश्न 3

कवि सहायक के न मिलने पर क्या प्रार्थना करता है?
Solution: कवि प्रार्थना करता है कि विपरीत परिस्थितियों में जब उसे कोई सहायक न मिले, तब भी उसका आत्म-बल और पौरुष (साहस) कम न हो। वह ईश्वर से यह वरदान माँगता है कि वह किसी भी कष्ट को धैर्य और सहनशीलता के साथ सहने में सक्षम हो, भले ही उसे अकेले ही उन परिस्थितियों का सामना करना पड़े।

प्रश्न 4

Solution: पूरी कविता में कवि ने ईश्वर से साहस, आत्मबल और आत्मविश्वास माँगा है। अंत में, कवि ईश्वर से यह अनुनय करता है कि यदि सभी लोग उसे धोखा दें या उसे चारों ओर से दुख घेर लें, तब भी ईश्वर के प्रति उसकी आस्था और विश्वास कम न हो। वह चाहता है कि उसका ईश्वर में विश्वास कभी डगमगाए नहीं। इसके अतिरिक्त, वह यह भी कामना करता है कि सुख के क्षणों में भी वह ईश्वर को हर पल याद करता रहे और उसे भूले नहीं।

प्रश्न 5

आत्मत्राण शीर्षक की सार्थकता कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
Solution: 'आत्मत्राण' शब्द का अर्थ है आत्मा का त्राण, अर्थात् आत्मा या मन के भय का निवारण और उससे मुक्ति। इस कविता के संदर्भ में, 'त्राण' शब्द का प्रयोग बचाव, आश्रय और भय निवारण के अर्थ में किया जा सकता है। कवि यह प्रार्थना नहीं करता कि उसे जीवन में कोई दुःख न मिले, बल्कि वह दुखों को निर्भय होकर सहन करने और उन्हें झेलने की शक्ति के लिए प्रार्थना करता है। वह ईश्वर से बल-पौरुष बनाए रखने और कष्टों को धैर्य से सहने की क्षमता माँगता है। इस प्रकार, यह शीर्षक कविता के मूल भाव को पूर्णतः सार्थक करता है, क्योंकि यह कवि की आंतरिक शक्ति और आत्म-सुरक्षा की कामना को दर्शाता है।

प्रश्न 6

अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आप प्रार्थना के अतिरिक्त और क्या-क्या प्रयास करते हैं? लिखिए।
Solution: अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना के अतिरिक्त, हम निम्नलिखित प्रयास करते हैं:
  1. कठिन परिश्रम और निरंतर संघर्ष करते हैं ताकि अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें।
  2. सफलता प्राप्त होने तक धैर्य बनाए रखते हैं और अपनी योजनाओं पर टिके रहते हैं।
  3. जीवन में आने वाली कठिनाइयों और बाधाओं से घबराते नहीं हैं और न ही उनसे पीछे हटते हैं, बल्कि उनका सामना करते हैं।
  4. अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें सुधारने का प्रयास करते हैं।
  5. सही योजना बनाकर और उसे क्रियान्वित करके अपनी इच्छाओं को साकार करने का प्रयास करते हैं।

प्रश्न 7

क्या कवि की यह प्रार्थना आपको अन्य प्रार्थना गीतों से अलग लगती है? यदि हाँ, तो कैसे?
Solution: हाँ, कवि की यह प्रार्थना अन्य सामान्य प्रार्थना गीतों से निश्चित रूप से अलग लगती है। अन्य प्रार्थना गीतों में प्रायः दास्य भाव, ईश्वर के प्रति पूर्ण आत्मसमर्पण, समस्त दुखों को दूर करके सुख-शांति की कामना, व्यक्तिगत या सामूहिक कल्याण की प्रार्थना, और ईश्वर से सभी कार्य पूरे करने का निवेदन होता है। इसके विपरीत, इस कविता में कवि कष्टों से सीधे छुटकारा पाने की प्रार्थना नहीं करता। वह ईश्वर से दुखों को सहने की शक्ति, आत्मविश्वास और निर्भयता की प्रार्थना करता है। कवि मुसीबत में भयभीत नहीं होना चाहता और सुख के दिनों में भी ईश्वर का स्मरण बनाए रखना चाहता है। यह प्रार्थना किसी सांसारिक या भौतिक सुख की कामना के लिए नहीं है, बल्कि यह आत्म-बल, कर्मठता और ईश्वर में अटूट आस्था बनाए रखने पर केंद्रित है।

प्रश्न 8

निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए -
  1. नत शिर होकर सुख के दिन में
  2. तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में।
Solution: इन पंक्तियों का भाव यह है कि कवि ईश्वर से प्रार्थना करता है कि सुख के दिनों में भी वह विनम्रता (नत शिर) के साथ ईश्वर को हर पल, हर क्षण स्मरण रखे और उसके मुख (ईश्वर के स्वरूप) को पहचानता रहे। कवि यह नहीं चाहता कि सुख मिलने पर वह ईश्वर को भूल जाए, बल्कि वह सुख और दुख दोनों ही अवस्थाओं में ईश्वर के प्रति समान भाव और श्रद्धा बनाए रखना चाहता है।

प्रश्न 9

हानि उठानी पड़े जगत् में लाभ अगर वंचना रही तो भी मन में ना मानूँ क्षय।
Solution: कवि ईश्वर से यह प्रार्थना करता है कि यदि संसार में उसे लाभ के स्थान पर हानि ही उठानी पड़े, या उसे किसी प्रकार का छल या धोखा मिले, तब भी वह अपने मन में किसी प्रकार की कमी या हताशा महसूस न करे। वह चाहता है कि ऐसी परिस्थितियों में भी उसका मनोबल बना रहे, वह विचलित न हो और ईश्वर के प्रति उसकी आस्था, आशा और विश्वास अक्षुण्ण रहे।

प्रश्न 10

तरने की हो शक्ति अनामय मेरा भार अगर लघु करके न दो सांत्वना नहीं सही।
Solution: कवि इस पंक्ति के माध्यम से यह व्यक्त करता है कि वह स्वयं इस संसार रूपी भवसागर को पार करने की शक्ति चाहता है। वह यह नहीं चाहता कि ईश्वर उसके जीवन के दुखों या जिम्मेदारियों के भार को कम कर दे या उसे सांत्वना देकर आराम पहुँचाए। कवि अपनी जिम्मेदारियों को कम करने की या उनसे बचने की प्रार्थना नहीं कर रहा है, बल्कि वह उन जिम्मेदारियों और संघर्षों का सामना करने और उन्हें सहने की शक्ति के लिए प्रार्थना कर रहा है।

Common mistakes

  • Confusing the poet's prayer for protection with a prayer for avoidance of problems.
  • Misinterpreting 'आत्मत्राण' as simply seeking help rather than developing inner strength.
  • Overlooking the importance of maintaining faith during difficult times.
  • Focusing only on the literal meaning of the words without grasping the deeper philosophical message.

Revision tips

  • Read the poem carefully to grasp the emotional tone and the poet's requests.
  • Focus on understanding the core message: praying for strength, not for problems to disappear.
  • Analyze each question and its corresponding solution to ensure a clear understanding of the concepts.
  • Pay attention to the explanation of 'आत्मत्राण' and its significance.
  • Consider how the poem's themes relate to real-life challenges and personal resilience.

Practice MCQs

Q1. कवि ईश्वर से क्या प्रार्थना नहीं कर रहा है?

Q2. कवि 'आत्मत्राण' से क्या तात्पर्य समझता है?

Q3. सहायक के न मिलने पर कवि ईश्वर से क्या चाहता है?

Q4. सुख के दिनों में कवि ईश्वर को कैसे याद रखना चाहता है?

Q5. यह प्रार्थना अन्य प्रार्थना गीतों से कैसे भिन्न है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श के अध्याय 8 में मुख्य विषय क्या है?

अध्याय 8 की कविता का मुख्य विषय आत्म-निर्भरता, आंतरिक शक्ति और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के लिए साहस की प्रार्थना है, न कि कठिनाइयों से बचने की।

कवि ईश्वर से क्या विशेष प्रार्थना कर रहा है?

कवि ईश्वर से यह प्रार्थना कर रहा है कि उसे जीवन की विपदाओं से दूर न रखा जाए, बल्कि उन विपदाओं का सामना करने के लिए पर्याप्त शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्रदान किया जाए।

'आत्मत्राण' शीर्षक का क्या अर्थ है और यह कविता के लिए क्यों उपयुक्त है?

'आत्मत्राण' का अर्थ है आत्मा का त्राण या भय से मुक्ति। यह शीर्षक उपयुक्त है क्योंकि कवि ईश्वर से दुखों से बचने की नहीं, बल्कि उन्हें निर्भय होकर सहने की शक्ति माँग रहा है।

क्या कवि सुख के दिनों में ईश्वर को भूल जाना चाहता है?

नहीं, कवि सुख के दिनों में भी ईश्वर को हर पल, श्रद्धा भाव से याद रखना चाहता है ताकि उसका विश्वास बना रहे।

यह कविता अन्य प्रार्थना गीतों से किस प्रकार भिन्न है?

यह कविता अन्य प्रार्थना गीतों से भिन्न है क्योंकि इसमें सुख-शांति या दुखों से मुक्ति की कामना के बजाय, दुखों को सहने की शक्ति और आत्मबल की प्रार्थना की गई है।

इन NCERT समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?

ये समाधान कविता के गहन अर्थ, मुख्य संदेश और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने में मदद करते हैं, जिससे छात्र परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का सटीक उत्तर दे सकते हैं।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.