CBSE Class 10 Hindi स्पर्श NCERT Solutions Chapter 10

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CBSE Class 10 Hindi (स्पर्श) Chapter 10 NCERT Solutions delve into the pivotal events of January 26, 1931, a landmark day in India's fight for independence. This chapter explores the meticulous preparations undertaken by the citizens of Calcutta to observe this significant date. It sheds light on the distinctive atmosphere that permeated the city and contrasts the official directives with the public's pronouncements. The solutions meticulously detail the procession, the circumstances leading to its interruption, the active participation of women, and the consequences of the police intervention. Furthermore, the importance of capturing the essence of this struggle through photography is examined, alongside the unparalleled nature of the day's occurrences. The solutions underscore the bravery and resolve of those who defied British authority, offering students a deeper understanding of the historical context and the fervent spirit of the freedom movement, thereby enhancing their exam readiness.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectस्पर्श
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 10

Chapter summary

NCERT Solutions for CBSE Class 10 Hindi (स्पर्श) Chapter 10 cover the events of January 26, 1931, in Calcutta. The solutions explain the elaborate preparations for the day, the unique spirit of defiance against British rule, and the contrast between police and council notices. They detail the disruption of the procession, the role of women, and the significance of documenting the struggle. The chapter emphasizes the unprecedented nature of the public gathering and the challenge posed to the authorities, offering insights into the Indian freedom movement.

Learning outcomes

  • Understand the historical significance of January 26, 1931, in India's freedom struggle.
  • Analyze the preparations and atmosphere created by citizens to observe the day.
  • Differentiate between official restrictions and public defiance.
  • Explain the role and participation of women in the freedom movement.
  • Evaluate the impact of police actions on public gatherings.
  • Appreciate the courage shown by individuals in challenging oppressive laws.

Topics covered

Paper topics

  • 26 जनवरी 1931 का महत्व
  • कलकत्ता में स्वतंत्रता संग्राम की तैयारियाँ
  • राष्ट्रीय झंडा फहराना
  • पुलिस कमिश्नर और कौंसिल के नोटिस
  • धर्मतल्ले के मोड़ पर जुलूस का टूटना
  • महिलाओं की भूमिका
  • घायलों की देखभाल और फोटो खींचना
  • लाल बाजार की घटना
  • कानून भंग का कार्य
  • अपूर्व दिन का वर्णन
  • कलकत्तावासियों का योगदान
  • स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा

Important topics

  • 26 जनवरी 1931 का ऐतिहासिक महत्व
  • जनता द्वारा स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी
  • महिलाओं की अग्रणी भूमिका
  • ब्रिटिश सरकार के दमनकारी कानून और उनका विरोध
  • जुलूस और सभाओं का आयोजन
  • देशभक्ति और बलिदान की भावना

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गई?
Solution: 26 जनवरी 1931 के दिन को अविस्मरणीय बनाने के लिए कलकत्तावासियों ने व्यापक स्तर पर तैयारियाँ की थीं। लोगों ने अपने घरों और इमारतों को खूब सजाया, मानो स्वतंत्रता प्राप्त हो चुकी हो। पूरे शहर में राष्ट्रीय झंडे फहराए गए। शाम को मोनुमेंट के नीचे एक बड़ी सभा का आयोजन किया गया था, जहाँ झंडा फहराने की योजना थी। इन तैयारियों से उस दिन के महत्व को और भी बढ़ा दिया गया।

प्रश्न 2

'आज जो बात थी वह निराली थी' - किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला था? स्पष्ट कीजिए।
Solution: यह कथन इस बात से स्पष्ट होता है कि 26 जनवरी का दिन अपने आप में असाधारण था क्योंकि इसे खास बनाने के लिए कलकत्ता के लोग हर संभव प्रयास कर रहे थे। निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद, सैकड़ों लोग तीन बजे से ही पार्क में इकट्ठा होने लगे थे। स्त्रियाँ भी जुलूस में उत्साहपूर्वक भाग ले रही थीं। लोग टोलियों में घूम रहे थे और जगह-जगह राष्ट्रीय झंडे फहरा रहे थे, जो उस दिन के अनूठे माहौल को दर्शाता था।

प्रश्न 3

पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?
Solution: पुलिस कमिश्नर का नोटिस एक सरकारी आदेश था जो कुछ धाराओं का हवाला देते हुए सभा करने पर रोक लगाता था और भाग लेने वालों को दोषी ठहराने की चेतावनी देता था। इसके विपरीत, कौंसिल का नोटिस एक खुली चुनौती थी, जिसमें स्पष्ट रूप से बताया गया था कि मोनुमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। यह अंतर सरकार के भय फैलाने के प्रयास और जनता की देशभक्ति व अवज्ञा के बीच का था।

प्रश्न 4

धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?
Solution: धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस कई कारणों से टूट गया। पुलिस ने जनता पर लाठियाँ बरसाना शुरू कर दिया था, जिससे कई लोग घायल हो गए थे। इसी दौरान सुभाष बाबू को गिरफ्तार कर लिया गया था। इन हिंसक घटनाओं और नेताओं की गिरफ्तारी के कारण जुलूस में अव्यवस्था फैल गई और वह बिखर गया।

प्रश्न 5

डॉ. दास गुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख तो कर ही रहे थे, उनके फोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।
Solution: डॉ. दास गुप्ता द्वारा घायलों के फोटो खिंचवाने की मुख्य वजह यह थी कि वे अंग्रेजी सरकार के इस अमानवीय और क्रूर कृत्य को पूरे देश के सामने लाना चाहते थे। इन तस्वीरों को समाचार पत्रों में प्रकाशित करवाकर वे जनता को प्रेरित करना चाहते थे कि वे अंग्रेजों के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाएं और देश को आजाद कराने के आंदोलन में सहयोग दें।

प्रश्न 6

सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?
Solution: सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज ने अत्यंत महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई थी। स्त्रियों ने विभिन्न तरीकों से जुलूस का नेतृत्व किया, जैसे जानकी देवी और मदालसा बजाज ने जुलूस का सफल नेतृत्व किया। उन्होंने झंडोत्सव में भाग लिया, मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहराया और घोषणा पत्र पढ़ा। लगभग 105 स्त्रियों ने पुलिस के सामने अपनी गिरफ्तारी दी और अंग्रेजों के अत्याचारों का सामना किया, जो उनकी बहादुरी को दर्शाता है।

प्रश्न 7

जुलूस के लाल बाजार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?
Solution: जब जुलूस लाल बाजार पहुँचा, तो पुलिस ने तुरंत लाठियाँ बरसाना शुरू कर दिया। इस लाठीचार्ज में सुभाष बाबू को गिरफ्तार कर लिया गया और मदालसा बजाज को भी पुलिस ने पकड़ लिया। इस घटना में कई लोग घायल हुए और कई गिरफ्तार भी किए गए, जिससे जुलूस में अफरातफरी मच गई।

प्रश्न 8

'जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।' यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।
Solution: यहाँ पर पुलिस कमिश्नर द्वारा लागू किए गए उस कानून को भंग करने की बात कही गई है, जिसके अनुसार किसी भी प्रकार की सभा आयोजित करने या उसमें भाग लेने की मनाही थी। मेरे विचार से, इस कानून को भंग करना अत्यंत आवश्यक था। यदि ऐसा न किया जाता, तो स्वतंत्रता की भावना को बढ़ावा नहीं मिलता। अंग्रेजों के इस दमनकारी कानून को तोड़ना उनके लिए एक खुली चुनौती थी, जो यह दर्शाता था कि यह देश भारतीयों का है और रहेगा।

प्रश्न 9

बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: मेरे विचार में यह दिन अपूर्व इसलिए था क्योंकि इससे पहले कलकत्ता में इतने बड़े पैमाने पर और इतने संगठित तरीके से कोई जुलूस नहीं निकाला गया था। इस दिन सरकार को जिस प्रकार खुली चुनौती दी गई, वह अभूतपूर्व थी। विशेष रूप से, स्त्रियों का इतनी बड़ी संख्या में भाग लेना और गिरफ्तारी देना भी इस दिन को असाधारण और यादगार बनाता है। यह दिन स्वतंत्रता संग्राम में जनता की दृढ़ता और साहस का प्रतीक बन गया।

प्रश्न 10

आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया।
Solution: इस पंक्ति का आशय यह है कि इससे पहले यह माना जाता था कि कलकत्तावासी स्वतंत्रता संग्राम में उतना सक्रिय योगदान नहीं दे रहे हैं, जो उनके लिए एक कलंक की बात थी। लेकिन 26 जनवरी 1931 के दिन हुए अभूतपूर्व प्रदर्शन और लोगों की सक्रिय भागीदारी ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया। इस दिन के कार्यों ने कलकत्तावासियों के नाम से जुड़े इस कलंक को काफी हद तक धो दिया और उनकी देशभक्ति को उजागर किया।

Common mistakes

  • Confusing the specific date and year of the events.
  • Underestimating the role of women in the freedom struggle.
  • Not clearly distinguishing between the police commissioner's notice and the council's notice.
  • Failing to connect the photographs taken with the broader goal of raising awareness.

Revision tips

  • Focus on the key dates and events mentioned in the chapter.
  • Understand the motivations behind the citizens' actions and the authorities' responses.
  • Pay attention to the specific roles played by different individuals and groups, especially women.
  • Relate the events described to the larger context of India's fight for independence.
  • Practice explaining the significance of the day in your own words.

Practice MCQs

Q1. 26 जनवरी 1931 को कलकत्तावासियों ने अपने मकानों को कैसे सजाया था?

Q2. धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?

Q3. डॉ. दास गुप्ता द्वारा घायलों के फोटो उतरवाने का मुख्य उद्देश्य क्या था?

Q4. सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?

Q5. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में मुख्य अंतर क्या था?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह समाधान CBSE कक्षा 10 के हिंदी (स्पर्श) विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 10 पर केंद्रित हैं।

अध्याय 10 में किस ऐतिहासिक घटना का वर्णन है?

अध्याय 10 मुख्य रूप से 26 जनवरी 1931 को कलकत्ता में हुए स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित घटनाओं का वर्णन करता है, जब लोगों ने राष्ट्रीय झंडा फहराने और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा लेने का प्रयास किया था।

क्या इन समाधानों में प्रश्नों के उत्तर विस्तृत हैं?

हाँ, इन समाधानों में प्रत्येक प्रश्न का उत्तर विस्तृत और स्पष्ट रूप से समझाया गया है, जिसमें परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक सभी बिंदु शामिल हैं।

महिलाओं की भूमिका के बारे में क्या बताया गया है?

समाधानों में बताया गया है कि सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज ने सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसमें जुलूस का नेतृत्व करना और गिरफ्तारी देना शामिल था।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान छात्रों को अध्याय की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके महत्व को स्पष्ट करते हैं, और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने के लिए एक ठोस आधार प्रदान करते हैं।

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