CBSE Class 10 Hindi B स्पर्श पाठ 2 मीरा NCERT Solutions

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CBSE Class 10 Hindi B, 'Sparsh' Chapter 2, delves into the devotional poetry of Meera Bai. These solutions explore her profound love and supplications to Lord Krishna, particularly focusing on how she implores him to end her suffering by recalling his past acts of grace for devotees like Draupadi and Prahlada. The text also examines Meera's yearning to serve Krishna as a devoted 'chakri' (servant) to achieve his divine darshan and closeness. It highlights the aesthetic portrayal of Krishna in her verses and analyzes the linguistic and stylistic features of her poetry, including her unique blend of Rajasthani and Braj dialects and her skillful use of poetic devices. These solutions aim to enhance students' understanding of Meera's Bhakti poetry and aid in their exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectस्पर्श
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. मीराः पद्य

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi B 'Sparsh' Chapter 2, 'Meera: Padya', offers detailed explanations for questions based on Meera Bai's devotional poems. It covers the interpretation of her pleas for divine help, her desire for servitude to Lord Krishna, and the description of Krishna's divine form. The solutions also analyze Meera's unique language style and poetic devices, providing a comprehensive understanding of her works.

Learning outcomes

  • Understand Meera Bai's devotional pleas to Lord Krishna in her poems.
  • Analyze the significance of Krishna's past divine interventions as described by Meera.
  • Explain Meera's desire to serve Krishna and the benefits she seeks.
  • Describe the depiction of Krishna's physical beauty in Meera's poetry.
  • Identify and appreciate the language and stylistic features of Meera's poems.
  • Interpret the poetic beauty and emotional depth of the given verses.

Topics covered

Paper topics

  • मीरा के पद
  • श्रीकृष्ण की भक्ति
  • भक्तों की पीड़ा हरना
  • द्रौपदी की रक्षा
  • प्रह्लाद की रक्षा
  • गजराज की रक्षा
  • श्रीकृष्ण का रूप-सौंदर्य
  • मीरा की चाकरी की इच्छा
  • मीरा की भाषा शैली
  • भक्ति रस
  • अलंकार प्रयोग
  • काव्य-सौंदर्य स्पष्टीकरण

Important topics

  • मीरा के पदों का भावार्थ
  • श्रीकृष्ण द्वारा भक्तों की पीड़ा हरने के उदाहरण
  • मीरा की श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति
  • मीरा की भाषा और शैली
  • काव्य-सौंदर्य की व्याख्या

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

पहले पद में मीरा ने हिर से अपनी पीड़ा हरने की विनती किस प्रकार की है?
Solution:

पहले पद में, मीराबाई अपने आराध्य श्रीकृष्ण को संबोधित करते हुए उनसे अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं। वह उन्हें उनके पूर्व के कार्यों की याद दिलाती हैं, जैसे द्रौपदी की लाज बचाने के लिए वस्त्र बढ़ाना, भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण करना, और डूबते हुए हाथी (गजराज) को मगरमच्छ से बचाकर उसकी पीड़ा दूर करना। इन उदाहरणों के माध्यम से मीरा यह दर्शाना चाहती हैं कि श्रीकृष्ण सदैव अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करते आए हैं। वह स्वयं को श्रीकृष्ण की दासी बताते हुए उनसे भी संकटों से बचाने और पीड़ा मुक्त करने की प्रार्थना करती हैं।

प्रश्न 2

दूसरे पद में मीराबाई श्याम की चाकरी क्यों करना चाहती हैं? स्पष्ट कीजिए।
Solution:

दूसरे पद में मीराबाई श्रीकृष्ण (श्याम) की चाकरी (सेवा) करना चाहती हैं क्योंकि वह उन्हें अपना सर्वस्व समर्पित कर चुकी हैं। चाकरी करने से उन्हें श्रीकृष्ण के नित्य दर्शन का सुख प्राप्त होगा, जिससे उनका जीवन सफल हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, सेवा के बहाने उन्हें श्रीकृष्ण के नाम स्मरण रूपी 'खरची' (खर्च) और भावपूर्ण भक्ति रूपी 'जागीर' भी प्राप्त होगी। इस प्रकार, मीरा दासी बनकर तीनों लाभ - दर्शन, सुमिरन और भक्ति - प्राप्त कर अपना जीवन धन्य बनाना चाहती हैं।

प्रश्न 3

मीराबाई ने श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन कैसे किया है?
Solution:

मीराबाई श्रीकृष्ण के रूप-सौंदर्य का अत्यंत मनोहारी चित्रण करती हैं। वह बताती हैं कि श्रीकृष्ण ने अपने सिर पर मोर पंखों से बना मुकुट धारण किया हुआ है। उनके तन पर पीले वस्त्र सुशोभित हैं, जो उनके सौंदर्य को और बढ़ाते हैं। गले में वैजयंती के फूलों की माला उनके रूप को और भी आकर्षक बना रही है। जब श्रीकृष्ण बाँसुरी बजाते हुए वृन्दावन की गलियों में गाय चराते हैं, तो उनका यह रूप अत्यंत मनोरम और मनमोहक लगता है।

प्रश्न 4

मीराबाई की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।
Solution:

मीराबाई की भाषा शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. भाषा: उनकी भाषा मुख्य रूप से राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा है। इसमें गुजराती शब्दों का भी प्रभाव दिखाई देता है। यह भाषा अत्यंत सरल, सहज और आम बोलचाल के करीब है।
  2. शैली: उनके पदों की पदावली कोमल, भावों के अनुकूल और प्रवाहमयी है। उन्होंने मुक्तक गेय पदों की रचना की है, जिनमें उनकी प्रेम-पीड़ा और भक्ति की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है।
  3. रस और गुण: उनके पदों में मुख्य रूप से भक्ति रस और माधुर्य गुण की प्रधानता है। शांत रस के दर्शन भी होते हैं।
  4. अलंकार: मीराबाई ने अपने पदों में अनुप्रास, पुनरुक्ति प्रकाश, रूपक और उत्प्रेक्षा जैसे अलंकारों का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया है, जिससे पदों की सुंदरता बढ़ जाती है।
  5. अभिव्यक्ति: उन्होंने अपनी प्रेम की पीड़ा और ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति को व्यक्त करने के लिए अत्यंत भावुक और उपयुक्त शब्दावली का प्रयोग किया है।

प्रश्न 5

वे श्रीकृष्ण को पाने के लिए क्या-क्या कार्य करने को तैयार हैं?
Solution:

मीराबाई श्रीकृष्ण को अपने प्रियतम के रूप में देखती हैं और उन्हें पाने के लिए किसी भी कार्य को करने को तैयार हैं। वह श्रीकृष्ण की सेविका बनकर उनके साथ रहना चाहती हैं। वह उनके विहार के लिए सुंदर बाग-बगीचे लगाना चाहती हैं। वह वृन्दावन की गलियों में घूमकर कृष्ण की लीलाओं का गुणगान करना चाहती हैं। इसके अतिरिक्त, वह ऊँचे महलों में खिड़कियाँ बनवाना चाहती हैं ताकि वह आसानी से अपने प्रियतम के दर्शन कर सकें। वह कृष्ण से मिलने की तीव्र इच्छा में कुसुम्बी रंग की साड़ी पहनकर यमुना के तट पर आधी रात को उनकी प्रतीक्षा करने तक को तैयार हैं। संक्षेप में, वह अपने आराध्य से मिलने के लिए हर संभव प्रयास करने को तत्पर हैं।

पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए - 1

हरि आप हरो जन री भीर। द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर। भगत कारण रूप नरहरि, धरयोआप सरीर।
Solution:

प्रस्तुत पंक्तियाँ मीराबाई के पद से ली गई हैं। इनमें मीरा अपने आराध्य श्रीकृष्ण से अपनी और सामान्य जन की पीड़ा हरने की प्रार्थना कर रही हैं। वह श्रीकृष्ण को उनके भक्तों के प्रति उनकी करुणा और सहायता के लिए याद दिलाती हैं। वह कहती हैं कि हे प्रभु, आपने ही द्रौपदी की भरी सभा में लाज बचाई थी, जब दुःशासन ने उसके वस्त्र खींचे थे, तब आपने ही वस्त्र बढ़ाकर उसकी रक्षा की थी। आपने अपने प्रिय भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण कर हिरण्यकश्यप का वध किया था। इन उदाहरणों से मीरा यह कहना चाहती हैं कि आप भक्तवत्सल हैं और आवश्यकतानुसार अपना रूप धारण कर उनके कष्ट हरते हैं, अतः मेरी भी पीड़ा दूर करें। इस पद में भक्ति रस, माधुर्य गुण और सरल, सीधी भाषा का प्रयोग हुआ है।

पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए - 2

बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कृण्जर पीर। दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर।
Solution:

ये पंक्तियाँ भी मीराबाई के पद से उद्धृत हैं। इनमें मीरा श्रीकृष्ण (गिरधर) से अपनी पीड़ा हरने की विनती करती हैं। वह पुनः गजराज (हाथी) का उदाहरण देती हैं, जिसे मगरमच्छ ने पकड़ लिया था और वह डूब रहा था। श्रीकृष्ण ने उस हाथी की रक्षा की और उसकी पीड़ा को दूर किया। मीरा स्वयं को श्रीकृष्ण की दासी बताते हुए उनसे प्रार्थना करती हैं कि जिस प्रकार उन्होंने गजराज की पीड़ा का निवारण किया, उसी प्रकार वह भी उनकी सांसारिक और आध्यात्मिक पीड़ाओं को दूर करें और उन्हें भवसागर से पार उतारें। यहाँ भी भक्ति रस और करुणा का भाव प्रमुख है।

पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए - 3

चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची। भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।
Solution:

प्रस्तुत पंक्तियाँ मीराबाई के पद से हैं, जिनमें वह श्रीकृष्ण की सेवा (चाकरी) के बदले मिलने वाले लाभों का वर्णन करती हैं। मीरा कहती हैं कि यदि वह श्रीकृष्ण की चाकरी करेंगी, तो उन्हें नित्य उनके दर्शन का अवसर मिलेगा ('दरसण पास्यूँ')। इसके साथ ही, उन्हें श्रीकृष्ण के नाम स्मरण का 'खरची' (रोज़मर्रा का खर्च या साधन) प्राप्त होगा। सबसे महत्वपूर्ण, उन्हें 'भाव भगती' (भावपूर्ण भक्ति) रूपी 'जागीर' प्राप्त होगी। मीरा के अनुसार, ये तीनों लाभ - दर्शन, सुमिरन और भक्ति - अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इन्हें प्राप्त करके उनका जीवन सफल हो जाएगा। इस पद में मीरा की श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण और सेवा भाव की गहरी अभिव्यक्ति है।

Common mistakes

  • Confusing the specific instances of Krishna's help mentioned in the text.
  • Misinterpreting Meera's desire for 'chakri' as mere servitude rather than a path to devotion.
  • Overlooking the linguistic and stylistic elements of Meera's poetry.
  • Failing to connect the different parts of Meera's pleas and desires.

Revision tips

  • Read Meera's poems aloud to feel the rhythm and devotion.
  • Focus on understanding the historical and mythological references Meera uses.
  • Pay attention to the specific words Meera uses to describe Krishna and her feelings.
  • Practice explaining the poetic beauty of each stanza in your own words.
  • Use the solutions to clarify any doubts about the meaning of specific lines or phrases.

Practice MCQs

Q1. पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से क्या हरने की विनती करती हैं?

Q2. दूसरे पद में मीराबाई श्रीकृष्ण की चाकरी क्यों करना चाहती हैं?

Q3. मीराबाई ने श्रीकृष्ण के सिर पर क्या धारण करने का वर्णन किया है?

Q4. मीराबाई की भाषा मुख्य रूप से किन भाषाओं का मिश्रण है?

Q5. मीराबाई कृष्ण के दर्शन के लिए क्या पहनने को तैयार हैं?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह समाधान CBSE कक्षा 10 की हिंदी 'स्पर्श' पुस्तक के पाठ 2 'मीरा: पद्य' के लिए हैं।

पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से क्या अनुरोध करती हैं?

पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण से अपनी और सामान्य जन की पीड़ा हरने का अनुरोध करती हैं, जैसा कि उन्होंने पूर्व में द्रौपदी और प्रह्लाद जैसे भक्तों के लिए किया था।

मीराबाई श्रीकृष्ण की चाकरी क्यों करना चाहती हैं?

मीराबाई श्रीकृष्ण की चाकरी (सेवा) इसलिए करना चाहती हैं ताकि उन्हें प्रभु के दर्शन का सुख मिल सके, नाम स्मरण का अवसर मिले और भक्ति रूपी जागीर प्राप्त हो।

मीराबाई की भाषा की क्या विशेषताएँ हैं?

मीराबाई की भाषा राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा है, जो सरल, सहज और प्रवाहमयी है। इसमें गुजराती शब्दों का भी प्रयोग मिलता है।

इन समाधानों से छात्रों को परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद मिलेगी?

ये समाधान छात्रों को मीरा के पदों के अर्थ, उनकी भक्ति भावना, भाषा शैली और काव्य-सौंदर्य को गहराई से समझने में मदद करेंगे, जिससे वे परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का सटीक उत्तर दे सकेंगे।

क्या इन समाधानों में काव्य-सौंदर्य स्पष्टीकरण शामिल है?

हाँ, इन समाधानों में दिए गए पंक्तियों के काव्य-सौंदर्य का विस्तृत स्पष्टीकरण भी शामिल है, जो छात्रों को अलंकार, रस और भावों को समझने में सहायता करता है।

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