CBSE Class 10 Hindi B स्पर्श पाठ 3: बिहारी के दोहे - NCERT Solutions

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CBSE Class 10 Hindi B, 'स्पर्श' पाठ 3, presents the profound couplets of the celebrated poet Bihari. These NCERT Solutions offer a deep dive into the meaning and context of each doha, unraveling themes like the oppressive summer heat, the complexities of love and separation, the contrast between outward religious show and genuine devotion, and the charming exchanges between Radha and Krishna. The solutions meticulously explain Bihari's poetic language, vivid imagery, and the core messages embedded within his verses. They are crafted to enhance students' understanding of Bihari's poetic genius, identify literary techniques, and build confidence for their board exams through clear, analytical interpretations of every couplet.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectस्पर्श
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter3. बिहारीः दोहे

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi B 'स्पर्श' पाठ 3, 'बिहारी: दोहे', offers detailed explanations of Bihari's famous couplets. The solutions cover themes like the oppressive heat of summer, the subtle communication in love, the critique of religious hypocrisy, and the divine charm of Krishna. They aim to enhance students' understanding of poetic expression and the philosophical depth within these verses, aiding in exam preparation.

Learning outcomes

  • Understand the intense imagery used to describe summer heat in Bihari's dohas.
  • Analyze the subtle expressions of love and longing described in the couplets.
  • Differentiate between outward religious practices and true devotion to God.
  • Interpret the playful interactions and divine beauty of Krishna as depicted by Bihari.
  • Explain the use of poetic devices and language in Bihari's couplets.
  • Articulate the philosophical messages conveyed through the dohas.

Topics covered

Paper topics

  • बिहारी के दोहे
  • ग्रीष्म ऋतु का वर्णन
  • विरह वेदना
  • प्रेम निवेदन
  • सच्ची भक्ति
  • धार्मिक आडंबरों का खंडन
  • श्रीकृष्ण का सौंदर्य
  • गोपियों का प्रेम
  • काव्य सौंदर्य
  • भावार्थ स्पष्टीकरण

Important topics

  • सच्ची भक्ति बनाम धार्मिक आडंबर
  • विरह और प्रेम का चित्रण
  • प्रकृति के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति
  • श्रीकृष्ण के सौंदर्य का वर्णन
  • बिहारी के दोहों का भावार्थ

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

छाया भी कब छाया ढूँढ़ने लगती है?
Solution: ग्रीष्म ऋतु के जेठ मास की दोपहर में सूर्य की धूप अत्यंत तीव्र होती है, जिससे वस्तुओं की छाया भी छोटी होती जाती है और वह स्वयं गर्मी से बचने के लिए कहीं और आश्रय ढूंढने लगती है। कवि बिहारी इस तीव्र गर्मी का वर्णन करते हुए कहते हैं कि इस समय वृक्षों और घरों की छाया भी सिकुड़ कर घर के भीतर सिमट जाती है, मानो वह भी गर्मी से त्रस्त होकर कहीं छाया ढूंढ रही हो।

प्रश्न 2

बिहारी की नायिका यह क्यों कहती है 'कहिहै सबु तेरौ हियौ, मेरे हिय की' बात-स्पष्ट कीजिए।
Solution: बिहारी की नायिका विरह की अग्नि में जल रही है और अपने प्रियतम को संदेश भेजना चाहती है। परंतु, विरह की पीड़ा के कारण पत्र लिखते समय उसके हाथ काँपते हैं और आँखों से आँसू बहने लगते हैं, जिससे वह अपनी पूरी बात लिख पाने में असमर्थ है। साथ ही, वह अपनी सखी से यह भी कहती है कि उसे लज्जा भी आ रही है। इसलिए, वह अपनी सखी से कहती है कि तुम मेरे हृदय की व्यथा को समझ जाओगी, क्योंकि तुम्हारा हृदय भी वही महसूस करेगा जो मेरा हृदय महसूस कर रहा है। सच्चे प्रेमी एक-दूसरे के मन की भावनाओं को बिना कहे ही समझ जाते हैं।

प्रश्न 3

सच्चे मन में राम बसते हैं-दोहे के संदर्भानुसार भाव स्पष्ट कीजिए।
Solution: कवि बिहारी के अनुसार, ईश्वर की प्राप्ति के लिए हृदय की पवित्रता और सच्चाई सबसे महत्वपूर्ण है। वे बाहरी धार्मिक आडंबरों, जैसे माला जपना, माथे पर तिलक लगाना या छापे लगाना, को व्यर्थ मानते हैं। उनके अनुसार, जो लोग इन दिखावटी कर्मकांडों में लगे रहते हैं, वे दुनिया को धोखा दे सकते हैं, पर ईश्वर को नहीं। भगवान राम तो केवल उसी भक्त के हृदय में निवास करते हैं जो सच्चे मन से उसकी भक्ति करता है। इसलिए, मन पर नियंत्रण और सच्ची निष्ठा ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है।

प्रश्न 4

गोपियाँ श्रीकृष्ण की बाँसुरी क्यों छिपा लेती हैं?
Solution: गोपियाँ श्रीकृष्ण से अत्यंत प्रेम करती हैं और उनसे बातें करके अपने मन के भाव व्यक्त करना चाहती हैं। श्रीकृष्ण को अपनी बाँसुरी अत्यंत प्रिय है और उसे बजाते समय वे अपनी सुध-बुध खो देते हैं। गोपियाँ श्रीकृष्ण का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने और उनसे अधिक समय तक बात करने के उद्देश्य से उनकी बाँसुरी छिपा लेती हैं। जब श्रीकृष्ण उनसे बाँसुरी माँगते हैं, तो गोपियाँ मना कर देती हैं। इस बहाने उन्हें श्रीकृष्ण से बात करने का अवसर मिल जाता है, जिससे वे प्रसन्न होती हैं।

प्रश्न 5

कवि ने सभी की उपस्थिति में भी कैसे बात की जा सकती है, इसका वर्णन किस प्रकार किया है? अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: कवि बिहारी बताते हैं कि प्रेम का प्रदर्शन केवल एकांत में ही नहीं, बल्कि सबके बीच भी संभव है, वह भी बिना शब्दों के। वे वर्णन करते हैं कि जब नायिका घर के सदस्यों के बीच बैठी होती है, तब नायक द्वार पर आकर इशारों से प्रेम का निवेदन करता है। नायिका इशारे से मना कर देती है, जिस पर नायक मोहित हो जाता है। नायिका पहले खीजती है, लेकिन फिर दोनों की आँखें मिलती हैं और आँखों ही आँखों में प्रेम की स्वीकृति हो जाती है। इस पर नायक प्रसन्न होता है और नायिका को लज्जा आती है। इस प्रकार, कवि का कहना है कि प्रेम प्रदर्शन के लिए शब्दों की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि आँखों के इशारे और हाव-भाव ही पर्याप्त होते हैं।

प्रश्न 6

मनौ नीलमनी-सैल पर आतपु परयो प्रभात।
Solution: इस पंक्ति में कवि बिहारी ने श्रीकृष्ण के अनुपम सौंदर्य का वर्णन किया है। श्रीकृष्ण के साँवले शरीर पर पीले वस्त्र ऐसे सुशोभित हो रहे हैं, मानो किसी विशाल नीलमणि पर्वत पर सुबह की सुनहरी किरणें पड़ रही हों। यह उपमा श्रीकृष्ण के श्याम वर्ण और उनके पीले वस्त्रों के संयोग से उत्पन्न होने वाले अद्भुत सौंदर्य को दर्शाती है।

प्रश्न 7

जगतु तपोबन सौ कियौ दीरघ-दाघ निदाघ।
Solution: इस पंक्ति का भाव यह है कि ग्रीष्म ऋतु की भीषण गर्मी ने पूरे संसार को एक तपोवन के समान बना दिया है। गर्मी की तीव्रता के कारण सभी जीव, जो सामान्यतः एक-दूसरे के शत्रु होते हैं, जैसे साँप और मोर, हिरण और सिंह, गर्मी से बचने के लिए एक साथ रहने लगे हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो गर्मी के प्रभाव से उन्होंने अपनी आपसी शत्रुता भुला दी है और वे प्रेमपूर्वक एक साथ निवास कर रहे हैं, जैसा कि तपोवन में होता है।

प्रश्न 8

जपमाला, छापैं, तिलक सरै न एकौ काम्। मन-काँचै नाचै बृथा, साँचै राँचै रामु।।
Solution: इन पंक्तियों के माध्यम से कवि बिहारी बाहरी धार्मिक आडंबरों का खंडन करते हुए सच्ची भक्ति पर बल देते हैं। उनका कहना है कि केवल माला जपने, माथे पर तिलक लगाने या छापा लगाने जैसे बाहरी कर्मकांडों से ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती। ऐसे कार्य केवल कच्चे मन वाले या चंचल चित्त वाले लोग ही व्यर्थ में करते हैं, जो दुनिया को धोखा दे सकते हैं पर ईश्वर को नहीं। भगवान राम तो केवल उसी व्यक्ति से प्रसन्न होते हैं जो सच्चे हृदय से उसकी भक्ति करता है और उसी में लीन रहता है। इसलिए, मन की पवित्रता और ईश्वर में निष्ठा ही सच्ची भक्ति है।

Common mistakes

  • Confusing literal meaning with the deeper philosophical or emotional context.
  • Overlooking the subtle nuances of language and poetic devices used by Bihari.
  • Misinterpreting the critique of religious rituals as a dismissal of faith itself.
  • Failing to connect the imagery of nature (like summer heat) to the emotional state of characters.

Revision tips

  • Read each doha aloud to appreciate its rhythm and flow.
  • Focus on understanding the core message of each couplet before diving into details.
  • Relate the descriptions of nature and human emotions to real-life experiences.
  • Practice explaining the meaning of each doha in your own words.
  • Pay attention to the specific examples used by Bihari to illustrate his points.

Practice MCQs

Q1. ग्रीष्म ऋतु की दोपहर में छाया भी छाया क्यों ढूँढ़ने लगती है?

Q2. बिहारी की नायिका अपनी सखी से क्या कहती है?

Q3. कवि बिहारी के अनुसार ईश्वर की प्राप्ति किससे होती है?

Q4. गोपियाँ श्रीकृष्ण की बाँसुरी क्यों छिपा लेती हैं?

Q5. नीलमणि-सैल पर आतपु परयो प्रभात' पंक्ति में किसका वर्णन है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE बोर्ड की कक्षा 10 के हिंदी (बी) विषय के लिए हैं, विशेष रूप से 'स्पर्श' पुस्तक के पाठ 3: 'बिहारी के दोहे' पर केंद्रित हैं।

बिहारी के दोहों का मुख्य विषय क्या है?

बिहारी के दोहों में प्रेम, विरह, प्रकृति का चित्रण (विशेषकर ग्रीष्म ऋतु), सच्ची भक्ति और धार्मिक आडंबरों की आलोचना जैसे विभिन्न विषयों को शामिल किया गया है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान प्रत्येक दोहे के भावार्थ को स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद मिलेगी।

दोहा संख्या 1 में गर्मी का वर्णन कैसे किया गया है?

दोहा संख्या 1 में जेठ मास की दोपहर की तीव्र धूप का वर्णन है, जहाँ गर्मी इतनी अधिक है कि छाया भी छाया ढूंढने लगती है, जो गर्मी की भीषणता को दर्शाता है।

सच्ची भक्ति के बारे में बिहारी क्या कहते हैं?

बिहारी के अनुसार, सच्ची भक्ति बाहरी आडंबरों जैसे माला जपना या तिलक लगाना से नहीं, बल्कि मन की सच्चाई और ईश्वर में एकाग्रता से होती है। राम तो केवल सच्चे मन से ही प्रसन्न होते हैं।

गोपियाँ कृष्ण की बाँसुरी क्यों छिपाती हैं?

गोपियाँ कृष्ण से अधिक बात करने के लिए उनकी बाँसुरी छिपा लेती हैं, ताकि बाँसुरी माँगने के बहाने कृष्ण उनसे संवाद कर सकें।

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