CBSE Class 10 Hindi स्पर्श NCERT Solutions Chapter 15

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This chapter of CBSE Class 10 Hindi (स्पर्श) focuses on Chapter 15, offering detailed NCERT Solutions. It delves into concepts such as the distinction between pure gold and guinea gold, the definition of a 'practical idealist', and the essence of 'pure ideals' in the context of the chapter. The solutions also explore the Japanese concept of 'speed' in their drive for progress, the Japanese tea ceremony ('Cha-no-yu') and its associated rituals performed by the 'Chajin', and the serene ambiance of the tea-drinking space in Japan. Furthermore, it elaborates on the comparison between pure ideals and practicality, the graceful actions of the Chajin during the tea ceremony, the reasons for limited entry into the tea ceremony, and the profound shift in the author's perception after experiencing the tea ceremony. Finally, it highlights Gandhiji's remarkable leadership abilities with illustrative examples. These solutions are designed to aid students in understanding the chapter's nuances and preparing effectively for their examinations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectस्पर्श
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 15

Chapter summary

NCERT Solutions for CBSE Class 10 Hindi (स्पर्श) Chapter 15 provide in-depth answers to textual questions. The solutions cover the philosophical distinction between pure ideals and practicality, exemplified by gold and copper. They explain the concept of a 'practical idealist' and the characteristics of 'pure ideals'. The chapter also touches upon cultural aspects like the Japanese emphasis on speed and the intricate ritual of the 'Cha-no-yu' (tea ceremony), including the role of the 'Chajin' and the serene environment. The solutions analyze the author's experience of the tea ceremony and Gandhiji's leadership. This set of solutions aims to clarify complex ideas and enhance comprehension for students.

Learning outcomes

  • Understand the difference between pure ideals and practicality.
  • Define 'practical idealist' and 'pure ideals' as per the text.
  • Explain the significance of speed in Japanese culture.
  • Describe the Japanese tea ceremony ('Cha-no-yu') and its rituals.
  • Analyze the author's experience and transformation after the tea ceremony.
  • Recognize Gandhiji's leadership qualities through examples.

Topics covered

Paper topics

  • शुद्ध सोना बनाम गिन्नी का सोना
  • प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट की परिभाषा
  • शुद्ध आदर्श का अर्थ
  • जापानी संस्कृति में गति (Speed)
  • जापानी चाय समारोह (चा-नो-यू)
  • चाजीन की भूमिका और क्रियाएँ
  • टी-सेरेमनी का स्थान और विशेषताएँ
  • आदर्श और व्यावहारिकता की तुलना
  • लेखक का चाय पीने के बाद का अनुभव
  • गांधीजी का नेतृत्व क्षमता

Important topics

  • प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट और शुद्ध आदर्श
  • जापानी चाय समारोह (चा-नो-यू) की विधि और महत्व
  • आदर्शों की तुलना सोने और ताँबे से
  • लेखक द्वारा महसूस किया गया आंतरिक परिवर्तन
  • गांधीजी के नेतृत्व के उदाहरण

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?
Solution: शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना इसलिए अलग होता है क्योंकि शुद्ध सोना पूरी तरह से मिलावट रहित होता है। दूसरी ओर, गिन्नी के सोने में थोड़ी मात्रा में ताँबा मिलाया जाता है। इस मिलावट के कारण गिन्नी का सोना शुद्ध सोने की तुलना में अधिक चमकता है और अधिक मजबूत भी होता है।

प्रश्न 2

प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?
Solution: प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट (व्यावहारिक आदर्शवादी) उन व्यक्तियों को कहा जाता है जो अपने आदर्शों को केवल सैद्धांतिक रूप में नहीं रखते, बल्कि उन्हें व्यवहारिकता के साथ जोड़कर प्रस्तुत करते हैं। आज के समय में, केवल आदर्शों पर चलकर जीवन जीना कठिन हो सकता है, इसलिए इन आदर्शों को व्यवहारिकता के साँचे में ढालना आवश्यक हो जाता है।

प्रश्न 3

पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?
Solution: पाठ के संदर्भ में, शुद्ध आदर्श वह है जिसमें हानि या लाभ की कोई गुंजाइश नहीं होती। इसका अर्थ है कि व्यावहारिकता का प्रभाव शुद्ध आदर्शों पर नहीं पड़ता। ऐसे आदर्श जिनमें पूरे समाज की भलाई निहित हो और जो समाज के शाश्वत मूल्यों को बनाए रखने में सक्षम हों, उन्हें शुद्ध आदर्श माना जाता है।

प्रश्न 4

लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड' का इंजन लगने की बात क्यों कही है?
Solution: लेखक ने जापानियों के दिमाग में 'स्पीड' का इंजन लगने की बात इसलिए कही है क्योंकि जापानी लोग अपनी उन्नति और विकास की दौड़ में सबसे आगे रहने के लिए अत्यधिक प्रयासरत रहते हैं। वे हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति करना चाहते हैं, जो उनकी कार्यशैली और जीवनशैली में परिलक्षित होता है।

प्रश्न 5

जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?
Solution: जापानी भाषा में चाय पीने की विधि को "चा-नो-यू" कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ 'टी-सेरेमनी' (Tea Ceremony) है। इस समारोह में चाय पिलाने वाले व्यक्ति को "चाजीन" कहा जाता है।

प्रश्न 6

जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?
Solution: जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, वह स्थान पारम्परिक ढंग से सजाया जाता है। यह एक छोटा, प्राकृतिक रूप से सुसज्जित स्थान होता है जहाँ अत्यधिक शांति और गरिमा का माहौल होता है। इस स्थान की मुख्य विशेषता इसकी शांति है, जो आगंतुकों को सुकून प्रदान करती है।

प्रश्न 7

शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?
Solution: शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से इसलिए की गई है क्योंकि सोना अपनी शुद्धता में अमूल्य होता है और उसमें कोई मिलावट नहीं होती। इसी प्रकार, शुद्ध आदर्श भी अपने मूल स्वरूप में श्रेष्ठ होते हैं। व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से की गई है क्योंकि ताँबा सोने को मज़बूत तो बनाता है, पर उसकी शुद्धता को कम कर देता है। इसी तरह, व्यावहारिकता जीवन को सुगम बनाती है, पर अत्यधिक व्यावहारिकता शुद्ध आदर्शों को धूमिल कर सकती है। हालाँकि, आदर्शों के साथ व्यावहारिकता का मेल उन्हें अधिक सुंदर और प्रभावी बना सकता है।

प्रश्न 8

चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?
Solution: चाजीन ने टी-सेरेमनी से जुड़ी सभी क्रियाएँ अत्यंत गरिमापूर्ण और सहज ढंग से पूरी कीं। इसमें पर्णकुटी में अतिथियों का उठकर स्वागत करना, आराम से अँगीठी सुलगाना, चायदानी को व्यवस्थित रखना, दूसरे कमरे से चाय के बर्तन लाना, उन्हें तौलिए से सावधानीपूर्वक पोंछना और अंत में बर्तनों में चाय डालना जैसी क्रियाएँ शामिल थीं। प्रत्येक कार्य को बड़े ही सधे हुए और शांत तरीके से किया गया।

प्रश्न 9

'टी-सेरेमनी' में कितने आदिमयों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?
Solution: 'टी-सेरेमनी' में केवल तीन ही व्यक्तियों को प्रवेश दिया जाता था। इसका मुख्य कारण यह था कि वहाँ शांति और एकाग्रता का वातावरण बनाए रखा जा सके। अधिक लोगों के आने से शांति भंग हो सकती थी और वह उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता था कि व्यक्ति भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर कुछ पल वर्तमान में जी सके और भूत-भविष्य की चिंताओं से मुक्त हो सके।

प्रश्न 10

चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?
Solution: चाय पीने के बाद लेखक ने अपने भीतर एक गहरा परिवर्तन महसूस किया। उन्हें लगा जैसे उनके दिमाग की गति बहुत धीमी हो गई हो, मानो वह चलना ही बंद हो गया हो। कमरे में पसरा सन्नाटा भी उन्हें सुनाई देने लगा। उन्हें ऐसा अनुभव हुआ मानो वे अनंतकाल से जी रहे हों, और वे भूतकाल या भविष्य की चिंता में न पड़कर पूरी तरह वर्तमान क्षण में डूब गए हों।

प्रश्न 11

गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।
Solution: गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी, जिसकी पुष्टि उनके द्वारा चलाए गए आंदोलनों से होती है। उन्होंने अपने सभी आंदोलनों को व्यावहारिकता के धरातल से उठाकर आदर्शों के उच्च स्तर तक पहुँचाया। उनके नेतृत्व में 'भारत छोड़ो आंदोलन', 'सत्याग्रह', 'असहयोग आंदोलन' और 'दांडी मार्च' जैसे सभी आंदोलन सफल हुए। उन्होंने सत्य और अहिंसा को अपने संघर्ष का मुख्य हथियार बनाया और इन्हीं सिद्धांतों के बल पर ब्रिटिश साम्राज्य का सामना किया। उनके नेतृत्व में लाखों भारतीयों ने एकजुट होकर संघर्ष किया और देशवासी उनके नेतृत्व को स्वीकार करके गर्व का अनुभव करते थे।

Common mistakes

  • Confusing pure ideals with mere idealism without practicality.
  • Underestimating the significance of rituals and serenity in cultural practices.
  • Failing to connect abstract concepts like 'speed' to cultural drivers.
  • Not appreciating the author's subjective experience and its impact.

Revision tips

  • Focus on the analogies used, like gold vs. copper, to understand abstract concepts.
  • Pay close attention to the descriptions of the Japanese tea ceremony and its purpose.
  • Analyze the author's personal reflections after the tea ceremony for deeper meaning.
  • Connect Gandhiji's leadership traits to the chapter's themes of ideals and practicality.

Practice MCQs

Q1. शुद्ध सोना और गिन्नी के सोने में मुख्य अंतर क्या है?

Q2. पाठ के अनुसार 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' किसे कहा जाता है?

Q3. जापानियों के दिमाग में 'स्पीड' का इंजन लगने की बात लेखक ने क्यों कही है?

Q4. जापानी चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?

Q5. टी-सेरेमनी में शांति बनाए रखने के लिए कितने लोगों को प्रवेश दिया जाता था?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 10 के हिंदी (स्पर्श) विषय के लिए हैं, विशेष रूप से पाठ 15 के लिए।

पाठ 15 में 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' का क्या अर्थ समझाया गया है?

पाठ के अनुसार, 'प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट' वह व्यक्ति होता है जो अपने आदर्शों को आज के समय की व्यावहारिकता के साथ जोड़कर प्रस्तुत करता है, क्योंकि केवल आदर्शों से जीवन जीना कठिन हो सकता है।

जापानी चाय समारोह (चा-नो-यू) की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

जापानी चाय समारोह (चा-नो-यू) एक पारम्परिक, शांत और गरिमापूर्ण अनुष्ठान है जो एक विशेष, प्राकृतिक रूप से सजे स्थान पर होता है, जहाँ केवल कुछ लोग ही भाग ले सकते हैं।

लेखक ने चाय पीने के बाद क्या महसूस किया?

चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि उनके दिमाग की गति धीमी हो गई है, वे भूत-भविष्य की चिंता से मुक्त होकर वर्तमान क्षण में जी रहे हैं और उन्हें सन्नाटे की आवाज़ें भी सुनाई दे रही हैं।

गांधीजी के नेतृत्व क्षमता का उदाहरण पाठ में कैसे दिया गया है?

पाठ में गांधीजी के नेतृत्व क्षमता का उदाहरण उनके सत्य और अहिंसा पर आधारित सफल आंदोलनों (जैसे भारत छोड़ो, सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन) के माध्यम से दिया गया है, जिनमें लाखों भारतीयों ने उनका साथ दिया।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान पाठ के सभी प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद मिलेगी।

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