CBSE Class 9 Hindi NCERT Solutions: Chapter 9
CBSE Class 9 Hindi (Sparsh Bhag 1) के लिए प्रस्तुत यह अध्याय संत रविदास की भक्ति कविताओं 'अब कैसे छूटे राम नाम…' और 'ऐसी लाल तुझ बिनु…' पर केंद्रित है। ये समाधान भक्त और ईश्वर के गहरे संबंध की पड़ताल करते हैं, जिसमें रविदास द्वारा इस बंधन को दर्शाने के लिए उपयोग की गई विभिन्न उपमाओं का विश्लेषण किया गया है। छात्रों को ईश्वर और सांसारिक तत्वों के बीच की तुलनाओं, संगीतात्मकता उत्पन्न करने में तुकबंदी वाले शब्दों के महत्व और कुछ शब्दों के अंतर्संबंधों की विस्तृत व्याख्या मिलेगी। समाधान ईश्वर के लिए प्रयुक्त 'गरीब निवाज' (गरीबों का पालनहार) का अर्थ भी स्पष्ट करते हैं और ईश्वर की करुणा को उजागर करने वाली विशिष्ट पंक्तियों की व्याख्या करते हैं। इसके अतिरिक्त, छात्र कविताओं में प्रयुक्त कुछ पुराने हिंदी शब्दों के समकालीन रूपों को सीखेंगे और रविदास द्वारा अपने प्रभु के लिए उपयोग किए गए विभिन्न नामों की पहचान करेंगे। ये समाधान छात्रों को रविदास की कविता की बारीकियों को समझने और उनकी परीक्षाओं की प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 9. अब कैसे छूटे राम नाम … ऐसी लाल तुझ बिनु … |
Chapter summary
NCERT Solutions for Class 9 Hindi, Chapter 9, covers two devotional poems by Sant Ravidas: 'Ab Kaise Chhute Ram Naam...' and 'Aisi Laal Tujh Binu...'. The solutions focus on analyzing the poet's comparisons of God and devotee to natural elements, identifying rhyming words, and understanding word associations. They also explain the concept of God as 'Garib Niwaj' and interpret key poetic lines, providing modern equivalents for older words and listing the various names Ravidas uses for the divine. This chapter's solutions aid in comprehending devotional poetry and its rich imagery.
Learning outcomes
- Understand the devotional relationship between God and the devotee as depicted in Ravidas's poems.
- Identify and analyze the similes and metaphors used to compare God and the devotee.
- Recognize the use of rhyming words (tukant shabda) to enhance the musicality of the poems.
- Understand the meaning and significance of 'Garib Niwaj' in the context of the second poem.
- Interpret the meaning of specific lines and archaic words from the poems.
- Identify the various names used by Ravidas to address his Lord.
Topics covered
Paper topics
- Devotional poetry of Sant Ravidas
- Comparison of God and devotee
- Rhyming words (Tukant Shabda)
- Word associations
- Meaning of 'Garib Niwaj'
- Interpretation of poetic lines
- Modern equivalents of archaic words
- Names of God used by Ravidas
- Class 9 Hindi Literature
- Sparsh Bhag 1
Important topics
- Analysis of similes and metaphors in Ravidas's poetry
- Understanding the concept of divine compassion ('Garib Niwaj')
- Interpretation of key poetic lines and their deeper meaning
- Identifying and understanding archaic Hindi words
- The devotee-divine relationship
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Questions and Solutions
(क) पहले पद में भगवान और भक्त की जिन-जिन चीज़ों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए।
पहले पद में कवि रैदास ने भगवान और भक्त के अटूट संबंध को दर्शाने के लिए कई उपमाओं का प्रयोग किया है। इन तुलनाओं में भक्त स्वयं को भगवान के विभिन्न रूपों से जोड़ता है, जैसे:
- भगवान की तुलना घन (बादल) से की गई है, और भक्त की तुलना मोर से, जो घन को देखकर नाच उठता है।
- भगवान की तुलना चंद्रमा से की गई है, और भक्त की तुलना चकोर पक्षी से, जो चंद्रमा के प्रकाश का पान करता है।
- भगवान की तुलना दीपक से की गई है, और भक्त की तुलना उसकी बाती से, जो दीपक की लौ में जलकर प्रकाश फैलाती है।
- भगवान की तुलना मोती से की गई है, और भक्त की तुलना धागे से, जो मोती को पिरोकर माला बनाता है।
- भगवान की तुलना सुहागे (पारस पत्थर) से की गई है, जो सोने को खरा बनाता है, और भक्त की तुलना सोने से, जिसे सुहागा खरा बनाता है।
- भगवान की तुलना चंदन (सुगंधित काष्ठ) से की गई है, और भक्त की तुलना पानी से, जो चंदन के साथ मिलकर सुगंधित हो जाता है।
इन सभी उपमाओं के माध्यम से भक्त यह स्पष्ट करना चाहता है कि वह भगवान के बिना अधूरा है और उसी पर पूरी तरह निर्भर है।
(ख) पहले पद की प्रत्येक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद-सौंदर्य आ गया है, जैसे- पानी, समानी आदि। इस पद में से अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।
पहले पद में लय और संगीत उत्पन्न करने के लिए तुकांत शब्दों (समान तुक वाले शब्द) का प्रयोग किया गया है। 'पानी' और 'समानी' जैसे उदाहरणों के अतिरिक्त, इस पद में निम्नलिखित तुकांत शब्द पाए जाते हैं:
- मोरा - चकोरा
- जाकी - लागी
- बाती - ज्योंति
- मोती - पोती
- सुहागा - रंगा
- चंदन - बाँह (यहाँ 'बाँह' का प्रयोग 'संग' के अर्थ में हुआ है, जो 'चंदन' के साथ मिलकर एक ध्वनि-साम्य बनाता है)
इन तुकांत शब्दों के प्रयोग से पद में एक मधुर संगीतात्मकता आ गई है, जो श्रोताओं को आकर्षित करती है।
(ग) पहले पद में कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध हैं। ऐसे शब्दों को छाँटकर लिखिए - उदाहरण: दीपक बाती
पहले पद में कवि ने भगवान और भक्त के संबंध को स्पष्ट करने के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग किया है जो अर्थ की दृष्टि से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उदाहरण के तौर पर 'दीपक' और 'बाती' एक-दूसरे के पूरक हैं। इसी प्रकार, इस पद में निम्नलिखित शब्द युग्म अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध हैं:
- घन - मोर (घन के आने पर मोर प्रसन्न होता है)
- चंद - चकोरा (चकोरा चंद्रमा के प्रकाश को पीता है)
- मोती - धागा (धागा मोती को पिरोता है)
- सुहागा - सोना (सुहागा सोने को खरा बनाता है)
- चंदन - पानी (पानी चंदन के साथ मिलकर सुगंधित हो जाता है)
- स्वामी - दासा (स्वामी और दास का संबंध)
ये युग्म भक्त और भगवान के बीच के अभिन्न संबंध को दर्शाते हैं, जहाँ एक के बिना दूसरे का अस्तित्व अधूरा है।
(घ) दूसरे पद में कवि ने 'गरीब निवाजु' किसे कहा है? स्पष्ट कीजिए।
'गरीब निवाजु' का शाब्दिक अर्थ है 'गरीबों का उद्धार करने वाला' या 'गरीबों पर दया करने वाला'। इस पद में कवि रैदास ने ईश्वर को 'गरीब निवाजु' कहा है।
कवि ईश्वर को ऐसा इसलिए कहते हैं क्योंकि ईश्वर ही एकमात्र ऐसे हैं जो समाज में निम्न माने जाने वाले या दीन-दुखी लोगों का उद्धार करते हैं। वे किसी भी व्यक्ति के साथ छुआछूत या जातिगत भेदभाव नहीं करते। ईश्वर अपनी कृपा से ऐसे लोगों को भी सम्मान और उच्च पद प्रदान करते हैं, जिन्हें समाज तुच्छ समझता है। वे सभी के कष्टों को हरते हैं और उन्हें भवसागर (संसार के दुखों से मुक्ति) से पार उतारते हैं। इसलिए, रैदास ईश्वर को 'गरीब निवाजु' कहकर उनकी असीम कृपा और समानता के भाव का वर्णन करते हैं।
(ङ) दूसरे पद की 'जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का आशय यह है कि ईश्वर उन लोगों पर भी विशेष कृपा करते हैं जिन्हें समाज अछूत या निम्न मानता है। 'जाकी छोति जगत कउ लागै' का अर्थ है कि जिस व्यक्ति को संसार (समाज) छूने से भी परहेज करता है, या जिसे समाज में नीचा दिखाया जाता है, या जिससे लोग छुआछूत का व्यवहार करते हैं। 'ता पर तुहीं ढरै' का अर्थ है कि ईश्वर उसी व्यक्ति पर अपनी कृपा बरसाते हैं, उसी का उद्धार करते हैं।
इस पंक्ति के माध्यम से कवि रैदास यह बताना चाहते हैं कि ईश्वर जाति-पाति या सामाजिक ऊँच-नीच के भेद को नहीं मानते। वे सभी पर समान रूप से स्नेह और कृपा करते हैं, विशेषकर उन पर जिन्हें समाज ने उपेक्षित कर दिया है। ईश्वर की करुणा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सभी दीन-दुखियों के रक्षक हैं।
(छ) निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए - मोरा, चंद, बाती, जोति, बरै, राती, छत्रु, धरै, छोति, तुहीं, गुसइआ
यहाँ दिए गए पुराने हिंदी शब्दों के प्रचलित (आधुनिक) हिंदी रूप प्रस्तुत हैं:
- मोरा - मेरा
- चंद - चाँद
- बाती - बत्ती (दीपक की)
- जोति - ज्योति (प्रकाश, लौ)
- बरै - जलता है, जलती है
- राती - रात
- छत्रु - छत्र (छाता)
- धरै - धारण करता है, रखता है
- छोति - छूना, स्पर्श
- तुहीं - तुम ही
- गुसइआ - गुसाईं (स्वामी, ईश्वर)
इन शब्दों के प्रचलित रूप को समझने से कविताओं के अर्थ को समझना आसान हो जाता है।
(च) 'रैदास' ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है?
कवि रैदास ने अपने आराध्य देव और स्वामी को विभिन्न नामों से पुकारा है, जो उनके प्रेम और भक्ति को दर्शाते हैं। दूसरे पद में, उन्होंने अपने स्वामी को मुख्य रूप से निम्नलिखित नामों से संबोधित किया है:
- गुसाईं - यह ईश्वर के लिए एक आदरसूचक शब्द है, जिसका अर्थ स्वामी या प्रभु होता है।
- लाल - यह स्नेह और प्रेम को व्यक्त करने वाला संबोधन है, जैसे प्रिय या प्यारे।
- गरीब निवाजु - यह ईश्वर की उस विशेषता को दर्शाता है कि वे गरीबों और दीन-दुखियों पर विशेष कृपा करते हैं।
इन नामों के प्रयोग से रैदास ईश्वर के प्रति अपनी गहरी निष्ठा, प्रेम और निर्भरता व्यक्त करते हैं।
Common mistakes
- Confusing the roles of God and devotee in the comparisons.
- Misinterpreting the meaning of archaic words or phrases.
- Failing to identify all the rhyming words or associated word pairs.
- Not fully grasping the concept of divine compassion ('Garib Niwaj').
Revision tips
- Read both poems aloud to appreciate the rhythm and rhyme.
- Create a table listing all the comparisons between God and the devotee.
- Practice rewriting the archaic words into their modern Hindi equivalents.
- Focus on understanding the core message of divine love and compassion in each poem.
- Try to explain the meaning of 'Garib Niwaj' in your own words.
Practice MCQs
Q1. पहले पद में भक्त अपनी तुलना भगवान के किस रूप से करता है?
Explanation: पहले पद में भक्त अपनी तुलना भगवान के घन (बादल) के मोर से करता है।
Q2. दूसरे पद में कवि ईश्वर को क्या कहकर संबोधित करता है?
Explanation: दूसरे पद में कवि ईश्वर को 'गरीब निवाजु' कहकर संबोधित करता है, जिसका अर्थ है गरीबों पर दया करने वाला।
Q3. निम्नलिखित में से कौन सा शब्द युग्म पहले पद में भगवान और भक्त की तुलना के लिए प्रयुक्त नहीं हुआ है?
Explanation: सूरज-किरण का युग्म पहले पद में भगवान और भक्त की तुलना के लिए प्रयुक्त नहीं हुआ है। अन्य सभी युग्मों का प्रयोग हुआ है।
Q4. 'जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै' पंक्ति का क्या आशय है?
Explanation: इस पंक्ति का आशय है कि जिस निम्न वर्ग के व्यक्ति को संसार छूने से भी कतराता है, ईश्वर उसी पर विशेष कृपा बरसाते हैं।
Q5. रैदास ने अपने स्वामी को किन नामों से पुकारा है?
Explanation: रैदास ने अपने स्वामी को 'गुसाईं' और 'लाल' जैसे नामों से पुकारा है।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह समाधान CBSE कक्षा 9 की हिंदी (स्पर्श भाग-1) के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 9 पर केंद्रित हैं।
अध्याय 9 में कौन सी कविताएँ शामिल हैं?
अध्याय 9 में संत रैदास द्वारा रचित दो पद शामिल हैं: 'अब कैसे छूटे राम नाम...' और 'ऐसी लाल तुझ बिनु...'
समाधान में किस प्रकार की जानकारी प्रदान की गई है?
समाधान में कविताओं के प्रश्नों के विस्तृत उत्तर, भगवान और भक्त की तुलनाओं की व्याख्या, तुकांत शब्दों की पहचान, 'गरीब निवाजु' का अर्थ और पुरानी शब्दावली के आधुनिक रूप शामिल हैं।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान छात्रों को कविताओं की गहरी समझ विकसित करने, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करेंगे।
कवि ने ईश्वर की तुलना किन-किन चीजों से की है?
कवि ने ईश्वर की तुलना घन (बादल), चंद्र, दीपक, मोती, सुहाग और चंदन से की है।
'गरीब निवाजु' का क्या अर्थ है और कवि ने इसे किसे कहा है?
'गरीब निवाजु' का अर्थ है गरीबों पर दया करने वाला। कवि ने इस उपाधि से ईश्वर को संबोधित किया है क्योंकि वे गरीबों का उद्धार करते हैं और उन्हें सम्मान दिलाते हैं।
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