कक्षा 9 हिंदी NCERT समाधान: किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया
यह खंड कक्षा 9 की हिंदी पुस्तक 'क्षितिज भाग 1' के अध्याय 5, 'किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय लेखक की साहित्यिक यात्रा के प्रारंभिक चरणों पर प्रकाश डालता है, जिसमें दिल्ली जाने के उनके निर्णय के पीछे के कारणों, अंग्रेजी में कविता लिखने पर उनके पछतावे, और हरिवंशराय बच्चन जैसे साहित्यिक दिग्गजों से प्राप्त समर्थन का वर्णन है। समाधान लेखक द्वारा झेली गई विभिन्न कठिनाइयों, जैसे बेरोजगारी, पत्नी की मृत्यु का दुख, और आर्थिक संघर्षों का भी पता लगाते हैं। यह अध्याय छात्रों को लेखक के जीवन के उतार-चढ़ाव और साहित्यिक दुनिया में उनके प्रवेश को समझने में मदद करता है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में कार्य करता है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5 किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया |
Chapter summary
कक्षा 9 हिंदी के अध्याय 5, 'किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया' के लिए NCERT समाधान, लेखक की साहित्यिक यात्रा के शुरुआती दौर पर केंद्रित हैं। इसमें दिल्ली जाने के कारणों, अंग्रेजी में लिखने पर पछतावे, और बच्चन जैसे साहित्यकारों से मिले सहयोग का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। समाधान लेखक के जीवन की कठिनाइयों, जैसे आर्थिक तंगी, पत्नी का वियोग, और विभिन्न लोगों से मिले समर्थन का भी वर्णन करते हैं। यह अध्याय छात्रों को लेखक के संघर्षों और हिंदी साहित्य में उनके प्रवेश की प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।
Learning outcomes
- लेखक के दिल्ली जाने के कारणों को समझना।
- अंग्रेजी में कविता लिखने पर लेखक के पछतावे के कारणों का विश्लेषण करना।
- हरिवंशराय बच्चन और अन्य साहित्यकारों द्वारा लेखक को दिए गए सहयोग को पहचानना।
- लेखक द्वारा अपने जीवन में झेली गई कठिनाइयों का वर्णन करना।
- लेखक के हिंदी लेखन में कदम रखने की क्रमानुसार प्रक्रिया को समझना।
Topics covered
Paper topics
- लेखक का दिल्ली आगमन
- अंग्रेजी में कविता लेखन पर पछतावा
- हरिवंशराय बच्चन का सहयोग
- लेखक के जीवन की कठिनाइयाँ
- साहित्यिक यात्रा का आरंभ
- विभिन्न व्यक्तियों का सहयोग (तेजबहादुर सिंह, नरेंद्र शर्मा, शारदाचरण उकील, बच्चन के पिता, सुमित्रानंदन पंत, ससुराल पक्ष)
- लेखक के हिंदी लेखन में कदम रखने का क्रम
Important topics
- लेखक के दिल्ली जाने के कारण और परिस्थितियाँ
- हरिवंशराय बच्चन की भूमिका और लेखक पर प्रभाव
- लेखक द्वारा झेली गई प्रमुख कठिनाइयाँ
- लेखक के हिंदी साहित्य में प्रवेश की प्रक्रिया
- विभिन्न सहायक व्यक्तियों का योगदान
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
प्रश्न 3
प्रश्न 4
- बच्चन का स्वभाव संघर्षशील, परोपकारी और दृढ़ संकल्प वाला था।
- वे समय के पाबंद थे और कला की परख रखते थे; उन्होंने लेखक की एक ही सॉनेट पढ़कर उसकी प्रतिभा पहचान ली थी।
- वे अत्यंत कोमल हृदय और सहृदय व्यक्ति थे।
- वे कर्म से भी सहयोगी थे; उन्होंने न केवल लेखक को इलाहाबाद बुलाया बल्कि उसकी पढ़ाई का पूरा खर्च भी उठाया।
प्रश्न 5
- तेजबहादुर सिंह: लेखक के बड़े भाई, जिन्होंने आर्थिक तंगी के समय में कुछ पैसे भेजकर मदद की।
- कवि नरेंद्र शर्मा: लेखक के मित्र, जिन्होंने एक प्रेरक नोट छोड़कर लेखक को प्रोत्साहित किया।
- शारदाचरण उकील: कला शिक्षक, जिनसे लेखक ने पेंटिंग सीखी।
- बच्चन के पिता: इलाहाबाद में लेखक के स्थानीय अभिभावक बने।
- सुमित्रानंदन पंत: हिंदी के प्रसिद्ध कवि, जिन्होंने लेखक को इंडियन प्रेस में अनुवाद का काम दिलवाया और उनकी कविताओं में सुधार किया।
- ससुराल पक्ष: लेखक के विधुर होने पर, उन्होंने लेखक को अपनी दुकान पर कम्पाउंडरी का प्रशिक्षण दिया।
प्रश्न 6
- सन् 1933 में उनकी कुछ रचनाएँ 'सरस्वती' और 'चाँद' पत्रिकाओं में छपीं।
- हरिवंशराय बच्चन ने उनसे 'प्रकार' की रचना करवाई।
- बच्चन की 'निशा-निमंत्रण' से प्रेरित होकर लेखक ने 'निशा-निमंत्रण के कवि के प्रति' कविता लिखी।
- निराला जी की नजर 'सरस्वती' में छपी उनकी कविता पर गई।
- इसके बाद उन्होंने कुछ हिंदी निबंध लिखे।
- बाद में वे 'हंस' कार्यालय की 'कहानी' पत्रिका से जुड़ गए।
- अंततः, उन्होंने कविताओं का संग्रह और अन्य रचनाएँ भी लिखीं।
प्रश्न 7
- शुरुआत में, वे बेरोजगार थे और शायद किसी की कड़वी बातों से आहत होकर दिल्ली चले गए, केवल कुछ रुपये लेकर।
- उन्होंने बिना फीस के उकील स्कूल में पेंटिंग सीखी और गुजारा चलाने के लिए साइन-बोर्ड पेंट किए।
- उनकी पत्नी का टी.बी. से निधन हो गया, जिससे वे युवावस्था में ही विधुर हो गए और पत्नी वियोग का गहरा दुख झेला।
- बाद में, वे ससुराल देहरादून आ गए और एक दुकान पर कम्पाउंडरी सीखने लगे।
- इलाहाबाद में बच्चन जी के आग्रह पर जाने के बाद भी, जहाँ बच्चन जी ने उनकी पढ़ाई का खर्च उठाया, उन्हें आर्थिक संघर्ष करना पड़ा।
- उन्होंने इंडियन प्रेस में अनुवाद का काम भी किया और हिन्दू बोर्डिंग हाउस के कॉमन-रूम में एक सीट मिलने के बावजूद वे आर्थिक तंगी से जूझते रहे।
Common mistakes
- लेखक के दिल्ली जाने के पीछे के कारणों को सतही तौर पर समझना।
- लेखक को मिले विभिन्न सहयोगों को क्रमबद्ध न कर पाना।
- लेखक द्वारा झेली गई कठिनाइयों को पूरी तरह से न समझ पाना।
Revision tips
- लेखक के जीवन के महत्वपूर्ण पड़ावों को एक टाइमलाइन के रूप में व्यवस्थित करें।
- हरिवंशराय बच्चन और अन्य सहायक व्यक्तियों की भूमिका को विशेष रूप से नोट करें।
- लेखक के संघर्षों और उनसे उबरने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित करें।
Practice MCQs
Q1. लेखक को दिल्ली जाने के लिए किस बात ने बाध्य किया होगा?
Explanation: लेखक बेरोजगार थे और शायद उन्हें किसी की कड़वी बातें चुभ गई होंगी, जिसके कारण उन्होंने दिल्ली जाने का निर्णय लिया।
Q2. लेखक को अंग्रेजी में कविता लिखने पर अफसोस क्यों था?
Explanation: लेखक को इस बात का अफसोस था कि अंग्रेजी भारत की आम भाषा नहीं थी, इसलिए उनके अपने लोग उनकी कविताओं को समझ नहीं पाते थे।
Q3. हरिवंशराय बच्चन ने लेखक के लिए नोट में क्या लिखा होगा, ऐसी कल्पना की गई है?
Explanation: कल्पना की गई है कि बच्चन ने लेखक को इलाहाबाद आने, लेखन में भविष्य देखने और परिश्रम करने के लिए प्रेरित किया होगा।
Q4. लेखक ने बच्चन के व्यक्तित्व के किस रूप का उल्लेख किया है?
Explanation: लेखक ने बच्चन को संघर्षशील, परोपकारी और दृढ़ संकल्प वाला व्यक्ति बताया है, जिसने लेखक की प्रतिभा को पहचाना।
Q5. तेजबहादुर सिंह ने लेखक की किस प्रकार सहायता की?
Explanation: तेजबहादुर सिंह, लेखक के बड़े भाई थे, जिन्होंने आर्थिक तंगी के समय में लेखक की मदद के लिए पैसे भेजे।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 9 की हिंदी विषय के लिए है, जो 'क्षितिज भाग 1' पुस्तक के अध्याय 5 'किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया' पर आधारित है।
इस अध्याय के समाधान में मुख्य रूप से क्या बताया गया है?
इस अध्याय के समाधान में लेखक के दिल्ली आने के कारणों, अंग्रेजी में कविता लिखने पर उनके पछतावे, हरिवंशराय बच्चन जैसे साहित्यकारों से मिले सहयोग और उनके जीवन की विभिन्न कठिनाइयों का वर्णन किया गया है।
लेखक को किन-किन लोगों से सहयोग मिला?
लेखक को हरिवंशराय बच्चन के अलावा तेजबहादुर सिंह, कवि नरेंद्र शर्मा, शारदाचरण उकील, बच्चन के पिता, सुमित्रानंदन पंत और ससुराल पक्ष से भी सहयोग मिला।
लेखक को अंग्रेजी में कविता लिखने पर अफसोस क्यों था?
लेखक को अंग्रेजी में कविता लिखने पर इसलिए अफसोस था क्योंकि वह भारत की जन-भाषा नहीं थी और आम भारतीय उसे समझ नहीं पाते थे।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?
यह समाधान छात्रों को अध्याय की गहरी समझ प्रदान करता है, लेखक के संघर्षों और साहित्यिक यात्रा को स्पष्ट करता है, और परीक्षा की तैयारी में मदद करता है।
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