कक्षा 9 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 16 यमराज की दिशा
यह पृष्ठ कक्षा 9 की हिंदी पुस्तक 'स्पर्श भाग 1' के पाठ 16 'यमराज की दिशा' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ कवि की माँ द्वारा सिखाई गई दक्षिण दिशा की अवधारणा और मृत्यु के भय पर आधारित है। समाधानों में कवि द्वारा दक्षिण दिशा को पहचानने में आसानी, दक्षिण दिशा को लाँघने की असंभवता, और आज हर दिशा का दक्षिण दिशा बन जाने के कारणों की व्याख्या की गई है। इसमें 'यमराज की दिशा' के भावार्थ को भी स्पष्ट किया गया है, जो आज के युग में व्याप्त भय और असुरक्षा को दर्शाता है। ये समाधान छात्रों को पाठ के गहन अर्थ को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 16 यमराज की दिशा |
Chapter summary
कक्षा 9 हिंदी के पाठ 'यमराज की दिशा' के ये NCERT समाधान छात्रों को कवि की माँ द्वारा दी गई दक्षिण दिशा की सीख और मृत्यु के भय के इर्द-गिर्द बुनी गई अवधारणा को समझने में मदद करते हैं। समाधानों में दक्षिण दिशा की पहचान, उसे पार करने की असंभवता, और वर्तमान समय में हर दिशा का मृत्यु की दिशा (दक्षिण) बन जाने के कारणों का विश्लेषण किया गया है। यह पाठ के भावार्थ को भी स्पष्ट करता है, जो आज के समाज में व्याप्त असुरक्षा और हिंसा को दर्शाता है।
Learning outcomes
- कवि की माँ द्वारा सिखाई गई दक्षिण दिशा की अवधारणा को समझना।
- दक्षिण दिशा को लाँघने की असंभवता के पीछे के कारणों का विश्लेषण करना।
- वर्तमान समय में हर दिशा के 'दक्षिण दिशा' बन जाने के सामाजिक-आर्थिक कारणों को समझना।
- पाठ के भावार्थ को स्पष्ट करना और उसके निहितार्थों को समझना।
- ईश्वर के भय को उचित-अनुचित निर्णय लेने में एक कारक के रूप में पहचानना।
Topics covered
Paper topics
- दक्षिण दिशा का प्रतीकात्मक अर्थ
- मृत्यु का भय
- माँ की सीख का प्रभाव
- सामाजिक असुरक्षा और हिंसा
- सभ्यता का विकास और उसके दुष्परिणाम
- ईश्वर का भय और नैतिकता
- भावार्थ स्पष्टीकरण
Important topics
- दक्षिण दिशा का प्रतीकात्मक अर्थ और वर्तमान संदर्भ
- पाठ का केंद्रीय भाव: सामाजिक असुरक्षा और मृत्यु का भय
- भाव स्पष्ट कीजिए: 'सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं...'
- ईश्वर के भय का नैतिक भूमिका
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
प्रश्न 3
प्रश्न 4
प्रश्न 5
Common mistakes
- दक्षिण दिशा को केवल भौगोलिक दिशा समझना, उसके प्रतीकात्मक अर्थ को न समझना।
- मृत्यु के भय को व्यक्तिगत डर तक सीमित रखना, सामाजिक संदर्भ को अनदेखा करना।
- पाठ के भावार्थ को सतही तौर पर समझना, गहरे अर्थों तक न पहुँच पाना।
Revision tips
- पाठ को पढ़ते समय दक्षिण दिशा के प्रतीकात्मक अर्थ पर विशेष ध्यान दें।
- कवि की माँ की सीख और उसके कवि पर पड़े प्रभाव को रेखांकित करें।
- वर्तमान समाज में व्याप्त असुरक्षा और हिंसा के संदर्भ में पाठ के संदेश को समझें।
- भाव स्पष्ट कीजिए वाले प्रश्न के उत्तर को अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. कवि को दक्षिण दिशा पहचानने में मुश्किल क्यों नहीं हुई?
Explanation: कवि की माँ ने उसे दक्षिण दिशा में यमराज का घर होने और उस दिशा में पैर करके न सोने की सीख दी थी, जिससे उसे यह दिशा हमेशा ज्ञात रही।
Q2. कवि के अनुसार दक्षिण को लाँघना संभव क्यों नहीं था?
Explanation: माँ की सीख के कारण कवि के मन में दक्षिण दिशा की ओर पैर करके सोने से मृत्यु होने का भय बैठ गया था, जिससे वह आजीवन आशंकित रहा और उसे लाँघना संभव नहीं लगा।
Q3. आज हर दिशा दक्षिण दिशा क्यों बन गई है?
Explanation: कवि का मानना है कि आज के युग में मनुष्य का जीवन कहीं भी सुरक्षित नहीं है, चारों ओर फैली हिंसा और विध्वंसक ताकतों के कारण हर दिशा मृत्यु की दिशा (दक्षिण) बन गई है।
Q4. प्रस्तुत पंक्तियों 'सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं...' का क्या भाव है?
Explanation: इन पंक्तियों का भाव यह है कि आज के युग में आतंक और हिंसा के कारण सामान्य जनमानस कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं करता, मानो यमराज (मृत्यु) ने हर जगह अपना डेरा जमा लिया हो।
Q5. ईश्वर का भय दिखाने का एक कारण क्या हो सकता है?
Explanation: ईश्वर का भय दिखाने का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि इससे लोगों की ईश्वर में आस्था बनी रहती है और वे अनैतिक कार्यों तथा बुराइयों से दूर रहकर मर्यादित जीवन जीते हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 9 हिंदी के पाठ 'यमराज की दिशा' में मुख्य विषय क्या है?
इस पाठ का मुख्य विषय माँ द्वारा सिखाई गई दक्षिण दिशा की अवधारणा और मृत्यु के भय के इर्द-गिर्द घूमता है। यह वर्तमान समाज में व्याप्त असुरक्षा, हिंसा और विध्वंसक ताकतों के कारण हर दिशा के मृत्यु की दिशा बन जाने की व्यथा को भी दर्शाता है।
कवि को दक्षिण दिशा पहचानने में कठिनाई क्यों नहीं होती थी?
कवि की माँ ने उसे बताया था कि दक्षिण दिशा में यमराज का घर होता है और उस दिशा में पैर करके कभी नहीं सोना चाहिए। इस सीख का पालन करते हुए कवि ने जीवन भर दक्षिण दिशा को पहचाना, इसलिए उसे कभी मुश्किल नहीं हुई।
पाठ के अनुसार आज हर दिशा दक्षिण दिशा क्यों हो गई है?
कवि के अनुसार, आज मनुष्य का जीवन कहीं भी सुरक्षित नहीं है। चारों ओर फैली हिंसा, असंतोष और विध्वंसक ताकतों के कारण मृत्यु का भय हर जगह व्याप्त है, इसलिए हर दिशा मृत्यु की दिशा (दक्षिण) बन गई है।
'यमराज की दिशा' पाठ का भावार्थ क्या है?
इस पाठ का भावार्थ यह है कि आज के युग में आतंक और हिंसा के कारण मनुष्य कहीं भी सुरक्षित नहीं है। मृत्यु का भय सर्वव्यापी हो गया है, मानो यमराज (मृत्यु) ने सभी दिशाओं में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया हो।
ईश्वर के भय को उचित-अनुचित निर्णय के पीछे क्यों आवश्यक माना गया है?
ईश्वर का भय लोगों को ईश्वर में आस्था बनाए रखने, बुराइयों और अनैतिक कृत्यों से दूर रहने तथा एक मर्यादित जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है, इसलिए इसे उचित-अनुचित निर्णय के पीछे एक आवश्यक कारक माना गया है।
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