कक्षा 9 विज्ञान: अध्याय 14 प्राकृतिक संपदा - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 14, 'प्राकृतिक संपदा' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों जैसे वायु, जल और मृदा के महत्व पर प्रकाश डालता है। इसमें वायुमंडल की संरचना, जल चक्र, नाइट्रोजन चक्र, कार्बन चक्र और ऑक्सीजन चक्र जैसे जैव रासायनिक चक्रों की व्याख्या की गई है। समाधान वायु और मृदा प्रदूषण के कारणों और प्रभावों पर भी चर्चा करते हैं, साथ ही इन अमूल्य प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। यह सामग्री छात्रों को इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 14. प्राकृतिक संपदा |
Chapter summary
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 14, 'प्राकृतिक संपदा' के ये NCERT समाधान छात्रों को पृथ्वी के आवश्यक संसाधनों - वायु, जल और मृदा - की गहन समझ प्रदान करते हैं। इसमें वायुमंडल की भूमिका, जल, नाइट्रोजन, कार्बन और ऑक्सीजन के जैव रासायनिक चक्रों की विस्तृत व्याख्या शामिल है। समाधान प्रदूषण के विभिन्न रूपों और उनके प्रभावों पर भी प्रकाश डालते हैं, साथ ही प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व पर जोर देते हैं।
Learning outcomes
- प्राकृतिक संसाधनों जैसे वायु, जल और मृदा के महत्व को समझना।
- वायुमंडल की संरचना और तापमान को नियंत्रित करने में इसकी भूमिका का वर्णन करना।
- जल, नाइट्रोजन, कार्बन और ऑक्सीजन चक्रों की प्रक्रिया को समझना।
- वायु और मृदा प्रदूषण के कारणों और प्रभावों की पहचान करना।
- प्राकृतिक संपदाओं के संरक्षण की आवश्यकता को स्पष्ट करना।
Topics covered
Paper topics
- प्राकृतिक संपदा
- वायुमंडल
- तापमान नियंत्रण
- पवन
- वायु प्रदूषण
- अम्लीय वर्षा
- धूम कोहरा
- जैव रासायनिक चक्र
- जल चक्र
- नाइट्रोजन चक्र
- कार्बन चक्र
- ऑक्सीजन चक्र
- मृदा
- मृदा निर्माण
- ह्यूमस
- मृदा अपरदन
- भूमि प्रदूषण
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
Important topics
- वायुमंडल की भूमिका
- जैव रासायनिक चक्र (जल, नाइट्रोजन, कार्बन, ऑक्सीजन)
- वायु और मृदा प्रदूषण के कारण और प्रभाव
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- वायु: यह जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन प्रदान करती है और वायुमंडल के रूप में पृथ्वी को ढके रहती है, जो तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- जल: सभी सजीवों के लिए जल अत्यंत आवश्यक है। यह कोशिकीय प्रक्रियाओं, पदार्थों के परिवहन और विभिन्न जैव रासायनिक चक्रों का आधार है।
- मृदा: मृदा पौधों के विकास के लिए आवश्यक खनिज और पोषक तत्व प्रदान करती है, जो खाद्य श्रृंखला का आधार बनते हैं।
- सूर्य से प्राप्त ऊर्जा: सूर्य प्रकाश संश्लेषण के लिए ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत है, जो पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 2
- जीवन का आधार: वायु, जल और मृदा जैसी प्राकृतिक संपदाएँ पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व के लिए मौलिक हैं। इनके बिना जीवन संभव नहीं है।
- संतुलन बनाए रखना: ये संपदाएँ जीवमंडल में संतुलन बनाए रखती हैं। प्रदूषण और अत्यधिक दोहन इस संतुलन को बिगाड़ सकते हैं, जिससे पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुँचता है।
- भविष्य की पीढ़ियाँ: प्राकृतिक संपदाएँ सीमित हैं। यदि हम इनका विवेकपूर्ण उपयोग नहीं करेंगे, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए ये उपलब्ध नहीं होंगी।
- गुणवत्तापूर्ण जीवन: स्वच्छ वायु, शुद्ध जल और उपजाऊ मृदा एक स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण जीवन जीने के लिए आवश्यक हैं। प्रदूषण इन सभी को दूषित करता है।
- जैव विविधता: प्राकृतिक संपदाओं का संरक्षण जैव विविधता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि विभिन्न प्रजातियाँ अपने आवास और संसाधनों के लिए इन पर निर्भर करती हैं।
प्रश्न 3
- दिन के दौरान: वायुमंडल सूर्य से आने वाली तीव्र ऊष्मा को सीधे पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से रोकता है। यह ऊष्मा को अवशोषित और परावर्तित करके तापमान को बहुत अधिक बढ़ने से नियंत्रित करता है।
- रात के दौरान: जब पृथ्वी विकिरण द्वारा ऊष्मा खोती है, तो वायुमंडल एक अवरोधक के रूप में कार्य करता है। यह पृथ्वी से उत्सर्जित ऊष्मा को पूरी तरह से अंतरिक्ष में जाने से रोकता है, जिससे रात में तापमान बहुत अधिक गिर नहीं पाता है।
प्रश्न 4
- तापमान में अंतर: स्थलीय भाग (भूमि) जलीय भाग (पानी) की तुलना में सूर्य की गर्मी से अधिक जल्दी गर्म और ठंडा होता है।
- वायु का गर्म होना और ऊपर उठना: जब भूमि गर्म होती है, तो उसके ऊपर की वायु भी गर्म हो जाती है। गर्म वायु हल्की होकर ऊपर उठती है, जिससे उस स्थान पर कम दाब का क्षेत्र बन जाता है।
- दाब में अंतर: समुद्र के ऊपर की ठंडी और भारी वायु, जहाँ दाब अधिक होता है, उस कम दाब वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है।
- पवन का प्रवाह: वायु की इसी एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र की ओर गति को ही पवन कहते हैं।
प्रश्न 5
- पवन पैटर्न: हवा की दिशा और गति वर्षा के वितरण को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है। आर्द्रता युक्त हवाएँ जहाँ जाती हैं, वहाँ वर्षा की संभावना बढ़ जाती है।
- तापमान: तापमान जल वाष्प के निर्माण और संघनन की प्रक्रिया को प्रभावित करता है, जो वर्षा के लिए आवश्यक हैं।
- पर्वत श्रृंखलाएँ: पर्वत हवा के मार्ग में बाधा उत्पन्न करते हैं, जिससे हवा ऊपर उठती है, ठंडी होती है और वर्षा करती है (पर्वतीय वर्षा)।
- समुद्र से दूरी: समुद्र के निकटवर्ती क्षेत्रों में अक्सर अधिक वर्षा होती है क्योंकि हवाएँ समुद्र से नमी लाती हैं।
- पृथ्वी का घूर्णन: पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना भी वायुमंडलीय परिसंचरण और वर्षा के पैटर्न को प्रभावित करता है।
प्रश्न 6
- सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइड: जीवाश्मी ईंधनों में थोड़ी मात्रा में सल्फर और नाइट्रोजन मौजूद होती है। इन्हें जलाने पर सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) जैसे ऑक्साइड निकलते हैं। ये ऑक्साइड वर्षा जल में घुलकर सल्फ्यूरिक एसिड और नाइट्रिक एसिड बनाते हैं, जिससे 'अम्लीय वर्षा' होती है। अम्लीय वर्षा इमारतों, फसलों और जलीय जीवन को नुकसान पहुँचाती है।
- निलंबित कण: जीवाश्मी ईंधनों का दहन वायु में छोटे-छोटे कणों को निलंबित कर देता है। इनमें बिना जले कार्बन कण और अन्य पदार्थ शामिल हो सकते हैं। ये कण श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं और दृश्यता (visibility) को भी कम कर सकते हैं।
प्रश्न 7
उदाहरण के लिए:
- जल चक्र: जल का वाष्पीकरण, संघनन और वर्षा के माध्यम से पुनर्चक्रण।
- कार्बन चक्र: वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड का पौधों द्वारा अवशोषण, जीवों द्वारा उपयोग और श्वसन या अपघटन द्वारा पुनः वायुमंडल में उत्सर्जन।
- नाइट्रोजन चक्र: वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण, पौधों द्वारा अवशोषण और फिर जीवों में स्थानांतरण।
प्रश्न 8
प्रश्न 9
प्रश्न 10
प्रश्न 11
- शैलों का टूटना: मूल चट्टानों का भौतिक (जैसे तापमान परिवर्तन, जल, वायु) और रासायनिक अपक्षय (weathering) से छोटे-छोटे कणों में टूटना मृदा निर्माण का प्रारंभिक चरण है।
- सूर्य: सूर्य की गर्मी चट्टानों के विस्तार और संकुचन का कारण बनती है, जिससे वे टूटती हैं।
- जल: बहता हुआ जल, वर्षा और बर्फ़ चट्टानों को घिसते हैं और उनके कणों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं। जल रासायनिक अपक्षय में भी भूमिका निभाता है।
- वायु: हवा द्वारा चट्टानों के कणों का घर्षण और परिवहन होता है।
- लाइकेन और अन्य जीव: लाइकेन जैसे सूक्ष्मजीव चट्टानों पर उगकर रासायनिक स्राव छोड़ते हैं जो उन्हें तोड़ने में मदद करते हैं। मृत जीवों के अवशेष (ह्यूमस) भी मृदा को उपजाऊ बनाते हैं।
प्रश्न 12
मृदा में ह्यूमस की भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं:
- उर्वरता बढ़ाना: ह्यूमस मृदा को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है, जिससे पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और मृदा उपजाऊ बनती है।
- जल धारण क्षमता: ह्यूमस मृदा को सरंध्र (porous) बनाता है और जल को सोखकर रखने की क्षमता को बढ़ाता है। इससे मृदा में नमी बनी रहती है, जो पौधों के लिए महत्वपूर्ण है।
- संरचना में सुधार: ह्यूमस मृदा की संरचना को बेहतर बनाता है, जिससे वायु का संचार और जल का निकास सुगम होता है।
- सूक्ष्मजीवों का पोषण: यह मृदा में रहने वाले लाभकारी सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का स्रोत है।
प्रश्न 13
- उपयोगी पदार्थों का हटना: मृदा से आवश्यक पोषक तत्वों या ह्यूमस का अत्यधिक दोहन या कटाव के कारण हटना।
- हानिकारक पदार्थों का मिलना: औद्योगिक कचरा, प्लास्टिक, कीटनाशक, रासायनिक उर्वरक, और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल (non-biodegradable) पदार्थ मृदा में मिल जाते हैं।
प्रश्न 14
मृदा अपरदन को रोकने के मुख्य उपाय निम्नलिखित हैं:
- वनीकरण: अधिक से अधिक पेड़ और पौधे लगाना। पौधों की जड़ें मिट्टी को बांधे रखती हैं और अपरदन को रोकती हैं।
- सीढ़ीदार खेत (Terracing): पहाड़ी या ढलान वाले क्षेत्रों में सीढ़ीदार खेत बनाकर जल के बहाव को धीमा किया जा सकता है, जिससे मृदा का कटाव कम होता है।
- आच्छादन (Mulching): नंगी मृदा को पुआल, घास या अन्य जैविक पदार्थों से ढकना, जो जल और वायु द्वारा होने वाले अपरदन को कम करता है।
- फसल चक्रण (Crop Rotation): एक ही खेत में लगातार एक ही फसल उगाने के बजाय विभिन्न फसलों को बारी-बारी से उगाना, जिससे मृदा की उर्वरता बनी रहती है और अपरदन कम होता है।
- अतिचारण (Overgrazing) पर नियंत्रण: पशुओं को अत्यधिक चरने से रोकना ताकि वे वनस्पति को पूरी तरह नष्ट न कर सकें।
प्रश्न 15
- जल की उपलब्धता: किसी भी क्षेत्र में जीवन के अस्तित्व के लिए जल की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण कारक है। जल की कमी वाले क्षेत्रों में जीवन सीमित होता है।
- तापमान: तापमान की सीमा जीवन की विभिन्न प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। अत्यधिक गर्मी या अत्यधिक ठंड जीवन के लिए प्रतिकूल हो सकती है।
- मृदा की प्रकृति: मृदा की गुणवत्ता, उसकी संरचना, पोषक तत्वों की मात्रा और जल धारण क्षमता पौधों के विकास को प्रभावित करती है, जो बदले में जंतुओं के जीवन को प्रभावित करती है।
- प्रकाश: सूर्य का प्रकाश प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है, जो अधिकांश पारिस्थितिक तंत्रों का आधार है।
- वायु: श्वसन के लिए ऑक्सीजन और अन्य गैसों की उपलब्धता भी जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 16
- वाष्पीकरण: सूर्य की ऊष्मा से विभिन्न जलाशयों (जैसे नदियाँ, समुद्र, महासागर, झीलें) का जल वाष्प बनकर वायुमंडल में ऊपर उठता है। पौधों से वाष्पोत्सर्जन (transpiration) द्वारा भी जल वाष्प वायुमंडल में पहुँचता है।
- संघनन: वायुमंडल में ऊपर उठने पर जल वाष्प ठंडा होकर छोटी-छोटी जल की बूँदों या बर्फ के कणों में बदल जाता है, जिससे बादल बनते हैं।
- वर्षण: जब बादल में जल की बूँदें या कण भारी हो जाते हैं, तो वे वर्षा, हिमपात या ओलावृष्टि के रूप में पृथ्वी पर गिरते हैं।
- संग्रहण और प्रवाह: वर्षा का जल नदियों, झीलों और महासागरों में एकत्र हो जाता है। कुछ जल भूमि में रिसकर भूजल बन जाता है। नदियाँ इस जल को वापस समुद्रों और महासागरों तक पहुँचाती हैं।
प्रश्न 17
- प्रोटीन का निर्माण: नाइट्रोजन अमीनो एसिड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो प्रोटीन बनाने वाली इकाइयाँ हैं। प्रोटीन शरीर की संरचना, एंजाइमों के रूप में कार्य करने और अन्य कई जैविक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक हैं।
- न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA): नाइट्रोजन न्यूक्लिक अम्ल, जैसे डी.एन.ए. (DNA) और आर.एन.ए. (RNA) का एक अभिन्न अंग है। ये अणु आनुवंशिक जानकारी को संग्रहीत करने और प्रोटीन संश्लेषण को निर्देशित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- कुछ विटामिन: कई आवश्यक विटामिन, जैसे कि बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन, में नाइट्रोजन होता है और वे शरीर के विभिन्न चयापचय कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
प्रश्न 18
यह वायु प्रदूषण का संकेत इस प्रकार देता है:
- दृश्यता में कमी: धूम कोहरे के कारण हवा में निलंबित कण और गैसें प्रकाश को बिखेर देती हैं, जिससे दृश्यता (visibility) बहुत कम हो जाती है। यह सीधे तौर पर हवा की गुणवत्ता में गिरावट को दर्शाता है।
- स्वास्थ्य पर प्रभाव: धूम कोहरे में मौजूद प्रदूषक कण श्वसन तंत्र में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे खांसी, अस्थमा का दौरा पड़ना और अन्य श्वसन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
- पर्यावरणीय प्रभाव: यह अम्लीय वर्षा का कारण बन सकता है और पौधों को नुकसान पहुँचा सकता है।
प्रश्न 19
- मिट्टी को बांधना: पौधों की जड़ें मिट्टी के कणों को आपस में कसकर बांधे रखती हैं, जिससे वे जल या वायु के बहाव के साथ आसानी से बहकर नहीं जा पातीं। यह मिट्टी को एक साथ रखने वाला जाल (net) बनाती हैं।
- जल के बहाव को धीमा करना: पौधों का आवरण (canopy) वर्षा की बूंदों की गति को धीमा कर देता है, जिससे वे सीधे मिट्टी से टकराकर उसे बिखेर नहीं पातीं। साथ ही, जड़ों का जाल मिट्टी में पानी के रिसने की दर को बढ़ाता है, जिससे सतह पर बहने वाले पानी की मात्रा कम हो जाती है, जो अपरदन का मुख्य कारण है।
- संरचना में सुधार: जड़ों की वृद्धि और क्षय से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है, जिससे वह अधिक स्थिर और जल-ग्रहण करने योग्य बनती है।
प्रश्न 20
- नदियों द्वारा बहाव: नदियाँ अपने मार्ग में आने वाली भूमि से विभिन्न पोषक तत्वों (जैसे नाइट्रेट, फॉस्फेट, खनिज) को घोलकर या कणों के रूप में बहाकर समुद्रों और महासागरों तक पहुँचाती हैं।
- जलीय चक्र: जलीय चक्र के दौरान, वर्षा का जल भूमि से पोषक तत्वों को घोलकर सतह पर बहाव के माध्यम से जलाशयों और अंततः समुद्रों में ले जाता है।
- समुद्री जीवों द्वारा उपयोग: समुद्र में पहुँचे ये पोषक तत्व समुद्री जीवों, जैसे फाइटोप्लांकटन (phytoplankton) और अन्य सूक्ष्मजीवों द्वारा उपयोग किए जाते हैं। ये प्राथमिक उत्पादक खाद्य श्रृंखला का आधार बनते हैं।
- अपघटन: जब समुद्री जीव मर जाते हैं, तो उनके शरीर का अपघटन होता है, जिससे पोषक तत्व वापस जल में मिल जाते हैं और अन्य जीवों के लिए उपलब्ध हो जाते हैं।
- समुद्री धाराएँ: समुद्री धाराएँ पोषक तत्वों को महासागरों के विभिन्न हिस्सों में वितरित करने में मदद करती हैं।
प्रश्न 21
- प्रकाश संश्लेषण (हरे पेड़-पौधों द्वारा): हरे पेड़-पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और इसे ग्लूकोज (एक प्रकार की शर्करा) में बदल देते हैं। यह प्रक्रिया पौधों के विकास के लिए आवश्यक है और वायुमंडल में CO2 की मात्रा को कम करती है।
- समुद्री जीवों द्वारा उपयोग: समुद्री जंतु और अन्य समुद्री जीव समुद्री जल में घुली हुई कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग अपने कवच (shells) और कंकाल (skeletons) बनाने के लिए करते हैं। वे पानी में घुले कार्बोनेट आयनों का उपयोग करके कैल्शियम कार्बोनेट जैसे यौगिक बनाते हैं, जिससे वायुमंडल से CO2 का अवशोषण अप्रत्यक्ष रूप से होता है।
प्रश्न 22
- संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र: जैविक घटक (जैसे पौधे, जंतु, सूक्ष्मजीव) अजैविक घटकों (जैसे वायु, जल, मृदा, सूर्य का प्रकाश) का उपयोग करके जीवित रहते हैं और अपनी प्रक्रियाएँ पूरी करते हैं। बदले में, जैविक घटक भी अजैविक घटकों को प्रभावित करते हैं (जैसे पौधे CO2 का उपयोग करते हैं और O2 छोड़ते हैं)। यह अंतःक्रिया एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र बनाती है।
- पदार्थ और ऊर्जा का प्रवाह: इस सामंजस्य के माध्यम से ही जैव रासायनिक चक्र (जैसे जल, कार्बन, नाइट्रोजन चक्र) सुचारू रूप से चलते हैं। इन चक्रों द्वारा आवश्यक पदार्थ और ऊर्जा सजीवों और निर्जीव पर्यावरण के बीच स्थानांतरित होते रहते हैं, जिससे जीवन का चक्र बना रहता है।
- स्थिरता और गतिशीलता: यह सामंजस्य जीवमंडल को एक ओर स्थिरता प्रदान करता है (क्योंकि चक्र संतुलित रहते हैं) और दूसरी ओर गतिशीलता (क्योंकि पदार्थ और ऊर्जा का निरंतर प्रवाह होता रहता है)।
- जीवन का अस्तित्व: यदि यह सामंजस्य बिगड़ जाए (जैसे अत्यधिक प्रदूषण या संसाधनों के अत्यधिक दोहन से), तो पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे जीवन के अस्तित्व पर संकट आ सकता है।
प्रश्न 23
इस गुण के कारण:
- वायुमंडल पृथ्वी को दिन में अत्यधिक गर्म होने से बचाता है और रात में अत्यधिक ठंडा होने से भी बचाता है। यह तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- पक्षियों के पंखों में हवा भरी होती है, जो उन्हें उड़ने में मदद करती है और उनके शरीर की गर्मी को बनाए रखती है।
- हमारे कपड़े, विशेष रूप से ऊनी कपड़े, हवा को फँसा लेते हैं और शरीर की गर्मी को बाहर निकलने से रोकते हैं, जिससे हमें गर्माहट मिलती है।
प्रश्न 24
इसके मुख्य कारण हैं:
- उच्च विशिष्ट ऊष्मा धारिता: जल को गर्म करने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, और जब यह ठंडा होता है तो यह बहुत अधिक ऊर्जा छोड़ता है। इसके विपरीत, भूमि को गर्म करने या ठंडा करने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
- ऊष्मा का संचरण: जल में ऊष्मा का संचरण संवहन (convection) द्वारा होता है, जो भूमि की तुलना में अधिक प्रभावी होता है। हालाँकि, जल की बड़ी मात्रा के कारण यह धीरे-धीरे गर्म और ठंडा होता है। भूमि में ऊष्मा का संचरण मुख्य रूप से चालन (conduction) द्वारा होता है, जो सतह के पास सीमित होता है।
- वाष्पीकरण: जल का वाष्पीकरण एक शीतलन प्रभाव पैदा करता है, जो जल निकायों को भूमि की तुलना में धीरे-धीरे ठंडा होने में मदद करता है।
प्रश्न 25
- सूर्य का विकिरण: सूर्य से आने वाली अधिकांश ऊर्जा पृथ्वी की सतह (भूमि और जल) द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।
- पुनर्विकिरण: अवशोषित ऊर्जा के कारण पृथ्वी की सतह गर्म हो जाती है और फिर यह ऊष्मा को अवरक्त विकिरण (infrared radiation) के रूप में पुनः वायुमंडल में उत्सर्जित करती है।
- वायुमंडल द्वारा अवशोषण: वायुमंडल में मौजूद कुछ गैसें, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), जल वाष्प (H2O), और मीथेन (CH4), इस अवरक्त विकिरण को अवशोषित कर लेती हैं।
- ऊष्मा का फँसना: इन गैसों द्वारा अवशोषित ऊष्मा को फिर से चारों ओर विकीर्ण किया जाता है, जिसमें से कुछ पृथ्वी की सतह की ओर वापस आती है। यह प्रक्रिया ऊष्मा को वायुमंडल में फँसा लेती है, ठीक वैसे ही जैसे ग्रीनहाउस में कांच ऊष्मा को फँसाता है।
- संवहन धाराएँ: जब वायुमंडल का निचला हिस्सा इस तरह से गर्म होता है, तो गर्म हवा फैलती है, हल्की हो जाती है और ऊपर उठती है। इससे संवहन धाराएँ (convection currents) उत्पन्न होती हैं, जो ऊष्मा को वायुमंडल में और ऊपर ले जाती हैं।
प्रश्न 26
इस स्थिति का परिणाम यह होता है कि:
- पवन का प्रवाह: आस-पास के अधिक दाब वाले क्षेत्रों से, विशेष रूप से समुद्र के ऊपर से जहाँ की वायु ठंडी और भारी होती है, हवा इस कम दाब वाले क्षेत्र की ओर तेजी से प्रवाहित होने लगती है।
- संवहन धाराएँ: ऊपर उठती हुई गर्म वायु संवहन धाराओं का निर्माण करती है, जो ऊष्मा को वायुमंडल में ऊपर ले जाती हैं।
प्रश्न 27
- तापमान में अंतर: पृथ्वी के विभिन्न भागों के तापमान में अंतर के कारण दाब में भिन्नता आती है, जो हवा को उच्च दाब से निम्न दाब की ओर प्रवाहित करती है।
- पृथ्वी की घूर्णन गति: पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है, जिससे कोरिओलिस बल (Coriolis force) उत्पन्न होता है। यह बल हवा की दिशा को उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मोड़ देता है।
- पवन के मार्ग में पर्वत श्रृंखलाएँ: बड़ी पर्वत श्रृंखलाएँ हवा के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डालती हैं। वे हवा को ऊपर उठने के लिए मजबूर कर सकती हैं (जिससे वर्षा होती है) या उसके मार्ग को बदल सकती हैं।
- दाब प्रवणता (Pressure Gradient): दाब में अंतर जितना अधिक होगा, हवा उतनी ही तेजी से बहेगी, जिससे तेज पवन चलेगी।
- स्थलाकृति (Topography): घाटियाँ, मैदान और अन्य स्थलाकृतिक विशेषताएँ भी स्थानीय पवन पैटर्न को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रश्न 28
- जल चक्र (Hydrologic Cycle): यह पृथ्वी पर जल के निरंतर पुनर्चक्रण की प्रक्रिया है, जिसमें वाष्पीकरण, संघनन और वर्षण शामिल हैं।
- नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle): यह वायुमंडलीय नाइट्रोजन के विभिन्न रूपों में परिवर्तन और सजीवों द्वारा उसके उपयोग की प्रक्रिया है।
- कार्बन चक्र (Carbon Cycle): यह कार्बन डाइऑक्साइड के वायुमंडल, सजीवों और पृथ्वी के अन्य हिस्सों के बीच आदान-प्रदान की प्रक्रिया है, जिसमें प्रकाश संश्लेषण और श्वसन प्रमुख हैं।
- ऑक्सीजन चक्र (Oxygen Cycle): यह ऑक्सीजन के वायुमंडल, सजीवों और पर्यावरण के बीच आदान-प्रदान की प्रक्रिया है, जो श्वसन और प्रकाश संश्लेषण से जुड़ी है।
प्रश्न 29
- श्वसन संबंधी समस्याएँ: ये छोटे कण फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं और श्वसन संबंधी बीमारियों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य फेफड़ों के रोगों को बढ़ा सकते हैं या उनका कारण बन सकते हैं।
- दृश्यता में कमी: हवा में निलंबित कण प्रकाश को बिखेरते हैं, जिससे दृश्यता (visibility) कम हो जाती है। यह यातायात (विशेषकर हवाई यातायात) के लिए खतरनाक हो सकता है और धूम कोहरे (smog) का निर्माण करता है।
- पर्यावरणीय प्रभाव: ये कण अम्लीय वर्षा के निर्माण में योगदान कर सकते हैं और पौधों की पत्तियों पर जमा होकर प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को बाधित कर सकते हैं।
- जलवायु परिवर्तन: कुछ निलंबित कण सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके पृथ्वी को ठंडा कर सकते हैं, जबकि अन्य ऊष्मा को अवशोषित करके उसे गर्म कर सकते हैं, जिससे जलवायु पर जटिल प्रभाव पड़ते हैं।
प्रश्न 30
- प्राकृतिक स्रोत: ज्वालामुखी विस्फोट से निकलने वाली गैसें और राख, जंगल की आग से धुआं।
- मानवजनित स्रोत: वाहनों से निकलने वाला धुआं, उद्योगों से निकलने वाली गैसें और कण, जीवाश्मी ईंधनों (कोयला, पेट्रोलियम) का जलना, कृषि गतिविधियाँ (जैसे कीटनाशकों का उपयोग)।
प्रश्न 31
- सूर्य: सूर्य की गर्मी चट्टानों को दिन के समय गर्म करती है, जिससे वे फैलती हैं। रात में जब तापमान गिरता है, तो वे सिकुड़ती हैं। इस निरंतर फैलने और सिकुड़ने की प्रक्रिया से चट्टानों में दरारें पड़ जाती हैं और वे कमजोर होकर टूट जाती हैं।
- जल: जल कई तरह से मृदा निर्माण में सहायक होता है। बहता हुआ जल (नदियाँ, वर्षा) चट्टानों को घिसता है और उनके कणों को बहा ले जाता है। चट्टानों की दरारों में जमा पानी जमने पर फैलता है और दरारों को चौड़ा करता है। जल रासायनिक अपक्षय (जैसे खनिजों का घुलना) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- वायु: हवा चट्टानों के कणों को आपस में रगड़कर उन्हें घिसती है (अपघर्षण)। हवा में मौजूद ऑक्सीजन और नमी चट्टानों के खनिजों के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करके उन्हें कमजोर कर सकती है (ऑक्सीकरण, हाइड्रेशन)।
प्रश्न 32
- कचरा प्रबंधन: कचरे को कम करना, पुन: उपयोग करना और पुनर्चक्रण (Reduce, Reuse, Recycle) करना। प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का उचित निपटान सुनिश्चित करना।
- जैविक खाद का उपयोग: रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बजाय जैविक खाद का उपयोग करना, जो मृदा की उर्वरता को बनाए रखता है और प्रदूषण कम करता है।
- वनरोपण: अधिक से अधिक पेड़ लगाना, क्योंकि पेड़ मृदा अपरदन को रोकते हैं और भूमि की गुणवत्ता में सुधार करते हैं।
- औद्योगिक कचरे का उपचार: उद्योगों से निकलने वाले हानिकारक कचरे को पर्यावरण में छोड़ने से पहले उसका उचित उपचार करना।
- जागरूकता फैलाना: लोगों को भूमि-प्रदूषण के खतरों और इसे रोकने के उपायों के बारे में जागरूक करना।
- भूमि सुधार: प्रदूषित या निम्नीकृत भूमि को सुधारने के लिए उचित तकनीकों का उपयोग करना।
प्रश्न 33
- जड़ों का अभाव: पेड़ और पौधे अपनी जड़ों से मिट्टी को मजबूती से बांधे रखते हैं। जब जंगल काटे जाते हैं, तो ये जड़ें नष्ट हो जाती हैं, जिससे मिट्टी ढीली पड़ जाती है और जल या वायु के बहाव के साथ आसानी से बह जाती है।
- वर्षा की बूंदों का सीधा प्रभाव: पेड़ों की पत्तियाँ और शाखाएँ वर्षा की बूंदों की गति को धीमा कर देती हैं, जिससे वे सीधे मिट्टी से टकराकर उसे बिखेर नहीं पातीं। वनों के कटने पर, वर्षा की बूंदें सीधे मिट्टी पर गिरती हैं और उसे उड़ा ले जाती हैं।
- सतही बहाव में वृद्धि: पेड़ों की अनुपस्थिति में, मिट्टी पानी को उतनी अच्छी तरह से सोख नहीं पाती। इससे सतह पर पानी का बहाव (runoff) बढ़ जाता है, जो अपने साथ मिट्टी की ऊपरी उपजाऊ परत को बहा ले जाता है।
- पवन अपरदन में वृद्धि: पेड़ हवा की गति को भी कम करते हैं। वनों के कटने से हवा की गति बढ़ जाती है, जिससे पवन अपरदन (wind erosion) की संभावना बढ़ जाती है।
प्रश्न 34
कार्बन चक्र के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
- प्रकाश संश्लेषण: हरे पौधे वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग करके इसे कार्बनिक यौगिकों (जैसे ग्लूकोज) में बदलते हैं।
- उपभोग: शाकाहारी जीव पौधों को खाते हैं और कार्बनिक यौगिकों को अपने शरीर में समाहित करते हैं। मांसाहारी जीव इन शाकाहारियों को खाते हैं, जिससे कार्बन खाद्य श्रृंखला में स्थानांतरित होता है।
- श्वसन: सभी सजीव (पौधे और जंतु) श्वसन की प्रक्रिया में कार्बनिक यौगिकों को तोड़कर ऊर्जा प्राप्त करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को वापस वायुमंडल में छोड़ते हैं।
- अपघटन: जब सजीव मर जाते हैं, तो सूक्ष्मजीव (जैसे बैक्टीरिया और कवक) उनके कार्बनिक पदार्थों का अपघटन करते हैं, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड या मीथेन जैसी गैसें वायुमंडल में वापस चली जाती हैं।
- जीवाश्मी ईंधनों का जलना: कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्मी ईंधनों को जलाने से बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड वायुमंडल में छोड़ी जाती है।
- समुद्री अवशोषण: महासागर वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं और इसे घुले हुए रूप में या समुद्री जीवों के कंकालों में संग्रहीत करते हैं।
प्रश्न 35
ऑक्सीजन चक्र के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
- प्रकाश संश्लेषण: हरे पौधे और शैवाल प्रकाश संश्लेषण के दौरान जल और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके ऑक्सीजन (O2) का उत्पादन करते हैं और इसे वायुमंडल में छोड़ते हैं। यह ऑक्सीजन चक्र का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है।
- श्वसन: अधिकांश सजीव (मनुष्य, जानवर, पौधे) श्वसन की प्रक्रिया में वायुमंडल से ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।
- दहन: आग लगने या जीवाश्मी ईंधनों के जलने जैसी दहन प्रक्रियाओं में ऑक्सीजन का उपयोग होता है।
- अपघटन: जब सजीवों के मृत शरीर का अपघटन होता है, तो सूक्ष्मजीव ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।
- अन्य प्रक्रियाएँ: ओजोन (O3) का निर्माण और विघटन, और चट्टानों का ऑक्सीकरण भी ऑक्सीजन चक्र में भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 36
ये चक्र सुनिश्चित करते हैं कि आवश्यक तत्व (जैसे कार्बन, नाइट्रोजन, जल, ऑक्सीजन) एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होते रहें और सजीवों तथा पर्यावरण के बीच निरंतर उपलब्ध रहें। उदाहरण के लिए:
- कार्बन चक्र: वायुमंडल से कार्बन पौधों में, फिर जंतुओं में और अंततः अपघटन या श्वसन द्वारा वापस वायुमंडल में स्थानांतरित होता है।
- जल चक्र: जल का वाष्पीकरण, संघनन और वर्षण के माध्यम से निरंतर पुनर्चक्रण होता है।
- ऊर्जा का प्रवाह: ऊर्जा मुख्य रूप से सूर्य से उत्पादकों (पौधों) में आती है और फिर खाद्य श्रृंखला के माध्यम से उपभोक्ताओं में स्थानांतरित होती है। हालाँकि, ऊर्जा का प्रवाह एक दिशात्मक होता है और यह जैव रासायनिक चक्रों के साथ मिलकर काम करता है।
प्रश्न 37
समुद्र में, ये पोषक तत्व समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इनका उपयोग निम्नलिखित द्वारा किया जाता है:
- फाइटोप्लांकटन (Phytoplankton): ये सूक्ष्म समुद्री पौधे प्रकाश संश्लेषण के लिए इन पोषक तत्वों (जैसे नाइट्रेट, फॉस्फेट) का उपयोग करते हैं। ये समुद्री खाद्य श्रृंखला के आधार होते हैं।
- अन्य समुद्री जीव: अन्य समुद्री जीव भी इन पोषक तत्वों का उपयोग अपने विकास और जीवन प्रक्रियाओं के लिए करते हैं।
प्रश्न 38
- वाष्पीकरण (Evaporation): सूर्य की ऊष्मा के कारण नदियों, झीलों, समुद्रों और महासागरों का जल वाष्प बनकर वायुमंडल में ऊपर उठता है। पौधों से वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) द्वारा भी जल वाष्प निकलता है।
- संघनन (Condensation): वायुमंडल में ऊपर उठने पर जल वाष्प ठंडा होकर छोटी-छोटी जल की बूँदों या बर्फ के कणों में बदल जाता है, जिससे बादल बनते हैं।
- वर्षण (Precipitation): जब बादलों में जल की बूँदें या कण पर्याप्त भारी हो जाते हैं, तो वे वर्षा, हिमपात, ओलावृष्टि आदि के रूप में पृथ्वी पर गिरते हैं।
- संग्रहण और प्रवाह (Collection and Flow): वर्षा का जल नदियों, झीलों और महासागरों में एकत्र हो जाता है। कुछ जल भूमि में रिसकर भूजल (groundwater) बन जाता है। नदियाँ इस जल को सतह पर बहाकर वापस समुद्रों में ले जाती हैं।
प्रश्न 39
प्रश्न 40
- प्रोटीन का निर्माण: नाइट्रोजन अमीनो एसिड का एक प्रमुख हिस्सा है, जो प्रोटीन बनाने वाली मूल इकाइयाँ हैं। प्रोटीन शरीर की संरचना, एंजाइमों के निर्माण और विभिन्न जैविक कार्यों के लिए आवश्यक हैं।
- न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA): नाइट्रोजन डी.एन.ए. (DNA) और आर.एन.ए. (RNA) जैसे न्यूक्लिक एसिड का एक अभिन्न अंग है, जो आनुवंशिक जानकारी को संग्रहीत करने और प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- कुछ विटामिन: कई आवश्यक विटामिन, जैसे कि बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन, में नाइट्रोजन होता है और वे शरीर के चयापचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Common mistakes
- जैव रासायनिक चक्रों की जटिलताओं को समझने में कठिनाई।
- वायु और मृदा प्रदूषण के बीच अंतर करने में भ्रम।
- प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व को कम आंकना।
Revision tips
- प्रत्येक प्राकृतिक संसाधन (वायु, जल, मृदा) के महत्व को सूचीबद्ध करें।
- जैव रासायनिक चक्रों के आरेखों का अभ्यास करें।
- प्रदूषण के विभिन्न प्रकारों और उनके प्रभावों पर नोट्स बनाएं।
- प्राकृतिक संपदाओं के संरक्षण के तरीकों पर चर्चा करें।
Practice MCQs
Q1. पृथ्वी को चारों ओर से ढकने वाली वायु की परत क्या कहलाती है?
Explanation: वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर एक कंबल की तरह फैली हुई वायु की परत है जो जीवन को संभव बनाती है।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा जैव रासायनिक चक्र का उदाहरण नहीं है?
Explanation: जल, नाइट्रोजन और कार्बन चक्र जैव रासायनिक चक्र के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं, जबकि ऊर्जा का प्रवाह एक दिशात्मक प्रक्रिया है।
Q3. मृदा के निर्माण में कौन सा कारक सहायक है?
Explanation: मृदा का निर्माण शैलों के टूटने से होता है, जिसमें सूर्य, जल और लाइकेन जैसे जीव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Q4. धूम कोहरा (Smog) क्या संकेत करता है?
Explanation: धूम कोहरा वायु में निलंबित कणों और हानिकारक पदार्थों की अधिक मात्रा के कारण दृश्यता में कमी को दर्शाता है, जो वायु प्रदूषण का एक रूप है।
Q5. प्राकृतिक संपदाओं को किस प्रकार उपयोग करना चाहिए?
Explanation: प्राकृतिक संपदाओं का उपयोग इस प्रकार से किया जाना चाहिए कि वे भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी उपलब्ध रहें, जिसे संपोषणीय उपयोग कहते हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 14 का मुख्य विषय क्या है?
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 14, 'प्राकृतिक संपदा' का मुख्य विषय पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक प्राकृतिक संसाधनों जैसे वायु, जल और मृदा का महत्व, उनके कार्य, प्रदूषण और संरक्षण है।
जैव रासायनिक चक्र क्या होते हैं?
जैव रासायनिक चक्र वे प्रक्रियाएं हैं जिनके द्वारा जीवमंडल के विभिन्न घटकों के बीच आवश्यक पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, कार्बन, ऑक्सीजन और जल एक रूप से दूसरे रूप में बदलते रहते हैं।
वायुमंडल पृथ्वी के तापमान को कैसे नियंत्रित करता है?
वायुमंडल दिन में तापमान को अचानक बढ़ने से रोकता है और रात में ऊष्मा को अंतरिक्ष में जाने से रोककर पृथ्वी के औसत तापमान को लगभग नियत रखता है।
मृदा प्रदूषण के क्या कारण हैं?
मृदा प्रदूषण तब होता है जब उपयोगी पदार्थ मृदा से हट जाते हैं या हानिकारक पदार्थ मृदा में मिल जाते हैं, जिससे उसकी उर्वरता कम हो जाती है और जैव विविधता नष्ट हो जाती है।
हमें प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित क्यों करना चाहिए?
हमें प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए क्योंकि वे जीवन के लिए आवश्यक हैं और उनका अंधाधुंध उपयोग भविष्य की पीढ़ियों के लिए उनकी उपलब्धता को खतरे में डाल सकता है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान अध्याय की मुख्य अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं और प्रश्नों के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत सहायक हैं।
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